18 नवंबर, 2025

मिटानी होगी मानवता की दुश्मन बनती कट्टरता

 

मिटानी होगी मानवता की दुश्मन बनती कट्टरता



'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कुछ समय तक शांत दिखने वाला पाकिस्तान एक बार फिर आतंक की राह पर लौट आया है। हाल ही में हुए 'दिल्ली ब्लास्ट' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तुर्किये, कतर समेत कुछ कट्टरपंथी देशों के सहयोग से भारत के खिलाफ नया छद्म युद्ध छेड़ा जा चुका है। इन देशों ने भारत की बढ़ती संप्रभुता, समृद्धि और वैश्विक साख को चोट पहुँचाने के लिए आतंकवाद का जाल दोबारा बुनना शुरू कर दिया है।

इस्लाम की मूल आत्मा शांति और मानवता है, लेकिन कुछ मुल्लाओं ने अल्लाह के इस पवित्र धर्म को अपने स्वार्थ और सत्ता के हवाले कर दिया है। कुरान की मनमानी व्याख्याओं के जरिये मासूमों को 72 हूरों और जन्नत के नाम पर बरगलाया जा रहा है। नतीजा यह कि धर्म का वस्त्र ओढ़े आतंक के सौदागर मानवता के सीने पर बारूद बिछा रहे हैं।

पाकिस्तान की आईएसआई लंबे समय से हनीट्रैप और साइबर घुसपैठ जैसे अभियानों के जरिए भारत के खिलाफ साजिशें रचती रही है। रावलपिंडी स्थित फातिमा जिन्ना महिला विश्वविद्यालय को हनीट्रैप केंद्रमें तब्दील किया जाना इसका ज्वलंत उदाहरण है। सूत्र बताते हैं कि वहाँ तीन-चरणीय प्रशिक्षण प्रणाली के तहत महिलाएँ सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने, भावनात्मक जाल बुनने और अंततः गोपनीय सूचनाएँ हथियाने के गुर सीखती हैं।

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने अपने महिला विंग को पुनर्जीवित कर जमात-उल-मोमिनातके नाम से नया रूप दिया है। मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर और उसकी सहयोगी अफीरा बीबी इस संगठन की अगुवाई कर रही हैं। यह विंग तीन भागों में बंटा है पहला, गरीब और उत्पीड़ित महिलाओं को शामिल करने वाला; दूसरा, शिक्षित मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर मोड़ने वाला; और तीसरा, आईएसआई के हनीट्रैप अभियानों में सहयोग देने वाला।

रिपोर्टों के अनुसार 8 अक्टूबर 2025 को बहावलपुर में आयोजित बैठक में भारत के खिलाफ दर्जनों योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया। इनमें धार्मिक चंदे की आड़ में फंड जुटाना, महिला आतंकियों की भर्ती, ‘गजवा-ए-हिंदकी पुनर्संरचना, और भारत में मीरजाफरों की फौज तैयार करना प्रमुख हैं। इन प्रयासों में लखनऊ, हैदराबाद, अलीगढ़, मेरठ, भोपाल और प्रयागराज सहित देश के कई मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में स्लीपर सेल सक्रिय हो चुके हैं।

यह तथ्य चिंताजनक है कि इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) जैसे संस्थानों को भी अब कुछ देशों ने मानवता और विश्वशांति के बजाय कट्टर एजेंडे का औजार बना लिया है। यही कारण है कि आज आतंक का यह नेटवर्क चार महाद्वीपों तक फैला दिखाई देता है।

कट्टरता की यह बेल अब धर्म, राष्ट्र और मानवता की सीमाओं को लांघ चुकी है। इसे मिटाना अब केवल किसी एक देश का नहीं, बल्कि पूरी मानव सभ्यता का नैतिक दायित्व है। अन्यथा यह आग जल्द ही पूरे विश्व को अपने लपेटे में ले लेगी। बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया को चेतना ही मानवता की रक्षा का एकमात्र रास्ता है।

 

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