02 जनवरी, 2026
भाजपा महिला नेत्री रेप केस: सागर कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी पार्षद बरी – सियासी हंगामा फिर गरमाया
BJP_Saga_Rape Case_ भाजपा महिला
नेत्री रेप केस: सागर कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी
पार्षद बरी – सियासी हंगामा फिर गरमाया
सागर, // 2/01/2026//
मध्य प्रदेश के सागर जिले में भाजपा की एक महिला
पदाधिकारी द्वारा लगाए गए रेप आरोपों के बहुचर्चित मामले में SC-ST विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी भाजपा पार्षद और
पूर्व NSG कमांडो मनोज राय को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
मामले की पूरी कथा
खुरई के गुरुनानक वार्ड से भाजपा पार्षद मनोज
राय पर 11 मार्च 2025 को खुरई शहरी
थाने में भाजपा की ही एक महिला नेत्री ने बलात्कार का केस दर्ज कराया था। पीड़िता
का आरोप था कि आरोपी ने घर छोड़ने के बहाने उसे कार में बिठाया, दुष्कर्म किया और धमकी देकर कई बार शारीरिक शोषण किया। मामला दर्ज होते ही
यह स्थानीय स्तर पर सियासी हंगामा बन गया, जिसमें BJP
की आंतरिक कलह के आरोप भी लगे।
कोर्ट का तर्क: साक्ष्यों में विरोधाभास
न्यायाधीश प्रदीप सोनी ने अभियोजन और बचाव पक्ष
के साक्ष्य, गवाह बयान व दस्तावेजों की गहन जांच की। फैसले
में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा, क्योंकि
तथ्यों और गवाहों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास थे। कोर्ट ने मनोज राय को सभी
धाराओं से दोषमुक्त घोषित किया। फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने इसे न्यायिक जीत बताया,
जबकि पीड़िता पक्ष असंतुष्ट है।
MP में BJP नेताओं पर
इसी तरह के अन्य मामले
मध्य प्रदेश में BJP नेताओं
से जुड़े रेप/यौन शोषण के कई मामले सुर्खियों में रहे हैं।
भोपाल (2023): BJP नेता
प्रशांत वर्मा पर नाबालिग से रेप का आरोप; मामला कोर्ट में
विचाराधीन।
इंदौर (2024): BJP युवा
मोर्चा नेता पर सहयोगी महिला कार्यकर्ता ने दुष्कर्म का केस दर्ज किया; आरोपी फरार।
ग्वालियर (2022): BJP पार्षद
पर बलात्कार के आरोप, कोर्ट ने जमानत दी; मामला लंबित।
झाबुआ (2025): आदिवासी BJP
नेत्री ने पार्टी के ही जिला अध्यक्ष पर शोषण का आरोप लगाया;
जांच जारी।
रीवा (2024): पूर्व BJP
विधायक पर नजरबंदी के दौरान रेप का केस; हाईकोर्ट
ने स्थगित किया।
ये मामले अक्सर सियासी रंग ले लेते हैं, लेकिन ज्यादातर में साक्ष्य विवाद के कारण फैसले लंबे खिंचते हैं
29 दिसंबर, 2025
जी राम जी' बिल और बुंदेलखंड
'बुंदेलखंड की डायरी
जी राम जी' बिल और बुंदेलखंड
रवीन्द्र व्यास
लोकसभा में बिल पेश होते ही विपक्ष ने जिस तरह से जी राम जी बिल को लेकर हंगामा मचाया वह संसदीय गरिमा के अनुकूल नहीं था ,हालंकि यह विपक्ष का कोई पहला तमाशा नहीं था । विपक्ष अपनी पूरी शक्ति से चिल्लाया स्टैंडिंग कमेटी भेजो , सरकार बोली चिंता मत करो 125 दिन का रोजगार पाओ , विपक्ष अब सड़क पर जी राम जी का विरोध कर रही है | ये अलग बात है कि बिल का विरोध जिन मुद्दों के साथ करना चाहिए उस पर कोंग्रेसी मौन हैं | बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है , प्रियंका-खड़गे चीख रहे हैं कि ये 'गरीब-विरोधी हैं , गांधी नाम हटाकर राम नाम जोड़ा गया है , शिवराज जी मुस्कुरा रहे हैं मनरेगा की खामियां दूर कर , विकसित भारत का विजन हमने देश को दिया है | लेकिन बुंदेलखंड के किसान सोचते हैं 2025 की बेबसी में ये राम जी का बिल है या हमारे हालात का मजाक?
