29 नवंबर, 2015

Bundelkhand Ki Dayri_Ken_Betva

बुंदेलखंड की डायरी
 केन- बेतवा लिंक परियोजना
बुंदेलखंड में बनेगा विनाश कारी बाँध
रवीन्द्र व्यास

 बुंदेलखंड की  केन नदी का किनारा अप्रेल 2011 की गर्म हवाओ के थपेड़े  ऐसे में तत्कालीन  केंद्रीय वन एव पर्यावरण  मंत्री जय राम रमेश  केन नदी के निर्मल जल को निहार रहे थे   इसी दौरान  उनसे  एक सवाल   केन बेतवा लिंक परियोजना पर पूंछा गया उनका जबाब था  कई सालों  से चर्चा चल रही है मेने खुद सलमान खुर्शीद जो सिचाई मंत्री हें  से चर्चाकि है ,मेने पी.एम्.. को पत्र लिखा है कि अगर ये केन बेतवा लिंक बनेगा तो ये सारा पन्नाटाइगर रिजर्व ख़त्म हो जाएगा , करीब ६० वर्ग कि.मी.एरिया जो शेरों के रहवास क्षेत्र  का प्रमुखस्थान है  इसका सत्यानाश हो जाएगा , केन बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व कोख़तरा है हमारा मंत्रालय तो इसकी अनुमति   नहीं देगा |
                            दरअसल  जय राम रमेश देश में ऐसी कोई योजना नहीं चाहते थे की जिससे  आज तो फायदा दिखे पर भविष्य बर्बाद हो जाए    विकाश की अंधी  दौड़ में  , देश के नेताओं को आज का  विकाश दिख रहा है , भविष्य किसने देखा की मानसिकता से ग्रस्त ये नेता  मानव  और जीव कल्याण के विषय में सोच ही नहीं सकते

              सरकार और इंजीनियरों की नजर में  बुंदेलखंड के छतरपुर,पन्ना,टीकमगण ,झाँसी जिले के लोगों की तक़दीर और तस्वीर  बदलने वाली है  केन -बेतवालिंक परियोजना।  अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब देश की 37  नदियों को आपस मेंजोडने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी | देश की इन 37  नदियों को आपस मेंजोडने पर 5 लख 60  हजार करोड़ रु .व्यय होने का अनुमान लगाया गया था | |यह देश की वहपरियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था | परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर 30  करोड़ रु,व्यय किये गए हें | 6  हजार करोड़ की इस  परियोजना  की  लागत  अब बाद कर 17 हजार 500 करोड़ रु  हो गई है इसका   मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व  के डोंदन गाँव में बनना है |बाँध वा नहरों के कारण सवा पांच हजार हेक्टेयर वन  क्षेत्र  नष्ट हो जाएगा ,छतरपुर जिले केदस गाँव डूब जायेंगे |
केन बेतवा लिंक परियोजना में चार बाँध बनाए जायेंगे | केन नदी पर ढोढन  बाँधबनेगा 77  मी.ऊँचा वा 19633  वर्ग कि.मी. जलग्रहण छमता  वाले इस मुख्य बाँधमें 2853  एम्.सी.एम्.पानी भंडारण कि छमता होगी| इस बाँध से दो  बिजली घर बनेंगेजिससे 78  में.वा. बिजली बनेगी   |इस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व  कि 5258  हेक्टेयरजमीन  सहित कुलहजार हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी | इस जमीन पर बसे सुकुवाहा ,भावरखुवा ,घुगारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा ,डोंदन ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँव का अस्तित्वसमाप्त हो जाएगा | बाँध से 221  कि.मी.लम्बी मुख्य  नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकरमिलेगी | इस नहर से 1074  एम्.सी.एम्. पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमेसे 659  एम्.सी.एम्. पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा |
ढोंडन  बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर  बनेंगे |रायसेन , विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र  में,बरारी बेराजसे 2500  हे.वा केसरी बेराज से 2880  हे. क्षेत्र  में  सिचाई  होगी | लिंक नहर से मार्गोंमें 60294  हे. क्षेत्र  सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के 46599  हे. वा उत्तर प्रदेशके 13695  हे.क्षेत्र  में सिचाई होगी | ढोंडन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि 3.23  लाख हे.जमीन सिंचित होगी होने का दावा किया जा रहा है
                    इस परियोजना को केंद्र के केबिनेट से  हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती  ने अगस्त 2015 में खजुराहो के होटल में बैठक कर डाली   बैठक में  उन्होंने  बताया था की सात साल में योजना पूर्ण कर ली जायेगी बैठक के बाद  जब   उनसे इस बाँध  के कारण होने वाली पर्यावरण की क्षति और जैव विविधता के होने वाले नुकशान का सवाल एक पत्रकार ने पूंछा था , तो  वे नाराज भी हुई थी , और यह कह कर चलती बनी थी कि  यहां के होकर इस महत्व पूर्ण योजना में अड़ंगा डाल  रहे हो   पांच सितारा होटल से निकल कर वे ढोंडन गाँव भी गई थी पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर बसे  इस गाँव  पर ही  केन बेतवा लिंक का बाँध बनना है गाँव में नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसी के डी जी मसूद हुसैन ने बताया था कि  इस परियोजना से लाख हेक्टेयर जमीन की सिचाई होगी फर्स्ट फेज 15 हजार करोड़ रु और सेकेण्ड फेज में ढाई हजार  करोड़ रु  का खर्च आएगा प्रोजेक्ट से छतरपुर ,पन्ना , टीकमगढ़ , रायसेन , विदिशा , महोबा ,बांदा और झाँसी जिले को लाभान्वित होने का दावा किया था

