28 अगस्त, 2015

आप की सक्रियता

आप की सक्रियता 
रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड इलाके में इन दिनों  आम आदमी पार्टी की चहल कदमी बढ़ रही है । आप के नेताओं को लगता है कि आजादी के बाद से ही इस इलाके की उपेक्षा  हुई है । और वर्तमान बीजेपी शासन काल  में इस इलाके की उपेक्षा के साथ तिरिष्कार भी हुआ है । इलाके में राजनैतिक शून्यता के कारण स्थानीय स्तर  पर  छोटे - छोटे क्षत्रप पैदा हो गए । जिन्हे राजनैतिक विचार धारा से  कोई सरोकार नहीं , इन क्षत्रपों ने  अपने धन बल और दल की दबंगई की वजह से स्थानीय निकायों पर कब्जा कर लिया । दूसरी तरफ यहां के निर्वाचित जन प्रतिनिधि  या तो सिर्फ संघटन मंत्री की कटपुतली बनने को मजबूर हैं  या  फिर बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व और सरकार की उपेक्षा के शिकार हैं । परिणामतः  ब्यूरो क्रेशी  हावी है । जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़  रहा है । इन हालातों में जनता के सोये हुए आक्रोश को जाग्रत करना जरुरी है । 
आप  इन्ही तमामा स्थितियों का मूल्यांकन  कर  अपनी रण नीति बनाने में जुटी है ।व्यापम घोटाले के बाद शायद  आप नेताओं को दिल्ली के बाद सबसे अनुकूल राज्य मध्य प्रदेश ही  समझ में  आ रहा है । इसके पीछे वजह भी है दिल्ली की तरह यह राज्य भी दो दलीय व्यवस्था में चल रहा है , सपा और बसपा  की  जतिवादी राजनैतिक विशात को यह राज्य नकार चुका है ।  ऐसी दशा में  आम आदमी पार्टी एक सशक्त राजनैतिक विकल्प के तौर पर यहां स्थापित हो सकती है ।  इसी के चलते  प्रदेश संयोजक एवं दिल्ली के विधायक सोमनाथ शास्त्री मध्य प्रदेश का दौरा कर रहे हैं ।   वे जगह जगह पार्टी कार्यकर्ताओ को सम्बोधित करते हुए  कहते हैं की  जहां भी गये हमने  देखा कि जनता में भाजपा के 15 साल के कुशासन को लेकर भारी आक्रोश है लेकिन विकल्प न होने की बजह से जनता छटपटा रही है। हमेें प्रदेश में दिल्ली की तरह संगठन खड़ा करना है ताकि जनता को भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन दिया जा सके। वे मध्य प्रदेश में  आम आदमी पार्टी का बूथ स्तर पर संगठन तैयार करने का  गुरु मन्त्र भी कार्य कर्ताओ को दे रहे हैं । 
         दूसरी तरफ आप के प्रदेश सहप्रभारी विकास पांडे  कार्यकर्तों को समझा रहे हैं की  युवा ही कोई परिवर्तन ला सकते हैं, दिल्ली में परिवर्तन  युवाओं एवं छात्रों की बदौलत ही हुआ  है। इस कारण युवाओ को संघटन से जोड़ना आवश्यक है । आप के बुंदेलखंड के प्रमुख नेता अमित भटनागर का  तो मनना  है की बुंदेलखंड में  जो राजनैतिक दल है वे जनता कि समस्याओं को नहीं उठाते जिस कारण जनता मायूस है । 
          आप की इस राजनैतिक कवायद का कितना लाभ पार्टी को मिल पायेगा यह तो आने वाला भविष्य ही बताएगा , पर  आप की सक्रीयता बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है ।  पर कर्म का फल तभी मिलेगा जब आप बुनियादी समस्याओ को लेकर  पहल करेगी । 
                       सियासत के इस संघर्ष में  हर दल  आने वाले वक्त को अपनी मुट्ठी में कैद करने की कवायद में जुटा है । बीजेपी ने जहां  सदस्यता अभियान  से अपने दल को दुनिया का सबसे बड़ा दाल बनाया है , और इस लकीर को लंबा करने के लिए जिस तरह से बीजेपी महा संपर्क अभियान चला रही है वह बीजेपी वालों को आत्म मुग्ध करने के लिए पर्याप्त है ।   दूसरी तरफ पिछले कई वर्षों से  कांग्रेस  का हाथ आम आदमी के साथ नहीं रहा । नतीजतन  आम आदमी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया । वर्षों बाद कांग्रेस  के हाथ व्यापम का हथियार हाथ लगा है , वह भी अब सीबीआई के कारण उनके हाथ से फिसलता  है ।  गुटों में बटी कांग्रेस के हाथ भी तभी मजबूत हो सकते हैं जब वह खुद में एक मत  हो  आम आदमी की बुनियादी समस्याओं के लिए गाँव से लेकर राजधानी  तक संघर्ष करे ।                                                                                        राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जन से सरोकार सबसे जरुरी है ।  और आज के दौर में देश के राजनैतिक धरातल पर तमाम प्रमुख  राजनैतिक दल जन से दूर होते जा रहे हैं ।  इसमें  चाहे कांग्रेस हो अथवा भाजपा  दोनों  ही  आम आदमी की समस्याओं से बेखबर सी नजर आती हैं । मध्य प्रदेश में जिस तरह से राजनैतिक लूट का वातावरण बना है , और  बेलगाम ब्यूरो क्रेसी  है उसे देखते हुए यह माना जा सकता है की प्रदेश में वैकल्पिक राजनैतिक दल की गुंजाइश काफी है

