सूखा-विकराल समस्या ,बौने समाधान
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड की यह धरा कभी दशार्णा देश के नाम से जानी जाती थी । यह नाम इसका यु हीनहीं पड़ा था यहां की दस
नदियों के कारण ही दशर्णा देश कहा जाता था । बाद में इसे बुंदेलखंड के नाम से जानागया जो अपनी वीरता के किस्सों के लिए
जाना जाता था । , बुंदेलखंड का आल्हा यहां के सैनिको के लहू में ऐसा उबाल लाता था कीदुश्मनों के छक्के छूट जाते थे ।
दो राज्यों में बटी बुंदेलखंड की वही वीर वसुंधरा अपने बेटों की भूख और प्यास से व्याकुल है ।भूख और प्यास से व्याकुल अपने
सपूतों को दम तोड़ते देख बेबस माँ रोने को मजबूर है । सियासत का अजब रंग भी यहाँ लोगदेख रहे हैं । उड़न खटोलो से उतरते ,
चमचमाती वातानुकूलित वाहनो में सवार नेताओं और अधिकारियों को देखा । समाज सेवा कास्वांग करने वालों को भी देखा
हमारी बदहाली की ख़बरों को चटपटा बनाकर लोगों को बेचते देखा । किसी ने नहीं देखा तो सिर्फहमारा दर्द ॥
बुंदेलखंड का इतिहास बताता है कि 19वीं व 20 वीं सदी के दौरान 12 बार सूखा औरअकाल के हालत झेले हैं
बुंदेलखंड ने ।औसत तौर पर कहा जा सकता है की हर 16 _17 साल में यहां सूखापड़ा । 1968 से 1992 के 24 सालों में
तीन बार सूखा पड़ा मतलब हर 8 वे साल सूखा पड़ा । जलवायु परिवर्तन का असरपिछले 15 वर्षों में यहां देखने को मिला
और लगभग हर बार मौसम की मार यहां के लोग झेलने को मजबूर हैं । पिछले कुछ वर्षो मेंयहां मानसून अनियमित सा हो गया ।
कभी कभार अत्याधिक वर्षा तो कभी वर्षा की कमी जो निरंतर चल रही है ,उस पर ओला औरपाला के मार , तालाबों , बांधो ,
कुआँ का सूख जाना ऐसे कुछ कारण रहे जिन्होंने यहां खेती को पूर्णतःबर्बाद कर दिया। परिणामतः खेती पर निर्भर 80
फीसदी आबादी के सामने अब भुखमरी के हालात निर्मित हो गए । सबसे बड़ा संकट यहां केजानवरो के लिए खड़ा हो गया है , जिनके
लिए लोगों के पास चारे और पानी की व्यवस्था ना होने के कारण खुले छोड़ दिए गए हैं । सूखतेजल श्रोतो ने आने वाले दिनों के लिए
एक भयानक हालात की तरफ इशारा कर दिया है ।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिलों वाले बुंदेलखंड केहालातों को जानने पिछले दिनों स्वराज्य
अभियान के संयोजक योगेन्द्र यादव तीन बार बुंदेलखंड का दौरा कर चुके हैं । मध्य प्रदेश केमुख्य मंत्री अपनी सभाए कर चुके हैं ।
प्रदेश के मुख्य मंत्री ने कुछ ठोस समाधान का प्रयास की बात कही है । कांग्रेस के राष्ट्रीयउपाध्यक्ष के आने की चर्चा चल रही है ।
उनके आने के पहले कांग्रेसी नेता बुंदेलखंड का फीड बैक ले चुके हैं । २२ जनवरी कोसंभवतः उन्हें आना है ।
बुंदेलखंड मे अपना ज्यादा समय देने वाले योगेन्द्र यादव ने चर्चा के दौरान कहा की बुंदेलखंडके हालात देख कर मुझे डर लगता है ।
तालब , कुए सूख गए हेंड पम्प जबाब देने लगे हैं । पीने के पानी का बड़ा ही गंभीर संकट है ।आज जब यह हालात हैं तो आने वाले
समय में और क्या हालात होंगे । यदि सरकार ने पानी के लिए अभी से युद्ध स्तर पर प्रयास नहींकिये तो मराठवाड़ा जैसे हालात हो
