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अकाल के आगोश  में बुंदेलखंड:
पानी के लिए जाती जान 


रवीन्द्र व्यास  

अकाल के आगोश में समाये बुंदेलखंड एक ऐसी त्रासदी का सामना कर रहा है जिसकी कल्पना यहां के किसानो ने नहीं की थी । इन दिनों हरियाली की चादर ओढ़ने वाले खेत वीरान हैं । पानी के लिए लोग एक दूसरे की जान लेने पर आमादा हो गए हैं ।  इस बार  मेघ कुछ ऐसे रूठे की बुंदेलखंड में अकाल के हालात बन गये  और पीने के पानी के लिए लोग तरशने लगे । वहीँ लोग अब जीवन  लिए आटा की चोरी करने को मजबूर हो गए हैं । तो दूसरी तरफगुजर बसर लायक मुआवजा मांगने वाले किसान पुलिस  लाठी से मरने को मजबूर हैं ।
              बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के ईशानगर थाना इलाके के सलैया गाँव  में 29 और 30 जनवरी की मध्य रात्रि एक किसान मुन्नी यादव  की पानी को लेकर ह्त्या कर दी गई । हत्यारे और कोई नहीं बल्कि उसी के चचेरे भाई बंधू थे ।  दरअसल यह किसान मुन्नी यादव गाँव की विकराल जल समस्या को देख कर  सरकार द्वारा लगाया जाने वाला हेंड पम्प सार्वजनिक जगह पर लगवाना चाहता था ।  जब की उसी के भाई लोग  कालू नेता , स्वामी यादव ,बल्लू यादव मूलचंद यादव , और संतोष यादव , सरकारी हेंड पंम्प को अपने घर के परिसर में लगवाना चाहते थे । मुन्नी यादव ने इस बात की जानकारी अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को  भी दी थी । उसने गाँव में किसी तरह का बवाल हेंड पम्प को लेकर ना हो इसकी सूचना पुलिस थाने में भी दी थी ।  जब हेंड पम्प सार्वजनिक जगह पर लगने लगा और उसी के भाई बंधू  इसका विरोध करने लगे तो मुन्नी यादव खुलकर सामने आ गया और विवाद इतना बड़ा की चचेरे भाइयो ने उसकी लाठी कुल्हाड़ी और बल्लम मारकर ह्त्या कर दी । पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर अपने दायित्व की पूर्ति कर अपनी पीठ ठोक ली । यदि बुंदेलखंड के जल के हालात को देख कर पुलिस मुन्नी यादव की बात को गंभीरता से लेती तो  उसकी जान बच सकती थी । 
           सूखा ग्रस्त  बुंदेलखंड इलाके में पानी को लेकर ह्त्या का यह कोई पहला नहीं है । इसकी आहट तो पहले से ही सुनाई देने लगी थी किन्तु नवम्बर 15 में छतरपुर जिले के चंदला थाने के ग्वाल भाटा  गाँव में  प्रकाश लोधी की उसी के चचेरे भाइयों ने गोली मारकर ह्त्या कर दी थी । यहां विवाद का  कारण भी पानी ही था । खेत में सिचाई को लेकर यह विवाद हुआ था । दिसंबर माह में खेत पर सिचाई को लेकर छतरपुर जिले के ही बमनौरा थाना इलाके के हँसरी गाँव में गोली चली । जीत लाल यादव और गोर लाल यादव  तालाब पर पम्प रख कर खेत की सिचाई कर रहे थे , जिसका गाँव के छोटे राजा और उसके साथियों ने विरोध किया । जब ये लोग नहीं माने तो छोटे राजा वा उसके साथियों ने गोली मारकर जीतलाल को घायल कर दिया । इसी थाना इलाके के मरौत खेरा गाँव में नवम्बर माह में  खेत पर सिचाई के विवाद में दो चचेरे भाइयो में खूनी संघर्ष हुआ ।  लखन ने अपने चचेरे भाई को बल्लम मारकर घायल कर दिया था ।
                  नवम्बर माह में ही छतरपुर जिले के नौगांव थाना इलाके के कीरतपुरा गाँव में दबंगों ने दलितों के पानी भरने पर रोक लगा दी थी। दबंगों के इस फरमान को ना मानने वालों को जान से मारने की धमकी दी गई थी । मामला पुलिस और प्रशासन तक पहुंचा था । प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद  मामला सुलझा था । 
                   इसी माह की शुरुआत में टीकमगढ जिले के गोवा गाँव में राजू और उसकी पत्नी को गाँव के दबंगों ने लाठियों और कुल्हाड़ी से दबंगो ने मार मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था । गाँव के दबंग राजू के खेत पर हो रही सिचाई को लेकर खफा थे । पीने के पानी को लेकर गाँव गाँव में होते संघर्ष अलग से हैं । ये सारे हालात  सूखे के कारण बने हैं । 
              पानी और अनाज को लेकर  बुंदेलखंड इलाके में हालात इस कदर  खराब हैं की लोग दाल के लिए जान ले लेते हैं । जनवरी माह की 29 तारीख को छतरपुर जिले के बिजावर थाना इलाके के भारत पुरा गाँव में एक आटा चक्की से दो क्विंटल आटा चोरी हो गया । अनुमान लगाया जा रहा है की भूख से व्याकुल लोग  चक्की का छप्पर हटा कर अंदर प्रवेश किया  और दो क्विंटल रखा आटा लेकर चम्पत हो गए ।  
            बुंदेलखंड में इस बार के सूखे ने ऐसी तबाही का मंजर तैयार किया है की लोग सर्दी में भी पानी के लिए परेशान हो रहें हैं । यहां के नदी ,नाले, तालाबो का पानी सूख चुका है । तालाबों और बांधो से निकली जमीन पर लोग खेती कर रहे हैं । जिन तालाबों और बांधों में थोड़ा बहुत पानी बचा है उनके सिचाई के उपयोग पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया है । भूख से मरते लोग प्यास से ना मरे इसका इंतजाम करने में प्रशासन कितना जुटा है और उसका इंतजाम कितना कारगर रहा यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जायेगा । 

