संदेश

लुप्त होती बुंदेली परम्परा सावनी

बुंदेलखंड की डायरी

अबनहींडलतेसावनकेझूले _ चपेटाकोभूलीबालिकाए रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंडी जीवन शैली  वैसे तो प्रकृति  से सामंजस्य की अदभुत  जीवन शैली है ।  यहां का हर त्यौहार , प्रकृति  और  लोक  रंजन से जुड़ा है ।   अब शायद बुंदेलखंड की  इस जीवन परम्परा को भी आधुनिकता का ग्रहण लग गया है । सावन की कई परम्पराए  जो कभी लोगों के प्रकृति प्रेम और आपसी समन्वय  और  प्रेम को दर्शाती थी अब सिर्फ किस्से कहानियो तक सिमट कर रह गई हैं । अब ना नव वधु के घर भेजी जाने वाली सावनी की परम्परा बची और ना ही वृक्षों की डाल पर डलते झूले बचे | ना बच्चो के हाथ से घूमते लट्टू और चकरी |                             वर्षा ऋतू  में जब चारों और हरियाली व्याप्त हो ऐसे में किसका मन प्रफुल्लित ना होगा । ऐसे में बुंदेलखंड के घर - घर में ऊँचे वृक्ष की डाल पर झूले डाले जाते थे ।  धीरे - धीरे ये गाँव के झूलो तक  पहुँच गए । और अब किसी किसी गांव में ही ये झूले  और झूलों पर झूलती बालाएं देखने को मिलती हैं |    सावन का महीना  उल्लास और उमंग का महीना बुंदेलखंड में माना जाता  था ।गाँव - गाँव में महिलाये और बालिकाए गाँव में ल…

बुंदेलखंड राज्य के लिए सत्याग्रह

चित्र
बुंदेलखंड की डायरी  जहा से पहली मांग उठी वही  इलाका मौन रवीन्द्र व्यास बुंदेलखंड  का नाम लेते ही लोगों के जेहन में जो तस्वीर उभरती है वह बदहाली  और बेबसी की होती है| संपन्न धरा के लोग बेबसी से मुक्ति का रास्ता अलग राज्य में तलाशते हैं | यह मांग ठीक उसी तरह की है जब परिवार  में  असमानता नजर आने लगती है तो परिजन  अपना   अलग आसियान तलाशने लगते  हैं | ऐसी ही असमानता को लेकर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से अलग राज्य की मांग जोर शोर से उठ रही है |झाँसी में इसको लेकर सत्याग्रह किया जा रहा है | मजे की बात ये है कि जिस मध्य प्रदेश वाले इलाके से अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग सबसे पहले उठी थी वह शांत है | 

     संसद सत्र शुरू होने के साथ ही झाँसी के गांधी पार्क में अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए सत्याग्रह शुरू हुआ | बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय की  अगवाई में चल रहा यह सत्याग्रह अभियान १८ अगस्त तक चलेगा | सत्याग्रह के इस अभियान में स्थानीय लोगों के अलावा कांग्रेस , सपा ,बसपा , और बीजेपी के उमा भारती से नाराज लोग खुल कर समर्थन दे रहे हैं , या बढ़ते विरोध को देख कर अपनी सिय…

कागजो में बने शौचालय

चित्र
बुन्देलखण्ड की डायरी

रवीन्द्र व्यास  बुंदेलखंड का एक आदिवासी गाँव है जहां कागजों में शौचालय  बन गए | आदिवासियों ने बैंक का मुंह तक नहीं देखा पर उनके खाते भी खुल गए |  यहां तक की उनसे लेंन  देंन  भी हो गया |  कागजों में बने शौचालय की पोल तब खुली जब यहाँ  अधिकारियों का एक दल शौचालय  के हालात जानने पहुंच गया |  समग्र स्वक्षता मिशन को किस तरह प्रशासनिक तंत्र द्वारा तहस नहस किया जा रहा है यह उसका एक छोटा सा ही उदहारण कहा जा सकता है | हालांकि टीकमगढ़ जिला 2015 तक प्रदेश के उन जिलों में शुमार था जहां शौचालय निर्माण की गति सबसे कम थी | यहां तक की कलेक्टर ने  ऐसे लोगों के शस्त्र लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश भी दिए थे जिनके घर पर शौचालय नहीं हैं | नवीन लाइसेंस के लिए भी स्वछता  प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया था | वर्तमान में टीकमगढ़ भले ही प्रदेश में दूसरे नंबर पर हो , पर कागजों में बने शौचालय उसके दावे पर सवाल जरूर खड़े करते हैं | 
   टीकमगढ जिले की  जनपद पंचायत जतारा की  ग्राम पंचायत बेरवार के  आदिवासी  बाहुल्य घटिया हार गांव  में   शौचालय धरातल पर नही कागजों पर बनाये जा रहे है।…

किसान त्रस्त सरकार मस्त

चित्र
बुदेलखंड की डायरी रवींद्र व्यास

                    बुंदेलखंड के किसानो के दर्द की दवा तो नहीं मिलती अलबत्ता  हमारा दर्द कितना गहरा और गंभीर है की उसे जब फ़िल्मी पर्दे पर दिखाया जाता है तो वह भी पुरुस्कृत हो जाता है | बुंदेलखंड के किसानो के दर्द पर बनी फीचर फिल्म " बी फॉर बुंदेलखंड "  कोलकता में आयोजित इंटर नेशनल कल्ट फिल्म फेस्टिवल ना सिर्फ सराहा गया बल्कि फिल्म डायरेक्टर को इसके लिए "बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर " का अवार्ड भी दिया गया | फीचर  फिल्म में  कर्ज में जी रहे  किसान राम सिंह और उसके पुत्र लल्ला  के दर्द की कथा है  | जिसमे बेटा कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचने की बात कहता है और पिता अपने जीते जी जमीन बेचना नहीं चाहता  | नाराज होकर जब बेटा घर गाँव छोड़ कर चला जाता है तो एक बेबस पिता कर्ज की नियति  आगे हार जाता और फांसी लगाकर आत्म ह्त्या कर लेता है |

