31 जनवरी, 2016

bundelkhand dayri_



अकाल के आगोश  में बुंदेलखंड:
पानी के लिए जाती जान 


रवीन्द्र व्यास  

अकाल के आगोश में समाये बुंदेलखंड एक ऐसी त्रासदी का सामना कर रहा है जिसकी कल्पना यहां के किसानो ने नहीं की थी । इन दिनों हरियाली की चादर ओढ़ने वाले खेत वीरान हैं । पानी के लिए लोग एक दूसरे की जान लेने पर आमादा हो गए हैं ।  इस बार  मेघ कुछ ऐसे रूठे की बुंदेलखंड में अकाल के हालात बन गये  और पीने के पानी के लिए लोग तरशने लगे । वहीँ लोग अब जीवन  लिए आटा की चोरी करने को मजबूर हो गए हैं । तो दूसरी तरफगुजर बसर लायक मुआवजा मांगने वाले किसान पुलिस  लाठी से मरने को मजबूर हैं ।
              बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के ईशानगर थाना इलाके के सलैया गाँव  में 29 और 30 जनवरी की मध्य रात्रि एक किसान मुन्नी यादव  की पानी को लेकर ह्त्या कर दी गई । हत्यारे और कोई नहीं बल्कि उसी के चचेरे भाई बंधू थे ।  दरअसल यह किसान मुन्नी यादव गाँव की विकराल जल समस्या को देख कर  सरकार द्वारा लगाया जाने वाला हेंड पम्प सार्वजनिक जगह पर लगवाना चाहता था ।  जब की उसी के भाई लोग  कालू नेता , स्वामी यादव ,बल्लू यादव मूलचंद यादव , और संतोष यादव , सरकारी हेंड पंम्प को अपने घर के परिसर में लगवाना चाहते थे । मुन्नी यादव ने इस बात की जानकारी अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को  भी दी थी । उसने गाँव में किसी तरह का बवाल हेंड पम्प को लेकर ना हो इसकी सूचना पुलिस थाने में भी दी थी ।  जब हेंड पम्प सार्वजनिक जगह पर लगने लगा और उसी के भाई बंधू  इसका विरोध करने लगे तो मुन्नी यादव खुलकर सामने आ गया और विवाद इतना बड़ा की चचेरे भाइयो ने उसकी लाठी कुल्हाड़ी और बल्लम मारकर ह्त्या कर दी । पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर अपने दायित्व की पूर्ति कर अपनी पीठ ठोक ली । यदि बुंदेलखंड के जल के हालात को देख कर पुलिस मुन्नी यादव की बात को गंभीरता से लेती तो  उसकी जान बच सकती थी । 
           सूखा ग्रस्त  बुंदेलखंड इलाके में पानी को लेकर ह्त्या का यह कोई पहला नहीं है । इसकी आहट तो पहले से ही सुनाई देने लगी थी किन्तु नवम्बर 15 में छतरपुर जिले के चंदला थाने के ग्वाल भाटा  गाँव में  प्रकाश लोधी की उसी के चचेरे भाइयों ने गोली मारकर ह्त्या कर दी थी । यहां विवाद का  कारण भी पानी ही था । खेत में सिचाई को लेकर यह विवाद हुआ था । दिसंबर माह में खेत पर सिचाई को लेकर छतरपुर जिले के ही बमनौरा थाना इलाके के हँसरी गाँव में गोली चली । जीत लाल यादव और गोर लाल यादव  तालाब पर पम्प रख कर खेत की सिचाई कर रहे थे , जिसका गाँव के छोटे राजा और उसके साथियों ने विरोध किया । जब ये लोग नहीं माने तो छोटे राजा वा उसके साथियों ने गोली मारकर जीतलाल को घायल कर दिया । इसी थाना इलाके के मरौत खेरा गाँव में नवम्बर माह में  खेत पर सिचाई के विवाद में दो चचेरे भाइयो में खूनी संघर्ष हुआ ।  लखन ने अपने चचेरे भाई को बल्लम मारकर घायल कर दिया था ।
                  नवम्बर माह में ही छतरपुर जिले के नौगांव थाना इलाके के कीरतपुरा गाँव में दबंगों ने दलितों के पानी भरने पर रोक लगा दी थी। दबंगों के इस फरमान को ना मानने वालों को जान से मारने की धमकी दी गई थी । मामला पुलिस और प्रशासन तक पहुंचा था । प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद  मामला सुलझा था । 
                   इसी माह की शुरुआत में टीकमगढ जिले के गोवा गाँव में राजू और उसकी पत्नी को गाँव के दबंगों ने लाठियों और कुल्हाड़ी से दबंगो ने मार मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था । गाँव के दबंग राजू के खेत पर हो रही सिचाई को लेकर खफा थे । पीने के पानी को लेकर गाँव गाँव में होते संघर्ष अलग से हैं । ये सारे हालात  सूखे के कारण बने हैं । 
              पानी और अनाज को लेकर  बुंदेलखंड इलाके में हालात इस कदर  खराब हैं की लोग दाल के लिए जान ले लेते हैं । जनवरी माह की 29 तारीख को छतरपुर जिले के बिजावर थाना इलाके के भारत पुरा गाँव में एक आटा चक्की से दो क्विंटल आटा चोरी हो गया । अनुमान लगाया जा रहा है की भूख से व्याकुल लोग  चक्की का छप्पर हटा कर अंदर प्रवेश किया  और दो क्विंटल रखा आटा लेकर चम्पत हो गए ।  
            बुंदेलखंड में इस बार के सूखे ने ऐसी तबाही का मंजर तैयार किया है की लोग सर्दी में भी पानी के लिए परेशान हो रहें हैं । यहां के नदी ,नाले, तालाबो का पानी सूख चुका है । तालाबों और बांधो से निकली जमीन पर लोग खेती कर रहे हैं । जिन तालाबों और बांधों में थोड़ा बहुत पानी बचा है उनके सिचाई के उपयोग पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया है । भूख से मरते लोग प्यास से ना मरे इसका इंतजाम करने में प्रशासन कितना जुटा है और उसका इंतजाम कितना कारगर रहा यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जायेगा । 

