29 दिसंबर, 2025

जी राम जी' बिल और बुंदेलखंड

 'बुंदेलखंड की डायरी


जी राम जी
बिल और  बुंदेलखंड 

रवीन्द्र व्यास 

लोकसभा में बिल पेश होते ही विपक्ष ने जिस तरह से जी राम जी बिल को लेकर हंगामा मचाया वह संसदीय गरिमा के अनुकूल नहीं था ,हालंकि यह विपक्ष का कोई पहला तमाशा नहीं था  । विपक्ष अपनी पूरी शक्ति से  चिल्लाया स्टैंडिंग कमेटी भेजो , सरकार बोली चिंता मत करो  125 दिन का रोजगार पाओ विपक्ष  अब सड़क पर जी राम जी का विरोध कर रही है  | ये अलग बात है कि बिल का विरोध जिन मुद्दों के साथ करना चाहिए उस पर कोंग्रेसी मौन हैं |  बिल को  राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है ,  प्रियंका-खड़गे चीख रहे हैं कि ये  'गरीब-विरोधी हैं , गांधी नाम हटाकर राम नाम  जोड़ा गया है  , शिवराज जी मुस्कुरा रहे हैं  मनरेगा की खामियां दूर कर , विकसित भारत का विजन हमने देश को दिया है लेकिन बुंदेलखंड के किसान सोचते हैं  2025 की बेबसी में ये राम जी का बिल है या हमारे हालात का  मजाक?

 100 से 125 दिन का जुमला

      योजना कोई भी हो सरकार यह सोचकर लाती है कि इससे उनका राजनैतिक हित भी सधे और जनता को लाभ भी हो जाए इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रख कर मनरेगा आया था  पर इसका असर बुंदेलखंड में क्या रहा यह तो पलायन के आंकड़े स्वयं बयां करते हैं सरकार के आंकड़े भी बताते हैं कि    2025 (अप्रैल-अक्टूबर) में एमपी बुंदेलखंड के 13 जिलों में औसत 55 कार्यदिवसयूपी के जिलों  में 48 कार्यदिवस ही काम मिला इनमे भी बड़े काम ये हुए कि काम मशीनों से हुए और मौके वे मजदुर दिखाए गए जो रोजगार की तलाश में पलायन कर गए 

 नया बिल ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की बजाय 125 दिनों का रोजगार गारंटी देता है। कार्यों का दायरा चार क्षेत्रों जल सुरक्षाग्रामीण अवसंरचनाआजीविका और जलवायु लचीलापन तक सीमित कर दिया गया हैजबकि मनरेगा में अधिक लचीलापन था।फंडिंग पैटर्न मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता थालेकिन VB-G RAM G में केंद्र-राज्य अनुपात 60:40 हो गया है (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10)। इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगाहालांकि केंद्र शासित प्रदेशों को 100% फंडिंग मिलेगी।

निगरानी और तकनीक नई योजना में एआईजीपीएसबायोमेट्रिक सत्यापनरीयल-टाइम डैशबोर्ड और साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासा अनिवार्य है। सभी परिसंपत्तियां विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में जुड़ेंगीभ्रष्टाचार रोकने के लिए केंद्र-राज्य स्टीयरिंग समितियां बनेगी ।

VB-G RAM G बिल के तहत ग्राम पंचायतों के अधिकारों को सीमित कर दिया गया  हैंजो मनरेगा के विकेंद्रीकृत मॉडल से हटकर केंद्र-प्रधान दृष्टिकोण अपनाया है। इससे स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण और कार्यान्वयन की स्वायत्तता कम हो गई है। कार्य चयन की सीमा ग्राम पंचायतें अब स्वतंत्र रूप से कार्य चुन नहीं सकतीं |  जबकि मनरेगा में 29 प्रकार के कार्यों की व्यापक सूची थीलेकिन नई योजना में केंद्र की स्टीयरिंग कमेटी पूर्व-अनुमोदन देगी।योजना निर्माण पर नियंत्रण ग्राम सभाओं की भूमिका कम हो गई है सभी योजनाएं विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जुड़ेंगीजहां केंद्र-राज्य समिति अंतिम मंजूरी लेगी। पंचायतें अब रीयल-टाइम डैशबोर्ड पर जीपीएस-आधारित कार्यों तक सीमित हैंस्वतंत्र सोशल ऑडिट की जगह ए आई निगरानी प्रमुख है।वित्तीय स्वायत्तता में कमी फंडिंग 60:40 (केंद्र-राज्य) होने से पंचायतों को राज्य सरकारों पर निर्भरता बढ़ जायेगी मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र वहन करता था। बिना पूर्व अनुमति के अतिरिक्त कार्य शुरू करने का अधिकार समाप्त हो गया । सीधी बात ये कि अब सरपंच साहब की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा 