100 से 125 दिन का जुमला
योजना कोई भी हो सरकार यह सोचकर लाती है कि इससे उनका राजनैतिक हित भी सधे और जनता को लाभ भी हो जाए | इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रख कर मनरेगा आया था पर इसका असर बुंदेलखंड में क्या रहा , यह तो पलायन के आंकड़े स्वयं बयां करते हैं | सरकार के आंकड़े भी बताते हैं कि 2025 (अप्रैल-अक्टूबर) में एमपी बुंदेलखंड के 13 जिलों में औसत 55 कार्यदिवस, यूपी के 7 जिलों में 48 कार्यदिवस ही काम मिला | इनमे भी बड़े काम ये हुए कि काम मशीनों से हुए और मौके वे मजदुर दिखाए गए जो रोजगार की तलाश में पलायन कर गए |
नया बिल ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की बजाय 125 दिनों का रोजगार गारंटी देता है। कार्यों का दायरा चार क्षेत्रों जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका और जलवायु लचीलापन तक सीमित कर दिया गया है, जबकि मनरेगा में अधिक लचीलापन था।फंडिंग पैटर्न मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता था, लेकिन VB-G RAM G में केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 हो गया है (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10)। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, हालांकि केंद्र शासित प्रदेशों को 100% फंडिंग मिलेगी।
निगरानी और तकनीक नई योजना में एआई, जीपीएस, बायोमेट्रिक सत्यापन, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य है। सभी परिसंपत्तियां विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में जुड़ेंगी, भ्रष्टाचार रोकने के लिए केंद्र-राज्य स्टीयरिंग समितियां बनेगी ।
VB-G RAM G बिल के तहत ग्राम पंचायतों के अधिकारों को सीमित कर दिया गया हैं, जो मनरेगा के विकेंद्रीकृत मॉडल से हटकर केंद्र-प्रधान दृष्टिकोण अपनाया है। इससे स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण और कार्यान्वयन की स्वायत्तता कम हो गई है। कार्य चयन की सीमा ग्राम पंचायतें अब स्वतंत्र रूप से कार्य चुन नहीं सकतीं | जबकि मनरेगा में 29 प्रकार के कार्यों की व्यापक सूची थी, लेकिन नई योजना में केंद्र की स्टीयरिंग कमेटी पूर्व-अनुमोदन देगी।योजना निर्माण पर नियंत्रण ग्राम सभाओं की भूमिका कम हो गई है , सभी योजनाएं विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जुड़ेंगी, जहां केंद्र-राज्य समिति अंतिम मंजूरी लेगी। पंचायतें अब रीयल-टाइम डैशबोर्ड पर जीपीएस-आधारित कार्यों तक सीमित हैं, स्वतंत्र सोशल ऑडिट की जगह ए आई निगरानी प्रमुख है।वित्तीय स्वायत्तता में कमी फंडिंग 60:40 (केंद्र-राज्य) होने से पंचायतों को राज्य सरकारों पर निर्भरता बढ़ जायेगी , मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता था। बिना पूर्व अनुमति के अतिरिक्त कार्य शुरू करने का अधिकार समाप्त हो गया । सीधी बात ये कि अब सरपंच साहब की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा |
मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संवाद
सुशासन दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने वी बी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के बारे में आजीविका मिशन की दीदियों से संवाद कर कई सुनहरे सपने दिखाए | उन्होंने महिलाओं को समझाया कि 125 दिवस का रोजगार एक तिहाई महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य, जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के कार्य प्राथमिकता में लिए जाएंगे। स्वसहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों में आवश्यक अधोसंरचना जैसे वर्किंग शेड, पशु शेड, ट्रैनिंग सेंटर, फलोद्यान, सिंचाई संरचना आदि के काम लिये जाएंगे। काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा ।
पंचायतों की ग्रेडिंग होगी और अधिक आवश्यकता वाली पंचायतों को अतिरिक्त बजट का प्रावधान रखा जाएगा , योजना और अन्य विभागों के कन्वर्जेन्स से विभिन्न कार्य होंगे।कार्य और भुगतान में पारदर्शिता होगी । आधुनिक तकनीक का प्रयोग, वीकली डिस्पोजल की प्रक्रिया होगी , मजदूरी भी बढ़ाई जाएगी। प्रशासनिक व्यय 06 प्रतिशत से बढ़कर 09 प्रतिशत हुआ। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महिलाओं से आह्वान किया कि अपने अपने गांव में छोटी छोटी बैठकों, सोशल मीडिया प्लेटफार्म आदि में योजना का व्यापक प्रचार प्रसार करें।
गरीबी के आंकड़े
मनरेगा से देश के साथ बुंदेलखंड के लोगों को भी रोजगार घर पर ही मिलने का भरोसा जाग्रत हुआ था ,पर योजना भी शासकीय सिस्टम की भेंट चढ़ गई | योजना के बाद भी ना पलायन रुका ना गरीबी घाटी | आज भी आंकड़े बोलते हैं कि देश में गरीबी ४- ५ फीसदी है जबकि बुंदेलखंड में २५ से ३५ फीसदी परिवार गरीबी में जीवन जीने को मजबूर हैं |
हालांकि भारत और बुंदेलखंड में गरीबी के आंकड़े 2011 से 2025 तक काफी बदले हैं, जहां राष्ट्रीय स्तर पर भारी कमी आई लेकिन बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों में प्रगति सुस्त रही। विश्व बैंक रिपोर्ट्स के अनुसार 2011-12 में भारत की अत्यधिक गरीबी दर 27.1% थी, जो 2022-23 तक घटकर 5.3% रह गई और , 2025 में अनुमानित 4-5% के आसपास। बुंदेलखंड (एमपी-यूपी) में 2011 में 40-50% परिवार गरीबी रेखा से नीचे थे, 2025 तक यह 25-35% तक ही सिमटी ।राष्ट्रीय गरीबी में कमी विश्व बैंक के आंकड़ों से भारत ने 2011-12 में 34.4 करोड़ अत्यधिक गरीबों को घटाकर 2022-23 में 7.5 करोड़ कर लिया, यानी 26.9 करोड़ लोग ऊपर आए। 2025 तक ग्रामीण गरीबी 2.8% और शहरी 1.1% अनुमानित |तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट की माने तो बुंदेलखंड में 2011 की 45% गरीबी 2025 तक सर्वे से 28-32% घटी | हालात की यही मज़बूरी है की बुंदेलखंड से हर वर्ष लाखों युवा रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर होते हैं |
