01 नवंबर, 2025

खजुराहो एयरबेस: राष्ट्रीय सुरक्षा की नयी ऊंचाई और क्षेत्रीय पहचान की परीक्षा

 

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बुंदेलखंड की डायरी 

खजुराहो एयरबेस: राष्ट्रीय सुरक्षा की नयी ऊंचाई और क्षेत्रीय पहचान की परीक्षा

रवीन्द्र व्यास 

मध्य प्रदेश का खजुराहो अब केवल विश्व धरोहर मंदिरों का नगर नहीं रहेगाबल्कि यह भारतीय वायुसेना की सामरिक शक्ति का नया आधार बनने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने खजुराहो में देश का सबसे बड़ा एयरबेस स्थापित करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। लगभग 1000 एकड़ भूमि खजुराहो एयरपोर्ट के समीप  चिन्हित की गई हैजहां अब लड़ाकू विमानों और भारी सैन्य परिवहन विमानों के संचालन का केंद्र विकसित होगा।

यह निर्णय केवल रक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं करेगाबल्कि मध्य भारत की भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक संतुलन के केंद्र के रूप में परिभाषित करेगा। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच स्थित यह क्षेत्र वायुसेना के लिए एक ऐसा कॉरिडोर सिद्ध हो सकता हैजहां से युद्धकालीन या आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित तैनाती आसान हो जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसारइस एयरबेस की स्थापना भारत की वायु सुरक्षा परिदृश्य को मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में पर्याप्त गहराई और संतुलन प्रदान करेगी।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से क्यों चुना गया खजुराहो

रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए विश्लेषण में झांसीग्वालियर और प्रयागराज जैसे वैकल्पिक विकल्पों की तुलना में खजुराहो को सबसे उपयुक्त  पाया गया। इसके पीछे कई वैज्ञानिक और रणनीतिक कारण हैं। बुंदेलखंड का यह इलाका भूकंप की दृष्टि से स्थिर माना जाता है। इसका भूभाग पठारी है और यहां का मौसम सालभर सामान्य रहता हैजिससे उड़ानें प्रभावित नहीं होतीं। धुंधप्रदूषण और घनी आबादी का अभाव इस क्षेत्र को सुरक्षित और उपयुक्त बनाता है।

भौगोलिक दृष्टि से खजुराहो लगभग देश के मध्य में स्थित है। इससे देश के विभिन्न दिशाओं में समान दूरी और आकाशीय पहुँच संभव होती है। यह सामरिक सुविधा वायुसेना को किसी अप्रत्याशित स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की ताकत प्रदान करेगी। सुरक्षा नीति निर्धारकों ने इन सभी पहलुओं पर गहन विचार कर खजुराहो को प्राथमिकता दी।

इसके अलावाहाल में सम्पन्न सैन्य अभियानों के अनुभवों से यह महसूस हुआ कि देश के भीतर सुरक्षित और तेज़ पहुँच वाले एयरबेस की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। ताजिकिस्तान के आयनी एयरबेस को छोड़ने के बाद भारत की मध्य एशियाई उपस्थिति सीमित हो गई थी। इस पृष्ठभूमि में खजुराहो का नया केंद्र भारतीय वायुसेना के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम कहा जा सकता है।

एयरबेस से विकास और रोजगार की नई ऊर्जा

खजुराहो एयरबेस का प्रभाव केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। यह बुंदेलखंड जैसी आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े मानी जाने वाली भूमि में विकास की नई लहर लाएगा। यहां सैन्य परिसरप्रशिक्षण विद्यालयविमान रखरखाव इकाइयांईंधन भंडारण केंद्र और बसाहट  क्षेत्र बनने से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

स्थानीय व्यापारियोंहोटल व्यवसायियोंट्रांसपोर्ट और निर्माण उद्योगों के लिए यह अवसरों का नया दौर लाएगा। बड़ी मात्रा में आने वाले कर्मियों की उपस्थिति क्षेत्र में सेवाआवासपरिवहन और भोजन आदि से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देगी। परिणामस्वरूप स्थानीय बाजारों में नए निवेश और आय प्रवाह की शुरुआत होगी।

राज्य सरकार के अनुसारएयरबेस परियोजना से सड़करेल और हवाई संपर्क को आधुनिक रूप दिया जाएगा। यह बुंदेलखंड को बाकी भारत से और बेहतर रूप से जोड़ेगा। साथ हीरक्षा संबंधी सहायक उद्योग जैसे रेडार उपकरणतकनीकी मरम्मतसंचार व्यवस्था और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाएं इस क्षेत्र की औद्योगिक प्रोफ़ाइल को मजबूत करेंगी।

