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Bimar Bhagvaan

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भगवानहुएबीमार

जगन्नाथ स्वामी रथ यात्रा पन्ना 
रवीन्द्रव्यास
मध्यप्रदेशकेपन्नामेंभगवानजगन्नाथजीस्वामीकोसोमवारकोलूलगगई।उनकोयहलूतबलगीजबउन्हेंइसभीषणगर्मीमेंऔरखुलेमेंस्नानकरायागया।अबभगवानबीमारहोगएहैंऔरउनकाइलाजशुरूहोचुकाहै , लिहाजवेअबअपनेभक्तोकोकमसेकम 15 दिनोंतकदर्शननहींदेंगे। पुरीकीतरहपवित्रनगरीपन्नामेंसोमवारकोरथयात्रामहोत्सवकाशुभारम्भकेस्नानकेसाथहोताहै।रथयात्रासमारोहकेप्रथमदिवसभगवानजगन्नाथस्वामीकेपूजाअर्चनाकेबादभगवानकोमंदिरपरिसरमेंलायाजाताहै।उन्हेंपरम्पराकेअनुसारसहस्रछिद्रोंवालेकलशमेंजिसमेऔषधियुक्तजलहोताहैउससेस्नानकरायागया।स्नानकेबादविधिवतपूजाअर्चनाकीगई।स्नानकेबादउन्हेंलूलगजातीहैऔरभगवानबीमारहोजातेहैं | वेअगले 15 दिनतकरोगीअवस्थामेंरहेंगे।उनकेपट 15 दिनबाददर्शनकेलिएपुन: खुलेंगे।

bundelkhand Dayri

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विकाश के नाम पर विनाश का  आमंत्रण रवीन्द्र व्यास 




पर्यावरण दिवस के नाम पर  हर साल मनाये जाने वाले  इस दिन, जानकार और स्वयं सेवी संस्थाओं के लोगों ने  गम्भीर चिंतन और मनन किया । कुछ  लोगों को पर्यावरण जागरूकता के लिए पहल का संकल्प भी लिया  हैं । ये अलग बात है की  कुछ इस अभियान में जीवन पर्यन्त लगे रहते हैं और कुछ शमशान के ज्ञान की तरह घर पहुँचते ही  इसे भूल जाते हैं । यही हालात बुंदेलखंड जैसे इलाके की भी है , जहां के अतीत की जीवन शैली भले ही प्रकृति के अनुकूल रही हो किन्तु वर्तमान की जीवन शैली , लालशा,और बढ़ती आबादी के बोझ ने लोगों को प्रकृति से दूर कर दिया । इसमें जितने हम और आप जिम्मेदार हैं उतनी ही प्रयोग वादी सरकारें भी जिम्मेदार हैं । विकाश की आंधी में शहरी संस्कृति को बढ़ावा दिया गया ,प्रकृति और पर्यावास को नष्ट कर विनाश को आमंत्रित किया गया । इसी का परिणाम है की प्राकृतिक विपदाओं का बार बार सामना करना पड रहा है । 

कभी  बुंदेलखंड का इलाका एक घने वन क्षेत्र के तौर पर जाना जाता था । लोगों के जीवन का आधार यही वृक्ष थे , अचार ,महुआ ,तेंदू , आम और आंवला ऐसे वृक्ष थे जो  यहां के लोगों की …