'बुंदेलखंड की डायरी
जी राम जी' बिल और बुंदेलखंड
रवीन्द्र व्यास
लोकसभा में बिल पेश होते ही विपक्ष ने जिस तरह से जी राम जी बिल को लेकर हंगामा मचाया वह संसदीय गरिमा के अनुकूल नहीं था ,हालंकि यह विपक्ष का कोई पहला तमाशा नहीं था । विपक्ष अपनी पूरी शक्ति से चिल्लाया स्टैंडिंग कमेटी भेजो , सरकार बोली चिंता मत करो 125 दिन का रोजगार पाओ , विपक्ष अब सड़क पर जी राम जी का विरोध कर रही है | ये अलग बात है कि बिल का विरोध जिन मुद्दों के साथ करना चाहिए उस पर कोंग्रेसी मौन हैं | बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है , प्रियंका-खड़गे चीख रहे हैं कि ये 'गरीब-विरोधी हैं , गांधी नाम हटाकर राम नाम जोड़ा गया है , शिवराज जी मुस्कुरा रहे हैं मनरेगा की खामियां दूर कर , विकसित भारत का विजन हमने देश को दिया है | लेकिन बुंदेलखंड के किसान सोचते हैं 2025 की बेबसी में ये राम जी का बिल है या हमारे हालात का मजाक?
100 से 125 दिन का जुमला
योजना कोई भी हो सरकार यह सोचकर लाती है कि इससे उनका राजनैतिक हित भी सधे और जनता को लाभ भी हो जाए | इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रख कर मनरेगा आया था पर इसका असर बुंदेलखंड में क्या रहा , यह तो पलायन के आंकड़े स्वयं बयां करते हैं | सरकार के आंकड़े भी बताते हैं कि 2025 (अप्रैल-अक्टूबर) में एमपी बुंदेलखंड के 13 जिलों में औसत 55 कार्यदिवस, यूपी के 7 जिलों में 48 कार्यदिवस ही काम मिला | इनमे भी बड़े काम ये हुए कि काम मशीनों से हुए और मौके वे मजदुर दिखाए गए जो रोजगार की तलाश में पलायन कर गए |
नया बिल ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की बजाय 125 दिनों का रोजगार गारंटी देता है। कार्यों का दायरा चार क्षेत्रों जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका और जलवायु लचीलापन तक सीमित कर दिया गया है, जबकि मनरेगा में अधिक लचीलापन था।फंडिंग पैटर्न मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता था, लेकिन VB-G RAM G में केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 हो गया है (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10)। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, हालांकि केंद्र शासित प्रदेशों को 100% फंडिंग मिलेगी।
निगरानी और तकनीक नई योजना में एआई, जीपीएस, बायोमेट्रिक सत्यापन, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य है। सभी परिसंपत्तियां विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में जुड़ेंगी, भ्रष्टाचार रोकने के लिए केंद्र-राज्य स्टीयरिंग समितियां बनेगी ।
VB-G RAM G बिल के तहत ग्राम पंचायतों के अधिकारों को सीमित कर दिया गया हैं, जो मनरेगा के विकेंद्रीकृत मॉडल से हटकर केंद्र-प्रधान दृष्टिकोण अपनाया है। इससे स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण और कार्यान्वयन की स्वायत्तता कम हो गई है। कार्य चयन की सीमा ग्राम पंचायतें अब स्वतंत्र रूप से कार्य चुन नहीं सकतीं | जबकि मनरेगा में 29 प्रकार के कार्यों की व्यापक सूची थी, लेकिन नई योजना में केंद्र की स्टीयरिंग कमेटी पूर्व-अनुमोदन देगी।योजना निर्माण पर नियंत्रण ग्राम सभाओं की भूमिका कम हो गई है , सभी योजनाएं विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जुड़ेंगी, जहां केंद्र-राज्य समिति अंतिम मंजूरी लेगी। पंचायतें अब रीयल-टाइम डैशबोर्ड पर जीपीएस-आधारित कार्यों तक सीमित हैं, स्वतंत्र सोशल ऑडिट की जगह ए आई निगरानी प्रमुख है।वित्तीय स्वायत्तता में कमी फंडिंग 60:40 (केंद्र-राज्य) होने से पंचायतों को राज्य सरकारों पर निर्भरता बढ़ जायेगी , मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता था। बिना पूर्व अनुमति के अतिरिक्त कार्य शुरू करने का अधिकार समाप्त हो गया । सीधी बात ये कि अब सरपंच साहब की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा |
मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संवाद
सुशासन दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने वी बी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के बारे में आजीविका मिशन की दीदियों से संवाद कर कई सुनहरे सपने दिखाए | उन्होंने महिलाओं को समझाया कि 125 दिवस का रोजगार एक तिहाई महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य, जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के कार्य प्राथमिकता में लिए जाएंगे। स्वसहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों में आवश्यक अधोसंरचना जैसे वर्किंग शेड, पशु शेड, ट्रैनिंग सेंटर, फलोद्यान, सिंचाई संरचना आदि के काम लिये जाएंगे। काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा ।
पंचायतों की ग्रेडिंग होगी और अधिक आवश्यकता वाली पंचायतों को अतिरिक्त बजट का प्रावधान रखा जाएगा , योजना और अन्य विभागों के कन्वर्जेन्स से विभिन्न कार्य होंगे।कार्य और भुगतान में पारदर्शिता होगी । आधुनिक तकनीक का प्रयोग, वीकली डिस्पोजल की प्रक्रिया होगी , मजदूरी भी बढ़ाई जाएगी। प्रशासनिक व्यय 06 प्रतिशत से बढ़कर 09 प्रतिशत हुआ। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने महिलाओं से आह्वान किया कि अपने अपने गांव में छोटी छोटी बैठकों, सोशल मीडिया प्लेटफार्म आदि में योजना का व्यापक प्रचार प्रसार करें।
गरीबी के आंकड़े
मनरेगा से देश के साथ बुंदेलखंड के लोगों को भी रोजगार घर पर ही मिलने का भरोसा जाग्रत हुआ था ,पर योजना भी शासकीय सिस्टम की भेंट चढ़ गई | योजना के बाद भी ना पलायन रुका ना गरीबी घाटी | आज भी आंकड़े बोलते हैं कि देश में गरीबी ४- ५ फीसदी है जबकि बुंदेलखंड में २५ से ३५ फीसदी परिवार गरीबी में जीवन जीने को मजबूर हैं |
हालांकि भारत और बुंदेलखंड में गरीबी के आंकड़े 2011 से 2025 तक काफी बदले हैं, जहां राष्ट्रीय स्तर पर भारी कमी आई लेकिन बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों में प्रगति सुस्त रही। विश्व बैंक रिपोर्ट्स के अनुसार 2011-12 में भारत की अत्यधिक गरीबी दर 27.1% थी, जो 2022-23 तक घटकर 5.3% रह गई और , 2025 में अनुमानित 4-5% के आसपास। बुंदेलखंड (एमपी-यूपी) में 2011 में 40-50% परिवार गरीबी रेखा से नीचे थे, 2025 तक यह 25-35% तक ही सिमटी ।राष्ट्रीय गरीबी में कमी विश्व बैंक के आंकड़ों से भारत ने 2011-12 में 34.4 करोड़ अत्यधिक गरीबों को घटाकर 2022-23 में 7.5 करोड़ कर लिया, यानी 26.9 करोड़ लोग ऊपर आए। 2025 तक ग्रामीण गरीबी 2.8% और शहरी 1.1% अनुमानित |तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट की माने तो बुंदेलखंड में 2011 की 45% गरीबी 2025 तक सर्वे से 28-32% घटी | हालात की यही मज़बूरी है की बुंदेलखंड से हर वर्ष लाखों युवा रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर होते हैं |
ग्राम विकास का जी राम जी मॉडल
मनरेगा में केंद्र मजदूरी का पूरा खर्च वहन करता था, अब 60:40 (पूर्वोत्तर के लिए 90:10, केंद्रशासित को 100%)। कर्ज के मकड़ जाल में फंसी राज्य सरकारें इस योजना के लिए ४० फीसदी बजट कहाँ से लाएंगी ,यह एक बड़ा सवाल है ? जिसका जवाब बीजेपी शासित राज्यों के मौन और गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुखर विरोध में छिपा है |
डिजिटल जादू 2025: ए आई-जीपीएस का सपना
एआई, जीपीएस, बायोमेट्रिक, रीयल-टाइम डैशबोर्ड, साप्ताहिक खुलासा होगा , भ्रष्टाचार भागेगा! लेकिन बुंदेलखंड में ट्राई 2025 के अनुसार 65% गांव नेट रहित। टीकमगढ़ में सोशल ऑडिट ने 70-80 करोड़ भ्रष्टाचार पकड़ा था , अब ए आई बाबा आएंगे और भ्रष्टाचार पकड़ेंगे |


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