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August, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

bundelkhand Dayri_ RIo Tinto

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टिन्टो (रियो ) का टंटा -------------------------- रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंडकेछतरपुरजिलामेंपिछले१४सालसेहीराकीखोजऔरखुदाईकेजतनमेंजुटी ,आस्ट्रेलियनहीराकंपनीरियोटिंटोअबबकस्वाहामेंहीरानहींखोदेगी।इससालकेअंततकवहअपनाकार्यपूर्णतःबंदकरदेगी।यहविदेशीकंपनीभीसरकारकीसुस्तचालऔरसियासतीतिकड़मोसेहारकरसैकड़ोंकरोड़खर्चकरअबहीराकेमोहकोत्यागरहीहै।ग्रहोंकीचालऔरज्योतिषमेंभरोषाकरनेवालेज्ञानीमानतेहैकीहीराएकरत्नहै , जोनीलमजैसेरत्नकीतरहहरकिसीकेअनकूलनहींहोता।यहशुभऔरअशुभफलदेताहै।जिसकेकारणआपकोआर्थिक ,मानसिकऔरशारीरिकनुक्सानऔरपरिस्थितियांप्रतिकूलहोजातीहैं।शायदरियोटिंटोकेसाथभीऐसाहीहोगया ,उनकीगृहदशाहिंदुस्तानीहीरेकेअनकूलनहींथी , जिसकारण१४वर्षकेलम्बेसंघर्षकेबादभीउन्हेंहीराखोदनेकास्थाईअधिकार

BUndelkhand Dayri

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पानी को तरसते बुंदेलखंड में हुई आफत की बारिश  रवींद्र व्यास  बुंदेलखंड का इलाका पिछले तीन चार साल से बून्द -बून्द पानी के लिए तरश रहा था । इस बार कुछ ऐसा पानी बरषा की ये आफत की बारिश हो गई । हाल की बारिश के इस प्रकोप में इस क्षेत्र के 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई ।तीन दिन तक बुंदेलखंड के कई जिलों का  सड़क संपर्क काटा रहा ।  सड़के ,पल पुलिया क्षति ग्रस्त हो गए तो कही स्टॉप डेम बाह गए तो कही तालाब फुट गए । अंग्रेजो के शासन काल में बने गंगऊ डेम की दीवाल भी इस बार पानी का दबाव नहीं झेल पाई । बुंदेलखंड के हर बाँध के गेट खुल गए तो   तालाबो ,नदी नालों ने  भी अपनी सीमा लांघी और  जहां जो मिला उसे बर्बाद करता पानी चला गया । फिर वो चाहे मानव हो  मानव की सुख सुविधाओं के लिए बनी सड़क हो या पुल पुलिया अथवा मानव और जीवो के पेट की आग बुझाने वाले खेत हो फिर सर पर साया बनाने वाले घर । 
मध्य प्रदेश के छः और उत्तर प्रदेश के सात जिलो में तीन चार दिन की लागातार बारिश ने ऐसा कहर बरपाया की उत्तर प्रदेश के  करीब एक दर्जन और मध्य प्रदेश वाले इलाके के १८ से ज्यादा लोग पानी की भेंट चढ़ गए । सबसे दर्दनाक सागर जिले …

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बुंदेलखंड की डायरी :-  आजादी के 70 साल और "बुंदेलखंड" ? रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड _ भी आजादी की 70 वी  वर्षगाँठ मना रहा है ,। इस दिन बुंदेलखंड की अधिकाँश रियासतों के वाशिंदों को दोहरी गुलामी से मुक्ति मिली थी । "आजादी " का यह शब्द यहां के लोगों के लिए एक अलग ही मायने रखता था । समय बीता , देश में जब बीते सात दशकों में विकास का पहिया तेजी से घूमा ,और बुंदेलखंड की रफ़्तार सुस्त रही तो अनेक सवाल बुन्देलखंडियो के मन में खड़े होने लगे । उन  कमियाँ  और कारणों की तलाश होने लगी जिसके चलते बुलंद बुंदेलखंड - बदहाल  हुआ । लोगों को हर बदहाली के मूल में राजनैतिक नक्कारापन ,और विभाजन की टीस नजर आई । इसको लेकर बुंदेलखंड के लोगों को छला भी गया , अपने ही लोगों ने अपना स्वार्थ सिद्ध भी किया , पर जिसका हकदार बुंदेलखंड था वह उसे कभी नहीं मिला , बल्कि यहां से छीना ही गया ।                                     अतीत के पन्ने पलटे जाए तो  बुंदेलखंड का इलाका ऋषि मुनियों की तपो भूमि रहा है । यहां भगवान् राम ने वनवास बिताया तो भक्त प्रह्लाद ने  यहां की भूमि में जन्म लेकर धरा को पावन किया । गोस्वामी…