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January, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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अकाल के आगोश  में बुंदेलखंड: पानी के लिए जाती जान 

रवीन्द्र व्यास 
अकाल के आगोश में समाये बुंदेलखंड एक ऐसी त्रासदी का सामना कर रहा है जिसकी कल्पना यहां के किसानो ने नहीं की थी । इन दिनों हरियाली की चादर ओढ़ने वाले खेत वीरान हैं । पानी के लिए लोग एक दूसरे की जान लेने पर आमादा हो गए हैं ।  इस बार  मेघ कुछ ऐसे रूठे की बुंदेलखंड में अकाल के हालात बन गये  और पीने के पानी के लिए लोग तरशने लगे । वहीँ लोग अब जीवन  लिए आटा की चोरी करने को मजबूर हो गए हैं । तो दूसरी तरफगुजर बसर लायक मुआवजा मांगने वाले किसान पुलिस  लाठी से मरने को मजबूर हैं ।               बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के ईशानगर थाना इलाके के सलैया गाँव  में 29 और 30 जनवरी की मध्य रात्रि एक किसान मुन्नी यादव  की पानी को लेकर ह्त्या कर दी गई । हत्यारे और कोई नहीं बल्कि उसी के चचेरे भाई बंधू थे ।  दरअसल यह किसान मुन्नी यादव गाँव की विकराल जल समस्या को देख कर  सरकार द्वारा लगाया जाने वाला हेंड पम्प सार्वजनिक जगह पर लगवाना चाहता था ।  जब की उसी के भाई लोग  कालू नेता , स्वामी यादव ,बल्लू यादव मूलचंद यादव , और संतोष यादव , सरकारी हेंड पंम्प को …

Bundelkhand Ki Dayri

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सूखे पर सियासत

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड के सूखे पर सियासत शुरू हो गई है , यह क्रम चल तो काफी समय से रहा था किन्तु 22 और 23 जनवरी को नेताओ के जमावड़े के साथ यह अपने चरम पर पहुंच गया  है । संसद चलने में अवरोध पैदा करने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुन्देलखंडियों को भरोषा दिला गए हैं की उनकी आवाज संसद में उठाएंगे । वही केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति एक दिन पहले कह गई की बदहाल बुंदेलखंड की समस्याओ को  बजट के माध्यम से दूर किया जाएगा , हम इसीलिए आये हैं । कौन क्या करता है यह एक बड़ा सवाल है फिलहाल ये जन सेवक जनता को रंगीन सपने दिखा  गए और बुंदेलखंड में सूखा का एक बड़ा मुद्दा सियासत करने वालों को मिल गया ।बुंदेलखंड के सूखे के बहाने उन्हें  प्रधान मंत्री मोदी पर जम  कर हमला बोलने का मौका भी मिला  ।                               शनिवार को बुंदेलखंड के महोबा में राहुल गांधी ने पवा पैराहे से लाडपुर तक सात किलोमीटर पैदल मार्च किया । इस दौरान वे किसानो से भी मिले ,गाँव की महिलाओ  से भी चर्चा की ।उनकी इस पदयात्रा के काफिले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रद…
50 वर्ष बाद  इंदिरा जी की प्रतिमा का अनावरण राहुल  ने किया 
रवीन्द्र व्यास 
महोबा //   बुंदेलखंड की बदहाली और सूखा के दर्द को समझने आये कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के इस पड़ाव में एक भावुक क्षण भी आया । जब वे यहां के मुडारी गाँव पहुंचे , जहां के गाँव वाले 50 वर्ष से इंदिरा गांधी की प्रतिमा को सहेजे रखे थे , गाँव वालों की जिद थी की प्रतिमा का अनावरण गांधी परिवार का ही कोई करेगा । राहुल के पहुँचने से यह जिद पूर्ण हुई ।                                                 मुंडारी गाँव के 95 वर्षीय छवि लाल पुरोहित बताते हैं की ,1962 के भारत -चीन युद्ध के दौरान  गाँव वालों ने इंदिरा गांधी का  चांदी से तुलादान किया था । महिलाओं ने अपने जेवर भी इस तुलादान में अर्पित किये थे । यह सब गाँव वालों ने इस लिए किया था ताकि  युद्ध में देश के लिए धन की कमी नहीं आये । 1962 में जबइंदिरा गांधी का तुला दान हुआ था उस समय उनका वजन ५८ किलो था  जब की यहाँ के लोगों ने ६५ किलो चांदी चढ़ाई थी । तुलादान के बाद ही इंदिरागांधी की प्रतिमा बनाने का निर्णय हुआ था जो १९६५ में बनकर तैयार हुई ।  तब गाँव वालों ने  तय किया था …

