12 नवंबर, 2015

Bundelkahnd _ Diwali Dance



बुंदेलखंडी  दीवारी  नृत्य कर रोमांचित हुए ताइवानी पर्यटक 
रवीन्द्र व्यास                                                
खजुराहो // 12 नव15 _बुंदेलखंड इलाके में  गोवर्धन पूजा  से शुरू  होने वाला दिवाली नृत्य  एक दिन पहले ही शुरू हो गया  यह सब किसी परम्परागत नृत्य  दल ने नहीं किया , बल्कि इसे किया  खजुराहो आये विदेशी पर्यटकों के एक दल ने यह दल शुद्ध भारतीय पोशाक में जब दिवाली नृत्य कर रहा था तो लोग देखते ही रह गए बुंदेलखंड में  रची बसी परम्पराए लोग अब भी जीवंत रक्खे हैं यही कारण है की बुंदेलखंड के  दिवारी नृत्य की  परम्परा  दुनिया भर में अनूठी है   
तायपेई म्यूजिक एन्ड कल्चर आर्गेनाइजर के  प्रमुख जेफ्री वू फाउंडर ने बताया की  विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो तायपेई इंडिया म्यूजिक एन्ड कल्चर आर्गेनाइजर के 16 सदस्यीय दल आया है यह दल पास के  गाँव  नहदौरा में पहुंचा  तो लोग समझ ही नहीं पाये यह किस लिए आये हैं जब लोगों ने इन्हे  भारतीय बेषभूषा और  हाथों में मोर के पंख लिए देखा तो कुछ कुछ समझ में आया    ढोलक की थाप  , नगड़िया का तीव्र  संगीत  और मंजीरे की मधुर झंकार के साथ  मोर  पंख  हाथ में लेकर ताइवान के पर्यटको का  दीवाली नृत्य  करना  जिसने भी देखा वह वहीँ ठहर  गया   
  तायपेई म्यूजिक एन्ड कल्चर आर्गेनाइजर के  प्रमुख जेफ्री वू फाउंडर ने बताया की हम लोगों ने  भारतीय ट्रेडिसिनल गाँव का भ्रमण किया  , गाँव में  लोगों ने हमारा  स्वागत  भी परम्परागत तरीके से किया दीपावली के मौके पर  घर घर में बनने वाली मिठाई को भी  हमने देखा  और हमारे कई सदस्यों  ने खुद मिठाई बनाई हमारी एक दो सदस्यों ने  भैस को देख इन्होने उसका  दूध भी निकाला , और  वो मटके में कुछ  घुमा घुमा कर क्रीम भी निकाला ( मथानी चलाई ) उन्होंने बताया की वे लोग भारत को बहुत पसंद करते हैं यहां की परम्पराओ में एक उमंग है एक उत्साह है यहाँ उन्हें लोगों ने गिफ्ट भी दिए  
                        दरअसल  बुंदेलखंड में दीपावली के दिन से चरवाही संस्कृति के दिवाली नृत्य का आगाज होता है जो लोग इस नृत्य को करते हैं वह मौन धारण कर लेते हैं   इस कारण इस नृत्य को करने वालों को मौनिया और नृत्य को मौनिया नृत्य भी कहा जाता है।  मौनिया  दल के सदस्य बताते हैं की   द्वापर युग से यह  परम्परा चली रही हैइसमें  विपत्तियों को दूर करने के लिए ग्वाले मौन रहने  का कठिन व्रत रखते हैं। यह मौन व्रत बारह वर्ष तक रखना पड़ता है। तेरहवें वर्ष में मथुरा वृंदावन जाकर  यमुना नदी के तट पर पूजन कर  व्रत तोड़ना पड़ता है।
शुरुआत में पांच मोर पंख लेने पड़ते हैं प्रतिवर्ष पांच-पांच पंख जुड़ते रहते हैं। इस प्रकार उनके मुट्ठे में बारह वर्ष में साठ मोर पंखों का जोड़ इकट्ठा हो जाता है। परम्परा के अनुसार मौन चराने वाले लोग दीपावली के दिन सरोवर या  नदी पर नहाते हैं ,   पूजन कर पूरे नगर में ढोल नगाड़ों की थाप पर दीवारी गाते, नृत्ये करते हुए हुए अपने गंतव्य को जाते हैं। इस दिन मौनिया श्वेत धोती ही पहनते हैं और मोर पंख के साथसाथ बांसुरी भी लिए रहते हैं। मौनिया बारह वर्षों तक मांस शराब आदि का सेवन नहीं करते हैं।
मौनिया व्रत की शुरुआत सुबह गौ (बछिया) पूजन से होती है। इसके बाद वे गौमाता श्रीकृष्ण भगवान का जयकारा लगाकर मौन धारण कर लेते हैं।  
कई क्षेत्रों में मौनिया व्रत की शुरुआत गौ-क्रीड़ा से करते हैं गौ-क्रीड़ा में गाय को रंग और वस्रों से सजाकर   पूजन करते  है। इसमें एक गायक ही लोक परम्पराओं के गीत और  भजन गाता है  और उसी पर दल के सदस्य नृत्य करते हैं बुंदेलखंड इलाके में दिवारी गीत ग्वालों के गीत हैं , जो गौसेवक बनाम पशुपालन का  और खेती से जुड़े हैं , जिनकी रक्षा में ये शौर्य परक गीत  पर  नृत्य करते हैं   इनके हाथों में मोर पंख , होते हैं , नगड़िया ,ढोलक , मंजीरा , और झांजर इनके प्रमुख वाद्य यंत्र होते हैं  
" लंका के मैदान में, अंगद रोपे  जांग रे
जांग हलाई हले , धरती हल हल जाए रे
 इसके बाद दिन भर मौन  के बाद शाम को गायों को लेकर सभी मौनिया गांव पहुंचते हैं और सामूहिक रुप से व्रत तोड़ते हैं।दूसरे दिन दीवारी गाने वाले सैकड़ों ग्वाले लोग गांव नगर के संभ्रांत लोगों के दरवाजे पर पहुंचकर  लाठियों से दीवारी खेलते हैं। उस समय युद्ध का सा दृश्य आता है। एक आदमी पर एक साथ १८-२० लोग एक साथ लाठी से प्रहार करते हैं, और वह अकेला पटेबाज खिलाड़ी इन सभी के वारों को अपनी एक लाठी से रोक लेता है। इसके बाद फिर लोगों को उसके प्रहारों को झेलना होता है। चट-चटाचट चटकती लाठियों के बीच दीवारी गायक जोर-जोर से दीवारी --गीत  गाते हैं और ढ़ोल बजाकर वीर रस से युक्त ओजपूर्ण नृत्य का प्रदर्शन

कोई टिप्पणी नहीं:

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...