 मंत्री शिवराज सिंह चौहान का  संवाद

सुशासन दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने वी बी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के बारे में आजीविका मिशन की दीदियों से संवाद कर कई सुनहरे सपने दिखाए  उन्होंने महिलाओं को समझाया  कि 125 दिवस का रोजगार एक तिहाई महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्यजल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के कार्य प्राथमिकता में लिए जाएंगे। स्वसहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों में आवश्यक अधोसंरचना जैसे वर्किंग शेडपशु शेडट्रैनिंग सेंटरफलोद्यानसिंचाई संरचना आदि के काम लिये जाएंगे। काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा ।

 पंचायतों की ग्रेडिंग होगी और अधिक आवश्यकता वाली पंचायतों को अतिरिक्त बजट का प्रावधान रखा जाएगा , योजना और अन्य विभागों के कन्वर्जेन्स से विभिन्न कार्य होंगे।कार्य और भुगतान में पारदर्शिता होगी । आधुनिक तकनीक का प्रयोगवीकली डिस्पोजल की प्रक्रिया होगी मजदूरी भी बढ़ाई जाएगी। प्रशासनिक व्यय 06 प्रतिशत से बढ़कर 09 प्रतिशत हुआ।  केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने  महिलाओं से आह्वान किया कि अपने अपने गांव में छोटी छोटी बैठकोंसोशल मीडिया प्लेटफार्म आदि में योजना का व्यापक प्रचार प्रसार करें। 

 गरीबी के आंकड़े 

मनरेगा से देश के साथ बुंदेलखंड के लोगों को भी रोजगार घर पर ही मिलने का भरोसा जाग्रत  हुआ था ,पर योजना भी शासकीय सिस्टम की भेंट चढ़ गई योजना के बाद भी ना पलायन रुका ना गरीबी घाटी आज भी आंकड़े बोलते हैं कि देश में गरीबी ४- ५ फीसदी है जबकि बुंदेलखंड में २५ से ३५ फीसदी परिवार गरीबी में जीवन जीने को मजबूर  हैं 


 

 हालांकि  भारत और बुंदेलखंड में गरीबी के आंकड़े 2011 से 2025 तक काफी बदले हैंजहां राष्ट्रीय स्तर पर भारी कमी आई लेकिन बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों में प्रगति सुस्त रही। विश्व बैंक रिपोर्ट्स के अनुसार 2011-12 में भारत की अत्यधिक गरीबी दर  27.1% थीजो 2022-23 तक घटकर 5.3% रह गई और , 2025 में  अनुमानित 4-5% के आसपास। बुंदेलखंड (एमपी-यूपी) में 2011 में 40-50% परिवार गरीबी रेखा से नीचे थे, 2025 तक यह 25-35% तक ही  सिमटी ।राष्ट्रीय गरीबी में कमी विश्व बैंक के आंकड़ों से भारत ने 2011-12 में 34.4 करोड़ अत्यधिक गरीबों को घटाकर 2022-23 में 7.5 करोड़ कर लियायानी 26.9 करोड़ लोग ऊपर आए। 2025 तक ग्रामीण गरीबी 2.8% और शहरी 1.1% अनुमानित |तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट की माने तो  बुंदेलखंड में 2011 की 45% गरीबी  2025 तक  सर्वे से 28-32% घटी | हालात की यही मज़बूरी है की बुंदेलखंड से हर वर्ष लाखों युवा रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर होते हैं 

 ग्राम  विकास का जी राम जी मॉडल 

मनरेगा में केंद्र मजदूरी का पूरा खर्च वहन करता थाअब 60:40 (पूर्वोत्तर के लिए 90:10, केंद्रशासित को 100%)। कर्ज के मकड़ जाल में फंसी राज्य सरकारें इस योजना के लिए ४० फीसदी बजट कहाँ से लाएंगी ,यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब बीजेपी शासित राज्यों के मौन और गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुखर विरोध में छिपा है |  

डिजिटल जादू 2025: ए आई-जीपीएस का सपना

एआईजीपीएसबायोमेट्रिकरीयल-टाइम डैशबोर्डसाप्ताहिक खुलासा होगा भ्रष्टाचार भागेगा! लेकिन बुंदेलखंड में ट्राई  2025 के अनुसार 65% गांव नेट रहित। टीकमगढ़ में सोशल ऑडिट ने 70-80 करोड़ भ्रष्टाचार पकड़ा था , अब ए आई बाबा आएंगे और भ्रष्टाचार पकड़ेंगे 



22 दिसंबर, 2025

भाजपा भटक रही क्या सत्ता-लालच में

 सप्ताह की हलचल: 

भाजपा भटक रही क्या सत्ता-लालच में

धीरेन्द्र कुमार नायक एडवोकेट

2025 का तीसरा सप्ताह -  देश की राजनीति में इस सप्ताह ऐसा हंगामा मचा कि भैंस भी चौंक गई! बुन्देलखंडी कहावत याद आई - देर करेगा तो भैंस पडिया  जनेगी! आइए आगे की कथा जानते हैं | 

. भाजपा का 'नितिन नबीन' धमाका: 

चाणक्यनीति या जाति-जुगाड़?भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला लिया, मानो आसमान से बिजली गिरी ! बिहार के लोक निर्माण मंत्री नितिन नबीन  जिनके पापा ने विधायक की विरासत थमाई उन्ही  को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। नया साल आते ही पूर्ण अध्यक्ष घोषित हो जायेंगे |  बड़े कद्दावर चेहरे की तलाश में सालभर भटके, फिर ये युवा 'चमत्कार'!क्यों लिया ये फैसला? आरएसएस? सदस्य बोर्ड? नामुमकिन!