                       केन _बेतवा लिंक परियोजना को  मुख्य मंत्री की अध्यक्षता वाले वन्य प्राणी बोर्ड ने सहमति दे दी है   जिसमे कहा गया है कि  टाइगर रिजर्व के कोर एरिया के एवज में अन्य क्षेत्र को जोड़ा जाए पार्क के अंदर के गाँवों का पुनर्स्थापन पुनर्वास परियोजना व्यय से किया जाए बाँध निर्माण के कार्य में लगने वाले  श्रमिकों को पार्क  से  बाहर रखा जाए निर्माण सामग्री भी बाहर ही लाइ जाए गिद्ध रहवास पर होने असर का अध्यन किया जाए केन नदी के इकोलॉजिकल प्रभाव को सुनिश्चित किया जाए इस तरह की सात शर्तों के साथ प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड को भेजा  है  
 असर :
इस बाँध को बनाने के लिए सरकारहजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगी , इस भूमि में अकेले टाइगर रिजर्व की 52 58 हेक्टेयर भूमि जा रही है जिसके कारण  टाइगर रिजर्व के लगभग 13 लाख पेड़ डूब  जाएंगे , मानव और वन्य जीव पर ख़तरा होगा सो अलग जिन बाघों से इस इलाके का नाम दुनिया में रोशन हो रहा है उनके  घर भी छिन  जाएंगे   इस नदी पर बने  केन घड़ियाल अभ्यारण्य के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा ।केन घड़ियाल अभ्यारण्य  रनेह फाल पर  स्थित है बाँध बनने से पानी बाँध में ही रुक जाएगा जिसके चलते विदेशी सेलानियो के आकर्षण का केंद्र  यह सुन्दर फाल जिसे लोग मिनी नियाग्रा  फाल के नाम से भी सम्बोधित करते हैं समाप्त हो जाएगा यहां रहने वाले जलचर  घड़ियाल का तो भगवान ही मालिक होगा
सामाजिक संस्था सोशल मीडिया फाउंडेशन के  उपाध्यक्ष  और  रिटायर्ड रेंजर  आर. के. थापक  खुद  बात से हैरान हैं की  वन जीवो और लगे लगाए वनो के विनाश की इस परियोजना को सरकार ने कैसे अनुमति दे दी जब की इंदिरा गांधी के शासन काल में इसी तरह की एक योजना आई थी , केन बहुउद्देशीय सिचाई परियोजना जो इससे काम नुकशान दायक थी किन्तु  वन और पर्यावरण की समस्या और वन्य जीवों की बसाहट को देख कर यह योजना निरस्त कर दी गई थी
उजड़ेगा गिद्धों का घरौंदा भी  _ इस परियोजना के बनने से पार्क के अंदर पाये जाने वाले  7प्रजातियो के गिद्ध का घरोंदा भी उजड़ जाएगा    बर्ष 2015  की  गणना में  यहां 1676 गिद्धपाये गये है। आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो  वर्ष 2011 मे 1340, 2012 मे 1797, 2013 मे 1347और 2014 मे 910 गिद्ध मिले थे दरअसल दुनिया में और भारत में गिद्ध और बाघ तेजी से समाप्त हो  रहे  हैं, ऐसे में धरा की इस नस्लों को बचाने के लिए दुनिया भर  प्रयास हो रहे हैं   दुनिया में भारत्त ही ऐसा देश होगा  जहां इन नस्लों को नेस्तनाबूत करने की योजना सरकार ने बनाई है
                 सरकार और उसके नुमाइंदो को विकाश की  और सिचाई वा पानी की बर्बादी रोकने की इतनी ही चिंता है तो सबसे पहले उसे बुंदेलखंड के भूगोल और भूगर्भ  समझना होगा   बुंदेलखंड की टोपोग्राफी इतनी शानदार है की कम लागत में  यहां के गाँव -गाँव में विशाल सरोवरों का निर्माण किया जा सकता है जिससे  यहां के किसानो की सिचाई का संकट दूर होगा साथ ही जलीय फसल और मछली उत्पादन का काम गाँव वालों को  मिलेगा इन तालाबों को बाढ़ वाली नदियों से  चैन सिस्टम से भरा भी जा सकता है

