21 दिसंबर, 2025

Political_भगवान भरोसे: अदालत से लेकर ईडी तक, सबका अपना-अपना ड्रामा?

 


भगवान भरोसे: अदालत से लेकर ईडी तक
, सबका अपना-अपना ड्रामा!

 

अरे भाई, देश की अदालतें और जांच एजेंसियां भगवान भरोसे चल रही हैं, या यूं कहें कि भगवान भी इनके फैसलों से थक चुके होंगे! सबसे बड़ा तमाशा तो नेशनल हेराल्ड केस का है। 2013 में कोर्ट के आदेश पर ईडी ने जांच शुरू की, 12 साल बाद चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट ने? नहीं लेते संज्ञान! क्यों? क्योंकि शिकायत किसी निजी व्यक्ति की थी, जबकि ईडी को तो पुलिस या दूसरी एजेंसी से केस मिलना चाहिए था। वाह अदालत का ये तकनीकी ज्ञान तो ऐसा है जैसे क्रिकेट में एल बी डब्लू  न देने के लिए कहें बॉल पिच पर नहीं पड़ी | 

 

सोनिया-राहुल जैसे बड़े आरोपी हैं, निचली अदालत ने मेरिट पर कुछ नहीं कहा, बस तकनीकी आधार पर रिहा, लेकिन रुकिए, जांच कोर्ट के ही आदेश से शुरू हुई थी। आरोपी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन जांच रुकी क्यों नहीं? सभी को जमानत मिली, मतलब तब तो सभी अदालतें बोलीं ईडी जाओ , पूछताछ हुई, कांग्रेस ने धरने दिए, लेकिन अब अचानक गलत प्रक्रिया  कांग्रेस के वकीलों को ये राज़ 12 साल बाद कैसे पता चला? या फिर राजनीति में तो सब जानते हैं, बस मौका देखते हैं।

बीजेपी जब भी सोनिया-राहुल को भ्रष्ट' साबित करना चाहती, नेशनल हेराल्ड का जाप शुरू हो जाता था , जमानत को भी गुनाह का सबूत बता दिया। विपक्ष चिल्लाता रहा ईडी-सीबीआई का दुरुपयोग  सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई। अब ईडी अपील करेगी। लगता है, कांग्रेस-बीजेपी का ये अदावत विचारधारा का नहीं, बल्कि कौन किसे फंसाएगा का खेल है। यूपीए पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर बीजेपी सत्ता में आई, लेकिन कोर्ट में ज्यादातर  साबित नहीं हो पाए |  अब नेशनल हेराल्ड का मामला  2000 करोड़ की संपत्ति यंग इण्डिया लिमिटेड  को मिटटी  के भाव पर ट्रांसफर? ईडी ने जब पकड़ा, तो खुद ही दिल्ली पुलिस को केस सौंप दिया। क्यों? क्योंकि चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही आभास हो गया  हमारा आधार ही लंगड़ा है | 

 

देश का ये क्लासिक केस है, जहां सर्वोच्च नेता फंसे हैं, लेकिन जांच का आधार ही फर्जी है |  कांग्रेस चिल्लाती है  फंसाने की साजिश  लेकिन अब लगता है, ईडी इन दोनों को बचाने की कोशिश कर रही। सही प्रक्रिया से जांच होती तो राहुल-सोनिया जेल के हवाले हो जाते, उनकी इमेज धूल चाटती, कांग्रेस जमीन पर और पटकनी खाती। वैसे भी, राहुल के रहते कांग्रेस तीन बार केंद्र में हारी  बीजेपी को तो राहुल का धन्यवाद करना चाहिए |  जहां मुकाबला सीधा  वहां कांग्रेस को  मुंह की खानी पड़ी हद तो तब जब   जीतती दिखे, तो बयानों से हार का स्वाद चखा | 

 

नेशनल हेराल्ड पर कोर्ट का संज्ञान न लेना न्याय का ऐसा मजाक है कि लगता है, सुप्रीम कोर्ट में भी तकनीकी ग्राउंड पर ही सब चलता है। कांग्रेस इसे जीत बता रही राहत मिले तो सत्य की जय, उल्टा फैसला आए तो 'कोर्ट खरीदा हुआ  भगवान ही रक्षा करे  इन सबसे | 

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