                 बुंदेलखंड के बेबस किसानो का दर्द जानने जो भी अधिकारी और नेता आये सबने एक ही बात कही सूखा बहुत विकराल है । किसी ने घास की रोटी खिलाई तो किसी ने सियासत की रोटी सेंकी । राहुल गांधी के बुंदेलखंड के दौरे बाद बुंदेलखंड दौरे पर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री को आना ही पड़ा । अब अखिलेश यादव कहने लगे हैं यह इलाका उनकी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल है । वे सभा में यह कहने से भी नहीं चूके की यह चुनाव का साल है और  लोगों को भाजपा और बसपा की साजिशो को समझना  होगा । बीजेपी के इतने सारे सांसद उत्तर प्रदेश ने भेजे किन्तु केंद्र ने क्या किया उत्तर प्रदेश के लिए । रही बात मुख्य मंत्री के बुंदेलखंड में आने की तो बताओ कितने मुख्य मंत्री यहां आये हैं ?
                उत्तर प्रदेश के सात जिले बाँदा ,हमीरपुर ,चित्रकूट ,महोबा ,झाँसी ,जालौन ,और ललितपुर , मध्य प्रदेश के छः जिले सागर ,दमोह ,छतरपुर ,टीकमगढ़ ,पन्ना और दतिया के इलाके को बुंदेलखंड का मुख्य इलाका माना जाता है । दो प्रदेशो में बटे होने के कारण इस इलाके की उपेक्षा दोनों प्रदेशो की सरकारें करती रही हैं । अकाल के हालात में सियासी दलों के लिए एक बड़ा मुद्दा तो मिल गया है किन्तु कोई भी दल समस्या के समाधान की दिशा में कारगर कदम नहीं उठा रहा है । सूखा की त्रासदी के चलते किसानो की मौतें हुई , किसानो ने पलायन किया  , जल श्रोत जबाब दे गए , खेत वीरान पढ़ें हैं ऐसे में जब लोगों के पास खुद के खाने  और पीने  का पानी इंतजाम नहीं हो पा रहा वे जानवारो को क्या खिलाये और क्या पिलाये । जानवर छोड़ दिए गए । गौ रक्षा की बात करने वाली मध्य प्रदेश सरकार की गौ शालाओ की दशा ये है की वहां रह कर गौ माता दम तोड़ रही हैं । यह दर्दनाक दशा पन्ना जिले के पवई में देखने को मिली । जहाँ एक साथ दो सौ गायों के शवो को गौ शाला से हटाया गया । दिलचस्प यह है यह गौ शाला वह लोग संचालित करते हैं जो अहिंषा पर्मोधर्मा का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हैं , और वही ये गौ माता भूख से मर जाती हैं । 
          उत्तर प्रदेश में जानवरो के चारे के संकट को देखते हुए भूषा बांटा जा रहा है , उनके पानी के लिए व्यवस्था की जा रही है । मध्य प्रदेश में ऐसी एक भी व्यवस्था नहीं है । हालांकि मध्य प्रदेश सरकार यह दावा कर सकती है की हमने तो पहले से गौ शाला बनवा रखी हैं । ये गौ शालये कितना सहारा ग्रामीणो को दे रही हैं इसका अंदाज तो पन्ना जिले की घटना से लग ही जाता है । 
         देखा जाए तो जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी मार  बुंदेलखंड झेलने को मजबूर है । लगातार सूखा और प्राकृतिक विपदा के शिकार इस इलाके के लिए सरकारों की ईमानदार कोशिस भी बेईमान अधिकारियों और छुट भइया नेताओं के गठ जोड़ के कारण  फलीभूत नहीं हो पाई हैं । 
             