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बुंदेलखंड की दुर्दशा के लिए यूपीए सरका जिम्मेदार :: साध्वी  रवीन्द्र व्यास  टीकमगढ़ // २३ जनवरी से राहुल गांधी बुंदेलखंड इलाके की पदयात्रा  करेंगे । उनकी पदयात्रा के एक दिन पहले आज केंद्रीय  केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरजन ज्योति बुंदेलखंड के दौरे पर आ गई । ओरछा  से शुरू हुआ उनका दौरा , इस दौरे के दौरान वे जहां पार्टी कार्यकर्ताओं को समझाईस दे रही हैं वहीँ पत्रकारों से भी खुल कर चर्चा कर रही हैं । यह अलग बात है की अपनी असुन्तलित भाषा शैली के लिए पहँचानी जाने वाली साध्वी इस बार बड़े ही संतुलित ढंग से अपनी वाणी का प्रयोग करती नजर आई । 
 पृथ्वीपर और टीकमगढ़ में  पत्रकारों के सवाल के जबाब में उन्होंने कहा  की बुंदेलखंड और देश के किसानो की दुर्दशा के लिए  यूपीए सरकार जिम्मेदार है । राहुल गांधी की पदयात्रा के सवाल पर उन्होंने कहा की  राहुल गांधी सत्ता चली गई तो पदयात्रा कर रहे हैं , सत्ता में रहकर पदयात्रा करते । हम तो सरकार में रहकर पदयात्रा कर रहे हैं , वो सरकार में रहकर पदयात्रा करते तो लगता कुछ किया । वो ६२ साल सत्ता में रहे  देश में किसानो और बुंदेलखंड की दुर्…

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सूखा-विकरालसमस्या ,बौनेसमाधान रवीन्द्रव्यास
बुंदेलखंडकीयहधराकभीदशार्णादेशकेनामसेजानीजातीथी।यहनामइसकायुहीनहींपड़ाथायहांकीदस नदियोंकेकारणहीदशर्णादेशकहाजाताथा।बादमेंइसेबुंदेलखंडकेनामसेजानागयाजोअपनीवीरताकेकिस्सोंकेलिए जानाजाताथा।  , बुंदेलखंडकाआल्हायहांकेसैनिकोकेलहूमेंऐसाउबाललाताथाकीदुश्मनोंकेछक्केछूटजातेथे। दोराज्योंमेंबटीबुंदेलखंडकीवहीवीरवसुंधराअपनेबेटोंकीभूखऔरप्याससेव्याकुलहै।भूखऔरप्याससेव्याकुलअपने सपूतों को  दमतोड़तेदेखबेबसमाँरोनेकोमजबूरहै।सियासतकाअजबरंगभीयहाँलोगदेखरहेहैं।उड़नखटोलोसेउतरते , चमचमातीवातानुकूलितवाहनोमेंसवारनेताओंऔरअधिकारियोंको

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गांधी का टूटा चरखा और बदहाल हुए बुनकर रवीन्द्र व्यास  बुंदेलखंड के महोबा जिले का जैतपुर ( बेलाताल ) कभी खादी के एक बड़े निर्माण केंद्र के तौर पर जाना जाता था ।  यहां की बुनकर बस्ती चरखा की मधुर ध्वनि  से गुंजायमान रहती थी । आज यहां की यह बस्ती में मौत  सी खामोशी  है ,  बचे हैं तो सिर्फ बुजुर्ग और बच्चे । जवान तो अपनी और परिवार की पेट की आग बुझाने महानगरों की और पलायन कर  गए हैं ।  बेलाताल बुंदेलखंड का ऐसा खादी  निर्माण केंद्र था जिसकी खादी  देश भर में मश्हूर थी । आज इस खादी केंद्र  पर ग्रहण यहां के संचालकों और सरकार के उपेक्षित रवैये के कारण लग गया है ।   महत्मागांधीनेकलकत्ता  में   देश का पहला खादी  केंद्र खोला था । देश का  दूसरा खादी केंद्र   बुंदेलखंड जैसे इलाके के  जैतपुर ( बेलाताल )  में शुरू किया था ।  1920 में यहां खादी  केंद्र शुरू करने का असर सम्पूर्ण  बुंदेलखंड में हुआ । बेलाताल ही नहीं आसपास  के सौ किमी के एरिया में बुनकरों को रोजगार का नया जरिया मिल गया । जिसका परिणाम यह हुआ की महोबा , छतरपुर ,हरपालपुर ,बिजावर ,सरसेड , राठ  ,(मऊरानीपुर ) रानीपुर , मौदहा , आदि स्थानो पर बुनकर कपड़…