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कोई भी संत भगवान की पूरी लीला का वर्णन नहीं कर सकता//।मैथिलीशरण भाईजी

(लखनलाल असाटी) छतरपुर, । कल्याण मंडपम् में  शरदपूर्णिमा की रात्रि में रामकथा कहते हुए मैथिलीशरण भाईजी ने कहा कि शरदपूर्णिमा को ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में महा रासलीला की थी और शरदपूर्णिमा को ही जनकपुर में भगवान श्रीराम व किशोरीजी ने पुष्प वाटिका में एक दूसरे को पहलीबार देखा था। देवता भी जानते हैं कि अमृत से शरीर को तो तृप्त किया जा सकता है पर मन को तृप्त करने के लिए भगवान के रूपामृत की जरुरत है इसलिए अमृत पान करने वाले सभी देवता आकाश में स्थिर होकर भगवान की मनोहारी महा रासलीला का आनंद लेने से नहीं चूके।             भाईजी ने कहा कि भगवान तो भाव के ग्राहक हैं इसीलिए तो गोपियों के साथ महारास में श्रीकृष्ण गोपियों का भाव रखने अनेक रुपों में प्रगट हो गए और प्रत्येक गोपी के हाथों को हाथ में लेकर उन्होंने नृत्य किया। यही स्थिति वनवास से लौटकर अयोध्या में भगवान राम की थी। गुरु, माताएं, भाई, सखा, सेवक सभी भगवान से अपने-अपने भाव अनुरुप मिलना चाह रहे हैं। प्रेमातुर सब लोग निहारी। कौतुक कीन्ह कृपाल खरारी।।           अमित रुप प्रगटे तेहि काला। जथा जोग मिले सबहि कृपाला।।             उसी समय कृप…

मृत्यु और जीवन एक दूसरी के पूरक हैंooभाईजी

(लखन लाल असाटी) छतरपुर,  व्यक्ति के जीवन रूपी धारा के दो घाटों का नाम हरिकृपा और हरि इच्छा है। जब भी कुछ अनुकूल घटे तो उसे हरिकृपा और जब प्रतिकूल घटे तो उसे हरिइच्छा मानकर संतोष कर लीजिए। अनुकूल और प्रतिकूल दोनों ही परिस्थितियों में भगवान को नहीं भूलिए।छतरपुर के  कल्याण मण्डपम् में ''हरि अनंत हरि कथा अनंता" पर तीसरे दिन प्रवचन करते हुए मैथिलीशरण भाई जी ने कहा कि जब हम मौसम में 'पतझड़ को सहजता से स्वीकार कर लेते हैं तो जीवन में प्रतिकूलता को क्यों नहीं?             युगतुलसी पं. राम किंकर प्रवचन माला में उनके शिष्य भाई जी ने कहा कि जब सूर्य उदित हो रहा होता है तो वह सबसे पहले पश्चिम को ही देखता है, जहां उसे अस्त होना है। इसी तरह अस्ताचल सूर्य की नजर पूरब पर होती हैं, जहां अगली सुबह उसका उदय होना तय है। सूर्य के उदय और अस्त होने के उदाहरण को उन्होने मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुये उन्होनें कहा कि मृत्यु और जीवन एक दूसरी के पूरक हैं। जीवन में जो मिल रहा है उसे हरिकृपा माने और दु:खो को भगवान के चरणों में विलीन कर दें। जीवन में पश्चिम आने का तात्पर्य है कि जीवन में …

कोई भी ज्ञानी या मूर्ख नहीं होता ;;भाई जी

(लखन लाल असाटी) छतरपुर, । भगवान राम ने किसी के अंदर कोई परिवर्तन करने की जगह उसके स्वभाव को जस का तस स्वीकार कर लिया, यही राम राज्य बनाने की कला है। जो व्यक्ति जैसा है, उसमें जो गुण है उसे स्वीकार कर लीजिए। यह कथा युग तुलसी रामकिंकर जी के कृपा पात्र मैथिलीशरण भाई जी ने बुन्देलखण्ड परिवार द्वारा कल्याण मंडपम् में आयोजित सप्त दिवसीय रामकथा के पहले दिन क ही। प्रांरभ में कथा प्रसंग से परिचय कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार व संपादक विनीत खरे ने साकेतवासी नारायणदास अग्रवाल बड़े भैया को स्मरण कर उनके प्रयासों को सतत जारी रखने के लिए कथा आयोजक जयनारायण अग्रवाल जय भैया व कथा रसिक श्रोताओं का स्वागत किया। रामकथा सुनने अपर आयुक्त वाणिज्यकर व पूर्व कलेक्टर राजेश बहुगुणा, जिला जज उपभोक्ता फोरम पी.के.श्रीवास्तव, ए.डी.जे. कृष्ण मूर्ति मिश्रा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
            ''हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहि बहुबिधि सब संता।।  प्रसंग पर कथा कहते हुए भाई जी ने कहा कि जब अनेक रंगो को मिलाकर एक सुंदर चित्र की रचना हो सकती है तो अलग -अलग स्वभाव व वृत्तियों के लोगों को मिलाकर सुंदर समाज और संसार की…