24 जनवरी, 2016

Bundelkhand Ki Dayri


सूखे पर सियासत 

रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड के सूखे पर सियासत शुरू हो गई है , यह क्रम चल तो काफी समय से रहा था किन्तु 22 और 23 जनवरी को नेताओ के जमावड़े के साथ यह अपने चरम पर पहुंच गया  है । संसद चलने में अवरोध पैदा करने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुन्देलखंडियों को भरोषा दिला गए हैं की उनकी आवाज संसद में उठाएंगे । वही केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति एक दिन पहले कह गई की बदहाल बुंदेलखंड की समस्याओ को  बजट के माध्यम से दूर किया जाएगा , हम इसीलिए आये हैं । कौन क्या करता है यह एक बड़ा सवाल है फिलहाल ये जन सेवक जनता को रंगीन सपने दिखा  गए और बुंदेलखंड में सूखा का एक बड़ा मुद्दा सियासत करने वालों को मिल गया ।बुंदेलखंड के सूखे के बहाने उन्हें  प्रधान मंत्री मोदी पर जम  कर हमला बोलने का मौका भी मिला  ।    
                          शनिवार को बुंदेलखंड के महोबा में राहुल गांधी ने पवा पैराहे से लाडपुर तक सात किलोमीटर पैदल मार्च किया । इस दौरान वे किसानो से भी मिले ,गाँव की महिलाओ  से भी चर्चा की ।उनकी इस पदयात्रा के काफिले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के नेता और रीता बहुगुणा ,प्रमोद तिवारी , वा पी एल पूनिया  भी कदमताल करते नजर आये । पाव् पैराहा गाँव में राहुल गांधी को देखने और उनसे मिलने की होड़ में भगदड़ भी मच गई थी जिसे किसी तरह से नियंत्रित किया गया ।  सूपा ( जहां टी वी चैनलों की ओ बी वैन लगी थी )और  ललपुर  में सभाओं को सम्बोधित कर उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को जम कर कोशा   । वे लोगों को यह बताने से नहीं चूके की देखों हमने तो बुंदेलखंड के लिए 7 हजार 266 करोड़ का बुंदेलखंड पैकेज दिया था । पर यहां की सरकारों ने उसका दुरूपयोग किया । जितना लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए था नहीं पहुंचा ।  लोकसभा चुनाव के समय ६ बार बुंदेलखंड का चक्कर लगाने वाले मोदी जी बुंदेलखंड के सूखे के हालात जानने एक बार भी नहीं आये । बुंदेलखंड भी हिन्दुस्तान का हिस्सा है , यहाँ के लोग सूखे की त्रासदी से परेशान हैं पर मोदी जी की सरकार तो पूंजीपतियों की सरकार है उसे गरीबो से क्या सरोकार । राहुल  ने मोदी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ा चाहे वे तेल की कीमतें हो अथवा काला धन वापसी का मुद्दा हो । 