पर्यटनसंस्कृति और पर्यावरण की चिंता


दूसरी ओरस्थानीय समाज के भीतर इस परियोजना के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंताएं भी उभर रही हैं। खजुराहो निवासी सुधीर शर्मा कहते हैं कि  खजुराहो का नाम विश्व सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में उसके मंदिरों और कलात्मक परंपरा के कारण दर्ज है। यह नगर अपनी शांतप्राकृतिक और आध्यात्मिक पहचान से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में भारी सैन्य विमानअभ्यासों का शोरऔर लगातार वायु गतिविधियां इस शांति को प्रभावित कर सकती हैं।

पर्यावरणविदों का कहना है कि विमानन क्षेत्र से जुड़ी ईंधन और ध्वनि प्रदूषण की वजह से स्थानीय वन्यजीवों तथा आसपास के प्राकृतिक संतुलन पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। पर्यटन कारोबारी आशंकित हैं कि विदेशी पर्यटकों की संख्या घट सकती है। सामाजिक संस्थाएं चाहती हैं कि सरकार यहां संतुलित नीति अपनाए  ताकि विकास के साथ पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा भी हो सके।

महिला और युवा संगठनों ने भी सुझाव दिया है कि इस एयरबेस के साथ ऐसे प्रशिक्षण या शोध केंद्र विकसित किए जाएं जो स्थानीय कौशल और परंपराओं को आगे बढ़ाएंजैसे रक्षा उपकरणों में हस्तशिल्प वस्तुओं का प्रयोग या सांस्कृतिक प्रदर्शनी केंद्रजो खजुराहो की पारंपरिक पहचान बनाए रखें। 

राष्ट्रहित और स्थानीय संवेदनशीलता का संतुलन

यह प्रश्न अब केवल विकास का नहींबल्कि पहचान और अस्तित्व का भी है। खजुराहोजो भारत की कलात्मक आत्मा का प्रतीक हैआज राष्ट्र की सुरक्षा और स्थानीय परंपरा के संघर्ष में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। सरकार के लिए चुनौती यही है कि वह इस परियोजना को इस प्रकार क्रियान्वित करें कि न तो राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारी में कोई समझौता होऔर न ही खजुराहो की सांस्कृतिक आत्मा पर बुरा प्रभाव पड़े।

राष्ट्रहित सर्वोपरि है। देश की सीमाएं सुरक्षित होंगीतो ही उसके भीतर संस्कृतिधर्मपर्यटन और पहचान सुरक्षित रह सकेंगे। जैसे शरीर को स्थिर रहने के लिए मजबूत हृदय की आवश्यकता होती हैवैसे ही संस्कृति को बने रहने के लिए सुरक्षित राष्ट्र की जरूरत होती है। खजुराहो एयरबेस इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है  एक ऐसा प्रतीक जो दिखाता है कि आधुनिकता और परंपरा विरोधी नहींबल्कि पूरक हो सकते हैं।

भविष्य का संतुलित दृष्टिकोण

रक्षा मंत्रालय का यह निर्णय भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा नीति का हिस्सा हैपरंतु इसका सही लाभ तभी मिलेगा जब इसे पर्यावरणीय दृष्टि से स्थायी और जनहितकारी ढंग से क्रियान्वित किया जाए। पारदर्शी भूमि अधिग्रहणउचित मुआवजास्थानीय लोगों के लिए प्राथमिक रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण योजनाएं इस परियोजना की सफलता के प्रमुख आयाम होंगे। 

यदि इस दिशा में संवेदनशीलता और दूरदर्शिता रखी जाती हैतो खजुराहो केवल प्राचीन संस्कृति का प्रतीक नहीं रहेगाबल्कि यह आधुनिक भारत की रक्षा शक्तिआत्मनिर्भरता और विकासीय संतुलन का उदाहरण भी बनेगा।

 खजुराहो की धरतीजहां कलाअध्यात्म और स्थापत्य की आत्मा बसती हैअब राष्ट्र की सुरक्षा की आत्मा को भी अपना घर देने जा रही है। यह वह संगम है जहां परंपरा और प्रगति एक दूसरे को बल देते हुए भारत की सामूहिक चेतना का नया अध्याय रचेंगे।

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