 ये तो पीएम, पूर्व अध्यक्ष और उनके 'चाणक्य मीडिया' का कमाल है। चाणक्यनीति याद कीजिए  सिंहासन पर कोई बैठे, लेकिन लगाम हाथ में रहे। ईडी-सीबीआई आज के विषकन्या हैं! मेरा नजरिया? जातिवाद से ऊपर उठने का दांव। ब्राह्मण-ठाकुर-यादव-कुर्मी-अनुसूचित जातियों का बोलबाला खत्म। अब भाजपा पर 'छोटी जाति' वाले अध्यक्ष से आरोप नहीं लगेगा  जैसे इंदिरा गांधी कहती थीं, हाथ पर मुहर लगेगी, जात-पात नहीं!मध्यप्रदेश के ठाकरे-पटवा-जोशी जैसे दिग्गजों ने दूसरी लाइन खत्म कर तीसरी लाइन बनाई, लेकिन पीएम की कुर्सी के चक्कर में खुद लाइन से बाहर। कर्म का फल तो मिलेगा! दीनदयाल उपाध्याय जी बोले थे  सत्ता के दोष बढ़ें तो आर एस एस  नया दल खड़ा करेगा। लेकिन आर एस एस   बीच में ही थक गया। याद है वीपी सिंह का ग्राफ? रज्जू भैया को सरसंघचालक बनाकर संभाला। आज नितिन नबीन जी को शुभकामनाएं - युवा शिल्पी, बस कुर्सी न लूट लें!


मनरेगा का 'जी राम जी' अवतार: 
नाम बदला, भ्रष्टाचार नहीं?लोकसभा में धमाल! 20 साल पुरानी मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी। पहले महात्मा गांधी को हटाया, अब 'हे राम' पर भरोसा। नया बिल: 100 की जगह 125 दिन गारंटी, मशीनें भी चलेंगी, 60% केंद्र-40% राज्य का खर्च। काम न मिला तो राज्य बेरोजगारी भत्ता दे! डिजिटल निगरानी बायोमेट्रिक, GPS, AI ऑडिट।
लेकिन हंसते हैं हम! 2006 में मनमोहन सिंह ने ग्राम पंचायतों में 5-15 लाख डाले, सरपंचों ने वाहन खरीद लिए। मास्टररॉल पर हाजिरी, नकद भुगतान - चत्तरपुर में तकनीकी अधिकारी करोड़पति बने। बाद DBT आया तो सरपंच बोले, मनरेगा करेगा तो बेमौत नमरेगा! कोविड में बरदान बनी, लेकिन अब? राज्य के पास 40% कहां से लाएंगे? लोकलुभावन योजनाओं से कंगाल हो चुके। नाम जी राम जी, नियत राम भरोसे! गांधी जी को आजाद किया, लेकिन भ्रष्टाचार को नहीं।

 मध्यप्रदेश का कर्जा-महाभारत: 

लाडली बहना ने खजाना चूस लिया!शनिवार को शहरी विकास बैठक  मनोहर लाल खट्टर, मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय। मंत्री जी बोले लाडली बहना-उज्ज्वला-किसान सम्मान से 20-22 हजार करोड़ सालाना उड़ते हैं। कर्ज 4.65 लाख करोड़, ब्याज 30 हजार करोड़, खजाने में बिना कर्ज मात्र 618 करोड़  देश के टॉप-10 अमीरों से कम पीएम आवास बंद, विकास ठप टैक्स लगाओ जनता पर, नगर निगम खुद चलाओ  मंत्री जी की सलाह! जनता सड़क-पानी-बिजली मांगे, तो सरकार किस मुँह से कहे 'खुद संभालो'? विधायक-मंत्रियों की ऐशोआराम के लिए टैक्स दो, भाजपा भटक रही क्या सत्ता-लालच में? सेवा का मार्ग भूलकर पानी सर के ऊपर ? जो करोगे, वही भरोगे!
इस सप्ताह इतना। अगले हफ्ते नई हलचल के साथ मिलते हैं। जय श्री राम!

धीरेन्द्र कुमार नायक एडवोकेट

21 दिसंबर, 2025

प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत: बुंदेलखंड के जंगलों में लौटेगी तेज दौड़

 

बुंदेलखंड की डायरी


प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत: बुंदेलखंड के जंगलों में लौटेगी तेज दौड़

मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट को मिली नई गति: नौरादेही में दौड़ेगा चीतों का  झुंड

रवीन्द्र व्यास 



  बुंदेलखंड के  वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वी डी टी आर)नौरादेहीसागर को मध्य प्रदेश का चीतों का तीसरा घर बनने की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय से प्रशासनिकतकनीकी और प्रक्रियात्मक बाधाओं से अटके प्रोजेक्ट चीता प्रोजेक्ट  को अब  शासन ने 5.20 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है हालांकि इसकी घोषणा भी बुंदेलखंड में ही सी एम् मोहन यादव ने की  थी |  बजट के  बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया है। नए साल 2026 में यहां चीतों की दहाड़ गूंजने लगेगीऔर जुलाई तक 3-4 चीते की शिफ्टिंग होने की पूरी उम्मीद है।