जाएंगे । पानी की कारण गाँव के गाँव खाली हो जाएंगे ।
योगेन्द्र यादव ने इसके समाधान के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य मंत्रियो को पत्र भीलिखे , पर उनके इन पत्रों का कोई ठोश
समाधान अब तक नहीं निकला है वे इन्तजार कर रहें की कुछ और ठोस समाधान निकले , यदि फिर भी समाधान ना हुआ तो इसके सूखा से बेहाल बुंदेलखंड के लिए आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे ।
बुंदेलखंड इलाके के 60 प्रतिशत से अधिक लोग गरी बी रेखा के नीचे जीवन जीने कोविवश हैं। अधिकांशतः यहाँ सीमांत कृषक ही है।
25 फीसदी किसान 1 से 2 हेक्टेयर भूमि और अपने परिवार का गुजारा करते हैं । खेती औरजिंदगी जीने के लिए इन किसानो द्वारा लियाकर्जा ही उनकी जान का दुश्मन बन बैठा है । जिसके चलते यहां के 3223 किसान 2009 से2014 के बीच आत्म ह्त्या कर चुके हैं । नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं की 2009 में 568 , 2010 में 583 2011 में 519 ,2012में 745 और2014 में 58 किसानो ने मौत को गले लगाने को मजबूर हुए । इस बार अधिकृत आंकड़े तो नहीं आये हैं किन्तु जो तमाम सूत्रों से जानकारी मिली है वह बताती है की 440 किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं ।
खरीफ फसल के नुकशान से कई किसान जान गँवा चुके हैं किन्तु रवि फसलों की बुवाई काप्रतिशत औसतन दस फीसदी ही है।
अधिकांशतःउन्ही इलाको में किसानो ने रवि फसल बोई है जहां पानी की कुछ आस थी । इन हालातो के चलतेबुंदेलखंड इलाके के गाँव के गाँव खाली हो गए हैं ।
बुंदेलखंड इलाके में कार्यरत स्वयं सेवी संस्थाए बताती हैं की पिछले एक दशक के दौरानबुंदेलखंड इलाके से 62 लाख लोग पलायन कर चुके हे ।जिनमे टीकमगढ़ से 5 ,89 ,371छतरपुर से 7,66 ,809 सागर से 8 ,49 ,148 पन्ना से 2 ,56,270 ,दमोह से 2 ,70 ,477
दतिया से 200 901 लोग वहीँ उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से 7 37 920 ,चित्रकूट से 344801 ,महोबा से 297547 , हमीरपुर से 417489उरई से 538147,झाँसी से 558377,और ललितपुर से 3 81 316 लोग पलायन कर चुके हैं ।
पत्रकार रमाशंकर मिश्र एक सामान्य चर्चा में बताते हैं की गाँवों में तो सिर्फबुजुर्ग और बच्चे ही बचे हैं । पानी की कमी को देखते हुए कुछ समय बाद ये लोग भी गाँव छोड़नेको मजबूर हो जाएंगे । पिछले साल उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में सहारिया जाति केआदिवासी समुदाय नेअपने बच्चों को ऊंट वालो के पास गिरवी रख कर दो जून की रोटी की जुगतकी थी । इस बार स्थिति और भी भयानक है मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के देवेन्द्र नगर विकाशखंड से इस तरह की खबरे आ रही हैं की अनाज के लिए लोग अपने बच्चों को गिरवी
रख रहें हैं।
इस विकराल समस्या के समाधान की दिशा में कोई खास पहल और योजना अब तक दोनों प्रदेशो की सरकार ने शुरू नहीं की है ।

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