वोट हमारा, उम्मीदवार हमारा "

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लोकउम्मीदवारकीखोज

बुंदेलखंड के छतरपुर जिलेकेबिजावरविधानसभाक्षेत्रमेंलोकतंत्रकाएकनयाचेहरादेखनेकोमिलरहाहै /  राष्ट्रिययुवासंगठननामकसंगठनगाँव-गाँवमेंमतदाताचौपाललगारहाहै / चौपालमें " हमाराविधायककैसाहो" जैसे गंभीर विषय पर ग्रामीण चर्चाकर

देवी को प्रसन्न करने चडाई जीभ

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छतरपुर/ एम. पी. / 11 अक्टूबर 13
जिला मुख्यालय से ८० किलोमीटर दूर बछोन  गाँव में अंध श्रद्धा का एक मामला सामने आया / लवकुश  नगर थाना इलाके  के बछोन गाँव  के काली देवी मंदिर में एक भक्त ने अपनी जीभ काट कर चडा  दी / उसे इलाज के लिए छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती  किया गया है ।   नवरात्रि के मोके पर तेजराम पाल (22 )नाम के युवक ने नो दिन का उपवास रखा था / 10 _11 अक्तूबर की मध्य रात्रि  ये भक्त देवी मंदिर पहुंचा और माँ को खुश करने हेतु उसने अपनी जीभ  चाक़ू से काट कर माँ के चरणों में अर्पित कर दी /  तेजराम के भाई रामचंद्र ने बताया की उसे सपने में माँ ने जीभ चडाने को माता ने कहा था , इसी लिए उसने ये बलि चडाई है / घटना की जानकारी सुबह लगी तब उसे इलाज के लिए लवकुश नगर ले गए फिर यहाँ जिला अस्पताल में भर्ती किया है ।  द्र. सुनील चौरसिया ने बताया की  खून ज्यादा बह जाने के कारण हालत चिन्ताजनक है , इलाज चल रहा है , ठीक हो जाएगा \

महराजपुर विधान सभा// बीजेपी में बन रहे बगावत के आसार

महराजपुर विधान सभा 
बीजेपी में बन रहे बगावत के आसार  रवीन्द्र व्यास  छतरपुर जिले का  महराजपुर विधान सभा क्षेत्र बुंदेलखंड का वह इलाका है जिसे बुंदेलखंड की शान कहा जाए तो कोई अतिसंयोक्ति नहीं होगी/  वैसे यह विधान सभा क्षेत्र  1962  से 2003  तक के चुनावों में अजा. के लिए आरक्षित था /  नए परिसीमन में इसमे जो इलाका जुड़ा  उसने इसका वैभव और बड़ा दिया / मूलतः जनसंघ बनाम बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके को दुनिया के  मुस्लिम बाहुल्य इलाके में पान के लिए भले ही  जाना जाता  हो   पर अब इसकी चर्चा की   खास वजह भी है \ पहली वजह इस  विधान सभा क्षेत्र से 2003  के चुनावों में पराजित बीजेपी प्रत्याशी पुष्पेन्द्र नाथ पाठक की सक्रियता ,और दूसरी वजह है पाठक को पराजित करने वाले पूर्व मंत्री मानवेन्द्र सिंह की बीजेपी में बिना  शर्त एंट्री /  इस विधान सभा क्षेत्र के लिए 1962 से 2003  तक 10 चुनाव हुए ,इन दस चुनावों में मात्र तीन बार ही कांग्रेस जीती 7  बार जनसंघ बनाम बीजेपी ने चुनाव जीता । 2008   में नए परिसीमन में इस विधान सभा नक्शा और दर्जा क्या बदला ,चार दशको से सामान्य वर्ग के दिलो में दफ़न अरमान उभर क…