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कुबेर का कुआँ

कुआँ  (कूप) /  लोगों की प्यास  बुझाने वाले कुआँ की कहानी भी कितनी अजीब है  | पहले कुआँ खुदवाकर लोग पुण्य कमाते थे | राजा अपनी प्रजा के लिए कुँए खुदवाते थे , ताकि उसकी प्रजा प्यासी ना रहे | लोग जब घर से निकलते थे तो अपने सामान के साथ लोटा ,डोरिया साथ रखते थे ताकि किसी कुँए पर अपनी प्यास बुझा सकें | दुनिया में कुआँ के महत्त्व का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है  की कुँए को लेकर कई तरह की कहावतें समाज में प्रचलित हें |  बुंदेलखंड में एक इलाका है नोगांव यहाँ अंग्रेजों का पोलिटिकल एजेंट रहता था , उसने भी इस इलाके में कई कुँए बनवाये |  समय बदला देश आजाद हो गया जनसेवक का तमगा लगा कर लोग देश चलाने लगे | पर उनका व्यवहार क्रूर राजा की तरह हो गया ठीक वेसे ही जैसे अंग्रेजो और लुटेरे मुगलों का रहा | दान धर्म से इन्हे भला क्या वास्ता ये तो स्वयं को भगवान् मानने लगे | इनकी दिलचस्पी पानी वाले कुआँ से ज्यादा तेल वाले कुँए के लिए हो गई | जनता जनार्दन की प्यास बुझाने के लिए इन्होने धरती के सीने पर अनगिनत छेद करवा दिए| बापू का नाम ले-ले कर गाँव में पंचायतें बनवा दी | पंचायतों को पंच  परमेश्वर के हवाले कर …