ग्राम विकास का जी राम जी मॉडल
मनरेगा में केंद्र मजदूरी का पूरा खर्च वहन करता था, अब 60:40 (पूर्वोत्तर के लिए 90:10, केंद्रशासित को 100%)। कर्ज के मकड़ जाल में फंसी राज्य सरकारें इस योजना के लिए ४० फीसदी बजट कहाँ से लाएंगी ,यह एक बड़ा सवाल है ? जिसका जवाब बीजेपी शासित राज्यों के मौन और गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुखर विरोध में छिपा है |
डिजिटल जादू 2025: ए आई-जीपीएस का सपना
एआई, जीपीएस, बायोमेट्रिक, रीयल-टाइम डैशबोर्ड, साप्ताहिक खुलासा होगा , भ्रष्टाचार भागेगा! लेकिन बुंदेलखंड में ट्राई 2025 के अनुसार 65% गांव नेट रहित। टीकमगढ़ में सोशल ऑडिट ने 70-80 करोड़ भ्रष्टाचार पकड़ा था , अब ए आई बाबा आएंगे और भ्रष्टाचार पकड़ेंगे |
22 दिसंबर, 2025
भाजपा भटक रही क्या सत्ता-लालच में
सप्ताह की हलचल:
भाजपा भटक रही क्या सत्ता-लालच में
धीरेन्द्र कुमार नायक एडवोकेट
2025 का तीसरा सप्ताह - देश की राजनीति में इस सप्ताह ऐसा हंगामा मचा कि भैंस भी चौंक गई! बुन्देलखंडी कहावत याद आई - देर करेगा तो भैंस पडिया जनेगी! आइए आगे की कथा जानते हैं |
. भाजपा का 'नितिन नबीन' धमाका:
चाणक्यनीति या जाति-जुगाड़?भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला लिया, मानो आसमान से बिजली गिरी ! बिहार के लोक निर्माण मंत्री नितिन नबीन जिनके पापा ने विधायक की विरासत थमाई उन्ही को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। नया साल आते ही पूर्ण अध्यक्ष घोषित हो जायेंगे | बड़े कद्दावर चेहरे की तलाश में सालभर भटके, फिर ये युवा 'चमत्कार'!क्यों लिया ये फैसला? आरएसएस? सदस्य बोर्ड? नामुमकिन!
ये तो पीएम, पूर्व अध्यक्ष और उनके 'चाणक्य मीडिया' का कमाल है। चाणक्यनीति याद कीजिए सिंहासन पर कोई बैठे, लेकिन लगाम हाथ में रहे। ईडी-सीबीआई आज के विषकन्या हैं! मेरा नजरिया? जातिवाद से ऊपर उठने का दांव। ब्राह्मण-ठाकुर-यादव-कुर्मी-अनुसूचित जातियों का बोलबाला खत्म। अब भाजपा पर 'छोटी जाति' वाले अध्यक्ष से आरोप नहीं लगेगा जैसे इंदिरा गांधी कहती थीं, हाथ पर मुहर लगेगी, जात-पात नहीं!मध्यप्रदेश के ठाकरे-पटवा-जोशी जैसे दिग्गजों ने दूसरी लाइन खत्म कर तीसरी लाइन बनाई, लेकिन पीएम की कुर्सी के चक्कर में खुद लाइन से बाहर। कर्म का फल तो मिलेगा! दीनदयाल उपाध्याय जी बोले थे सत्ता के दोष बढ़ें तो आर एस एस नया दल खड़ा करेगा। लेकिन आर एस एस बीच में ही थक गया। याद है वीपी सिंह का ग्राफ? रज्जू भैया को सरसंघचालक बनाकर संभाला। आज नितिन नबीन जी को शुभकामनाएं - युवा शिल्पी, बस कुर्सी न लूट लें!