लुप्त होती बुंदेली परम्पराए


अब नहीं डलते सावन के झूले _ चपेटा को भूली बालिकाए 
रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंडी जीवन शैली  वैसे तो प्रकृति  से सामंजस्य की अदभुत  जीवन शैली है ।  यहां का हर त्यौहार , प्रकृति  और  लोक  रंजन से जुड़ा है ।  पर अब शायद बुंदेलखंड की  इस जीवन परम्परा को भी आधुनिकता का ग्रहण लग गया है । सावन की कई परम्पराए  जो कभी लोगों के प्रकृति प्रेम और आपसी समन्वय  और  प्रेम को दर्शाती थी अब सिर्फ किस्से कहानियो तक सिमट कर रह गई हैं । 
                           वर्षा ऋतू  में जब चारों और हरियाली व्याप्त हो ऐसे में किसका मन प्रफुल्लित ना होगा । ऐसे में बुंदेलखंड के घर - घर में ऊँचे वृक्ष की डाल पर झूले डाले जाते थे ।  धीरे - धीरे ये गाँव के झूलो तक  पहुँच गए । और अब किसी किसी गांव में ही ये झूले  और झूलों पर झूलती बालाएं देखने को मिलती हैं |    सावन का महीना  उल्लास और उमंग का महीना बुंदेलखंड में माना जाता  था ।गाँव - गाँव में महिलाये और बालिकाए गाँव में लगे मेहँदी के पेड़ से मेहँदी तोड़ कर लाती थी , उसे पीस कर आपस में लगाती थी , लोक मान्यता थी जिस कन्या के हाथ में जितनी गहरी मेहँदी रचेगी उसे उतना ही सुन्दर पति मिलेगा ।  पहले गाँव -गाँव में  बाल _गोपाल  चकरी , भौरा (लट्टू) चलाते  , तो कोई बांसुरी की धुन छेड़ते  मिल जाता था । वहीँ बालिकाए  लाख के कंगन  और  चपेटों से खेलते मिल जाती थी ।  अब  मेहँदी के वृक्ष बचे नहीं तो बाजार से अपनी सामर्थ्य अनुसार मेहँदी ले आती हैं , ना ही  वो घूमते लट्टू रहे और ना चपेटे  के साथ  हंसती खिलखिलाती  बालिकाए । बुंदेलखंड के नगरीय इलाकों से तो परम्पराए काफी पहले लुप्त हो गई थी । 
           लोक जीवन की इन परम्पराओ की समाप्ति के पीछे  का जो मुख्य कारण है वह   आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में हम सब प्रकृति से अलग हो गए हैं । गाँव के घरो में लगे पेड़ कट गए , गाँव में लगे कुछेक वृक्ष किसी ना किसी की बपौती हो गए , उस पर उनके घर के लोगों के अलावा दूसरा  कोई जा नहीं सकता । इस तरह से झूला की परम्परा समाप्त हो गई ।  लट्टू और चकरी पहले गाँव का बढ़ई बना दिया करता था  फिर  बाजार में मिलने लगे अब वे भी नहीं मिलते । बांसुरी की तान बांस से बनी बांसुरी से ही आ सकती है , उसका स्थान प्लास्टिक ने ले लिया है । चपेटा जरूर खेला जाता है पर बहुत कम क्योंकि लोगों को अब टीवी से ही फुर्सत नहीं मिलती । 
लुप्त हुई सावनी भेजने की परम्परा :_
  प. रामकृपाल शर्मा बताते हैं की  सावन के महीना में  बुंदेलखंड में सावनी भेजने की परम्परा थी ।  यह भी अब समाप्त सी हो गई है इसका स्थान अब पैसों ने ले लिया है ।  इस परम्परा में  विवाहित महिला पहली बार जब  सावन के महीने में अपने मायके  आ जाती है । तब उसके पति के घर से  उसके लिए सोने -चांदी की राखी , कपडे , लकड़ी के खेल खिलौने आदि भेजे जाते हैं ।ससुराल से आई राखी ही बहिन अपने भाई की कलाई पर बांधती है ।  इसका बाकायदा गाँव के लोगों को निमंत्रण दिया जाता था , वे लोग आकार सावनी में आये सामान को देखते थे ।   अब  सावनी के सामान के स्थान पर  पैसा भेज दिया जाता है ।  
                                परम्पराए  आपसी सम्बन्ध को मजबूत करने की एक कड़ी थी किन्तु  अब ये सिर्फ ओप्चारिक्ताये बन कर रह गई हैं ।  वे कहते हैं की दरअसल  इस दौर में  वही सब कुछ हो रहा है जो लोग सुबह से साम तक देखते हैं ?           

