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सिलकोसिस से सिसकती जिदगिया

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सिलकोसिस से सिसकती जिंदगियां  
रवीन्द्र व्यास 
मध्य प्रदेश के  बुंदेलखंड के सबसे पिछडा जिला  पन्ना  में एक गाँव है गुडियाना यहां  के आदमी की औसत उम्र 50 साल है । गाँव में आधा सैकड़ा महिलाये विधवा हैं ।  आदिवासी बाहुल्य  इस गाँव में यह कोई शाप नहीं है बल्कि ये आदिवासी अपनी जान देकर विकाश की कीमत चुकाते हैं । जिससे सरकार और सेठ तो माला माल होते हैं और इनके हिस्से आती है सिर्फ मौत । असल में पत्थर की धूल से इन्हें मिलती है टी बी और सिलकोसिस जैसी ला इलाज बीमारी जो इनकी जान लेकर ही छोड़ती है ।  बुंदेलखंड में यह अभिशाप सिर्फ इस  गाँव के लोग ही नहीं   भोग रहे हैं  बल्कि सागर ,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,उत्तर प्रदेश के  झाँसी , लालितपुर ,महोबा , चित्रकूट जिले में इस तरह के सैकड़ों मामले आये हैं । पन्ना में तो लोगों को जिंदगी की भीख मांगने के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ा । इस जिले में गैर सरकारी आंकड़े बताते हैं कि  लगभग 15 हजार लोग सिलकोसिस जैसी बीमारी से ग्रसित  हैं । 

                                                  बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश इलाके में  आने वाले पन्ना जिले की पहचान देश दुनिया में हीरा …

पर्यटन का प्रलाप

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बुन्देलखण्ड की डायरी  रवीन्द्र व्यास 

उत्तर प्रदेश में जिस समय मुख्य मंत्री का चयन हो रहा था उसी समय   बुंदेलखंड के   खजुराहो में पर्यटन को लेकर प्रलाप जारी था । उत्तर प्रदेश के सात जिले और मध्य प्रदेश के 6 जिलों तक फैले बुंदेलखंड में सांझी संस्कृति   इलाके के पर्यटन कारोबार को बढ़ाने में महत्त्व पूर्ण कारक मानी जाती है । इसके बावजूद सरकार के सकारात्मक प्रयास सिर्फ सेमिनारों ,सम्मेलनों , और कॉन्क्लेव तक सिमट कर रह गए हैं ।  बुंदेलखंड के और देश के मुख्य पर्यटक स्थल  खजुराहो में आये दिन होने वाले पर्यटन सेमीनार और कॉन्क्लेव यहां के लोगों के लिए सिर्फ  तमाशा बन कर रह गए  हैं ।
खजुराहो के सहस्त्राब्दी वर्ष (1998 ) से खजुराहो और बुंदेलखंड के पर्यटन विकाश का प्रलाप सुन सुन कर शायद वे हताश हो गए  हैं । यहां के पांचसिताराहोटलमेंपर्यटनकोबढ़ावादेनेकेलिएआयोजितकॉन्क्लेव में पर्यटनपर एक साल के अंदर पांचवी बार मंथन हुआ । इस मंथन में भी वही सब बातें दोहराई गई जो पूर्व में दोहराई जाती रही हैं । मंथन तो होता है पर इस मंथन से क्या निकलता है यह अब भी रहस्य ही है ।  अब जब की उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी सरकार …

बुन्देलखण्ड का विश्वास बीजेपी के साथ

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बुन्देलखण्ड की डायरी 

रवीन्द्र व्यास 
उत्तर प्रदेश के साथ बुंदेलखंड ,में  अब तक के राजनैतिक दलों ने इतना कीचड़ समाज और शासन में फैलाया की कमल का फूल लहलहा उठा ।  बीजेपी की ऐसी आंधी चली की  बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर कमल खिल गया । मोदी और अमित शाह की सामाजिक सर्जरी ने ऐसा कमाल किया की जातीय राजनीति का गणित  ही फ़ैल हो गया । जो कल तक बुंदेलखंड को अपने जातीय गणित से अपना गढ़  बता रहे थे उन्हें भी मतदाताओं ने करारा जबाब दिया है । उत्तर प्रदेश  की इस ऐतिहासिक विजय का जश्न देश भर में बीजेपी मना रही  है ।                                            बेबस बुंदेलखंड ने दशकों तक जातिय  वर्गों के आतंक और अत्याचार  को झेला,। लूट के नज़ारे भी देखे और पंगु प्रशासन को भी देखा । राहुल की खाट पर भी बैठा और अखिलेश से   फ़रियाद भी की ,माया के मोह में भी फसा पर हालात और बदत्तर ही होते गए । बुंदेलखंड की बिजली से सैफई  और रामपुर तो रोशन होता रहा पर बुंदेलखंड अँधेरे में डूबा रहा । अंचल में ऐसा अंधेरा छाया की लोग आत्म ह्त्या को मजबूर होने लगे , पेट की आग बुझाने महानगरो की और पलायन करना  मज़बूरी हो गई । वहीँ दूसरी मज़…

अन्ना प्रथा से परेशान किसान

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बुन्देलखण्ड की डायरी  
रवीन्द्र व्यास 

बुन्देल खंड  में   अन्ना प्रथा अब किसी विपदा से काम नहीं रह गई है ।  सदियों से चली आ रही इस प्रथा में पहले चैत्र  मॉस में फसल कटाई के बाद , गोवंश को खुला छोड़ा जाता था , पिछले दो दशको में इस प्रथा को किसानों ने हमेशा के लिए अपना लिया ।  हालात ये बने  खुले छूटे जानवर सड़को पर घूमने लगे ,  फसलों को उजाड़ने लगे , किसानों में आपसी संघर्ष होने लगे , मसला सरकार के मुखियाओ तक पहुंचा , लोक सभा में भी इसकी गूंज सुनाई दी ,कुछ ने मसले के निपटाने के जातन  किये पर कुछ ने इस पर ध्यान देना ही जरुरी नहीं समझ । देखा जाए तो समस्या के मूल में बुंदेलखंड के किसानों के आर्थिक हालात , सरकार की नीतियां ही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं । 


   बुंदेलखंड इलाके में  यह प्रथा थी की जब  चैत्र मास में फसल कट जाती थी , और खेत खाली हो जाते थे ,उस समय जानवरो को खुला छोड़ दिया जाता था । इसके पीछे किसानों का  एक कृषि ज्ञान काम करता था । खुले खेतों में इन जानवरो के विचरण करने और चरने  से उन्हें अपने खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिलती थी ।  खेत में इन जानवरों का गोमूत्र और गोबर खाद का काम…