      बुंदेलखंड के   वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वी डी टी आर) मध्य प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व है, जिसे 2023 में इसे देश का 54  टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला है |   सागरदमोह और नरसिंहपुर जिलों में 2,339.12 वर्ग किलोमीटर में फैले इस टाइगर रिजर्व  का  1,414 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 925.12 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। 

रिजर्व में  बाघतेंदुआभेड़ियासियार फॉक्सधारीदार हाइना और स्लॉथ बियर  जैसे 18 स्तनधारी प्रजातियां पाई जाती हैं। हिरण प्रजातियों में चीतलसांभरचिंकारानीलगायब्लैकबक और चार सींग वाला चिंकारा(चौसिंगा) शामिल हैं। इसके अलावा 177 पक्षी प्रजातियां,16 मछली,सरीसृप और 10 उभयचर प्रजातियां भी यहाँ पाई जाती हैं | 


जैव विविधता से परिपूर्ण यह रिजर्व  क्षेत्र सूखे पर्णपाती वनों से आच्छादित है,। नर्मदा-यमुना बेसिन में स्थित होने से यहां विविध भू-आकृति जैसे पहाड़ियांघाटियां और मैदान हैं। हाल ही में चौसिंगा की दुर्लभ दृष्टि ने जैवविविधता को नई ऊंचाई दी है

प्रोजेक्ट चीता की नई शुरुआत

भारत में लुप्त हो चुके चीतों को पुनर्वसित करने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता अब मध्य प्रदेश के तीन टाइगर रिजर्व में फैल चुका है। पहले कुनो नेशनल पार्क और माधव नेशनल पार्क के बाद वी डी टी आर तीसरा गंतव्य बनेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल जैव विविधता को मजबूत करेगाबल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए. ए. अंसारी की मानें तो  बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मार्च 2026 तक सभी निर्माण कार्य समाप्त हो जाएंगे। इसके बाद चीतों को जुलाई तक यहां  लाया जाएगा। मोहाली क्षेत्र में कुल 8 बोमा (बाड़े) तैयार किए जा रहे हैंजो चीतों के लिए आदर्श आवास साबित होंगे।

  क्वारंटाइन से सॉफ्ट रिलीज तक

प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले बाड़ों का डिजाइन चीते की प्राकृतिक आदतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  क्वारंटाइन बोमा: प्रत्येक 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में। यहां चीतों को शिफ्टिंग के बाद प्रारंभिक अवधि (क्वारंटाइन) में रखा जाएगाताकि उनकी सेहत और अनुकूलन की जांच हो सके। इसके बाद इन्हे  100 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले  सॉफ्ट रिलीज बोमा  रखा जाएगा । ये बाड़े चीतों को धीरे-धीरे जंगलों में छोड़ने के लिए उपयोग होंगेजहां वे स्वतंत्र रूप से शिकार और घूम सकेंगे। इन बोमा में  पानी की व्यवस्थाशिकार के लिए छोटे जानवरों का प्रबंधननिगरानी के लिए कैमरे और बिजली की व्यवस्था भी रखी जायेगी ।

बोमा चीतों को तनाव मुक्त रखेंगे और रिजर्व के 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उनकी सुरक्षित घुमक्कड़ी सुनिश्चित करेंगे। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसारनौरादेही का जंगल चीतों के लिए उपयुक्त है क्योंकि यहां घास के मैदानपहाड़ियां और शिकार की प्रचुरता उपलब्ध है।

चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

 प्रोजेक्ट चीता के तहत अब तक कुनो में 20 से अधिक चीते लाए जा चुके हैंजिनमें से कुछ ने सफलतापूर्वक शावकों को जन्म भी  दिया है। वी डी टी आर में आने वाले चीते दक्षिण अफ्रीका या नामीबिया से लाए जा सकते हैं।इसको लेकर स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में उत्साह है। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देगाबल्कि सागर-दमोह क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर पैदा करेगा।  यह परियोजना इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास लाएगी। पर्यावरण जागरूकता अभियान से मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।

स्थानीय निवासियों को जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा हैताकि चीतों के साथ सह-अस्तित्व सुनिश्चित हो।गांव विस्थापन के बाद बने खुले मैदान आदर्श साबित होंगेलेकिन संघर्ष प्रबंधन भी जरूरी है। यह कदम वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय सहयोग को मजबूतकरेगा।

रोजगार अवसरों में वृद्धि

प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को गाइडिंगड्राइवरहोटल स्टाफ और 'चीतामित्रजैसे नए रोजगार मिलेंगे। कुनो नेशनल पार्क के अनुभव से प्रेरित होकर यहां होटलरिसोर्ट और पर्यटन सेवाओं में निवेश बढ़ेगा। सागर क्षेत्र की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।

