22 फ़रवरी, 2016

Bundelkhand_Bhim Kund

/बुंदेलखंड में है अथाह जल श्रोत का केंद्र भीमकुण्ड



 रवीन्द्र व्यास 




बुंदेलखंड आज सूखे की भयावहता से विचलित है , लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं समाजवादी नेता रघु ठाकुर को बुंदेलखंड की समस्याओं को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरनादेना पड़ रहा है  उसी बुंदेलखंड में पानी का एक ऐसा अथाह श्रोत भी है  जो आज भी लोगों केलिए किसी रहष्य से कम नहीं है | समुद्र कि गहराई तो भले ही माप ली गई हो पर इसकी गहराईआज तक कोई नहीं माप सका |
                                            छतरपुर जिला के बड़ा मलहरा के पास अथाह जल का श्रोत है  भीम कुंड । ऊपर से देखने पर एक 50 से 75 मीटर  व्यास का आकार दिखता है । भूवैज्ञानिक मानते हैं की यह इलाका चूना पत्थर( लाइम स्टोन ) का इलाका है , जहां यह कुण्ड बना है वह भी  लाइम स्टोन की केविटी वाली सरचनाओ  कारण ही बना है लाइम  स्टोन  ज्यादा नर्म होता है , और पानी के संपर्क मे आने के कारण इसमे जगह जगह   ेविटी बन जाती है जिसके कारण इसमे पानी जमा रहता है | पानी के अथाह भंडारण और कभी ख़त्म ना होने के पीछे उनका मानना है कि  सका किसी जल स्रोत से  सम्पर्क हो सकता है | 
मान्यताएं 
इस कुण्ड को लेकर अलग अलग तरह की लोक मान्यता है । कुछ लोग इसकी  इसकीउत्पत्ति द्वापर युग में होना मानते हैं । किवदंत्ती है कि वनवास काल का काफी समय पांडवों काबुंदेलखंड इलाके में बीताइसी दौरान  द्रोपदी निर्जला एकादशी का व्रत रखा शाम के समय जबउनका व्रत पूर्ण हुआ । प्यास से व्याकुल  द्रोपदी को  पीने का  पानी जब कहीं नजर नहीं आया तब   भीम ने पानी की तलाश में गदा मारा था जिससे यह कुंड बना | कुण्ड तक पहुँचने के लिए अर्जुन ने बाड़ से सीडिया बनाई थी ।  इसके बाद कुछ समय तक पांडव भी इसी जगह रहे । 
 एक और किवदंती यह भी है की  जब नारद मुनि आकाश मार्ग से विचरण कर रहे थे तभी उन्हें धारा पर कुछ स्त्री और परुष घायल अवस्था में दिखे थे । नारद जी ने उनके दुःख कारण पूंछा तो उन्होंने बतया था की वे  संगीत की राग और रागनियाँ हैं , हमारी यह दशा  पृथ्वी  लोक के अनाड़ी गायकों के दोषपूर्ण  गायन से हुई है । इस दशा से मुक्ति हमें तभी मिलेगी  जब कोई कुशल  संगीतज्ञ सामगान का गायन करे । सामगान के ज्ञाता नारद जी ने  तत्काल ही गायन शुरू कर दिया । उनके इस गायन को सुन सम्पूर्ण देवलोक मगन  गया , और स्वयं भगवान विष्णु उसी स्थान पर द्रवीभूत हो कर जा पहुंचे । द्रवीभूत विष्णु जी का स्पर्श पा कर सभी राग और रागनियाँ स्वास्थ्य हो गई । इन्ही राग रागनियों ने भगवान विष्णु से अनुरोध किया की वे इसी रूप में यही रुक जाए ताकि और पीड़ितों का भी भला हो सके । भगवान  उनकी यह बात मान ली और जल के रूप में इस कुण्ड में रुक गए । इस कारण कुछ लोग इसे नील कुण्ड भी कहते हैं । 
इस कुंड की गहराई आज तक कोई नहीं नाप सका | कहते हें की यहाँ पहले प्रेत आत्माओं का वाशरहता था , लोग यहाँ जाने से डरते थे | १९५६ में बिजावर रियासत के राजा ने यहाँ सीडियांबनवाई थी | इसी दौरान एक महंत यहाँ आकर रुके उन्होने इस स्थान को प्रेत आत्माओं से मुक्तकराया |

गहराई का रहष्य 

भीम कुण्ड की गहराई आज तक कोई नहीं माप सका है । एक बार नो सेना के गोता खोरों नेइसकी गहराई नापने का प्रयास किया था ,।  और एक बार  सागर विश्व विद्यालय के भू_ विज्ञान एम टेक के  छात्रों ने इसकी गहराई नापने का प्रयाश किया था पर दोनों ही लोग विफल रहे|
१९७७ में  जिला प्रशासन ने यहाँ तीन पम्प लगा कर इसको खाली कराने का प्रयाश किया था ,सात दिन तक चले इस प्रयाश में कुंड का पानी एक इंच भी कम नहीं हुआ था | 
 डिस्कवरी चेनल वालों ने भी इसका रहस्य जानने का  प्रयास किया था |- दिन के प्रयाश केबाद भी उनके गोताखोर इसकी तह नहीं जान पाए | डिस्कवरी चेनल वालों ने  यहाँ के पूर्व जनपदसदस्य प  रामकृपाल शर्मा को  बताया था  की इसके अन्दर कई गुफाएं हें , नीचे दो कुंड हें एकसे तेजी से पानी निकलता है और दूसरे में तेजी से जाता है जिसके कारण तेज बहाव रहता है |

सेटेलाइट सर्वे 

सेटेलाइट  सर्वे में बुंदेलखंड इलाके में जिस पाताल गंगा का पता चला है , उसका रहष्य भी इसी भीम कुण्ड से जुड़ा बताया जा रहा है । इस कुण्ड से एक नदी के जुड़े होने की बात कही जा रही है ,  
भूवैज्ञानिक मानते हैं की  भूकंप और सुनामी  के कारण उठने वाली लहरों का असर इस कुंड में भीदेखने को सिर्फ इस कारण मिलता है , क्योंकि  जब भी भूकंप आते हें उसका असर टेक्टोनिकप्लेट्स पर पड़ता है जिस कारण यहाँ भी लहरे उठती हें |
 संसद में भीम कुण्ड 
  
भीम कुण्ड के अथाह जल को देखते हुए  दमोह के सांसद प्रहलाद पटेल ने इसे संसद में उठाया था । उन्होंने इस भीम कुण्ड से आसपास और बक्स्वाहा में पेयजल सप्लाई की योजना बनाने का अनुरोध सरकार से किया था । 

जरुरत है बुंदेलखंड की इस जल सरचना के बेहतर इस्तेमाल और उसके  सही उपयोग की दिशा में छतरपुर जिला प्रशासन के प्रयास की । 

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