19 जुलाई, 2015

जनसंख्या नियंत्रण हेतु सामाजिक उपाय आवश्यक


 जयप्रकाश मिश्र 
विश्वके महान जनसंख्या शास्त्री थाम्स राबर्ट माल्थस ने 1798 में जनसंख्या पर निबंध लिखकर कहा था जनसंख्या प्रत्येक 25 वर्षों में दुगनी होगी इस पर नियंत्रण आवश्यक है क्योंकि खाद्य सामग्री का उत्पादन जनसंख्या वृद्धि के अनुपात कम होगा। परिणामस्वरूप दुनिया में लोग भुखमरी और कुपोषण का शिकार होकर काल के गाल में समा जाएंगे।
आज हम जनसंख्या में विश्व में दूसरे नंबर पर है। चीन दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाा देश है। परन्तु चीन ने अपनी जनसंख्या वृद्धि की दर को कम कर लियास है। जनसंख्या की वृद्धि दर यदि हमारे देश में यही  रही तो जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि सन् 2050 में हम विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएंगे।
सरकार के स्तर पर तो जनसंख्या नीति बनाकर जनसंख्या नियंत्रण के लिए उपाय किए जा रहे हैं। परन्तु समाज और देश के जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारे भीकुछ कर्तव्य हैं। अभी हाल में सरकार ने बेटी बचाओ अभियान पर काफी मशक्कत की है। तथ्य बताते हैं कि 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति 1000 युवाओं पर 933 स्त्रियां थी जबकि मध्यप्रदेश में प्रति हजार पुरूषों पर 920 स्त्रियां थीं। 2011 की जनगणना में भारत और मप्र का प्रति हजार पुरूषों पर स्त्रियों का अनुपात 940 एवं 930 के लगभग हुआ है। औसत आयु में भी इजाफा हो रहा है। अर्थात 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में प्रति नागरिक औसत आयु 67 वर्ष है। यह आंकड़ा सुखद नहीं है। अभिी और प्रयास की आवश्यकता है।
प्रश्न इस बात का है कि भारत में आज भी लगभग 26 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। तथ्य बताते हैं कि देश में चार लाख लोग आज भी कचरा  बीनकर अपना उदरपोषण कर रहे हैं जबकि 6 लाख 50 हजार लोग भीख मांगकर अपना जीवकोपार्जन कर रहे हैं। इन लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए हम सबको प्रयास करना पड़ेगा। इस जनसंख्या को कार्यशील जनसंख्या में तब्दील करने के लिए प्रयास करना होगा।
2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या में कार्यशील जनसंख्या का प्रतिशत भारत में 39.10 एवं मप्र में 42.47 प्रतिशत है। अर्थात कुल जनसंख्या 100 मान ली जाए तो भारत में 39 और मप्र में 42 लोग काम करके आय कमाते हैं।
इन सब दिए गए आंकड़ों का सच यह है कि सरकार के साथ-साथ हम सबको भी शासन की योजनाओं का लाभ देने के लिए गांव स्तर पर लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। सामाजिक सरोकारों में विवाह एक सरोकार है। इसमें कुण्डली मिलान का कार्य वर-वधु का किया जाता है जो ज्ञानी लोग कुण्डली मिलान का कार्य कुण्डली से करते हैं या कम्प्यूटर द्वारा मिलान करते हैं। मिलान करते वक्त वह वर-वधु की आयु देखते हैं यदि जनसंख्या नीति में उल्लेखित आयु वर 21 वर्ष और वधु की 18 वर्ष से कम हो तो यह कहें कि कानूनन अपराध भी है।
इस तरह वर-वधु के माता-पिता को हतोत्साहित किया जा सकता है। इसी तरह मण्डप में फेरे लेते समय सात-पांच के वचन की शपथ अपने दाम्पत्य जीवन को चलाने के लिए वर-वधु से दिलाई जाती है। सामाजिक व्यवस्था बनाकर इन वचनों में परिवर्तन कर इसे आठ-वचन किया जाए और इन वचनों में एक-एक वचन यह भी जुड़ा हो कि वर और वधु अपने जीवन काल में एक पुत्र एवं एक पुत्री को ही जन्म देंगेया दो पुत्र या दो पुत्रियांकहने का अभिप्राय एक दम्पत्ति अपने जीवन काल में दो संतानें ही पैदा करने की शपथ लें। यदि इस तरह की व्यवस्था बनाई जाए तो जनसंख्या नियंत्रण के लिए सामाजिक स्तर पर सार्थक प्रयास होगा।

प्राध्यापक अर्थशास्त्र
शास.महाराजा महाविद्यालयछतरपुर

12 जुलाई, 2015

व्यापम _ से आहात युवा वर्ग



रवीन्द्र व्यास 

देश के प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी  जिस युवा  देश का प्रचार  दुनिया में करते हैं , और यह कहते  हुए नहीं  थकते की  जो देश  दुनिया में सबसे युवा  देश  है वो क्या नहीं कर सकता , उसी देश के मध्य प्रदेश  के युवा  व्यापम  घोटाले के कारण अपने को ठगा हुआ मसहूस कर रहे हैं ।   योग्य होने के बावजूद  वे आज  दफतरों में बाबू गिरी , चपरासी  गिरी  करने को मजबूर हैं ।  सिर्फ इस कारण क्योंकि उनके पिता किसी  दल के नेता नहीं थे, किसी रशूख वाले पद पर आसीन नहीं थे अथवा धन पशु नहीं थे ।   मध्य   प्रदेश के नीति नियंता से लेकर अदने  से कम्प्यूटर आपरेटर  बड़ी संख्या में लोग भ्रस्टाचार के कीचड़ में सराबोर नजर आ रहे हैं ।  

मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला  प्रदेश और देश  की सीमाओ को लांघ कर विदेश  तक  पहुंच गया  है ।  इस घोटाले की  चर्चा  के बहाने  शायद परदेशी  भी भारत की इस  भृष्ट  सृजनात्मक शक्ति का लोहा मानने लगे हैं ।  फकीरों का यह  प्रदेश   अपने मुख्य मंत्री    शिवराज की कृपा से  देखते ही देखते  अमीरों का   प्रदेश  बन गया है । इस प्रदेश में  अरबों -खरबों के घोटाले हो जाते हैं , घोटाले  के  सूत्र धारो की रहसयमई  परिस्थितियों  में मौत  हो जाती  है  । अकूत राशि के भ्रष्टाचार की दुर्गन्ध जैसे व्यवस्था में पूरी तरह रच बस गई है । प्रदेश   की जनता   इसे ही अपना  नसीब मान कर मौन   है । शनै :  शनै : लेकिन निश्चित रूप से प्रदेश का आम आदमी  शायद इस व्यवस्था की इस सड़ांध आदी होता जा रहा है । ऐसा नहीं कि  पहले  इस प्रदेश में घोटाले नहीं  होते थे । चाहे वह गुलाबी चना काण्ड हो ,  जमीनो के घोटाले हों  ,  खरीद फरोख्त का मामला हो,, नौकरियां  देने का मामला हो,  पोषण आहार को हजम करने का हो , या  फिर सहकारी बैंकों के घोटाले  हो , सड़कों  और बांधो के निर्माण का हो , शिक्षा  के व्यवसाई करण  का या फिर डम्पर काण्ड ही क्यों ना हो । 

 ऐसा भी नहीं है कि  शासन तंत्र  की  भ्रष्ट  कारगुजारियां  पहली बार प्रदेश की जनता के सामने उजागर हुई हैं  ।  पर व्यापम घोटाला इस मायने  में भिन्न है  की  देश के प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी  जिस युवा  देश का प्रचार  दुनिया में करते हैं , और यह कहते  हुए नहीं  थकते की जिस  जो देश  दुनिया में सबसे युवा  देश  है वो क्या नहीं कर सकता , उसी देश के मध्य प्रदेश  के युवा  व्यापम  घोटाले के कारण अपने को ठगा हुआ मसहूस कर रहे हैं ।   योग्य होने के बावजूद  वे आज  दफतरों में बाबू गिरी , चपरासी  गिरी  करने को मजबूर हैं ।  सिर्फ इस कारण क्योंकि उनके पिता किसी  दल के नेता नहीं थे, किसी रशूख वाले पद पर आसीन नहीं थे अथवा धन पशु नहीं थे ।   मध्य   प्रदेश के नीति नियंता से लेकर अदने  से कम्प्यूटर आपरेटर  बड़ी संख्या में लोग भ्रस्टाचार के कीचड़ में सराबोर नजर आ रहे हैं ।  
