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अन्ना प्रकरण / जन से बड़ी नहीं हो सकती कोई संस्था

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रवीन्द्र व्यास इन दिनों देश में जिस की सरकार है देखा जाये तो वह दोहरे मुखोटे वाली सरकार है | जिसका दिखाने का मुखोटा अलग है और करने का अलग | जिसे  लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन करने वाली नहीं बल्की राजतांत्रिक व्यवस्था वाली सरकार कहा जा सकता  है | इसी लिए उसे लोक से और लोक आंदोलनों से अपने सिंहासन  पर कोई असर समझ नहीं आता | उसे अंग्रेजी हुकूमत की तरह इस तरह के जन आंदोलनों को कुचलने में ही आनंद आता है | पर इस बार उसका दाव उलटा पड़ गया , आजादी के  अहिंसक आन्दोलन की तर्ज पर शुरू हुए अन्ना के इस आन्दोलन ने सरकार की नीव हिलाकर रख दी | रामदेव के आन्दोलन को कुचलने के बाद सत्ता के मद में चूर हो गई है  सरकार | यही कारण है की सरकार और कांग्रेस के परम ज्ञानी सलाहकारों ने जिन्हे आम जन से कभी कोई सरोकार ही नहीं रहा , ने अपनी ज्ञान की गठरी खोली और ऐसी -ऐसी नायब सलाह दी और दे रहे हें की सरकार की हालत देखते ही बनती है | जिसका परिणाम ये हुआ की देश की जनता ने देखा की ये कैसी सरकार है जो सामने -सामने कहती कुछ है और करती कुछ है | और बेशर्म इतनी की उसे अपने इस दोहरे चरित्र पर कोई शर्म भी नहीं है | अन्ना हजार…