21 दिसंबर, 2025
प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत: बुंदेलखंड के जंगलों में लौटेगी तेज दौड़
बुंदेलखंड की डायरी
प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत: बुंदेलखंड के जंगलों में लौटेगी तेज दौड़
मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को मिली नई गति: नौरादेही में दौड़ेगा चीतों का झुंड
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वी डी टी आर), नौरादेही, सागर को मध्य प्रदेश का चीतों का तीसरा घर बनने की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय से प्रशासनिक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक बाधाओं से अटके प्रोजेक्ट चीता प्रोजेक्ट को अब शासन ने 5.20 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है हालांकि इसकी घोषणा भी बुंदेलखंड में ही सी एम् मोहन यादव ने की थी | बजट के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। नए साल 2026 में यहां चीतों की दहाड़ गूंजने लगेगी, और जुलाई तक 3-4 चीते की शिफ्टिंग होने की पूरी उम्मीद है।
बुंदेलखंड के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वी डी टी आर) मध्य प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व है, जिसे 2023 में इसे देश का 54 टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला है | सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में 2,339.12 वर्ग किलोमीटर में फैले इस टाइगर रिजर्व का 1,414 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 925.12 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है।
रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, भेड़िया, सियार, फॉक्स, धारीदार हाइना और स्लॉथ बियर जैसे 18 स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं। हिरण प्रजातियों में चीतल, सांभर, चिंकारा, नीलगाय, ब्लैकबक और चार सींग वाला चिंकारा(चौसिंगा) शामिल हैं। इसके अलावा 177 पक्षी प्रजातियां,16 मछली,सरीसृप और 10 उभयचर प्रजातियां भी यहाँ पाई जाती हैं |
जैव विविधता से परिपूर्ण यह रिजर्व क्षेत्र सूखे पर्णपाती वनों से आच्छादित है,। नर्मदा-यमुना बेसिन में स्थित होने से यहां विविध भू-आकृति जैसे पहाड़ियां, घाटियां और मैदान हैं। हाल ही में चौसिंगा की दुर्लभ दृष्टि ने जैवविविधता को नई ऊंचाई दी है
प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत
भारत में लुप्त हो चुके चीतों को पुनर्वसित करने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता अब मध्य प्रदेश के तीन टाइगर रिजर्व में फैल चुका है। पहले कुनो नेशनल पार्क और माधव नेशनल पार्क के बाद वी डी टी आर तीसरा गंतव्य बनेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल जैव विविधता को मजबूत करेगा, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए. ए. अंसारी की मानें तो बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मार्च 2026 तक सभी निर्माण कार्य समाप्त हो जाएंगे। इसके बाद चीतों को जुलाई तक यहां लाया जाएगा। मोहाली क्षेत्र में कुल 8 बोमा (बाड़े) तैयार किए जा रहे हैं, जो चीतों के लिए आदर्श आवास साबित होंगे।
क्वारंटाइन से सॉफ्ट रिलीज तक
प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले बाड़ों का डिजाइन चीते की प्राकृतिक आदतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
क्वारंटाइन बोमा: प्रत्येक 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में। यहां चीतों को शिफ्टिंग के बाद प्रारंभिक अवधि (क्वारंटाइन) में रखा जाएगा, ताकि उनकी सेहत और अनुकूलन की जांच हो सके। इसके बाद इन्हे 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले सॉफ्ट रिलीज बोमा रखा जाएगा । ये बाड़े चीतों को धीरे-धीरे जंगलों में छोड़ने के लिए उपयोग होंगे, जहां वे स्वतंत्र रूप से शिकार और घूम सकेंगे। इन बोमा में पानी की व्यवस्था, शिकार के लिए छोटे जानवरों का प्रबंधन, निगरानी के लिए कैमरे और बिजली की व्यवस्था भी रखी जायेगी ।