                       कांग्रेस के नेताओं ने उनके  इस राजनैतिक  पदयात्रा महोत्सव की रूप रेखा ऐसे गाँवों से जोड़ कर बनाई थी जहाँ से  गांधी परिवार का थोड़ा बहुत नाता था । रास्ते में पड़ने वाले मेड़की गाँव जहाँ 5 मार्च 1980 को इंदिरा गांधी आई थी , तब उन्होंने इस गाँव के लोगों से काफी देर तक चर्चा की थी । उस समय के बाल अमृत लाल को इंदिरा जी ने गोद में उठाया था ,उनकी  यादें आज भी ताजा हैं । पदयात्रा से अलग हट कर एक गाँव है मुडारी जहां 1962 में इंदिरा गांधी का  चांदी  से तुलादान हुआ था । इस गांव में राहुल गांधी गाड़ियों के काफिले से पहुंचे और यहाँ उन्होंने 50 साल से रखी इंदिरा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया । सभा में मोदी पर तंज कसे और जनता का आभार व्यक्त किया । 
                       राहुल गांधी के आने के   एक दिन पहले केंद्रीय  केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरजन ज्योति बुंदेलखंड के दौरे पर आई थी ।  टीकमगढ़ और छतरपुर जिले की सभाओ और   पत्रकारों के सवाल के जबाब में उन्होंने कहा  की बुंदेलखंड और देश के किसानो की दुर्दशा के लिए  यूपीए सरकार जिम्मेदार है । राहुल गांधी की पदयात्रा पर सवाल खड़े करती साध्वी कहने लगी कि  सत्ता चली गई तो पदयात्रा कर रहे हैं , सत्ता में रहकर पदयात्रा करते । हम तो सरकार में रहकर पदयात्रा कर रहे हैं , वो सरकार में रहकर पदयात्रा करते तो लगता कुछ किया । वो ६२ साल सत्ता में रहे  देश में किसानो और बुंदेलखंड की दुर्दशा के लिए कोई जिम्मेदार है तो वो यूपीए सरकार है उसने कुछ किया होता तो बुंदेलखंड की ऐसी दुर्दशा नहीं होती \ हमारी सरकार ने बुंदेलखंड में सिचाई सुविधा बढ़ाने के लिए नदियों को जोड़ने का काम शुरू किया है केन से बेतवा को जोड़ा जाएगा । अपनी इस यात्रा को राहुल की यात्रा से अलग बताने वाली साध्वी इसका मकसद बुंदेलखंड की समस्याओं को समझने का बताती रही है । बुंदेलखंड की इन समस्याओं को समझने के बाद वे  इसे प्रधान मंत्री मोदी जी को बताएंगी , फिर होगा समस्या के निदान का प्रयास ।  
             मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके से साध्वी ने बुंदेलखंड की जनता को यह सन्देश देने का प्रयास किया की बुंदेलखंड की दशा को लेकर प्रधानमन्त्री जी कितने चिंत्तित हैं । यह भी एक संयोग कहें या सुनियोजित राजनीति की जिस दिन राहुल को बुंदेलखंड इलाके का दौरा करना था उसी दिन खजुराहो के एयर टर्मिनल का उदघाटन करने बीजेपी सरकार  के मंत्री  आये । बुंदेलखंड के सूखे का दर्द बांटने पहले योगेन्द्र यादव तीन बार इस इलाके का दौरा कर गए हैं ।
राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के दौरे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव भी  बुंदेलखंड का दौरा करने की बात कहने को मजबूर हुए । अब  राहुल गांधी ने  मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड इलाके के दौरे की संभावना जता कर मध्य प्रदेश सरकार की नीद हराम कर दी है । दरअसल उन्होंने मध्य प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं को   इस इलाके का पूरा चिट्ठा लेकर दिल्ली तलब किया है । कांग्रेस के नेताओ ने खजुराहो एयर पोर्ट पर राहुल को बताया था ,की सूखा के कारण एम पी वाले बुंदेलखंड की हालात भी बहुत खराब हैं । यहां के दलितों और आदिवासी इलाकों की उपेक्षा हो रही है । बुंदेलखंड पैकेज से बनी जल संरचनाये कागजी साबित हुई हैं । पानी रोकने के कोई प्रयास नहीं हुए जिस कारण संकट इतना विकराल हो गया । 
                       सूखे की इस सियासत के पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है ,कि उत्तर प्रदेश वाला  बुंदेलखंड  सपा और बसपा का गढ़ है तो मध्यप्रदेश वाला बीजेपी का गढ़ ।  इन गढ़ों में सेंध लगाने और उत्तर प्रदेश के अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनावो में अपनी उपस्थिती का एहसास कराने कांग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है । राहुल का बुंदेलखंड प्रेम बीजेपी वालों की नजर में इसी का परिणाम है । 
                        
      

23 जनवरी, 2016

50 वर्ष बाद  इंदिरा जी की प्रतिमा का अनावरण राहुल  ने किया 
रवीन्द्र व्यास 

महोबा // 
 बुंदेलखंड की बदहाली और सूखा के दर्द को समझने आये कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के इस पड़ाव में एक भावुक क्षण भी आया । जब वे यहां के मुडारी गाँव पहुंचे , जहां के गाँव वाले 50 वर्ष से इंदिरा गांधी की प्रतिमा को सहेजे रखे थे , गाँव वालों की जिद थी की प्रतिमा का अनावरण गांधी परिवार का ही कोई करेगा । राहुल के पहुँचने से यह जिद पूर्ण हुई । 
                                               मुंडारी गाँव के 95 वर्षीय छवि लाल पुरोहित बताते हैं की ,1962 के भारत -चीन युद्ध के दौरान  गाँव वालों ने इंदिरा गांधी का  चांदी से तुलादान किया था । महिलाओं ने अपने जेवर भी इस तुलादान में अर्पित किये थे । यह सब गाँव वालों ने इस लिए किया था ताकि  युद्ध में देश के लिए धन की कमी नहीं आये । 1962 में जबइंदिरा गांधी का तुला दान हुआ था उस समय उनका वजन ५८ किलो था  जब की यहाँ के लोगों ने ६५ किलो चांदी चढ़ाई थी । तुलादान के बाद ही इंदिरागांधी की प्रतिमा बनाने का निर्णय हुआ था जो १९६५ में बनकर तैयार हुई ।  तब गाँव वालों ने  तय किया था का प्रतिमा का अनावरण  गांधी परिवार का ही कोई सदस्य करेगा । आज तक कोई नहीं था जिस कारण प्रतिमा का अनावरण नहीं हो पाया , आज राहुल गांधी आये तो उन्होंने प्रतिमा का अनावरण किया । 
                पुरोहित जी से राहुल गांधी ने भी हाल चाल पूंछा , राहुल गांधी ने यहां दिए अपने भाषण में कहा की गाँव वालों ने हमारी दादी के प्रति जो सम्मान और स्नेह रखा है , में आप सब का नमन करता हूँ । 
               पुरोहित जी की यादों में 1962 का वह दृश्य घूमने लगा और आँखों से बहने लगी अश्रु की धारा ।  वे कहने लगे गाँव ने सदैव कांग्रेस को अपना माना किन्तु कांग्रेस ने कभी इस गाँव की सुध नहीं ली ।  