घोटाले की व्यापकता  से स्तब्ध प्रदेश के नागरिक बस ठगे से घटनाक्रम को देखते जा रहे हैं ।  इस मामले में राशि ही  बड़ी नहीं है एक के बाद एक हो रही मौतों से जनता सिहर उठी है । प्रदेश के भोले भाले लोगों को  यह मालूम ही नहीं  था   की सरकार के संरक्षण में पले  बड़े  व्यापम  के  इस  दैत्य  से टकराने का अंजाम  मौत भी हो  सकता   है ।  प्रदेश  के एक  यदुवंशी  ज्ञानि  मंत्री जी ने  काफी विलम्ब से  अपने गीता ज्ञान को सार्वजनिक करते हुए कहा है   " जो  आया है सो जाएगा "  अब अगर  भारतीय संस्कृति के पुरोधा यदि  लोगों को  पहले ही  यह ज्ञान  दे देते तो शायद  बहुत सारे लोग  खामखा  शहीद होने से बच जाते ।
                                                 कुछ दुःसाहसी  लोग होते हैं  जैसे आजतक  टी वी न्यूज़ चैनल के अक्षय सिंह  वे दिल्ली से यहां आ गए  व्यापम के दैत्य  से टकराने , उन्होंने  यह भी नहीं सोचा की आखिर इस प्रदेश में पत्रकारिता के बड़े -बड़े महंत  आखिर क्यों  मौन साधे  बैठे  रहे   हैं ।  उन्हें भली प्रकार  मालुम है कि  इस  दानवी ताकत  से टकराने  पर    अक्षय सिंह  या संदीप  कोठारी की तरह  उनका भी अंजाम हो सकता है ।  ऐसा ना भी हुआ तो वे मध्य प्रदेश सरकार की कृपा  से प्राप्त  तमाम सुख सुविधाओं से वंचित होना  तो तय है ।   
                                                       देश में भी बड़े -बड़े  घोटाले हुए , घोटालों से सरकार बदल गई पर  ऐसा  कभी नहीं हुआ की घोटालों को दबाने के लिए लोगों की ह्त्याओ का लंबा सिलसिला शुरू हो गया हो ।   बोफोर्स काण्ड के कारण  कांग्रेस की सरकार  चली  गई थी ।  हर्षद मेहता , हवाला और यूरिया काण्ड के कारण  कांग्रेस की नरसिम्हा राओ  सरकार  को  और टू -जी थ्री जी , कॉमन वेल्थ , कोयला आवंटन घोटाले में मनमोहन की कांग्रेस सरकार को  जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया ।  इन सब तथ्यों के बावजूद यह हकीकत अपने जगह पर कायम है कि व्यापम  घोटाला शायद बड़े बड़े नौकर शाहों  सरकार के मंत्रियों और अन्य महत्त्व पूर्ण लोगों की बड़ी संख्या में संलिप्तता के चलते एक दावानल का रूप ले चुका है  और सत्ताधीशों तक इसकी तपिस पहुँच रही है । व्यापम घोटाला  अब तक के घोटालों की श्रंखला में सर्वाधिक निर्मम भी है । जिस तरह लोग बेमौत मारे जा रहें हैं वह स्तब्ध कारी है ।  ऐसे में प्रदेश के नागरिक  इस घोटाले और सत्ताधीशों  की करतूतों पर कैसे मौन रह सकते हैं ।  व्यापम घोटाले में सरकार द्वारा विलम्ब से सीबीआई  जांच कराने का निर्णय भी उसकी नियत पर संदेह जताता है । 
                                                       