बोमा चीतों को तनाव मुक्त रखेंगे और रिजर्व के 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उनकी सुरक्षित घुमक्कड़ी सुनिश्चित करेंगे। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, नौरादेही का जंगल चीतों के लिए उपयुक्त है क्योंकि यहां घास के मैदान, पहाड़ियां और शिकार की प्रचुरता उपलब्ध है।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक कुनो में 20 से अधिक चीते लाए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ ने सफलतापूर्वक शावकों को जन्म भी दिया है। वी डी टी आर में आने वाले चीते दक्षिण अफ्रीका या नामीबिया से लाए जा सकते हैं।इसको लेकर स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में उत्साह है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि सागर-दमोह क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर पैदा करेगा। यह परियोजना इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास लाएगी। पर्यावरण जागरूकता अभियान से मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।
स्थानीय निवासियों को जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, ताकि चीतों के साथ सह-अस्तित्व सुनिश्चित हो।गांव विस्थापन के बाद बने खुले मैदान आदर्श साबित होंगे, लेकिन संघर्ष प्रबंधन भी जरूरी है। यह कदम वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय सहयोग को मजबूतकरेगा।
रोजगार अवसरों में वृद्धि
प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को गाइडिंग, ड्राइवर, होटल स्टाफ और 'चीतामित्र' जैसे नए रोजगार मिलेंगे। कुनो नेशनल पार्क के अनुभव से प्रेरित होकर यहां होटल, रिसोर्ट और पर्यटन सेवाओं में निवेश बढ़ेगा। सागर क्षेत्र की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।
नौरादेही चीता दर्शन से पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी, जिससे स्थानीय व्यापार जैसे खान-पान, परिवहन और हस्तशिल्प को लाभ पहुंचेगा। इको-टूरिज्म से क्षेत्रीय आय मेंइजाफा होगा |
आंकड़ों की दौड़ में मध्य प्रदेश सबसे आगे
मध्य प्रदेश प्रोजेक्ट चीता में अग्रणी राज्य बन चुका है, जहां कुनो में 25 चीते (9 वयस्क: 6 मादा, 3 नर; 16 शावक) और गांधी सागर सहित कुल 27 चीते मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) का कुल क्षेत्र 2,339 वर्ग किमी (कोर: 1,414 वर्ग किमी, बफर: 925 वर्ग किमी) है, जो राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम बुंदेलखंड के इको-सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 2026 में नौरादेही के जंगलों में चीतों की तेज दौड़ देखने को मिलेगी, जो राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीति की सफलता का प्रतीक बनेगी। रिजर्व के विशाल घास मैदान पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
दरअसल भारत में चीतों का इतिहास अभी का नहीं बल्कि प्राचीन काल से जुड़ा है | एक समय था जब वे पूरे उपमहाद्वीप में फैले हुए थे। गुफा चित्रों से भी चीतों की उपस्थिति प्रमाणित होती है।
इतिहासकार बताते हैं कि मुगल काल में चीतों का शिकार के लिए उपयोग होता था । सम्राट अकबर के पास 1,000 चीते थे जो काले हिरण और चिंकारा का शिकार करते थे। दिल्ली सल्तनत और राजपूत राजाओं ने भी इन्हें पालतू बनाया, लेकिन कैद में प्रजनन न होने से संख्या घटी।औपनिवेशिक काल में शिकार, खेती विस्तार और पशुपालकों के संघर्ष से चीते कम हुए। 1918-1945 में अफ्रीका से 200 आयात किए गए। 1947 में कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह ने अंतिम तीन चीतों का शिकार किया। 1952 में भारत सरकार ने इसे विलुप्त घोषित किया ।
Political_भगवान भरोसे: अदालत से लेकर ईडी तक, सबका अपना-अपना ड्रामा?
भगवान भरोसे: अदालत से लेकर ईडी तक, सबका अपना-अपना ड्रामा!
अरे भाई, देश की
अदालतें और जांच एजेंसियां भगवान भरोसे चल रही हैं, या यूं
कहें कि भगवान भी इनके फैसलों से थक चुके होंगे! सबसे बड़ा तमाशा तो नेशनल हेराल्ड
केस का है। 2013 में कोर्ट के आदेश पर ईडी ने जांच शुरू की,
12 साल बाद चार्जशीट दाखिल की –और कोर्ट ने?
