महराजपुर विधान सभा
बीजेपी में बन रहे बगावत के आसार
रवीन्द्र व्यास
छतरपुर जिले का महराजपुर विधान सभा क्षेत्र बुंदेलखंड का वह इलाका है जिसे बुंदेलखंड की शान कहा जाए तो कोई अतिसंयोक्ति नहीं होगी/ वैसे यह विधान सभा क्षेत्र 1962 से 2003 तक के चुनावों में अजा. के लिए आरक्षित था / नए परिसीमन में इसमे जो इलाका जुड़ा उसने इसका वैभव और बड़ा दिया / मूलतः जनसंघ बनाम बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके को दुनिया के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में पान के लिए भले ही जाना जाता हो पर अब इसकी चर्चा की खास वजह भी है \ पहली वजह इस विधान सभा क्षेत्र से 2003 के चुनावों में पराजित बीजेपी प्रत्याशी पुष्पेन्द्र नाथ पाठक की सक्रियता ,और दूसरी वजह है पाठक को पराजित करने वाले पूर्व मंत्री मानवेन्द्र सिंह की बीजेपी में बिना शर्त एंट्री /
इस विधान सभा क्षेत्र के लिए 1962 से 2003 तक 10 चुनाव हुए ,इन दस चुनावों में मात्र तीन बार ही कांग्रेस जीती 7 बार जनसंघ बनाम बीजेपी ने चुनाव जीता । 2008 में नए परिसीमन में इस विधान सभा नक्शा और दर्जा क्या बदला ,चार दशको से सामान्य वर्ग के दिलो में दफ़न अरमान उभर कर सामने आ गए / बीजेपी में हर कोई अपने को नेता साबित करने की जुगत में जुट पडा । बड़ी संख्या में बीजेपी के बागी मैदान में कूद पडे / और इन बागियों की हौसला अफजाई की जिले के उन नेताओ ने जिनकी निगाह में भविष्य के लिए यह सीट सुरक्षित हो सकती थी /नतीजतन बीजेपी प्रत्यासी पुष्पेन्द्र नाथ पाठक (गुड्डन) कांग्रेस के बागी प्रत्यासी मानवेन्द्र सिंह (भवर राजा) से 1391मतों से चुनाव हार गए । भवर राजा को 19413 (18.77 %) और गुड्डन पाठक को 18022 (17. 43 %) वोट मिले /
क्यों हारी थी बीजेपी
2008 का चुनाव बीजेपी यहाँ से क्यों हारी थी , इसका बीजेपी के ही राजनैतिक विश्लेशको ने जो विश्लेषण किया ,उसमे कई बाते स्पष्ट हो गई / बीजेपी के बागी राकेश पाठक बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्हे 14. 73 % मत मिले , उमा भारती की जनशक्ति पार्टी के वीरेंद्र चौरसिया को 12 . 50 % मत मिले, मूलतः जनशक्ति पार्टी को मिले लोधी और चौरसिया समाज के वोट बीजेपी के परम्परागत वोट माने जाते हें / लोधी समाज के मतों का विभाजन अवश्य हुआ पर इसका लाभ बीजेपी को नहीं मिला / दरअसल यहाँ से कांग्रेस ने लोधी समाज के वोट और कांग्रेस के परम्परागत वोटो के गणित में यहाँ से वीर सिंह राजपूत को प्रत्याशी बनाया था उन्हे 9.59 % वोट मिले थे / इसके अलावा बीजेपी कुशवाहा समाज को भी अपना परम्परागत वोट बेंक मानती है पर चुनाव में समानता दल से कुशवाहा समाज के प्रत्याशी महेश कुशवाहा ने 9.37 % वोट लेकर बीजेपी के अरमानो पर कील ठोकी / छुट पुट बीजेपी के कार्यकर्ताओं के चुनाव मैदान में आने से बीजेपी को नुकशान हुआ । साथ ही छतरपुर के बीजेपी के वे ब्राम्हण नेता जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया था इस गणित में गुड्डन को पराजित करने में जुट गए थे की यदि गुड्डन विधायक बन गया तो उनसे ब्राम्हण नेता का ख़िताब भी छिन जायेगा / दूसरी तरफ पार्टी की वे सामंती शक्तिया भी उन्हे हराने में जुटी थी जिनकी निगाह भविष्य में इस विधान सभा सीट पर थी ।
मानवेन्द्र आये नहीं लाये गए हें
बीजेपी के अन्दर की खबरों पर यदि यकीन करें तो गुड्डन पाठक को मात्र 1. 34 % मतों के अंतर से हराने वाले मानवेन्द्र सिंह को बीजेपी में लाने वाले भी वही नेता हें जो हर हाल में गुड्डन पाठक को विधायक बनने से रोकना चाहते थे । दरअसल उमाभारती की जनशक्ति पार्टी के बीजेपी में विलय के बाद गुड्डन को हराना आसान नहीं था और ना-ही उनका टिकिट कटवाना , इसीके चलते मानवेन्द्र सिंह रूपी इक्के का सहारा लिया गया । मानवेन्द्र सिंह ने बिना शर्त यह भरोसा देकर बीजेपी में सदस्यता ली की वे महराजपुर और बिजावर विधान सभा सिट जितवा कर देंगे / दरअसल मानवेन्द्र सिंह अंतिम दम तक कांग्रेस से यह आश्वासन चाहते रहे की उन्हे टिकिट मिल जायेगा , पर कांग्रेस ने उनके परफोर्मेंस को देखकर कोई भरोषा देने से इंकार कर दिया ।
नए समीकरण : में 2013 के चुनाव भी इस विधान सभा क्षेत्र में दिलचस्प होंगे ,/ बीजेपी के दिग्गज नेता पार्टी के प्रदेश नेताओ के फैसले का इन्तजार कर रहे हें / प्रदेश नेतृत्व ने यदि सामजिक असंतुलन का प्रयास किया तो यहाँ के चुनाव रंग भी देखने लायक होगा /
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