28 जून, 2015

खुदाई में मिला खजाना

 

छतरपुर / रवीन्द्र  व्यास  /28 जून 15  से 70 किमी दूर धनगुवां ग्राम पंचायत के हरदौटा गाव् में प्रशासन खजाने की खोज में जुटा है । बड़ामलहरा विकाश खंड की इस पंचयात में  धनगुवां से मेदनीवार तक  सड़क निर्माण कराया जा रहा है । इसी दौरान (  हरदौटा गाँव जो बीच में पड़ता है के पास  ) खुदाई के दौरान मजदूरो को एक घड़ा दिखाई दिया जब उसको बाहर निकाला गया तो उसमे मुग़ल कालीन खजाना निकला । जिसे ग्रामीणो ने आपस में बाँट लिया । प्रशासन के हाथ आई मात्र तीन मोहरें । 
                                                 बड़ा मलहरा इलाके के पूर्व जनपद सदस्य प राम कृपाल शर्मा ने बताया की  शुक्रवार को सड़क निर्माण के दौरान ट्रेक्टर में घड़ा जैसा कुछ फसा था । उसे ग्रामीणो ने देखा तो उसमे कुछ मुग़ल कालीन सिक्के थे । कुछ लोग कहते हैं की इसमें सोने और चांदी के सिक्के थे  पर चूँकि कोई भी गाँव वाला इस मामले पर कुछ भी नहीं कह रहा है इस कारण कुछ भी स्पस्ट नहीं हो पा रहा है । मामले की जानकारी लगने पर शनिवार को सेंदपा पुलिस चौकी की पुलिस जांच हेतु आई थी पर बेरंग वापस चली गई ।  शाम को यहां पहुंची बड़ामलहरा एस डी ओ पी दीपाली जैन ने बताया की मौके से दो चांदी की मोहरे मिली थी जिन्हें जप्त कर लिया  गया है । घटना के बाद से ट्रेक्टर ड्राइवर (जीतेन्द्र सिंह लोधी ) फरार है , उसकी गिरफ्तारी के बाद ही कुछ कहा जा सकता है । 
                                                    खजाने की खबर के बाद अब प्रशासन चौकन्ना हुआ है । आज भी बड़ामलहरा एस डी ओ पी दीपाली जैन, तहसीलदार संजय सक्सेना  मौके पर पहुँच कर लोगों से पूंछ -तांछ करते रहे । जेसीबी से आसपास की खुदाई भी कराई । तहसीलदार संजय सक्सेना ने  बताया की   आज भी एक चांदी की मोहर मिली है कल दो मिली थी । सभी को पुलिस ने जप्त कर लिया है ,।  इस मामले में गहराई से जांच की जा रही है । चूँकि यह मामला पुरातत्व से जुड़ा है इस कारण पुरातत्व विभाग को लिखा जा रहा है । ताकि वे लोग यहां आकर खुदाई करें , हो सकता है की कोई प्राचीन नगर इसके  नीचे दफ़न हो । 
                                                 पूर्व जनपद सदस्य  राम कृपाल शर्मा ने बताया की यह इलाका पूर्व में डकैत प्रभावित क्षेत्रो में रहा है ।  हरदौटा गाँव में अधिकांशतः घोषी ठाकुरो की आबादी है । 

