रेप की फर्जी रिपोर्ट करने पर महिला को सजा
टीकमगढ़/ बुंदेलखंड इलाके में अपने विरोधी को फ़साने के लिए , बदला लेने के लिए महिलाओ को औजार की तरह किया जाता है इस्तेमाल । ऐसी ही एक महिला ने टीकमगढ कोतवाली में सन 2000 में दो पुलिस आरक्षकों के विरूद्ध बलात्कार का मामला दर्ज कार्या था । जांच में दुराचार की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में विशेष न्यायाधीश जेएस कटारिया ने महिला को 3 साल की सजा व 2 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है ।
महिला की रिपोर्ट पर फंसे थे 2 आरक्षक-
8 मार्च 2000 को कोतवाली टीकमगढ़ में पुलिस आरक्षक अशोक सेन व नेपाल के विरूद्ध महिला ने रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों आरक्षकों के विरूद्ध मामला कायम कर न्यायालय में पेश किया था,। लेकिन न्यायालय में महिला अपने पूर्व के दिए हुए बयानों से पलट गई और उसने अशोक सेन व नेपाल को पहचानने से ही इंकार कर दिया। इस पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया और फरियादी महिला के विरूद्ध कार्रवाई के लिए लिखा था।
विशेष न्यायाधीश ने सुनाई सजा-
न्यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने महिला के विरूद्ध धारा 182, 211 के तहत परिवाद न्यायालय में प्रस्तुत किया था। जिस पर विद्वान विशेष न्यायाधीश जेएस कटारिया ने महिला मिथिलेश को झूठी गवाही देने तथा मिथ्या रिपोर्ट करने पर धारा 211 आईपीसी में 3 साल के कठोर कारावास और 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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