22 जनवरी, 2016

Ministar_Niranjn Jyoti

बुंदेलखंड की दुर्दशा के लिए यूपीए सरका जिम्मेदार :: साध्वी 
रवीन्द्र व्यास 
टीकमगढ़ // २३ जनवरी से राहुल गांधी बुंदेलखंड इलाके की पदयात्रा  करेंगे । उनकी पदयात्रा के एक दिन पहले आज केंद्रीय  केन्द्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरजन ज्योति बुंदेलखंड के दौरे पर आ गई । ओरछा  से शुरू हुआ उनका दौरा , इस दौरे के दौरान वे जहां पार्टी कार्यकर्ताओं को समझाईस दे रही हैं वहीँ पत्रकारों से भी खुल कर चर्चा कर रही हैं । यह अलग बात है की अपनी असुन्तलित भाषा शैली के लिए पहँचानी जाने वाली साध्वी इस बार बड़े ही संतुलित ढंग से अपनी वाणी का प्रयोग करती नजर आई । 
                                       
 पृथ्वीपर और टीकमगढ़ में 
 पत्रकारों के सवाल के जबाब में उन्होंने कहा  की बुंदेलखंड और देश के किसानो की दुर्दशा के लिए  यूपीए सरकार जिम्मेदार है । राहुल गांधी की पदयात्रा के सवाल पर उन्होंने कहा की  राहुल गांधी सत्ता चली गई तो पदयात्रा कर रहे हैं , सत्ता में रहकर पदयात्रा करते । हम तो सरकार में रहकर पदयात्रा कर रहे हैं , वो सरकार में रहकर पदयात्रा करते तो लगता कुछ किया । वो ६२ साल सत्ता में रहे  देश में किसानो और बुंदेलखंड की दुर्दशा के लिए कोई जिम्मेदार है तो वो यूपीए सरकार है उसने कुछ किया होता तो बुंदेलखंड की ऐसी दुर्दशा नहीं होती \ हमारी सरकार ने बुंदेलखंड में सिचाई सुविधा बढ़ाने के लिए नदियों को जोड़ने का काम शुरू किया है केन से बेतवा को जोड़ा जाएगा । 
         राम मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा  कि राम मंदिर कोई मुददा नही आस्था का केन्द्र है।  जो लोग इसे मुददा बना रहे है वह एक वर्ग को खुश करने के लिये वहा दंगा करवा रहे हैं । वही सही मायने में सामंतशाही और अफसरशाही देखना है तो उत्तर प्रदेश में जाकर देखिये। केन्द्रीय मंत्री ने  टीकमगढ के   उत्सव वन में पार्टी   पदाधिकारियों से केन्द्र की योजनाओं की जानकारी भी ली ।इसके बाद वे बल्देवगढ़ के लिए रवाना हो गई वहा से वे छतरपुर जिले के गुलगंज में एक सभा को संबधित करेंगी । 

17 जनवरी, 2016

Bundelkhand Dayri


सूखा-विकराल समस्या ,बौने समाधान 
रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड की यह धरा कभी  दशार्णा  देश के नाम से   जानी  जाती  थी   यह  नाम इसका यु हीनहीं पड़ा था  यहां की दस 
नदियों के कारण ही दशर्णा  देश कहा जाता था   बाद में इसे बुंदेलखंड के नाम से जानागया  जो  अपनी वीरता के किस्सों के लिए
 जाना  जाता  था   , बुंदेलखंड का आल्हा  यहां के  सैनिको के लहू में ऐसा उबाल लाता था कीदुश्मनों के छक्के छूट जाते थे 
 दो राज्यों में बटी  बुंदेलखंड की वही वीर वसुंधरा  अपने बेटों की भूख और प्यास से व्याकुल है भूख  और प्यास से व्याकुल  अपने
सपूतों को  दम  तोड़ते देख  बेबस माँ रोने को मजबूर है   सियासत का अजब रंग भी यहाँ लोगदेख रहे हैं  उड़न खटोलो से उतरते ,
चमचमाती वातानुकूलित वाहनो में सवार नेताओं और अधिकारियों को देखा   समाज सेवा कास्वांग करने वालों को भी देखा 
हमारी बदहाली की ख़बरों को चटपटा बनाकर लोगों को बेचते देखा  किसी ने नहीं देखा तो सिर्फहमारा दर्द  