नहीं लेते संज्ञान! क्यों? क्योंकि
शिकायत किसी निजी व्यक्ति की थी,
जबकि ईडी को तो पुलिस या दूसरी एजेंसी से केस मिलना चाहिए था। वाह अदालत का ये तकनीकी ज्ञान तो ऐसा है
जैसे क्रिकेट में एल बी डब्लू न देने के लिए कहें बॉल पिच पर नहीं पड़ी |
सोनिया-राहुल जैसे बड़े आरोपी हैं, निचली अदालत ने मेरिट पर कुछ नहीं कहा, बस तकनीकी आधार पर रिहा, लेकिन रुकिए, जांच कोर्ट के ही आदेश से शुरू हुई थी। आरोपी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन जांच रुकी क्यों नहीं? सभी को जमानत मिली, मतलब तब तो सभी अदालतें बोलीं ईडी जाओ , पूछताछ हुई, कांग्रेस ने धरने दिए, लेकिन अब अचानक गलत प्रक्रिया कांग्रेस के वकीलों को ये राज़ 12 साल बाद कैसे पता चला? या फिर राजनीति में तो सब जानते हैं, बस मौका देखते हैं।
बीजेपी जब भी
सोनिया-राहुल को भ्रष्ट' साबित करना चाहती, नेशनल
हेराल्ड का जाप शुरू हो जाता था , जमानत को भी गुनाह का सबूत बता दिया। विपक्ष चिल्लाता रहा ईडी-सीबीआई
का दुरुपयोग सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई। अब ईडी अपील करेगी। लगता है,
कांग्रेस-बीजेपी का ये अदावत विचारधारा का नहीं, बल्कि कौन किसे फंसाएगा का
खेल है। यूपीए पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर बीजेपी सत्ता में आई, लेकिन कोर्ट में ज्यादातर साबित नहीं हो पाए | अब नेशनल हेराल्ड का मामला 2000 करोड़ की संपत्ति यंग इण्डिया लिमिटेड को मिटटी के भाव पर ट्रांसफर?
ईडी ने जब पकड़ा, तो खुद ही दिल्ली पुलिस को
केस सौंप दिया। क्यों? क्योंकि चार्जशीट दाखिल करने से पहले
ही आभास हो गया हमारा आधार ही लंगड़ा है |
देश का ये क्लासिक केस है, जहां सर्वोच्च नेता फंसे हैं, लेकिन जांच का आधार ही फर्जी है | कांग्रेस चिल्लाती है फंसाने की
साजिश लेकिन अब लगता है, ईडी इन दोनों को बचाने की कोशिश कर रही। सही प्रक्रिया से जांच होती
तो राहुल-सोनिया जेल के हवाले हो जाते, उनकी इमेज धूल चाटती,
कांग्रेस जमीन पर और पटकनी खाती। वैसे भी, राहुल
के रहते कांग्रेस तीन बार केंद्र में हारी बीजेपी को तो
राहुल का धन्यवाद करना चाहिए | जहां
मुकाबला सीधा वहां कांग्रेस को मुंह की
खानी पड़ी हद तो तब जब जीतती दिखे, तो बयानों से हार का स्वाद चखा |
नेशनल हेराल्ड पर
कोर्ट का संज्ञान न लेना न्याय का ऐसा मजाक है कि लगता है,
सुप्रीम कोर्ट में भी तकनीकी ग्राउंड पर ही सब चलता है। कांग्रेस इसे जीत बता रही राहत मिले तो सत्य
की जय, उल्टा फैसला आए तो 'कोर्ट
खरीदा हुआ भगवान ही रक्षा करे इन सबसे |
15 दिसंबर, 2025
कैबिनेट में छतरपुर को क्या मिला? कुछ नया नहीं।
2025 के दिसंबर का दूसरा सप्ताह सुर्खियों से भरा रहा,
खजुराहो कैबिनेट: तोते का आम, अमरूद के पेड़ पर!
धीरेन्द्र कुमार नायक,
Political_bangal _election_बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, राजनीतिक चेतावनी भी
बंगाल का फैसला: सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं , राजनीतिक चेतावनी भी रवीन्द्र व्यास पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति को एक ब...
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बुंदेलखंड की डायरी सियासी सम्मान दांव पर रवीन्द्र व्यास बुंदेलखंड के सागर संभाग में इस बार 72 .73 मतदान ...
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बुंदेलखंड की डायरी रवीन्द्र व्यास बुन्देलखण्ड से प्रकृति कुछ इस तरह से नाराज हैं कि कभी अवर्षा तो कभी अति वर्...
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सियासी शब्द संग्राम बुंदेलखंड की डायरी रवीन्द्र व्यास बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में प्रधान ...


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