आजादी के ६८ साल बाद मिलेगी गाँव वालों को एक किलोमीटर की सड़क


छतरपुर / रवीन्द्र व्यास /28 जून 15/पन्ना विकासखण्ड का दमचुआ गांव के लोगो को आजादी के ६८ साल बाद  एक किलोमीटर की सड़क  मिलेगी ।   विस्थापित बंगाली परिवारों के लिए जाना जाता है  यह दमचुआ गाँव ।  इस गाँव के  लोगो को अपने नजदीकी  बृजपुर क़स्बा पहुँचने के लिए ८ किमी का चक्कर लगाना पड़ता है , जब की दूरी  है मात्र एक किमी ।   कलेक्टर की पहल पर किसानो ने  अपनी भूमि शासन को  सड़क निर्माण हेतु  देने की आज सहमति देकर  गाँव की  दूरी काम कर दी । 

 ग्राम दमचुआ के निवासियों की समस्याओं का निराकरण करने के लिए मंत्री सुश्री  कुसुम मेहदेले तथा कलेक्टर शिव नारायण  सिंह चौहान ने  गाँव के माध्यमिक शाला परिसर में  जनसुनवाई की। गाँव के  बच्चों ने सडक न होने से बृजपुर जाकर पढाई करने में कठिनाई की बात कही। ग्रामवासियों ने बताया कि सडक के लिए 5 किसानों के खेतों की जमीन की जरूरत होगी। मंत्री सुश्री मेहदेले ने इनमें से दो किसानों  रामदत्त मिश्रा तथा  बृजबिहारी तिवारी से मोबाईल फोन पर बात की। उन्होंने गांव की जरूरतों से उन्हें अवगत कराया। मंत्री जी के अनुरोध पर दोनों किसानों ने अपनी भूमि सडक निर्माण के लिए देने की सहमति दी। इसके बाद शेष तीन किसानों से  कलेक्टर ने बात की। गांव के हित को देखते हुए किसानों ने अपनी भूमि सडक निर्माण के लिए प्रदान करने सहमति दी।
   