 जिस केन नदी पर इस विशाल बाँध को बनाया जा रहा है वह दरअसल बाढ़ वाली नदी नहीं कही जा सकती  कटनी  जिले से निकल  नदी बांदा जिले में यमुना में कर विलीन हो जाती है एशिया की यह साफ़ सुथरी नदियों में गिनी जाती है   निर्मल प्रवाह से से टाइगर रिजर्व के जीवों की प्यास भी बुझती है  
  यही कारण है की इस  बाँध को पर्यावरण विद उचित नहीं मानते हें , वे  इसे प्रकृति के केनियमों के विपरीत वा विनाशकारी  मानते हुए  सरकार यह सब विदेशी कम्पनियों के इशारे परबुंदेलखंड कि जेव विभिद्द्ता को नष्ट करने कि साजिश कर रही हे | सरकार पानी पर से जनताके बुनियादी अधिकार को ख़त्म करना चाहती हे | केन और बेतवा  के पानी के निजीकरण कीपहली सीडी है | इस परियोजना पर जितना पैसा लगाया जा रहा है यदि उसे गाँव का पानी गाँवमें रोकने पर खर्च किया जाए तो बुंदेलखंड के हर गाँव में खुशहाली छा जायेगी |

अब यहाँ सरकार को यह बात समझ में शायद नहीं आती की ,या वह समझना नहीं चाहती कीएक ओर पन्ना टाइगर रिजर्व हे , जिसको बचाए रखने का दावा सरकार  करती रहती है | बाघोंको बचाने के लिए सरकार ने खजाना खोल रखा है  " दूसरी ओर वही सरकार पार्क एरिया में बाँधबनाकर बाघों को भी विस्थापित करने पर आमादा है

