15 नवंबर, 2009

सेवा का दर्द

लखन तिवारी ये नाम है उस व्यक्ति का जो अस्पताल आने वाले गरीब बेसहारा लोगो की मदद करता था ,जिस मरीज का कोई नही होता उसका साथी बन जाता ,गर्मियों में मटके रख कर मुफ्त में लोगो को ठंडा पानी पिलाता \अपनी रोटी की जुगाड़ भी वह लोगो की सेवा कर किया करता था १५ साल पहले वह नोगाव में कंहा से आया कोई नही जनता ,हर कोई सिर्फ़ इतना जनता है की वो बेसहारों का सहारा है आज वो पेरो से लाचार है चल नही पता ,पिछले दो माह से बुडापे की बीमारियों से ग्रस्त है उसे पेट की आग बुझाने के लिए दो वक्त की रोटी भी अब नसीब नही होती आज उसकी आँखों में अपनी ही दशा के प्रति बेबसी नजर आती है ,पर ना उसे समाज शिकायत है ,ना ही अपने से उसकी इस दशा का पता चलने पर यहाँ के कुछ नोजवानो ने उसे अस्पताल में भरती कराया ,उसके भोजन पानी की व्यवस्था कराइ पर अस्पताल के वे डाक्टर और नर्स उसे भूल गए जिनकी सेवा में वो सदेव तत्पर रहता था वे लोग भी उसे भोल गए जिनकी सेवा में वो जीजान से लगा रहा उसके सेवा कार्य को सम्मान दिया तो सिर्फ़ नोजवानो ने नोजवानो का कार्य निश्चित तो़र पर सराहनीय कहा जा सकता है ,साथ ही उन लोगो पर तमाचा भी जिन्ह्ये आज के नोजवानो से कोई आस नजर नही आती अब अस्पताल में पड़े लखन तिवारी की आँखे मानो एक नही कई सवाल कर रही है ,समाज के उन् ठेकेदारों से जो बिरादरी ,जाति,धर्म और समाज सेवा के नाम पर अपना कारोबार चलाते है ###############

बुन्देलखण्ड मीडिया रिसोर्स नेटवर्क

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