22 नवंबर, 2015

BUndelkhand Dairy

 बुंदेलखंड की त्रासदी 


रवीन्द्र व्यास

 बुंदेलखंड का किसान और आम आदमी  आज इस बात की तलाश में रहता है की कोई तो हो उसकी  त्रासदी से सरोकार रखे । शायद योगेन्द्र यादव ने इस नब्ज को पहँचाना है ।  पिछले माह बुंदेलखंड के दौरे पर पन्ना आये योगेन्द्र यादव ने   कहा  था कि में यहां एकगहरे और बड़ी चीज के लिए आया हूँ जो पूरे  देश का दर्द है  ये पूरे ५० करोड़ हिंद्स्तानियो कासवाल है , ये जो सूखा है हमारे टी वी पर कभी कभी दिखाई देता है में आपसे अनुरोध करता हूँइसे महत्त्व दीजिये बाकी उठा पटक तो रोज चलती रहती है    किसानो का दुःख दर्दहमने  सुना  उन महिलाओ के चेहरे देखे आपने क्या ये बड़ी चीज नहीं होना चाहिए देश में । उनका यह कहना बुंदेलखंड इलाके में वाकई सत्य साबित होता है । इस इलाके की चटपटी ख़बरों के लिए हर राष्ट्रीय चैनल तलाश में रहता है किन्तु यथार्थ यही है इस इलाके के बुंदेलखंड के दर्द से किसी को सरोकार नहीं है । दो राज्यों में बटे बुंदेलखंड से पिछले एक दशक में ६२ लाख से ज्यादा लोग मजदूरी की तलाश में पलायन कर गए जिनमे 5 फीसदी ऐसे लोग भी हैं जिनका कहीं आता पता ही नहीं है । 
 योगेन्द्र यादव की माने तो  पूरे  देश में सूखा है लगातार दूसरे साल सूखा है,  और यहाँ इसइलाके में तो तीसरे चौथे साल सूखा है लेकिन पुरे देश के मानस पर इस सूखे का असर नहीं है । आज भी दिल्ली ,मुंबई  और महानगरों में इसआज भी इस सूखे के लेकर संवेदना नहीं है । इसलिए हमने  संवेदना यात्रा निकाली  उन्होंने अपनी इस यात्रा का उदेश्य कुछ इस तरह से बताया  की पूरे देश में सुखा को लेकर एक समझ बन सके एक संवेदना बन सके और सरकारसमाज और देश इसके बारे में कुछ करने का सोचे ,।  फसलें बर्बाद हैं , पानी की समस्या है ,पशुओ के चारे का संकट है , रोजगार गारंटी काम नहीं कर रही है  
                      बुंदेलखंड के जिस पन्ना जिले में योगेन्द्र यादव यह सब चर्चा कर रहे उसी पन्ना जिले की  अजयगढ़ तहसील  पडरहा पंचायत  के किसान मइया दीन विष्वकर्मा (५५) ने  खेत में आम के पेड़ से लटकर फांसी लगा ली । अपनी खराब  स्थिति उस पर उसके दोनों बेटे  भोले और अवधेश टी बी  रोग से ग्रस्त हैं, दस दिन पहले ही उसके 16 वर्षीय बेटे की मौत ने उसे तोड़ कर रख दिया था मइया दीन के पास 8 बीघा खेती  और हर बार फसल की तबाही  उसे तोड़ दिया था । हालात से हताश  हो कर  ही शायद उसने यह कदम उठाया होगा ।  
                            पन्ना कलेक्टर  एस एस चौहान ने जरूर मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए स्वयं उसके घर तक पहुंचे  और   परिवार का नाम बी पी एल सूचि में दर्ज करने , बच्चों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए \  मंत्री कुसुम मेहदेले ने स्वेक्षा अनुदान मद से दस हजार देने की घोषणा की । स्वेच्छा अनुदान देने की घोषणा की। 
                             पन्ना की इस घटना के हफ्ते भर के ही भीतर  दमोह जिले के सीता नगर में किसान लीलाधर पटेल (45 ) फांसी लगा कर आत्म ह्त्या कर ली ।  बर्बाद फसल  और बेटी की शादी की चिंता में उसने यह कदम उठाया था । 7 एकड़ जमीन के इस मालिक ने सोयाबीन की फसल बोई थी , जो चौपट हो गई  ३-४ लाख रु साहूकार और बैंक का  कर्जा था । प्रशासन ने इसे मानसिक विक्षिप्त बता दिया , ठीक वैसे ही जैसे छतरपुर जिले में किसान की मौत पर प्रशासन ने  उसकी पत्नी को किसान  और मृतक को ड्राइवर बता दिया था । मतलब साफ़ है अब शासन और प्रशासन इस मुहीम में जुटा है की किसानो की आत्म ह्त्या के आंकड़ों को सीमित किया जाए । 
                           आंकड़े इस बात के गवाह हैं की इस वर्ष बुंदेलखंड इलाके के दो दर्जन से ज्यादा किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं  । उस पर  प्रकृति जिस तरह का खेल खेल रही है उससे  रवि फसल की उम्मीद भी ना के बराबर ही रह गई है । ऐसे  हालात  में गाँव -गाँव में सन्नाटा पसरा है । 
                                      पिछले एक दशक में  उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके  में लगभग साढ़े चार हजार किसान मौत को गले लगा चुके हैं । इसी अवधि में   हालात से हताश होकर  ६२ लाख से ज्याद  काम की तलाश में पलायन कर चुके हैं ।  पर  किसान की मौत का यह संताप उसके परिवार वाले  तो जरूर महशूस करते हैं , किन्तु हजारो किसानो के परिजनों के रुदन की आवाज  मानवीय संवेदना का दावा करने वाले  जनसेवकों को विचलित नहीं कर पाती ।

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