बुंदेलखंड की डायरी
प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत: बुंदेलखंड के जंगलों में लौटेगी तेज दौड़
मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को मिली नई गति: नौरादेही में दौड़ेगा चीतों का झुंड
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वी डी टी आर), नौरादेही, सागर को मध्य प्रदेश का चीतों का तीसरा घर बनने की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय से प्रशासनिक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक बाधाओं से अटके प्रोजेक्ट चीता प्रोजेक्ट को अब शासन ने 5.20 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है हालांकि इसकी घोषणा भी बुंदेलखंड में ही सी एम् मोहन यादव ने की थी | बजट के बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। नए साल 2026 में यहां चीतों की दहाड़ गूंजने लगेगी, और जुलाई तक 3-4 चीते की शिफ्टिंग होने की पूरी उम्मीद है।
बुंदेलखंड के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वी डी टी आर) मध्य प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व है, जिसे 2023 में इसे देश का 54 टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला है | सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में 2,339.12 वर्ग किलोमीटर में फैले इस टाइगर रिजर्व का 1,414 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 925.12 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है।
रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, भेड़िया, सियार, फॉक्स, धारीदार हाइना और स्लॉथ बियर जैसे 18 स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं। हिरण प्रजातियों में चीतल, सांभर, चिंकारा, नीलगाय, ब्लैकबक और चार सींग वाला चिंकारा(चौसिंगा) शामिल हैं। इसके अलावा 177 पक्षी प्रजातियां,16 मछली,सरीसृप और 10 उभयचर प्रजातियां भी यहाँ पाई जाती हैं |
जैव विविधता से परिपूर्ण यह रिजर्व क्षेत्र सूखे पर्णपाती वनों से आच्छादित है,। नर्मदा-यमुना बेसिन में स्थित होने से यहां विविध भू-आकृति जैसे पहाड़ियां, घाटियां और मैदान हैं। हाल ही में चौसिंगा की दुर्लभ दृष्टि ने जैवविविधता को नई ऊंचाई दी है
प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत
भारत में लुप्त हो चुके चीतों को पुनर्वसित करने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता अब मध्य प्रदेश के तीन टाइगर रिजर्व में फैल चुका है। पहले कुनो नेशनल पार्क और माधव नेशनल पार्क के बाद वी डी टी आर तीसरा गंतव्य बनेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल जैव विविधता को मजबूत करेगा, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए. ए. अंसारी की मानें तो बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मार्च 2026 तक सभी निर्माण कार्य समाप्त हो जाएंगे। इसके बाद चीतों को जुलाई तक यहां लाया जाएगा। मोहाली क्षेत्र में कुल 8 बोमा (बाड़े) तैयार किए जा रहे हैं, जो चीतों के लिए आदर्श आवास साबित होंगे।
क्वारंटाइन से सॉफ्ट रिलीज तक
प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले बाड़ों का डिजाइन चीते की प्राकृतिक आदतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
क्वारंटाइन बोमा: प्रत्येक 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में। यहां चीतों को शिफ्टिंग के बाद प्रारंभिक अवधि (क्वारंटाइन) में रखा जाएगा, ताकि उनकी सेहत और अनुकूलन की जांच हो सके। इसके बाद इन्हे 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले सॉफ्ट रिलीज बोमा रखा जाएगा । ये बाड़े चीतों को धीरे-धीरे जंगलों में छोड़ने के लिए उपयोग होंगे, जहां वे स्वतंत्र रूप से शिकार और घूम सकेंगे। इन बोमा में पानी की व्यवस्था, शिकार के लिए छोटे जानवरों का प्रबंधन, निगरानी के लिए कैमरे और बिजली की व्यवस्था भी रखी जायेगी ।
बोमा चीतों को तनाव मुक्त रखेंगे और रिजर्व के 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उनकी सुरक्षित घुमक्कड़ी सुनिश्चित करेंगे। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, नौरादेही का जंगल चीतों के लिए उपयुक्त है क्योंकि यहां घास के मैदान, पहाड़ियां और शिकार की प्रचुरता उपलब्ध है।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक कुनो में 20 से अधिक चीते लाए जा चुके हैं, जिनमें से कुछ ने सफलतापूर्वक शावकों को जन्म भी दिया है। वी डी टी आर में आने वाले चीते दक्षिण अफ्रीका या नामीबिया से लाए जा सकते हैं।इसको लेकर स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में उत्साह है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि सागर-दमोह क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर पैदा करेगा। यह परियोजना इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास लाएगी। पर्यावरण जागरूकता अभियान से मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।
स्थानीय निवासियों को जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, ताकि चीतों के साथ सह-अस्तित्व सुनिश्चित हो।गांव विस्थापन के बाद बने खुले मैदान आदर्श साबित होंगे, लेकिन संघर्ष प्रबंधन भी जरूरी है। यह कदम वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय सहयोग को मजबूतकरेगा।
रोजगार अवसरों में वृद्धि
प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को गाइडिंग, ड्राइवर, होटल स्टाफ और 'चीतामित्र' जैसे नए रोजगार मिलेंगे। कुनो नेशनल पार्क के अनुभव से प्रेरित होकर यहां होटल, रिसोर्ट और पर्यटन सेवाओं में निवेश बढ़ेगा। सागर क्षेत्र की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।
नौरादेही चीता दर्शन से पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी, जिससे स्थानीय व्यापार जैसे खान-पान, परिवहन और हस्तशिल्प को लाभ पहुंचेगा। इको-टूरिज्म से क्षेत्रीय आय मेंइजाफा होगा |
आंकड़ों की दौड़ में मध्य प्रदेश सबसे आगे
मध्य प्रदेश प्रोजेक्ट चीता में अग्रणी राज्य बन चुका है, जहां कुनो में 25 चीते (9 वयस्क: 6 मादा, 3 नर; 16 शावक) और गांधी सागर सहित कुल 27 चीते मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) का कुल क्षेत्र 2,339 वर्ग किमी (कोर: 1,414 वर्ग किमी, बफर: 925 वर्ग किमी) है, जो राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम बुंदेलखंड के इको-सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 2026 में नौरादेही के जंगलों में चीतों की तेज दौड़ देखने को मिलेगी, जो राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीति की सफलता का प्रतीक बनेगी। रिजर्व के विशाल घास मैदान पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
दरअसल भारत में चीतों का इतिहास अभी का नहीं बल्कि प्राचीन काल से जुड़ा है | एक समय था जब वे पूरे उपमहाद्वीप में फैले हुए थे। गुफा चित्रों से भी चीतों की उपस्थिति प्रमाणित होती है।
इतिहासकार बताते हैं कि मुगल काल में चीतों का शिकार के लिए उपयोग होता था । सम्राट अकबर के पास 1,000 चीते थे जो काले हिरण और चिंकारा का शिकार करते थे। दिल्ली सल्तनत और राजपूत राजाओं ने भी इन्हें पालतू बनाया, लेकिन कैद में प्रजनन न होने से संख्या घटी।औपनिवेशिक काल में शिकार, खेती विस्तार और पशुपालकों के संघर्ष से चीते कम हुए। 1918-1945 में अफ्रीका से 200 आयात किए गए। 1947 में कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह ने अंतिम तीन चीतों का शिकार किया। 1952 में भारत सरकार ने इसे विलुप्त घोषित किया ।

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