                 बुंदेलखंड के बेबस किसानो का दर्द जानने जो भी अधिकारी और नेता आये सबने एक ही बात कही सूखा बहुत विकराल है । किसी ने घास की रोटी खिलाई तो किसी ने सियासत की रोटी सेंकी । राहुल गांधी के बुंदेलखंड के दौरे बाद बुंदेलखंड दौरे पर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री को आना ही पड़ा । अब अखिलेश यादव कहने लगे हैं यह इलाका उनकी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है । वे सभा में यह कहने से भी नहीं चूके की यह चुनाव का साल है और  लोगों को भाजपा और बसपा की साजिशो को समझना  होगा । बीजेपी के इतने सारे सांसद उत्तर प्रदेश ने भेजे किन्तु केंद्र ने क्या किया उत्तर प्रदेश के लिए । रही बात मुख्य मंत्री के बुंदेलखंड में आने की तो बताओ कितने मुख्य मंत्री यहां आये हैं ?
                उत्तर प्रदेश के सात जिले बाँदा ,हमीरपुर ,चित्रकूट ,महोबा ,झाँसी ,जालौन ,और ललितपुर , मध्य प्रदेश के छः जिले सागर ,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,पन्ना और दतिया के इलाके को बुंदेलखंड का मुख्य इलाका माना जाता है । दो प्रदेशो में बटे होने के कारण इस इलाके की उपेक्षा दोनों प्रदेशो की सरकारें करती रही हैं । अकाल के हालात में सियासी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा तो मिल गया है किन्तु कोई भी दल समस्या के समाधान की दिशा में कारगर कदम नहीं उठा रहा है । सूखा की त्रासदी के चलते किसानो की मौतें हुई , किसानो ने पलायन किया  , जल श्रोत जबाब दे गए , खेत वीरान पढ़ें हैं ऐसे में जब लोगों के पास खुद के खाने  और पीने  का पानी इंतजाम नहीं हो पा रहा वे जानवारो को क्या खिलाये और क्या पिलाये । जानवर छोड़ दिए गए । गौ रक्षा की बात करने वाली मध्य प्रदेश सरकार की गौ शालाओ की दशा ये है की वहां रह कर गौ माता दम तोड़ रही हैं । यह दर्दनाक दशा पन्ना जिले के पवई में देखने को मिली । जहाँ एक साथ दो सौ गायों के शवो को गौ शाला से हटाया गया । दिलचस्प यह है यह गौ शाला वह लोग संचालित करते हैं जो अहिंषा पर्मोधर्मा का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हैं , और वही ये गौ माता भूख से मर जाती हैं । 
          उत्तर प्रदेश में जानवरो के चारे के संकट को देखते हुए भूषा बांटा जा रहा है , उनके पानी के लिए व्यवस्था की जा रही है । मध्य प्रदेश में ऐसी एक भी व्यवस्था नहीं है । हालांकि मध्य प्रदेश सरकार यह दावा कर सकती है की हमने तो पहले से गौ शाला बनवा रखी हैं । ये गौ शालये कितना सहारा ग्रामीणो को दे रही हैं इसका अंदाज तो पन्ना जिले की घटना से लग ही जाता है । 
         देखा जाए तो जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी मार  बुंदेलखंड झेलने को मजबूर है । लगातार सूखा और प्राकृतिक विपदा के शिकार इस इलाके के लिए सरकारों की ईमानदार कोशिस भी बेईमान अधिकारियों और छुट भइया नेताओं के गठ जोड़ के कारण  फलीभूत नहीं हो पाई हैं । 
             
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