नौरादेही चीता दर्शन से पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगीजिससे स्थानीय व्यापार जैसे खान-पानपरिवहन और हस्तशिल्प को लाभ पहुंचेगा। इको-टूरिज्म से क्षेत्रीय आय मेंइजाफा होगा |   

आंकड़ों की दौड़ में मध्य प्रदेश सबसे आगे

मध्य प्रदेश प्रोजेक्ट चीता में अग्रणी राज्य बन चुका हैजहां कुनो में 25 चीते (9 वयस्क: 6 मादा, 3 नर; 16 शावक) और गांधी सागर सहित कुल 27 चीते मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) का कुल क्षेत्र 2,339 वर्ग किमी (कोर: 1,414 वर्ग किमीबफर: 925 वर्ग किमी) हैजो राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।

मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम बुंदेलखंड के इको-सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। 2026 में नौरादेही के जंगलों में चीतों की तेज दौड़ देखने को मिलेगीजो राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीति की सफलता का प्रतीक बनेगी।  रिजर्व के विशाल घास मैदान पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।

                                                दरअसल  भारत में चीतों का इतिहास अभी का नहीं बल्कि प्राचीन काल से जुड़ा है | एक समय था  जब वे पूरे उपमहाद्वीप में फैले हुए थे।  गुफा चित्रों से भी चीतों की  उपस्थिति  प्रमाणित होती है।

  इतिहासकार बताते हैं कि   मुगल काल में चीतों का शिकार के लिए  उपयोग होता था । सम्राट अकबर के पास 1,000 चीते थे जो काले हिरण और चिंकारा का शिकार करते थे।  दिल्ली सल्तनत और राजपूत राजाओं ने भी इन्हें पालतू बनायालेकिन कैद में प्रजनन न होने से संख्या घटी।औपनिवेशिक काल में शिकारखेती विस्तार और पशुपालकों के संघर्ष से चीते कम हुए। 1918-1945 में अफ्रीका से 200 आयात किए गए। 1947 में कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह ने अंतिम तीन चीतों का शिकार किया। 1952 में भारत सरकार ने इसे विलुप्त  घोषित किया ।


Political_भगवान भरोसे: अदालत से लेकर ईडी तक, सबका अपना-अपना ड्रामा?

 


भगवान भरोसे: अदालत से लेकर ईडी तक
, सबका अपना-अपना ड्रामा!

 

अरे भाई, देश की अदालतें और जांच एजेंसियां भगवान भरोसे चल रही हैं, या यूं कहें कि भगवान भी इनके फैसलों से थक चुके होंगे! सबसे बड़ा तमाशा तो नेशनल हेराल्ड केस का है। 2013 में कोर्ट के आदेश पर ईडी ने जांच शुरू की, 12 साल बाद चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट ने? नहीं लेते संज्ञान! क्यों? क्योंकि शिकायत किसी निजी व्यक्ति की थी, जबकि ईडी को तो पुलिस या दूसरी एजेंसी से केस मिलना चाहिए था। वाह अदालत का ये तकनीकी ज्ञान तो ऐसा है जैसे क्रिकेट में एल बी डब्लू  न देने के लिए कहें बॉल पिच पर नहीं पड़ी | 

 

सोनिया-राहुल जैसे बड़े आरोपी हैं, निचली अदालत ने मेरिट पर कुछ नहीं कहा, बस तकनीकी आधार पर रिहा, लेकिन रुकिए, जांच कोर्ट के ही आदेश से शुरू हुई थी। आरोपी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन जांच रुकी क्यों नहीं? सभी को जमानत मिली, मतलब तब तो सभी अदालतें बोलीं ईडी जाओ , पूछताछ हुई, कांग्रेस ने धरने दिए, लेकिन अब अचानक गलत प्रक्रिया  कांग्रेस के वकीलों को ये राज़ 12 साल बाद कैसे पता चला? या फिर राजनीति में तो सब जानते हैं, बस मौका देखते हैं।

बीजेपी जब भी सोनिया-राहुल को भ्रष्ट' साबित करना चाहती, नेशनल हेराल्ड का जाप शुरू हो जाता था , जमानत को भी गुनाह का सबूत बता दिया। विपक्ष चिल्लाता रहा ईडी-सीबीआई का दुरुपयोग  सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ठुकराई। अब ईडी अपील करेगी। लगता है, कांग्रेस-बीजेपी का ये अदावत विचारधारा का नहीं, बल्कि कौन किसे फंसाएगा का खेल है। यूपीए पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर बीजेपी सत्ता में आई, लेकिन कोर्ट में ज्यादातर  साबित नहीं हो पाए |  अब नेशनल हेराल्ड का मामला  2000 करोड़ की संपत्ति यंग इण्डिया लिमिटेड  को मिटटी  के भाव पर ट्रांसफर? ईडी ने जब पकड़ा, तो खुद ही दिल्ली पुलिस को केस सौंप दिया। क्यों? क्योंकि चार्जशीट दाखिल करने से पहले ही आभास हो गया  हमारा आधार ही लंगड़ा है | 

 

