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छतरपुर जिले में १७१ स्कूल शिक्षक विहीन

छतरपुर /जिले के  के 131 मिडिल और 40 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक नहीं, हें } जिले के दर्जनों मिडिल और प्राइमरी स्कूल इन दिनों शिक्षक विहीन हैं। जब की शहर के आसपास के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है।  इस सबके बीच जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के काफी स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज जानकारी के अनुसार  40 प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। जबकि जिले में कुल 1968 प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। 
 जिले में सबसे बदतर हालत मिडिल स्कूलों की है।  697 मिडिल स्कूल जिले में संचालित हैं। इनमें से 131 स्कूल शिक्षक विहीन हैं। इसके४ अतिरिक्त 9 मिडिल स्कूल ऐसे हैं, जहां पर हेड मास्टर तो पदस्थ हैं, लेकिन अन्य शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने से अतिथि शिक्षकों से काम चलाना पड़ रहा है। हालत यह है कि मिडिल स्कूल कंदैला-चंदला में 410 छात्र हैं। वहां पर 13 शिक्षकों को पदस्थ होना चाहिए, लेकिन कोई भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। है। ये है छतरपुर जिले में शिक्षा के अधिकार का  जलवा  | अब छतरपुर कलेक्टर को भी शिक्षा की सुध आई है  उन्होने  कहा है की जिले  में सभी स्कूलों में कम से कम एक स्थायी …

छतरपुर जिले में 5471 बच्चे अति कुपोषित

छतरपुर  जिले में 5471 बच्चे  अति कुपोषित  छतरपुर /  जिले में 5471 बच्चे अति कम वजन के पाए गए है।जिले में लगभग ढाई हजार परिवारों के साढ़े पांच हजार बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। ये हाल  तब है जब प्रदेश के साथ साथ जिले में अटल मिशन चल रहा है |  सर्वेक्षण में ये बात सामने आई है की जिले के अधिकाँश आंगनवाडी केन्द्रों पर पोषण आहार के नाम पर बच्चों के साथ मजाक किया गया है |  शहर से ही दस किलो मीटर दूर  बछरोनिया गाँव में तो महीनो से आंगन वाडी में पोषण आहार और यहाँ के स्कूल में मध्यान भोजन नहीं बटा | अब स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है की दूर दराज के गांवों की दशा क्या होगी | अब ज़िलामहिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किए गए सर्वे में जिले में 5471 बच्चे अति कम वजन के पाए गए है | इस स्थिति को देख कर ज़िला प्रशासन अब जाग्रत हुआ है | सोमवार को कलेक्टर ने बैठक कर कहा की  इन बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने एवं परिवारों की आय बढ़ाने के लिये उन्हें जिले के सभी विभाग शासकीय योजनाओं से लाभंावित करें|जिला पंचायत सीईअे श्रीमती भावना वालिम्बे ने कहा कि इसे हम चुनौती के रूप में स्वीकार कर रहे हं,ै इन परिव…

कांग्रेस का हाथ अब किसके साथ ?

ये यू.पी.ए. सरकार है  जिसका मुख्य घटक कांग्रेस है ,जिसका मुख्य नारा है कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ _ और अब लगता है ये हाथ आम आदमी के साथ नहीं बल्की आम आदमी की गरदान का नाप लेने तक साथ है _ , ऐसी कांग्रेस और सरकार के  मुखिया हें मनमोहन सिंह , वे इन दिनों काफी व्यस्त हें ,उनके पास अब जनता के मन को मोहने का वक्त नहीं है | असल में वे किसी दूसरे का मन मोहने में व्यस्त हें | सोनिया जी का मन मोहा तो प्रधान मंत्री बन गए  ,अब वे देश की जगह  दुनिया के बडे रंग दार का मन मोहने में जुट गए हें , अब जाने वे क्या बन जायेंगे ? घोटालों::कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला और कोयला खदान आवंटन घोटाला, इन सभी घोटालों  की आग से जल रहे देश में उन्होने एसा डीजल और जलने  वाली गैस फेंकी - की देश का हर आदमी बेचेन हो उठा | इससे भी वे संतुस्ट नहीं हुए तो गाँधी के सपनो को धता बता कर ऍफ़.डी.आई. की मंजूरी दे दी | ये सब कुछ उन्होने किया  गाँधी परिवार के आशीर्वाद और मल्टी नॅशनल कम्पनियों के बल से | कहते हें की इन्ही के बल बूते पर ही इनका दल देश का सबसे बड़ा पूंजी पति दल है | कई दलों के समर्थन पर टिकी उनकी …