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जिनने साठ  साल कुछ नहीं किया वो हम  से सवाल पूंछते हें =शिवराज सिंह 
छतरपुर /  आज से ठीक चार  साल पहले आज ही के दिन  हुए मतदान में मतदाताओं ने शिवराज को पुनः मुख्य मंत्री चुना था । आज के इस दिन ही बुंदेलखंड के नेता वा पूर्व मंत्री सुनील नायक की ह्त्या हुई थी । आज के इस ऐतहासिक दिन के समय मुख्य मंत्री शिवराज सिंह ने बुंदेलखंड की धरा पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर , जनता से बीजेपी की सरकार के लिए समर्थन की अपील भी कर दी । उन्होने सवाल किया की जिनने 60 साल में कुछ नहीं किया वो शिवराज से सवाल पूछते हे ।
शिवराज सिंह मंगलवार खजुराहो के समीप राजनगर के सती माता मंदिर के प्रांगण में  आयोजित खंड स्तरीय अन्त्योदय मेला के कार्यक्रम में जन सभा को संबोधित कर रहे थे । उन्होने केंद्र सरकार पर  पहला निशाना बुंदेलखंड के विकाश के बहाने लगाया , उन्होने कहा की हमने तो छतरपुर में विश्व विद्यालय की, नोगांव में  घोषणा कर दी है  । इसके लिए बजट भी तय कर दिया है किन्तु केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में विश्व विदालय का मसला लंबित है ., इसी तरह नोगाँव के इजीनियरिंग कालेज की स्वीकृति भारत सरकार के इ,आई,सी…
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मोनिया नृत्य और दिवारी गीतों के सिमित होते स्वर  रवीन्द्र व्यास   कहते हैं विन्ध्य पर्वत मालाओंओ से घिरा  बुंदेलखंड का  यह अंचल वैसे   तो  अपने अभावों  और बदहाली के कारण जाना जाता है ।  इस बदहाल इलाके में ऐसी  कई परम्परा  और  और लोक साहित्य है जो  यहाँ की  अपनी एक अलग पहचान बनाता है ।पर काल के गर्त में धीरे- धीरे  ये परम्पराएं  समाप्त होती जा रहीं हें ।  ऐसी  ही एक परम्परा है  दिवारी गीत और नृत्य । दिवाली के दूसरे  दिन जहां इनके  ये दल हर गली और नुक्कड़ पर दिख जाते थे अब सिमित होते जा रहे हें । दिवारी  गीत  मूलतः चरागाही  संस्कृति के गीत ह़े , यही कारण है  की इन गीतों में  जीवन  का यथार्थ मिलता है । फिर चाहे  वह सामाजिकता हो,या धार्मिकता , अथवा श्रृंगार  या  जीवन का दर्शन । ये वे  गीत हें जिनमे  सिर्फ  जीवन की वास्तविकता के रंग हें ,  बनावटी  दुनिया से दूर , सिर्फ चारागाही संस्कृति  का प्रतिबिम्ब । अधिकाँश गीत  निति और दर्शन के हें । ओज से परिपूर्ण इन गीतों में विविध रसों की अभिव्यक्ति मिलती है ।  दिवारी गीत दिवाली  के दूसरे  दिन  उस समय गाये जाते हें जब  मोनिया मौन व्रत रख कर गाँव- गाँव …