जनसंख्या नियंत्रण हेतु सामाजिक उपाय आवश्यक


 जयप्रकाश मिश्र 
विश्वके महान जनसंख्या शास्त्री थाम्स राबर्ट माल्थस ने 1798 में जनसंख्या पर निबंध लिखकर कहा था जनसंख्या प्रत्येक 25 वर्षों में दुगनी होगी इस पर नियंत्रण आवश्यक है क्योंकि खाद्य सामग्री का उत्पादन जनसंख्या वृद्धि के अनुपात कम होगा। परिणामस्वरूप दुनिया में लोग भुखमरी और कुपोषण का शिकार होकर काल के गाल में समा जाएंगे।
आज हम जनसंख्या में विश्व में दूसरे नंबर पर है। चीन दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाा देश है। परन्तु चीन ने अपनी जनसंख्या वृद्धि की दर को कम कर लियास है। जनसंख्या की वृद्धि दर यदि हमारे देश में यही  रही तो जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि सन् 2050 में हम विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएंगे।
सरकार के स्तर पर तो जनसंख्या नीति बनाकर जनसंख्या नियंत्रण के लिए उपाय किए जा रहे हैं। परन्तु समाज और देश के जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारे भीकुछ कर्तव्य हैं। अभी हाल में सरकार ने बेटी बचाओ अभियान पर काफी मशक्कत की है। तथ्य बताते हैं कि 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति 1000 युवाओं पर 933 स्त्रियां थी जबकि मध्यप्रदेश में प्रति हजार पुरूषों पर 920 स्त्रियां थीं। 2011 की जनगणना में भारत और मप्र का प्रति हजार पुरूषों पर स्त्रियों का अनुपात 940 एवं 930 के लगभग हुआ है। औसत आयु में भी इजाफा हो रहा है। अर्थात 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में प्रति नागरिक औसत आयु 67 वर्ष है। यह आंकड़ा सुखद नहीं है। अभिी और प्रयास की आवश्यकता है।
प्रश्न इस बात का है कि भारत में आज भी लगभग 26 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। तथ्य बताते हैं कि देश में चार लाख लोग आज भी कचरा  बीनकर अपना उदरपोषण कर रहे हैं जबकि 6 लाख 50 हजार लोग भीख मांगकर अपना जीवकोपार्जन कर रहे हैं। इन लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए हम सबको प्रयास करना पड़ेगा। इस जनसंख्या को कार्यशील जनसंख्या में तब्दील करने के लिए प्रयास करना होगा।
2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या में कार्यशील जनसंख्या का प्रतिशत भारत में 39.10 एवं मप्र में 42.47 प्रतिशत है। अर्थात कुल जनसंख्या 100 मान ली जाए तो भारत में 39 और मप्र में 42 लोग काम करके आय कमाते हैं।
इन सब दिए गए आंकड़ों का सच यह है कि सरकार के साथ-साथ हम सबको भी शासन की योजनाओं का लाभ देने के लिए गांव स्तर पर लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। सामाजिक सरोकारों में विवाह एक सरोकार है। इसमें कुण्डली मिलान का कार्य वर-वधु का किया जाता है जो ज्ञानी लोग कुण्डली मिलान का कार्य कुण्डली से करते हैं या कम्प्यूटर द्वारा मिलान करते हैं। मिलान करते वक्त वह वर-वधु की आयु देखते हैं यदि जनसंख्या नीति में उल्लेखित आयु वर 21 वर्ष और वधु की 18 वर्ष से कम हो तो यह कहें कि कानूनन अपराध भी है।
इस तरह वर-वधु के माता-पिता को हतोत्साहित किया जा सकता है। इसी तरह मण्डप में फेरे लेते समय सात-पांच के वचन की शपथ अपने दाम्पत्य जीवन को चलाने के लिए वर-वधु से दिलाई जाती है। सामाजिक व्यवस्था बनाकर इन वचनों में परिवर्तन कर इसे आठ-वचन किया जाए और इन वचनों में एक-एक वचन यह भी जुड़ा हो कि वर और वधु अपने जीवन काल में एक पुत्र एवं एक पुत्री को ही जन्म देंगेया दो पुत्र या दो पुत्रियांकहने का अभिप्राय एक दम्पत्ति अपने जीवन काल में दो संतानें ही पैदा करने की शपथ लें। यदि इस तरह की व्यवस्था बनाई जाए तो जनसंख्या नियंत्रण के लिए सामाजिक स्तर पर सार्थक प्रयास होगा।

प्राध्यापक अर्थशास्त्र
शास.महाराजा महाविद्यालयछतरपुर
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