02 जनवरी, 2026

भावुक जीत! पति की हत्या के बाद पत्नी बनी सरपंच, गांव ने दिया साथ


 

भावुक जीत! पति की हत्या के बाद पत्नी बनी सरपंच, गांव ने दिया साथ

सागर, 2 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना तहसील की देवल ग्राम पंचायत में उपचुनाव ने भावनाओं का परिचय दिया। सरपंच लाखन सिंह यादव की हत्या के बाद उनकी पत्नी बरषा ने भारी मतों से जीत दर्ज की। ग्रामीणों ने संवेदना का संदेश देते हुए राजनीति को पीछे छोड़ दिया।

29 दिसंबर को हुए मतदान की गणना शुक्रवार को तहसीलदार अंबर पंथी ने कराई वर्षा   (पति लाखन यादव) को 667 वोट, लखनलाल तिवारी को 257, बेटी बाई (चंद्रभान सिंह) को 230 और नोटा को 29 वोट मिले। जीत पर जश्न की जगह ग्रामीणों ने लाखन को श्रद्धांजलि दी।

हत्या का मामला: 4 सितंबर 2025 को भानगढ़ रोड पर गुरयाना के पास सरपंच की हत्या हुई। पुलिस ने दो आरोपियों को जेल भेजा है। ग्रामीणों ने बरषा को सांत्वना देते हुए उन्हें सरपंच चुना।

MP में ऐसे अन्य मामले:

यहां मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से  पहले भी  इसी तरह के कई मामले सामने आये  हैं, जहां हत्या, दुर्घटना या मौत के बाद परिवारजनों (खासकर महिलाओं) को ग्रामीणों ने भावुक समर्थन देकर सरपंच पद जिताया। 

 2024, रतलाम (जावड़ तहसील): सरपंच पति की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पत्नी को ग्रामीणों ने उपचुनाव में 80% वोट देकर जिताया।

2023, भोपाल (फंदा ग्राम पंचायत): सरपंच की बीमारी से मौत पर विधवा पत्नी को भावुक वोटिंग से सरपंच बनाया गया।

2022, ग्वालियर (मुरैना): हत्या प्रभावित परिवार की महिला को उपचुनाव में ग्रामीण समर्थन से जीत मिली, पुलिस जांच जारी रही।

2025, दमोह (पंधुर्णा पंचायत): सरपंच की चाकूबाजी से हत्या के बाद पत्नी को 72% वोटों से उपचुनाव में जीत। ग्रामीणों ने संवेदना यात्रा निकाली।

2024, छिंदवाड़ा (खैरी पंचायत): पति की सड़क हादसे में मौत पर विधवा को 500+ वोट देकर सरपंच बनाया। पुलिस ने ड्राइवर गिरफ्तार किया।

2023, सीधी (चुरहट  क्षेत्र): सरपंच पिता की बीमारी से मौत के बाद बेटी को उपचुनाव में भारी बहुमत। गांव ने श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

2022, नर्मदापुरम (पिपरिया): हत्या कांड में सरपंच की मौत पर पत्नी विजयी। आरोपी फरार, लेकिन ग्रामीण एकजुट।

2021, बालाघाट (लांजी): पंचायत सदस्य की हत्या के बाद भाई को सरपंच पद पर भावुक वोटिंग से चुना गया।

ये उदाहरण  मध्य प्रदेश के  ग्रामीण इलाकों में संवेदना-प्रधान राजनीति को दर्शाते हैं।

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