             बुंदेलखंड का  इतिहास बताता  है कि 19वीं  20वीं सदी  के दौरान 12 बार सूखा औरअकाल के हालत झेले हैं
 बुंदेलखंड ने ।औसत तौर पर कहा जा सकता है की हर 16 _17 साल में यहां सूखापड़ा   1968 से 1992 के 24 सालों में 
 तीन बार सूखा पड़ा मतलब हर 8 वे साल सूखा पड़ा  जलवायु परिवर्तन का असरपिछले  15 वर्षों में  यहां देखने  को मिला
  और लगभग  हर बार मौसम की मार यहां के लोग झेलने को मजबूर हैं   पिछले कुछ वर्षो मेंयहां  मानसून अनियमित सा हो गया 
कभी कभार  अत्याधिक वर्षा तो कभी वर्षा की कमी जो निरंतर चल रही है  ,उस पर ओला औरपाला के मार , तालाबों , बांधो ,
 कुआँ का सूख जाना  ऐसे कुछ कारण रहे जिन्होंने यहां खेती को पूर्णतःबर्बाद  कर दिया। परिणामतः खेती पर निर्भर 80 
 फीसदी आबादी  के सामने  अब भुखमरी के हालात निर्मित हो गए  सबसे बड़ा संकट  यहां केजानवरो के लिए खड़ा हो गया है , जिनके
 लिए लोगों के पास चारे और पानी की व्यवस्था ना होने के कारण खुले छोड़ दिए गए हैं  सूखतेजल श्रोतो ने आने वाले दिनों के लिए 
एक भयानक हालात की तरफ इशारा कर दिया है  
                                       उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिलों  वाले बुंदेलखंड  केहालातों को जानने पिछले दिनों  स्वराज्य
अभियान के संयोजक योगेन्द्र यादव तीन बार बुंदेलखंड का दौरा कर चुके हैं  मध्य प्रदेश केमुख्य मंत्री  अपनी सभाए  कर  चुके हैं  
 प्रदेश के मुख्य मंत्री ने कुछ ठोस समाधान का प्रयास  की बात कही है   कांग्रेस  के राष्ट्रीयउपाध्यक्ष  के आने  की चर्चा चल रही है 
 उनके आने के पहले  कांग्रेसी नेता  बुंदेलखंड का फीड बैक  ले  चुके हैं   २२ जनवरी  कोसंभवतः उन्हें आना है  
  बुंदेलखंड मे अपना  ज्यादा समय देने वाले   योगेन्द्र यादव ने चर्चा के दौरान कहा की  बुंदेलखंडके हालात देख कर मुझे डर लगता है 
 तालब , कुए सूख गए हेंड पम्प जबाब देने लगे हैं  पीने  के पानी का बड़ा ही गंभीर संकट है आज जब यह हालात हैं तो आने वाले
 समय में और क्या हालात होंगे  यदि सरकार ने पानी के लिए अभी से युद्ध स्तर पर प्रयास नहींकिये  तो  मराठवाड़ा जैसे हालात हो 
जाएंगे  पानी की कारण गाँव के गाँव खाली हो जाएंगे  
                योगेन्द्र यादव ने इसके समाधान के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य  मंत्रियो को पत्र भीलिखे , पर उनके इन पत्रों का कोई ठोश
समाधान अब तक नहीं निकला है वे इन्तजार कर रहें की कुछ और ठोस समाधान निकले , यदि फिर भी समाधान ना हुआ तो  इसके  सूखा से बेहाल बुंदेलखंड  के लिए  आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे  

