12 जुलाई, 2015

व्यापम _ से आहात युवा वर्ग



रवीन्द्र व्यास 

देश के प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी  जिस युवा  देश का प्रचार  दुनिया में करते हैं , और यह कहते  हुए नहीं  थकते की  जो देश  दुनिया में सबसे युवा  देश  है वो क्या नहीं कर सकता , उसी देश के मध्य प्रदेश  के युवा  व्यापम  घोटाले के कारण अपने को ठगा हुआ मसहूस कर रहे हैं ।   योग्य होने के बावजूद  वे आज  दफतरों में बाबू गिरी , चपरासी  गिरी  करने को मजबूर हैं ।  सिर्फ इस कारण क्योंकि उनके पिता किसी  दल के नेता नहीं थे, किसी रशूख वाले पद पर आसीन नहीं थे अथवा धन पशु नहीं थे ।   मध्य   प्रदेश के नीति नियंता से लेकर अदने  से कम्प्यूटर आपरेटर  बड़ी संख्या में लोग भ्रस्टाचार के कीचड़ में सराबोर नजर आ रहे हैं ।  

मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला  प्रदेश और देश  की सीमाओ को लांघ कर विदेश  तक  पहुंच गया  है ।  इस घोटाले की  चर्चा  के बहाने  शायद परदेशी  भी भारत की इस  भृष्ट  सृजनात्मक शक्ति का लोहा मानने लगे हैं ।  फकीरों का यह  प्रदेश   अपने मुख्य मंत्री    शिवराज की कृपा से  देखते ही देखते  अमीरों का   प्रदेश  बन गया है । इस प्रदेश में  अरबों -खरबों के घोटाले हो जाते हैं , घोटाले  के  सूत्र धारो की रहसयमई  परिस्थितियों  में मौत  हो जाती  है  । अकूत राशि के भ्रष्टाचार की दुर्गन्ध जैसे व्यवस्था में पूरी तरह रच बस गई है । प्रदेश   की जनता   इसे ही अपना  नसीब मान कर मौन   है । शनै :  शनै : लेकिन निश्चित रूप से प्रदेश का आम आदमी  शायद इस व्यवस्था की इस सड़ांध आदी होता जा रहा है । ऐसा नहीं कि  पहले  इस प्रदेश में घोटाले नहीं  होते थे । चाहे वह गुलाबी चना काण्ड हो ,  जमीनो के घोटाले हों  ,  खरीद फरोख्त का मामला हो,, नौकरियां  देने का मामला हो,  पोषण आहार को हजम करने का हो , या  फिर सहकारी बैंकों के घोटाले  हो , सड़कों  और बांधो के निर्माण का हो , शिक्षा  के व्यवसाई करण  का या फिर डम्पर काण्ड ही क्यों ना हो । 

 ऐसा भी नहीं है कि  शासन तंत्र  की  भ्रष्ट  कारगुजारियां  पहली बार प्रदेश की जनता के सामने उजागर हुई हैं  ।  पर व्यापम घोटाला इस मायने  में भिन्न है  की  देश के प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी  जिस युवा  देश का प्रचार  दुनिया में करते हैं , और यह कहते  हुए नहीं  थकते की जिस  जो देश  दुनिया में सबसे युवा  देश  है वो क्या नहीं कर सकता , उसी देश के मध्य प्रदेश  के युवा  व्यापम  घोटाले के कारण अपने को ठगा हुआ मसहूस कर रहे हैं ।   योग्य होने के बावजूद  वे आज  दफतरों में बाबू गिरी , चपरासी  गिरी  करने को मजबूर हैं ।  सिर्फ इस कारण क्योंकि उनके पिता किसी  दल के नेता नहीं थे, किसी रशूख वाले पद पर आसीन नहीं थे अथवा धन पशु नहीं थे ।   मध्य   प्रदेश के नीति नियंता से लेकर अदने  से कम्प्यूटर आपरेटर  बड़ी संख्या में लोग भ्रस्टाचार के कीचड़ में सराबोर नजर आ रहे हैं ।  
घोटाले की व्यापकता  से स्तब्ध प्रदेश के नागरिक बस ठगे से घटनाक्रम को देखते जा रहे हैं ।  इस मामले में राशि ही  बड़ी नहीं है एक के बाद एक हो रही मौतों से जनता सिहर उठी है । प्रदेश के भोले भाले लोगों को  यह मालूम ही नहीं  था   की सरकार के संरक्षण में पले  बड़े  व्यापम  के  इस  दैत्य  से टकराने का अंजाम  मौत भी हो  सकता   है ।  प्रदेश  के एक  यदुवंशी  ज्ञानि  मंत्री जी ने  काफी विलम्ब से  अपने गीता ज्ञान को सार्वजनिक करते हुए कहा है   " जो  आया है सो जाएगा "  अब अगर  भारतीय संस्कृति के पुरोधा यदि  लोगों को  पहले ही  यह ज्ञान  दे देते तो शायद  बहुत सारे लोग  खामखा  शहीद होने से बच जाते ।
                                                 कुछ दुःसाहसी  लोग होते हैं  जैसे आजतक  टी वी न्यूज़ चैनल के अक्षय सिंह  वे दिल्ली से यहां आ गए  व्यापम के दैत्य  से टकराने , उन्होंने  यह भी नहीं सोचा की आखिर इस प्रदेश में पत्रकारिता के बड़े -बड़े महंत  आखिर क्यों  मौन साधे  बैठे  रहे   हैं ।  उन्हें भली प्रकार  मालुम है कि  इस  दानवी ताकत  से टकराने  पर    अक्षय सिंह  या संदीप  कोठारी की तरह  उनका भी अंजाम हो सकता है ।  ऐसा ना भी हुआ तो वे मध्य प्रदेश सरकार की कृपा  से प्राप्त  तमाम सुख सुविधाओं से वंचित होना  तो तय है ।   
                                                       देश में भी बड़े -बड़े  घोटाले हुए , घोटालों से सरकार बदल गई पर  ऐसा  कभी नहीं हुआ की घोटालों को दबाने के लिए लोगों की ह्त्याओ का लंबा सिलसिला शुरू हो गया हो ।   बोफोर्स काण्ड के कारण  कांग्रेस की सरकार  चली  गई थी ।  हर्षद मेहता , हवाला और यूरिया काण्ड के कारण  कांग्रेस की नरसिम्हा राओ  सरकार  को  और टू -जी थ्री जी , कॉमन वेल्थ , कोयला आवंटन घोटाले में मनमोहन की कांग्रेस सरकार को  जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया ।  इन सब तथ्यों के बावजूद यह हकीकत अपने जगह पर कायम है कि व्यापम  घोटाला शायद बड़े बड़े नौकर शाहों  सरकार के मंत्रियों और अन्य महत्त्व पूर्ण लोगों की बड़ी संख्या में संलिप्तता के चलते एक दावानल का रूप ले चुका है  और सत्ताधीशों तक इसकी तपिस पहुँच रही है । व्यापम घोटाला  अब तक के घोटालों की श्रंखला में सर्वाधिक निर्मम भी है । जिस तरह लोग बेमौत मारे जा रहें हैं वह स्तब्ध कारी है ।  ऐसे में प्रदेश के नागरिक  इस घोटाले और सत्ताधीशों  की करतूतों पर कैसे मौन रह सकते हैं ।  व्यापम घोटाले में सरकार द्वारा विलम्ब से सीबीआई  जांच कराने का निर्णय भी उसकी नियत पर संदेह जताता है । 
                                                       

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