देश का ये क्लासिक केस है, जहां सर्वोच्च नेता फंसे हैं, लेकिन जांच का आधार ही फर्जी है |  कांग्रेस चिल्लाती है  फंसाने की साजिश  लेकिन अब लगता है, ईडी इन दोनों को बचाने की कोशिश कर रही। सही प्रक्रिया से जांच होती तो राहुल-सोनिया जेल के हवाले हो जाते, उनकी इमेज धूल चाटती, कांग्रेस जमीन पर और पटकनी खाती। वैसे भी, राहुल के रहते कांग्रेस तीन बार केंद्र में हारी  बीजेपी को तो राहुल का धन्यवाद करना चाहिए |  जहां मुकाबला सीधा  वहां कांग्रेस को  मुंह की खानी पड़ी हद तो तब जब   जीतती दिखे, तो बयानों से हार का स्वाद चखा | 

 

नेशनल हेराल्ड पर कोर्ट का संज्ञान न लेना न्याय का ऐसा मजाक है कि लगता है, सुप्रीम कोर्ट में भी तकनीकी ग्राउंड पर ही सब चलता है। कांग्रेस इसे जीत बता रही राहत मिले तो सत्य की जय, उल्टा फैसला आए तो 'कोर्ट खरीदा हुआ  भगवान ही रक्षा करे  इन सबसे | 

15 दिसंबर, 2025

कैबिनेट में छतरपुर को क्या मिला? कुछ नया नहीं।

2025 के दिसंबर का दूसरा सप्ताह सुर्खियों से भरा रहा, 

खजुराहो कैबिनेट: तोते का आम, अमरूद के पेड़ पर!

धीरेन्द्र कुमार नायक,

मध्यप्रदेश के मोहन मुख्यमंत्री ने जब बुन्देलखण्ड के छतरपुर खजुराहो में कैबिनेट बुलाई घोषित की, तो लगा कि अब तो केन-बेतवा का असली रोडमैप बनेगा। मन प्रसन्न हो गया। लेकिन विवादास्पद खर्चे पर नहीं जाना ,ट्रेन में भजन गाते मंत्रीगण महंगे होटल में ठहरे, नई सफारी से जानवर देखे।
 उधर खजुराहो में तीन कर्मचारी भोजन विषाक्तता से मरे, परिजन न्याय मांग रहे थे  मुख्यमंत्री या प्रभारी मंत्री नहीं पहुंचे!
कैबिनेट में छतरपुर को क्या मिला? कुछ नया नहीं। केन-बेतवा पर पुराना ढोल पीटा गया। बचपन में मदारी गांव आते एक तरफ नेवला बांधते, बांस की टोकरी में सांप को बीन बजाते। सांप के कान होते नहीं। फिर क्यों नाचता? धुन से या बीन घुमाने से? मां कहतीं, 
'बिना यह जिय जानके शेष दिए न कान, घरा मेघ सब डोलहे, तानसेन की तान।' 

मादरी सांप-नेवले की लड़ाई दिखाए बिना पैसे बटोर लेता। 65 साल हो गए, लड़ाई कभी नहीं देखी पैसे हमेशा बटोरे।यही केन-बेतवा का हाल! अटलजी गए, उमा भारती रहीं कुछ न हुआ। अब खजुराहो में ढोल पीटा। 
ताजा खबर: एमपी सरकार ने केंद्र को 'सस्ता' प्रस्ताव भेजा—पाइप से नदी जोड़ें, 218 की जगह 149 किमी पाइपलाइन, 78 की जगह 200 मैगावाट ज्यादा बिजली, सिंचाई 4.5 से 6.12 लाख हेक्टर।
 लेकिन ये छतरपुर-पन्ना-टीकमगढ़ से बाहर! हमारा पानी पाइप से ले जाकर मुख्यमंत्री के क्षेत्र के खेत लबालब भरेंगे, हमें सूखे में झुनझुना देकर तसल्ली दें? जैसे आज जिला पानी यूपी भेजता है।कच्ची नहर से पानी बहेगा तो बिना खर्च के कुओं का जलस्तर बढ़ेगा, कृषि रकबा फैलेगा। पाइप से? सिर्फ पूंजीपति विक्रेता को कमीशन! कौन बदलेगा बुन्देलखण्ड का जीवन सांप-नेवला की लड़ाई या सरकार का जुमला? 

मेडिकल कॉलेज 5 साल पहले स्वीकृत, भवन तैयार स्टाफ स्वीकृति तो बस तोते का आम अमरूद के पेड़ पर!

