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बुंदेलखंड राज्य के लिए सत्याग्रह

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बुंदेलखंड की डायरी  जहा से पहली मांग उठी वही  इलाका मौन रवीन्द्र व्यास बुंदेलखंड  का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली  और बेबसी की होती है| संपन्न धरा के लोग बेबसी से मुक्ति का रास्ता अलग राज्य में तलाशते हैं | यह मांग ठीक उसी तरह की है जब परिवार  में  असमानता नजर आने लगती है तो परिजन  अपना   अलग आसियान तलाशने लगते  हैं | ऐसी ही असमानता को लेकर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से अलग राज्य की मांग जोर शोर से उठ रही है |झाँसी में इसको लेकर सत्याग्रह किया जा रहा है | मजे की बात ये है कि जिस मध्य प्रदेश वाले इलाके से अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग सबसे पहले उठी थी वह शांत है | 

     संसद सत्र शुरू होने के साथ ही झाँसी के गांधी पार्क में अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए सत्याग्रह शुरू हुआ | बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय की  अगवाई में चल रहा यह सत्याग्रह अभियान १८ अगस्त तक चलेगा | सत्याग्रह के इस अभियान में स्थानीय लोगों के अलावा कांग्रेस , सपा ,बसपा , और बीजेपी के उमा भारती से नाराज लोग खुल कर समर्थन दे रहे हैं , या बढ़ते विरोध को देख कर अपनी सिय…

कागजो में बने शौचालय

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बुन्देलखण्ड की डायरी

रवीन्द्र व्यास  बुंदेलखंड का एक आदिवासी गाँव है जहां कागजों में शौचालय  बन गए | आदिवासियों ने बैंक का मुंह तक नहीं देखा पर उनके खाते भी खुल गए |  यहां तक की उनसे लेंन  देंन  भी हो गया |  कागजों में बने शौचालय की पोल तब खुली जब यहाँ  अधिकारियों का एक दल शौचालय  के हालात जानने पहुंच गया |  समग्र स्वक्षता मिशन को किस तरह प्रशासनिक तंत्र द्वारा तहस नहस किया जा रहा है यह उसका एक छोटा सा ही उदहारण कहा जा सकता है | हालांकि टीकमगढ़ जिला 2015 तक प्रदेश के उन जिलों में शुमार था जहां शौचालय निर्माण की गति सबसे कम थी | यहां तक की कलेक्टर ने  ऐसे लोगों के शस्त्र लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश भी दिए थे जिनके घर पर शौचालय नहीं हैं | नवीन लाइसेंस के लिए भी स्वछता  प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया था | वर्तमान में टीकमगढ़ भले ही प्रदेश में दूसरे नंबर पर हो , पर कागजों में बने शौचालय उसके दावे पर सवाल जरूर खड़े करते हैं | 
   टीकमगढ जिले की  जनपद पंचायत जतारा की  ग्राम पंचायत बेरवार के  आदिवासी  बाहुल्य घटिया हार गांव  में   शौचालय धरातल पर नही कागजों पर बनाये जा रहे है।…