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बुंदेलखंड में राहुल की राजनीती

रवीन्द्र व्यास
"नाजीतेआशानामरेनिराशा "


बुंदेलखंडकेलोगोकीदशाइसीकहावतसेमिलतीजुलतीहै |इसदर्दकोआजादी६दशकबीतजानेकेबादकेबादकिसीनेसमझाहै ,वेहैराहुलगाँधी |उनकीरणनीतिएकसोचीसमझीराजनीतीकेतहतचलरहीहै |वेइसइलाकेकेगावमेंरातबितातेहै ,लोगोकेदर्दकोकरीबसेसमझनेकाप्रयासकरतेहै |औरउसकासमाधानतलाशते

सेवा का दर्द

लखन तिवारी ये नाम है उस व्यक्ति का जो अस्पताल आने वाले गरीब बेसहारा लोगो की मदद करता था ,जिस मरीज का कोई नही होता उसका साथी बन जाता ,गर्मियों में मटके रख कर मुफ्त में लोगो को ठंडा पानी पिलाता \अपनी रोटी की जुगाड़ भी वह लोगो की सेवा कर किया करता था १५ साल पहले वह नोगाव में कंहा से आया कोई नही जनता ,हर कोई सिर्फ़ इतना जनता है की वो बेसहारों का सहारा है आज वो पेरो से लाचार है चल नही पता ,पिछले दो माह से बुडापे की बीमारियों से ग्रस्त है उसे पेट की आग बुझाने के लिए दो वक्त की रोटी भी अब नसीब नही होती आज उसकी आँखों में अपनी ही दशा के प्रति बेबसी नजर आती है ,पर ना उसे समाज शिकायत है ,ना ही अपने से उसकी इस दशा का पता चलने पर यहाँ के कुछ नोजवानो ने उसे अस्पताल में भरती कराया ,उसके भोजन पानी की व्यवस्था कराइ पर अस्पताल के वे डाक्टर और नर्स उसे भूल गए जिनकी सेवा में वो सदेव तत्पर रहता था वे लोग भी उसे भोल गए जिनकी सेवा में वो जीजान से लगा रहा उसके सेवा कार्य को सम्मान दिया तो सिर्फ़ नोजवानो ने नोजवानो का कार्य निश्चित तो़र पर सराहनीय कहा जा सकता है ,साथ ही उन लोगो पर तमाचा भी जिन्ह्ये आज क…

बदहाल बुंदेलखंड

मध्य प्रदेश और उतर प्रदेश में विभक्त देश का एक एसा इलाका है जंहा की धरा हीरा उगलती है ,कीमती खनिज संपदा से भर पूर इस इलाके की बदनसीबी यह देखिये की यहाँ के लोग अभावो और बदनसीबी में जीने को मजबूर है इस ब्लॉग को बनाने के पीछे भी मकशद यही है की यहाँ की वास्तविकता के बारे में कुछ लिख सकू
"कोंडी नही पास ,मेला लगे उदास " : दुनिया में तरक्की की नई कहानिया लिखी जा रही है ,देश की विकास दर बढ रही है ,कम्पनिया हीरा खोद कर यहाँ से ले जा रही है ,कम्पनिया हीरे से चमक रही है पर ,यहाँ के लोगो की दशा कोडी नही पास मेला लगे उदास जैसी ही है यहाँ किसान कर्ज के बोझ तले आत्म हत्या करने को मजबूर है , पेट की आग की खातिर वो देश ही नही विदेशो में भी जाकर मजदूरी करने को लाचार है
"गरीबी झगडे की जड़ "की ये कहावत इस इलाके में सटीक बैठती है आख़िर बेठे भी क्यो नही ,कहते है ना खाली दिमाग शेतान का ,जब खेत सूखे होंगे ,पेट भूखे होंगे तो ,शेतान तो हावी होगा ना ,यही शेतान झगडा फसाद कराता है ,बेबस लोग या तो मो़त को गले लगा लेते है या जंगल की राह पकड़ लेते है हाल के डकेतों की यही कहानी सामने आई है ,जिसमे ज…