                       मंदसौर में किसान आंदोलन में पुलिस गोली में हुई मौतों के बाद से मध्य प्रदेश में   किसान लगातार मौत को गले लगा रहे हैं | बुंदलखंड में तो हालात  और भी ज्यादा खराब हैं , यहां तो दुष्काल का एक  चक्र ह…

जमीन के लिए किसानो की जंग :वन कर्मियो को बनाया बंधक

छतरपुर  / 14 जून 17 जिले के दूरस्थ क्षेत्र किशनगढ़ थाना क्षेत्र मे आज वन कर्मचारियों और किसानों मे संघर्ष हो गया । जमीन को लेकर हुए इस विवाद मे  किसानों ने वन विभाग के डिप्टी रेंजर  और दो बीट गार्ड को बंधक बना कर जमकर पिटाई की  ।        किशनगढ़ थाना प्रभारी राजेश पाड़ेय ने बताया कि नगदा गांव में वन विभाग के कर्मचारियों को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी । सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डिप्टी रेंजर और दो बीट गार्ड को मुक्त कराया गया । वन विभाग वन भूमि पर किसानों द्वारा किए गए कब्जे से मुक्त कराने व वृक्षारोपण के लिए गए थे । इस जमीन का 9 जून को सीमांकन भी हो चुका था । इसके बाद भी  ये लोग जबरन तार वगैरह लगा कर कब्जा किया हुआ था । जब वन विभाग के लोगो ने इनके कब्जे से जमीन मुक्त करने लगे  उसी समय ग्रामीणो ने  इन पर   लाठी ड़ंड़ो  से हमला  कर दिया  और तीन लोगो को बधक बना कर बुरी तरह से पीटा ।  पुलिस ने बीट गार्ड वी जायसवाल की रिपोर्ट पर मथुरा यादव, कल्लू,  चंदू,नंदू, लखन और गेदाबाई यादव सहित 12 लोगो पर 294,506 बी, 353,332,427,34 के तहत मामला दर्ज किया है ।             दूसरी ओर किसान प…

जल अभाव ग्रस्त होता बुंदेलखंड

चित्र
जल अभाव ग्रस्त होता बुंदेलखंड 
रवीन्द्र व्यास 


बुंदेलखंड का नाम आते ही लोगों की आँखों के सामने अजब गजब तस्वीरें घूमने लगती हैं | शोषित , शापित इस इलाके की बदनसीबी ही है की भू - गर्भ खनिजों ,रत्नो से सराबोर है पर जीवन जीने के लिए आवश्यक जल धीरे धीरे उससे दूर होता जा रहा है | जल , जंगल, जानवर  और जमीन  जिससे जुड़ा है जीवन और समृद्धि का एक चक्र , पर आर्थिक समृद्धि की लालसा में जीवन के इस चक्र को ही ना सिर्फ  खंडित कर दिया बल्कि इसे नेस्तानाबूद करने में जुटे हुए हैं | सामाजिक जिम्मेदारी समझने वाले लोग इसको लेकर प्रयास भी करते हैं , सरकार योजनाए भी बनाती है बजट भी देती है किन्तु तंत्र को संचालित करने वाला गिरोह योजनाओ को कागजों में साकार कर देता है और धन को अपनी तिजोरी में बंद कर देता है | जिसके चलते कागजों में जंगल लहलहा रहें हैं , और धरा जल से परिपूर्ण है | जल संरचनाओं की उपेक्षा ही  बुंदेलखंड के दुष्काल का सबसे बड़ा कारण बन कर सामने आया है | 
                                                    पिछले कुछ समय में बुंदेलखंड के इन हालातों को देख कर लोगो ने और सत्ता पर काबिज लोगों ने अपनी चिंता…

बुन्देलखण्ड मे गिरता जल स्तर

चित्र
बुंदेलखंड की डायरी 

रवीन्द्र व्यास 
मध्य प्रदेश का यह बुंदेलखंड इलाका भी  भू -जल  दोहन में अग्रणी रहा है | हालात ये बने की ग्राउंड वाटर के मामले में यह  इलाका  भी डार्क जोन में पहुँचने का ख़तरा मंडराने लगा है  | पर यहां के हालात अजीब हैं  बुंदेलखंड के इन जिलों में एक ओर जहां जल स्तर में गिरावट ने स्थितियों को और चिंताजनक बनाया है वहीँ सरकार के प्रयासों पर यहां के अधियकारियों ने जम कर पलीता लगाया है |  सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज और मुख्यमंत्री नल जल योजना के माध्यम से  गाँव में नल जल योजनाए शुरू कराई थी |  पर गाँव की इन योजनाओं के सुचारु संचालन में ना अधिकारियों की रूचि थी और ना ही गाँव के सरपंचों की | गाँव के सरपंच इन योजनाओ में घटिया सामग्री को जिम्मेदार मानते हैं | इन हालातों में बुंदेलखंड के सागर संभाग की आधी से ज्यादा नल जल योजनाए ठप्प पड़ी हैं | केंद्र सरकार ने जरूर गिरते जल स्तर के सुधार के लिए 231 करोड़ रु की धन राशि उपलब्ध कराई है | 

 पिछली बार टीकमगढ़ जिले के निवाड़ी ब्लॉक को छोड़ कर बुंदेलखंड में जम कर वर्षा हुई थी | वर्षा से तमाम जल श्रोत लबालब भर गए थे , इसके बावजूद बुंदेलखंड में…