छतरपुर जिले में 5471 बच्चे अति कुपोषित
छतरपुर / जिले में 5471 बच्चे अति कम वजन के पाए गए है।जिले में लगभग ढाई हजार परिवारों के साढ़े पांच हजार बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। ये हाल तब है जब प्रदेश के साथ साथ जिले में अटल मिशन चल रहा है | सर्वेक्षण में ये बात सामने आई है की जिले के अधिकाँश आंगनवाडी केन्द्रों पर पोषण आहार के नाम पर बच्चों के साथ मजाक किया गया है |
शहर से ही दस किलो मीटर दूर बछरोनिया गाँव में तो महीनो से आंगन वाडी में पोषण आहार और यहाँ के स्कूल में मध्यान भोजन नहीं बटा | अब स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है की दूर दराज के गांवों की दशा क्या होगी |
अब ज़िलामहिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किए गए सर्वे में जिले में 5471 बच्चे अति कम वजन के पाए गए है | इस स्थिति को देख कर ज़िला प्रशासन अब जाग्रत हुआ है | सोमवार को कलेक्टर ने बैठक कर कहा की इन बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने एवं परिवारों की आय बढ़ाने के लिये उन्हें जिले के सभी विभाग शासकीय योजनाओं से लाभंावित करें|जिला पंचायत सीईअे श्रीमती भावना वालिम्बे ने कहा कि इसे हम चुनौती के रूप में स्वीकार कर रहे हं,ै इन परिवारों की मेपिंग कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोडक़र कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी जायेगी। जिला पंचायत सभा कक्ष में सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों की बैठक में अति कुपोषण से निपटने की रणनीति बनाई गई।
जिला पंचायत सी.इ.ओ.श्रीमती भावना वालिम्बे ने कहा कि अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नावास केन्द्रों में
भर्ती कराकर उन्हें कुपोषण से दूर किया जाये। समय पर उनका टीकाकरण हो और आंगनवाड़ी केन्द्रों में शिशुओं एवं उनकी माताओं को सभी निर्धारित सुविधायें सहज मुहैया कराई जायें। प्रशासन ने माना है कि जब तक इनके परिवारों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधारी जाती है तब तक समस्या का स्थाई समाधान सहज नहीं है। । अति कुपोषित बच्चे के परिवार में यदि जमीन है और सिंचाई के साधन नहीं तो उन्हें सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जायें। अति कुपोषित बच्चे की माँ को मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में रसोईया के पद पर नियुक्त किया जायें। डीपीआईपी, जनअभियान परिषद और तेजस्वनी भी इन परिवारों के लिए काम करेगें। उन्होंने आंगनवाड़ी केन्द्रों के आस-पास खुली भूमि में किचिन गार्डन विकसित करने का सुझाव दिया। हरी सब्जियों के लिए बीज कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध करा दिए जायेगें। इन हरी सब्जियों का उपयोग अति कुपोषित बच्चों के परिवारों हेतु होगा।
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