ये यू.पी.ए. सरकार है जिसका मुख्य घटक कांग्रेस है ,जिसका मुख्य नारा है कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ _ और अब लगता है ये हाथ आम आदमी के साथ नहीं बल्की आम आदमी की गरदान का नाप लेने तक साथ है _ , ऐसी कांग्रेस और सरकार के मुखिया हें मनमोहन सिंह , वे इन दिनों काफी व्यस्त हें ,उनके पास अब जनता के मन को मोहने का वक्त नहीं है | असल में वे किसी दूसरे का मन मोहने में व्यस्त हें | सोनिया जी का मन मोहा तो प्रधान मंत्री बन गए ,अब वे देश की जगह दुनिया के बडे रंग दार का मन मोहने में जुट गए हें , अब जाने वे क्या बन जायेंगे ?
घोटालों::कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला और कोयला खदान आवंटन घोटाला, इन सभी घोटालों की आग से जल रहे देश में उन्होने एसा डीजल और जलने वाली गैस फेंकी - की देश का हर आदमी बेचेन हो उठा | इससे भी वे संतुस्ट नहीं हुए तो गाँधी के सपनो को धता बता कर ऍफ़.डी.आई. की मंजूरी दे दी | ये सब कुछ उन्होने किया गाँधी परिवार के आशीर्वाद और मल्टी नॅशनल कम्पनियों के बल से | कहते हें की इन्ही के बल बूते पर ही इनका दल देश का सबसे बड़ा पूंजी पति दल है |
कई दलों के समर्थन पर टिकी उनकी सरकार के खेल भी बडे निराले हें | सरकार की बैठकों में उनका साथ देने वाले दल बाहर आकर उनका विरोध करते हें |शायद ये नेता देश की जनता को जरुरत से ज्यादा मूर्ख समझने लगे हें , तभी तो इस तरह की हरकत करते हें | अन्यथा क्या वजह है की देश की चिंता का स्वांग करने वाले ये दल -{दल } अब तक इस सरकार को समर्थन दे रहे हें |
उस पर सरकार का तुर्रा ये की देश को इन पेट्रोलियम उत्पादों में सब्सिडी देना पड़ती है जिस से करोड़ों {१.लाख ३२ हजार करोड़ } का घाटा हो रहा है | देश की जनता नहीं चाहती की देश की अर्थ दशा खराब हो वो भी आम आदमी के कारण | उसकी तो बस एक छोटी सी बिनती है की देश को विदेशियों के हाथों ना बेंचो ? बार - बार तेल गेस के दाम बढाने से अच्छा है की एक ही बार में जितने दाम हों बड़ा लो , गेस पर से भी सब्सिडी हटा लो ? आखिर इस देश में जो की तर्रक्की वाला विकाश शील _ से विकशित देश बन रहा है उसके विकाश में आम आदमी का अवरोध रहना ही नहीं चाहिए ? एसे लोगों की इस देश में जरुरत ही क्या है ? देश को जरुरत है संम्पन और सम्रद्ध लोगों की मल्टी नेशनल वाले पूंजी पतियों की | उनके चमचमाते बंगलों और फेक्टरियों , शो रूमों से देश की शान बढेगी | इस लिए एसे लोगों की मदद की जाना चाहिए , सरकार कर भी रही है , देश के बड़े कॉरपोरेट घरानों को 10 लाख करोड़ रुपए पिछले तीन साल में टैक्स छूट दी|
अब अगर सरकार आम आदमी के लिए डीजल और एलपीजी पर सब्सिडी देगी तो ये लोग खुश हाल जिन्दगी जी लेंगे , फिर ये बेचारे इन कॉरपोरेट घरानों में नौकरी नहीं करेंगे इस लिए इनको आर्थिक तौर पर इतना तोड़ दो की ये बेचारे लाचारी में ही सही इनके द्वार पर मत्था टेकने को मजबूर हो जाएँ | शायद इसी कारण अब लोग सवाल करने लगे हें की कांग्रेस का हाथ अब किसके साथ |
.कॉरपोरेट घरानों के बीच की साठगांठ(I.A.C.)
देश दुनिया में यदि कोई सबसे लाभ कारी प्रोडक्ट है तो वह है तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस,\ सरकार अब बड़े कॉरपोरेट घरानों से साठगांठ कर निजी हाथों में सौपने जा रही हैं. |तेल और गैस भंडारों को कॉरपोरेट घरानों को बांटे जाने पर न्यायपालिका भी ऐतराज जता चुकी है. पिछले 20 सालों में सरकारों ने तेल और गैस संपदा से भरपूर क्षेत्रों को गलत तरीके से निजी क्षेत्रों को सौंपा है. उससे राष्ट्र के खजाने को जो नुकसान हुआ है वह कोयला घोटाले से भी अधिक है.
राजस्थान तेल ब्लॉक को ओएनजीसी से लेकर कैर्न एनर्जी को औने-पोने दाम पर सौंप दिया गया. अनुबंध की समय सीमा खत्म होने के बाद भी कंपनी को उस क्षेत्र को अपने स्वामित्व में रखने की इजाजत दे दी गई.
कैर्न ने स्वीकार किया था कि इस ऑयल फील्ड रिजर्व में पांच लाख करोड़ का तेल था जबकि उस तेल को निकालने की लागत केवल तीन प्रतिशत है. ओएनजीसी को इस तेल क्षेत्र से केवल 30 फीसदी हिस्सा मिला लेकिन उसे रॉयल्टी की पूरी रकम चुकानी पड़ी. अगर यह तेल क्षेत्र ओनजीसी से वापस नहीं ले लिया गया होता तो देश को यह तेल काफी सस्ते में उपलब्ध होता.
उसी तरह गोदावरी गैस बेसिन में, जो कि देश का सबसे बड़ा बेसिन है, उसे उत्पादन में साझेदारी के एक अजीबोगरीब समझौते के तहत रिलायंस के हवाले कर दिया गया. रिलायंस ने लाभ को कम दिखाने की नीयत से गैस निकालने की लागत को मनमाने तरीके से बढ़ाकर दिखा दिया. चूंकि सरकार ने लाभ में साझीदारी का समझौता किया था और फर्जी तरीके से लागत बढाकर रिलायंस ने लाभ की राशि घटाकर दिखा दी, इस कारण देश को उसका वाजिब हिस्सा नहीं मिल पाया.
तेल और गैस जैसे देश के प्राकृतिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की नीति तत्काल बंद की जाए. निजी क्षेत्रों को अब तक जो आवंटन हुए हैं उसकी एक स्वतंत्र जांच कराई जाना चाहिए |
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