बुंदेलखंड इलाके के  60 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने कोविवश हैं। अधिकांशतः यहाँ  सीमांत कृषक ही  है।  
25 फीसदी किसान  1 से 2 हेक्टेयर  भूमि और अपने परिवार का गुजारा करते हैं  खेती औरजिंदगी जीने के लिए इन किसानो द्वारा लियाकर्जा ही उनकी जान का दुश्मन बन बैठा है  जिसके चलते  यहां  के 3223  किसान 2009 से2014 के बीच आत्म ह्त्या कर चुके हैं  नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं की 2009 में 568 , 2010 में 583 2011 में 519 ,2012में 745 और2014 में 58 किसानो ने मौत को गले लगाने को मजबूर हुए   इस  बार अधिकृत आंकड़े तो नहीं आये हैं किन्तु  जो तमाम सूत्रों से जानकारी मिली है वह बताती है की 440        किसान आत्म ह्त्या कर चुके हैं 
खरीफ फसल के नुकशान से कई किसान जान गँवा चुके हैं किन्तु रवि फसलों की बुवाई काप्रतिशत औसतन दस फीसदी ही है। 
अधिकांशतःउन्ही इलाको में किसानो ने रवि फसल बोई है जहां पानी की कुछ आस थी  इन हालातो के चलतेबुंदेलखंड इलाके के गाँव के गाँव खाली हो गए हैं 
 बुंदेलखंड इलाके में कार्यरत स्वयं सेवी संस्थाए बताती हैं की  पिछले एक दशक के दौरानबुंदेलखंड इलाके से 62  लाख लोग पलायन कर चुके हे जिनमे टीकमगढ़ से 5 ,89 ,371छतरपुर से 7,66 ,809 सागर से 8 ,49 ,148  पन्ना से 2 ,56,270  ,दमोह से 2 ,70 ,477
 दतिया से 200 901 लोग  वहीँ  उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से 7  37 920 ,चित्रकूट से 344801 ,महोबा से 297547 , हमीरपुर से 417489उरई से 538147,झाँसी से 558377,और ललितपुर से 3 81 316 लोग पलायन कर चुके हैं  
                   पत्रकार  रमाशंकर मिश्र एक सामान्य चर्चा में बताते हैं  की गाँवों में तो सिर्फबुजुर्ग और बच्चे ही बचे हैं  पानी की कमी को देखते हुए कुछ समय बाद ये लोग भी गाँव छोड़नेको मजबूर हो जाएंगे  पिछले साल  उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले  में सहारिया जाति केआदिवासी समुदाय नेअपने बच्चों को ऊंट वालो के पास गिरवी रख कर दो जून की रोटी की जुगतकी थी  इस बार स्थिति और भी भयानक है मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के देवेन्द्र नगर विकाशखंड से इस तरह की खबरे  रही हैं की अनाज के लिए लोग अपने बच्चों को गिरवी
रख रहें हैं  
 इस विकराल समस्या  के समाधान की दिशा में कोई खास पहल और योजना अब तक दोनों प्रदेशो की सरकार ने शुरू नहीं की है ।   