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किसान ने लगाई फांसी 
राजेंद्र सिंह  
छतरपुर //29 नव १५ // बुंदेलखंड  के  छतरपुर जिले के लवकुशनगर थाने के पठा गांव में एक पचास वर्सिय   किसान  ने  फांसी  लगाकर आत्महत्या कर ली ,।  कर्ज  के बोझ  टेल तब  किसान  की  मौत  को   पुलिस प्रशासन किसान मानता ही नहीं बल्कि उसे नशेलची घोषित कर दिया । 
                      खरीफ  फसल की  बर्बादी झेल चुका सुरेश दवेदी ने  रवि की  फसल बोई ही नहीं ,और उस पर भी कर्जे का बोझ ऐसे में जिंदगी  जंग  कब तक चलती ।  सुरेश द्विवेदी ने आखिरकार मौत को अपने गले लगा लिया ।मृतक के छोटे  भाई राजकुमार द्विवेदी ने बताया की, बीती रात कब अपने घर से निकले कोई नहीं जानता ,सुबह घर वालों ने उन्हें खेत पर लगे पेड़ पर फांसी पर झूलता पाया। ,राज्य सरकार की ओर से   दी  जा रही मुआवजे की राशि अभी तक  नहीं  मिल पायी है । मात्र तीन बीघा जमीन है , उसी से गुजर बसर करते थे । फसल खराब हो गई थी , उस पर साहूकार का कर्जा भी था । 
                              किसान की मौत पर  लवकुशनगर थाना   प्रभारी  आर एस  सेन  कहते हैं की वह  किसान  नहीं है , मृतक  शराबी और गंजेड़ी था  । टी आई  यह बात मृतक के  भाई के हवाले  से बताते हुए कहते हैं  की उसने अपने मृतक भाई के बारे में रिपोर्ट लिखाई  है की मृतक शराबी ,और कमजोर था  चलने फिरने में असमर्थ था उसने पेड़  फांसी लगा कर आत्म ह्त्या कर ली ,।  जब की मीडिया से चर्चा में  मृतक के  भाई राज कुमार द्विवेदी ने बताया की  भाई के परेशान होने ,कर्ज से दबे होने और फसल ख़राब होने की वजह से आत्महत्या  की है।  

26 नवंबर, 2015

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न्यायालय परिसर  में लगती है मंडी
 राजेन्द्र सिंह 
बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश इलाके का छतरपुर  जिला  प्रदेश सरकार  विज्ञापन वाक्य " अजब है पर गजब है " को चरितार्थ करता है ।  जिले की  गौरिहार तहसील न्यायालय  परिषर शनिवार को  साप्ताहिक हाट लगती है  ।  हाट वाले दिन इस न्यायालय में सब्जी मंडी का शोर तो सुनाई देता हे ,  इस दिन  न्यायालय में पीडितो की  फ़रियाद नहीं सुनी जाती । 

                     गौरिहार जहाँ जनपद कार्यालय और तहसील न्यायालय एक ही प्रांगण में स्थित है ,।  इसी प्रांगण में ग्राम पंचायत के द्वारा साप्ताहिक हाट लगवाई जाती  है ।  जिस तहसील न्यायालय में हर रोज मुवक्किलों की पुकार न्यायालय में हाजिर होने के लिए लगाई जाती हो वही साप्ताहिक
हाट के दिन सब्जी बेंचने वालों और खरीदने वालों का कलरव सुनाई देता है । ,यहाँ तक की सब्जी भाजी वालों की आवाजों से परेशान तहसीलदार गौरिहार बी डी नामदेव  ने इस दिन न्यायालीन काम तक बंद करवा रक्खा है ।  यहाँ के प्रसाइडिंग ऑफिसर ,स्टाफ ,अधिवक्ता ,और मुवक्किल सब परेशान रहते है ,।  तहसील न्यायालय के  अधिवक्ता महेंद्र सोनी बताते है की शनिवार के दिन यहाँ बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।आलम ये हो जाता है की सब्जी भाजी बेचने वाले तहसील कोर्ट के मुख्य गेट के बाहर तक बैठ जाते हैं ऐसे में मुवक्किलों का निकलना तक दूभर हो जाता है।कुछ इसी तरह के हालात जनपद पंचायत कार्यालय के भी हो जाते हैं।
अहम  बात ये है ये सिलसिला परम्परा के नाम पर बरसों से चला आ रहा है । लेकिन तहसील कोर्ट के काम में दखल न हो इसके लिए कोई भी कारगर कदम अब तक नहीं उठाये गए है ,। ऐसे में जब हमने इस मुद्दे को उठाया तो   चंदला विधायक आर डी प्रजापति से ले कर जनपद सी ई ओ प्रतिपाल सिंह बागरी ने  जल्द ही बाजार को दूसरी जगह शिफ्ट करने और विकल्प के रूप में बाजार को रविवार के दिन लगवाने की बात की।बड़ा सवाल ये है की ये व्यवस्था अभी तक क्यों नहीं की गयी ।
जाहिर है भले ही तहसील न्यायालय राजस्व न्यायलयों की सबसे छोटी इकाई है ,लेकिन परम्परा के नाम पर न्यायालीन गरिमा को ताक में रखकर परिसर में इस तरह से बाजार लगने का ये सिलसिला थमता है या बदस्तूर जारी रहता है देखना काफी दिलचस्प  होगा । 