 140 करोड़ के  देश में 5.5 करोड़ केस पेंडिंग: 
न्यायपालिका की 'नियत' या निपटाने की कमी?
लोकसभा में कानून मंत्री बोले: 5.5 करोड़ केस इंतजार में सुप्रीम कोर्ट में 90,897, 25 हाईकोर्ट में 63.63 लाख, निचली अदालतों में 4.84 करोड़। कारण? जटिलता, गवाह, जांच एजेंसी, वकील, अदालतों की कमी। न्यायाधीशों की जिम्मेदारी? का नामोनिशान नहीं!मैं वकील हूं। 50% दोष अदालतों का जो निपटाना चाहें, वकील-गवाह-एजेंसी सब दो महीने में आ जाते। एमपी हाईकोर्ट 5 साल पुराने केस निपटाने का टारगेट देता, बाकी? कोई नहीं पूछता। मित्र वकील ने राजीनामा कराया, एक लाख रिकॉर्ड पर दिलवाए फैसला 6 महीने बाद भी लटका। एक जज को 5 स्टाफ, 3 चपरासी, फर्राश छतरपुर में 11 जज, 20 मजिस्ट्रेट। लेकिन डिस्पोजल? एक जज दिनभर में एक विवादित केस भी नहीं निपटाता।
हकीकत: जज ही काम टालते हैं। 12 बजे कोर्ट, 2 बजे लंच, 3 के बाद शुरू, 5 से पहले बंद 4 घंटे 'कार्य'! वरिष्ठ जज की निगरानी हो, गुटबाजी न हो, तो काम बने। मैंने ऐसे जज देखे, जिन्होंने अपनी-अन्य अदालतों के पेंडिंग निपटाए हाईकोर्ट बंद करनी पड़ी। नियत हो तो संभव!


जनप्रतिनिधियों की निधि में भ्रष्टाचार: पुराना खेल, नया स्टिंग!

भ्रष्टाचार ऐसा कि 'सकल पदार्थ है जग माही, कर्महीन नर पावत नाही।' न किया या न कर पाया, तो उंगली उठती है। RSS सर कार्यवाह हौसबोले जी बोले: काम समय पर न करना भी भ्रष्टाचार! अधिकार अपात्र को देना भ्रष्टाचार। पुराने जमाने में नजराना (काम की गारंटी), शुक्राना (काम होने पर), जबराना (दबाव) आज तीनों मिक्स!

राजस्थान विधायक की निधि पर स्टिंग: विकास फंड में कमीशन सेटिंग। नया क्या? हर जगह चर्चा रहती है। क्रांतिकारी कवि हरिओम पावर ने कविता लिखी—'बंद करवाऊंगा!' लेकिन भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों वाले देश में नैतिकता? हाह!विकास निधि का अधिकार खत्म हो, तो चाटुकार भागेंगे। 80 के दशक की तरह विधायक बैग लटकाए अफसरों के चक्कर लगाएंगे फार्महाउस गायब! मोदीजी की सरकार पारदर्शी बनेगी जब संसद में बिल लाए: निधि सीधे खत्म। तब लोकसभा सदस्य नहीं, 'क्षेत्र सेवक' होंगे। कर्मचारियों पर भय बनेगा। मनरेगा से बापू रोजगार योजना बनाकर भ्रष्टाचार रुकेगा? हंसाओ मत!अगले सप्ताह फिर हलचलों के साथ।

धीरेन्द्र कुमार नायक, एडवोकेट, जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश।

Rivar_मरती नदियाँ आबाद होते माफिया

 


बुंदेलखंड की डायरी 

मरती नदियाँ आबाद होते माफिया 

रवीन्द्र व्यास 

 बुंदेलखंड  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों वाला यह ऐतिहासिक क्षेत्र विंध्याचल की पहाड़ियों से घिरा है। यहां केनबेतवा,, धसानयमुनाजामनीसोनारबागे और उर्मिल जैसी नदियाँ जीवन रेखा हैं। ये न केवल कृषिपेयजल और आजीविका का आधार हैबल्कि उच्च गुणवत्ता वाली लाल बालू जिसे स्थानीय लाल सोना कहते हैं,भी प्रदान करती हैं।  दुर्भाग्य सेअंधाधुंध खनन ने इन नदियों को मृत्यु के कगार पर ला खड़ा किया है। छोटी नदियों को तो राजस्व रिकॉर्ड में नाला बता दिया गया हैजिससे उनका संरक्षण ही असंभव हो गया शहरीकरण की होड़ में रेत की भूख बढ़ रही हैलेकिन बुंदेलखंड की जीवन रेखा केन नदी इसका शिकार बन रही है। पन्ना से बांदा तक बहने वाली इस नदी पर अवैध खनन ने पारिस्थितिकी को तबाह कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का 24 अगस्त 2025 का ऐतिहासिक फैसला जिसने पुनर्भरण अध्ययन बिना जिला सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) को अमान्य घोषित किया,अब केन पर सीधा असर डालेगा। लेकिन माफियाराजनीति और प्रशासन की सांठगांठ से नदी का संकट गहरा रहा है।



   दरअसल  2000 से पहले रेत खनन सीमित और मजदूरी पर आधारित  था,घरेलू जरूरतों के लिए ही नदी की रेत ली जाती थी। उसके बाद जेसीबीपोकलैंड जैसी मशीनों ने नदियों की 20 से 50 तक  फीट तक खुदाई शुरू कर दी। जिससे ना सिर्फ  प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ  बल्कि किनारों की उपजाऊ जमीन नष्ट हो गईं। इन सबका असर ये हुआ कि आज  नदियाँ सूख रही हैंजलस्तर गिर रहा है।किनारे वासियों का संकट नदी  किनारे के किसानकुम्हारमछुआरे और ढीमर बेरोजगार हो गए नतीजतन बुंदेलखंड में  पलायन बढ़ा। 