      कलेक्टर ने मौके पर उपस्थित कार्यपालन यंत्री आरईएस को तत्काल प्रस्तावित सडक का स्टीमेट तैयार करके एक सप्ताह में मौसम अनुकूल होने पर सडक निर्माण प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सडक का निर्माण मनरेगा योजना से किया जाएगा। मंत्री सुश्री मेहदेले ने कहा कि दमचुआ प्रगतिशील गांव है। यहां के निवासियों को बृजपुर जाने के लिए बरसात में परेशानी होती थी। केवल एक किलो मीटर की दूर बृजपुर जाने के लिए 8 किलो मीटर का चक्कर लगाना पडता था। हाई स्कूल में पढने वाले लडके-लडकियों को भी कीचड से होकर जाना पडता था। पर किसानों के सहयोग से गांव की यह समस्या दूर हो गई है। उन्होंने कहा कि दमचुआ में सीसी रोड का निर्माण तथा हाटूपुर में सामुदायिक भवन का निर्माण विधायक निधि से किया जाएगा। 
दरअसल शासकीय भूमि न होने तथा किसानों की भूमि के कारण सीधी सडक का निर्माण अब तक नही हो पाया। ग्रामवासी इसके लिए लगातार प्रयास करते रहे। सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले मंत्री पशुपालन, पीएचई, ग्रामोद्योग मछली पालन, विधि एवं विधायी कार्य तथा कलेक्टर शिवनारायण सिंह चौहान के प्रयासों से यह समस्या निपटी ।  जब की यहां अनेकों कलेक्टर आये और यही कह कर चले गए की शासकीय भूमि नहीं है इस कारण  सीधी सड़क नहीं  बन पाएगी ।  ये पन्ना जिले का वह इलाका है जहां सर्वाधिक उथली हीरा खदाने हैं । सड़क ना होने का लाभ अवैध हीरा खनन वाले भी उठाते रहे हैं । 

03 जून, 2015

खजुराहो के मंदिर पर गिरी गाज , छात्रा की मौत

खजुराहो के मंदिर पर गिरी गाज , छात्रा की मौत 

छतरपुर/ / , विश्व विख्यातपर्यटक स्थल खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह के जगदम्बिका मंदिर पर  गाज गिरी । गाज गिरने से जहां मंदिर का मुख्य गुम्बद क्षति ग्रस्त हो गया वही मंदिर घूमने आई एक छात्रा की मौत हो गई । मंदिरो पर गज गिरने की यह पहली घटना है । जिस समय गाज गिरी उस समय लड़की के साथ उनका पूरा परिवार था , सिर्फ उसी पर गज गिरना भी किसी रहस्य से काम नहीं है । 
                              भारतीय पुरातत्व संके खजुराहो के सह अधीक्षक राहुल तिवारी ने बताया की जगदम्बिका मंदिर  के निकट  यह गाज गिरी < गाज गिरने से मंदिर  अमालक  क्षति ग्रस्त हो गया है । कोई बड़ा नुक्सान नहीं हुआ है , केवल  हिस्सा टूटा है ।  अमालक के सम्बन्ध में उन्होंने बताया की यह मंदिर पर ध्वज वगेरह लगाने के लिए बनाये जाते हैं । लोग बाग़ इसे गुम्बद भी कहते हैं ।
  तिवारी ने बताया की इस हादसे में छतरपुर से यहां घूमने आई एक छात्रा  घायल   हो गई थी जिसे उपचार हेतु अपने वाहन से  खजुराहो के अस्पताल ले गए , जहां से  गंभीर होने पर उसे छतरपुर रेफर कर दिया ।  छतरपुर में गंभीर दशा में आई छात्रा  शिवांगी  शर्मा को यहां डॉ ने मृत घोषित कर दिया ।  शिवांगी के पिता  डॉ धीरेन्द्र शर्मा ने बताया की खजुराहो के अस्पताल में यदि सही तरीके से इलाज मिल जाता तो शिवांगी को बचाया जा सकता था ।  धीरेन्द्र शर्मा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खजुराहो घूमने गए थे । शिवांगी के भाई मनीष ने आरोप लगाया है की  आधे घंटे तक मंदिर परिषर में ही परेशान रहे । यह हादसा यदि किसी विदेशी के साथ होता तो क्या होता । 
                                                   खजुराहो के गाइड नरेंद्र शर्मा ने बताया की खजुराहो के मंदिर पर गाज गिरने की यह पहली घटना है । ए एस आई के राहुल तिवारी कहते हैं की मंदिरो पर तड़ित चालाक लगे हुए हैं जिससे यहाँ बिजली गिरने की संभावना काम ही रहती है ।  घटना के समय मंदिर में शर्मा परिवार सहित १५-१६ पर्यटक थे ।  गाज से सिर्फ शिवांगी आहत हुई 

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