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पन्ना के बाघों को अब कुत्तों से ख़तरा

रवीन्द्र व्यास
पन्ना। /M.P./ टाइगर रिजर्व के बाघों  पर  वाइरस के संभावित खतरा को देखते हुए यहां के बाघों का रक्त परीक्षण किया जा रहा है पार्क प्रबंधन को बाघों पर वाइरस  की जानकारी  तब लगी जब एक बाघ की मौत हो गई , जब उसकी  ऍफ़ एस  एल रिपोर्ट  आई  तो  उसमे मौत का कारण  सीडीए ब्रेन वायरस को बताया गया इस रिपोर्ट के बाद सकते में आया टाइगर रिजर्व  का स्टाफ  अब बाघों के रक्त परीक्षण में जुट गया है यह वाइरस कुत्तों में पाया जाता है  
                         दो माह पूर्व टाइगर रिजर्व में पी-233 बाघिन की मौत हुई थी।प्रारंभिक जांच में मौत का कारण बाघों के आपसी संघर्ष को बताया गया था   एफएसएलरिपोर्ट में खुलाशा हुआ की  बाघिन की मौत  सीडीए ब्रेन वायरस के कारण हुई है यहां के फील्ड डायरेक्टर आलोक कुमार बताते हैं की वायरस की  जानकारी  लगते  ही हमने इससे निपटने की  कार्य योजना   बना  ली है। दिसम्बर से आसपास के गांवों में कुत्तों का  टीकाकरण अभियान चलाया जायेगा। इन जानवरों से ही यह वायरस पनपता है। जहां तक नये बाघ की सिफ्टिंग की बात है तो उसमें कोई समस्या  नहीं है वे भरोषा दिलाते हैं की पार्क सुरक्षित है।  7 बाघों के सेंपल में कोई वायरस नहीं मिला है
                 जिन  7 बाघों के रक्त  परीक्षण किया गया उसमे  किसी में भीवायरस नहीं पाया गया है अब  टाइगर रिजर्व के सभी  बाघों का रक्त परीक्षण किया जा रहाहै जिनके रक्त  नमूमों को जांच के लिये बरेली के रिसर्च सेंटर भेजा  गया है पन्ना  के  टाइगर  रिजर्व में  भोपाल से आये  बाघ टी-7 को मिलाकर 34  बाघ हैं   पन्ना टाइगर रिजर्व का अधिकांश  इलाका आसपास के गाँवों से घिरा है    सीडीए ब्रेन वायरस  आवारा कुत्तों और मवेशियों में होता है। इन जानवरों के शिकार से यह वायरस एक्टिव होकर बाघ तक पहुंच जाताहै। जिससे बाघ के ब्रेन में संक्रमण के कारण उसकी मौत हो जाती है।

                              बाघ को सुरक्षित रखने  और सीडीए वासरस से निपटनेके लिये पार्क प्रबंधन ने  पार्क के कोर जोन से लगे 15  गांवों  के पालतू जानवरोकुत्तों काटीकाकारण कराया  जायेगा।  दिसम्बर से टीकाकारण का विशेष अभियान प्रारंभ होगा।  यह कोई पहला मौका नहीं है जब पार्क को कुत्तो से बाघ को बचाने के लिए यह जातां करना पद रहा हो , इसका पहले भी एक बार इस तरह की स्थिति बनी थी