  खनन के दुष्प्रभाव सामने आने लगे हैं  जलस्तर नीचे जा रहा हैकृषि प्रभावित हो रही हैमिट्टी की नमी  घट रही है।  प्राकृतिक संसाधनों के  अनियंत्रित  दोहन का  असर  जलवायु को भी बिगाड़ रहा  हैं।अवैध खनन पर   एनजीटी में शिकायतें भी हुईंलेकिन कार्रवाई नगण्य। राजनीतिक संरक्षण से केन-बेतवा जैसी नदियाँ के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया  हैं बांदा जिले में केन की लोअर स्ट्रीम सबसे ज्यादाप्रभावित हैजहां खप्टिहा कलां में दर्जनों पोकलेन ,नदी के  बीच से   रेत खोद रही हैं और ब्लैकलिस्ट खदानें (356/1-3) फिर सक्रियहैं। सांडी गांव में रेत खत्म होने पर  खेत गड्ढों में बदल गएकिसानों से जबरन कॉन्ट्रैक्ट लिया जा रहा। डीएमजे. रीभा ने अमलोर खादर और मरौली में छापे मारे डेस्कॉन बिल्डटेक पर 2.32 करोड़ और अन्य पर 39.76 लाख जुर्माना लगायालेकिन आसिफ इकबाल जैसे सिंडिकेट हावी हैं।

पन्ना अजयगढ़ से रामनई तक मशीनों का आतंक पन्ना जिले के अजयगढ़ से शुरू होकर रामनई-बरौली-जिगनी में किमी लंबी खाई बन गईजहां लिफ्टर मशीनें और गुंडे सक्रिय हैं किसान बूढ़ीबाई पर 22 करोड़ जुर्माना लगा था । आनंदेश्वर एग्रो जैसीफर्में  नियम तोड़ रही हैंनदी तल 10 से 15 मीटर गहरा हो गया। केन बचाओ आंदोलन यहां जोर पकड़ रहा है,

 छतरपुर के बीरा-चंदला पुल के  नीचे  पोकलेन पानी में रास्ता बनाकर खनन कर रहीरोज 500 ट्रक रेत ले जाते हैं फायरिंग और विवाद यहाँ  आम बात है  । बरुआ-परेई खदान में 22 ट्रक जब्त हुए थे तटबंध भी टूटे।गौरिहार क्षेत्र में हैवी मशीनें 4-6 फीट मिट्टी हटाकर रेत निकाल रही हैं , यहाँ नदी ने मार्ग बदल लिया  है ।

पर्यावरणीय  क्षति:: जिलों में खनन से भूजल 20-30 फीट नीचे पहुँच गया है ,  महाशीर जैसी  मछलियां लुप्त हो रही हैं , कटान-बाढ़  की समस्या  मिल रही जो अलग है , 2023 की  बाढ़ में बांदा का एक  गांव तबाह हो गया था । आज  हालत केन नदी की बांदा जिले में ऐसी है कि धारा पतली हो गई है ,मानो नदी नहीं कोई नाला बह रहा हो  | नदी किनारे के हेंड पम्प भी मुश्किल से पानी दे रहे हैं माफिया कानपुर-लखनऊ सिंडिकेट से जुड़े वे प्रभावशाली लोग हैं जो  उत्तर प्रदेश ही नहीं एमपी में भी खुदाई करने से नहीं डरते डरता अगर कोई है तो वो है आम आदमी और प्रशासन |   

अगर केन नदी को बचाना है तो नदी के दोनों तटों के  200 मीटर क्षेत्र को  बफर जोन बनाकर  पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए , ड्रोन से निगरानी की जाए , ग्राम पंचायत की  अनुमति ग्राम  सभा के बाद  अनिवार्य करें।रेत को प्रमुख खनिज घोषित कर ई-टेंडरिंग लाएंएम-सैंडप्रोत्साहन दें। बांदा डीएम रीभा की कार्रवाई सराहनीय मानी जायेगी इसी तरह की कार्यवाही पन्ना और छतरपुर कलेक्टर से भी अपेक्षित है  , वरना केन का क्र्रिया कर्म करने में लोभ की राजनीति पीछे नहीं रहेगी |      रेत खनन से जैव-विविधता नष्ट हो रही भू-कटाव-भूस्खलन बढ़ रहे। रेत पानी शुद्ध करने में सहायक होती हैलेकिन सैंड-पंपों ने यह क्षमता छीन ली। वैज्ञानिक खनन नीतिसतत निगरानी और कठोर कार्रवाई जरूरी। सरकार-समाज मिलकर नदियों को बचाएवरना बुंदेलखंड का भविष्य अंधकारमय।

विकास की उमंग और चुनौतियों के संघर्ष का बुंदेलखंड

  बुंदेलखंड की डायरी  विकास की उमंग और चुनौतियों के  संघर्ष का  बुंदेलखंड  रवीन्द्र व्यास  दो राज्य में बटे बुंदेलखंड के लिए    2025  में कई...