10 जनवरी, 2016

Bundelkhand Dayri _बदहाल हुए बुनकर


गांधी का टूटा चरखा और बदहाल हुए बुनकर 
रवीन्द्र व्यास 
बुंदेलखंड के महोबा जिले का जैतपुर ( बेलाताल ) कभी खादी के एक बड़े निर्माण केंद्र के तौर पर जाना जाता था । 
यहां की बुनकर बस्ती चरखा की मधुर ध्वनि  से गुंजायमान रहती थी । आज यहां की यह बस्ती में मौत  सी खामोशी  है , 
बचे हैं तो सिर्फ बुजुर्ग और बच्चे । जवान तो अपनी और परिवार की पेट की आग बुझाने महानगरों की और पलायन कर  गए हैं ।  बेलाताल बुंदेलखंड का ऐसा खादी  निर्माण केंद्र था जिसकी खादी  देश भर में मश्हूर थी । आज इस खादी केंद्र  पर ग्रहण यहां के संचालकों और सरकार के उपेक्षित रवैये के कारण लग गया है । 
  महत्मा गांधी   ने   कलकत्ता  में   देश का पहला खादी  केंद्र  खोला था । देश का  दूसरा खादी केंद्र   बुंदेलखंड जैसे इलाके के  जैतपुर ( बेलाताल )  में शुरू किया था ।  1920 में यहां खादी  केंद्र शुरू करने का असर सम्पूर्ण  बुंदेलखंड में हुआ । बेलाताल ही नहीं आसपास  के सौ किमी के एरिया में बुनकरों को रोजगार का नया जरिया मिल गया । जिसका परिणाम यह हुआ की महोबा , छतरपुर ,हरपालपुर ,बिजावर ,सरसेड , राठ  ,(मऊरानीपुर ) रानीपुर , मौदहा , आदि स्थानो पर बुनकर कपड़ा बंनाने लगे । 
एक समय ऐसा भी आया की बेलाताल की तरह , रानीपुर , और हरपालपुर सरसेड एक बड़े कपड़ा निर्माण के केंद्र बन गए ।  आधुनिकता की आंधी और पाश्चात्य प्रभाव कुछ ऐसा चला की  यहां के बुनकरों को मालिक से मजदूर बनने को मजबूर होना 
पड़ा । उनके चरखे की गूंज शांत हो गई , रह गई है तो सिर्फ अतीत की यादें । 
गाँधी जी का सपना था देश को सम्रद्ध और शक्तिशाली बनाना हैतो देश को बुनियादी मजबूतीदेनी होगी | उन्होने देखा अग्रेजों  द्वारा  देश
  के गाँव -गाँव में फैले कुटीर उद्योगों के कारोबार को एक योजनाबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है । गांधी जी ने इसे देश की 
अर्थव्यवस्था की रीड माना  और गाँव के कुटीर उद्योगो  आवश्यक बताया । इसी योजना के तहत उन्होंने  १९२०में  बुंदेलखंड के बेलाताल 
 में यहाँ खादी  केंद्र की स्थापना की थी |केंद्र खोलने के लिए महत्मा  गांधी , अपने सहयोगी जे. बी. कृपलानी , प. जवाहर लाल नेहरू के
 साथ यहां आये थे । इतना ही नहीं केंद्र  के पहले दिन की खादी की  बिक्री के केश मेमो  खुद गांधी जी के हस्ताक्षरों  से खरीददारों को 
दिए गए थे । गांधी के हस्ताक्षर  का बिल पाने  के लिए यहां खरीददारों की इतनी भीड़ जमा हो गई थी की पहले दिन सबको 
 बिल नहीं दिया जा सका , जो दूसरे दिन दिया गया । 1920 में इस खादी केंद्र से खुद गांधी जी पहले दिन 1185 रु की  
खादी बेचीं थी ।
 बुंदेलखंड  के इस सबसे बडे केंद्र से बुंदेलखंड के बुनकरों का जुड़ाव ठीक वेसा ही था जैसे जीवन का सांसों से | बुंदेलखंड इलाके के बुनकरों
 को ये केंद्र कच्चा सूत उपलब्ध कराते उससे ये लोग बारीक सूत नाकर खादी का कपड़ा बनाते थे | आज यहाँ रायबरेली के केंद्र से कपास 
के मोटे सूत ही आते हें , यहाँ  संचालित कुछ चरखों से सिर्फ महीन  सूत ही बनता है | इस एक किलो सूत बनाने की कीमत मात्र ६० रुपये है |
 दिन भर में सिर्फ पाव भर से आधा  किलो ही सूत बन पाता है | मतलब साफ़ है मजदूरी हुई  सिर्फ १५ से ३० रुपये रोजाना | खादी केंद्र से 
बुनकरों को काम नहीं मिल पाने की   बड़ी वजह सरकार का असहयोगात्मक  रुख   हें |  प्रधान मंत्री नरेंद्र  मोदी  लोगों से अपील तो करते हैं की कम से कम एक खादी का वस्त्र अवश्य खरीदें  इससे  बुनकरों को रोजगार मिलेगा ।   
        ८० के दशक तक बेलाताल  की बुनकर बस्ती आबाद रहती थी| बेलाताल ही नहीं आस पास के 11  गाँवों  में भी  बुनकर  खाड़ी केंद्र के लिए खाड़ी का निर्माण किया करते थे । जिससे यहां के ५ हजार से ज्यादा परिवारों   रोजी रोटी चलती थी । यहाँ के बुनकर गाँधी जी द्वारास्थापित खादी उत्पत्ति केंद्र में खादी के कपडे बना कर बेचते थे  |८० के बाद से यहाँ की ये बस्तीजो वीरान होना शुरू हुई तो अब तक होती ही जा रही है | अतीत में  यहाँ  दो सौ से ज्यादा बुनकरपरिवार यहाँ खादी के कपडे बनाते थे | आज ये सिर्फ किस्सेकहानियों की बात हो गई है | यहाँके बुनकरों ने हाथ करघा से तौबा कर लिया है | यहाँ तक की अपने करघे उन्होने कबाड़ में फेंकदिए हें | वजह साफ़ है की उनके श्रम का इतना भी मूल्य नहीं मिलता था की वो 
अपना और अपने परिवार का पेट पाल सकें | हालातों से हताश हो कर मजदूरी की तलाश में यहाँ के लोग  पलायन कर गए | बुनकर बस्ती का हर जवान पेट की आग बुझाने दिल्ली ,पंजाब,गुजरात में मजदूरी करने को मजबूर है | बस्ती में बचे हें तो सिर्फ लाचार वृद्ध | जिनकी आँखेंहमेशा तलाशती रहती हें अपनों को |
सपने को किसी और ने नहीं बल्की उनके ही अनुयायियों ने तोड़ डालाजिन बुनकरों को गाँधी के चरखा  और हथकरधा ने जीवन का आधार
 दिया था वो अब टूट गया है | खादी केंद्र  के सम्बन्ध में यहां के लोगों का मानना है की  पहले इस खादी  केंद्र के कर्ता  धर्ता पूर्वांचल के लोग हुआ करते थे , उन्होंने इस केंद्र को जब अपने इलाके में ले जाने का प्रयास किया था तो लोगों ने  इसके लिए एक बड़ा आंदोलन छेड़ा था । कई दिनों तक चले अनशन के बाद लोगों ने पूर्वांचल के लोगों से इस केंद्र को मुक्त कराकर  अपनों को सौंप दिया । अपनों ने इसकी ऐसी दुर्दशा की  बुनकर बदहाल हो गए । इस खादी केंद्र की ख्याति का लाभ लेने के लिए  यहां के आज के प्रबंधकों ने अपने स्वजनो  के नाम पर समानांतर  खादी  केंद्र की समिति बना ली । खादी केंद्र  के नाम पर अब इनकी खादी भी बाजार में बिकने लगी है । खादी केंद्र आज करोडो के कर्जे में है ,। ये सब उन लोगों का  कृत्य है जो  बात तो गांधी के उसूलों की करते हैं  और कर्म दलालों से भी बदत्तर हैं । 

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...