03 जनवरी, 2020

CAA. गांधी की इक्षा को कानूनी जामा पहनाया है:: बी डी शर्मा

 पत्रकार वार्ता की
छतरपुर 03 जनसरकार ने तो केवल वही काम किया हैजिसका आदेश महात्मा गांधी ने 26 सितम्बर 1947 को दिया था। 
गांधी जी की इच्छा को कानूनी जामा पहनाने का काम भाजपा ने किया है  गांधी जी ने कहा था-पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू हर नजरिए से भारत आ सकते हैंयदि वह वहां निवास नहीं करना चाहते। उन्हें नौकरी देनाउनके जीवन को सामान्य बनानाभारत सरकार का कर्तव्य  है। यह बात आज बीजेपी के सांसद बी डी शर्मा ने पत्रकार वार्ता में कही ।
 बीजेपी  नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में जनमानस बनाने के लिए हर जिला में  पत्रकार वार्ता  कर रही है ।
 खजुराहो सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी प्रदेश महामंत्री बीडी शर्मा ने कांग्रेस सहित उन सभी दलो   नागरिकता संशोधन के नाम पर देश में आग लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे गांधीजी का भी अपमान कर रहे हैं। 
विरोध करने वालो के पास इस बात का क्या जवाब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 प्रतिशत थी जो आज 3.7 प्रतिशत रह गई है  इसी प्रकार बांग्लादेश में 22 प्रतिशत थी जो आज 7.8 प्रतिशत हो गई है। 
ठीक इसी के उलट भारत में मुस्लिमों की संख्या 9.8 प्रतिशत थीजो आज 14 प्रतिशत के ऊपर हो गई है।नये कानून का विरोध करने वाले और देश में अराजकता फैलाने वालो बताये  कि पाकिस्तान और बांग्लादेश आदि के अल्पसंख्यक हिंदूसिखइसाईजैनबौद्धपारसी आदि को आसमान निगल गया या वे जमीन में समां गए।
पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को स्वभाविक हैया तो मार दिया गयाया धर्म परिवर्तन करा दिया गयाया उन्हें देश छोडक़र भागना पड़ा।
गैर मुसलमानों की बेटियों का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किए गए। पुरूषों को मार दिया गया और बचे-खुचे लोग भारत आ गए हैंउन्हें अब कांग्रेस और वामपंथी जीने का अधिकार देना नहीं चाहते। 
आज नागरिकता संशोधन के नाम पर जो लोग बवाल कर रहे हैंवे भी मुसलमानों के हितचिंतक नहीं हैं। सच तो यह है कि यह वह लोग हैं जिन्होंने मुसलमानों को पीढ़ी दर पीढ़ी डरा कर कभी देश की मुख्य धारा में आने नहीं दिया। नागरिकता संशोधन कानून में बहुत स्पष्ट रूप से नागरिकता देने का प्रावधान हैलेने का नहीं।  कुछ लोग तीन ही देषों का विषय उठा रहे हैंहम उन्हें कहना चाहते हैं कि यह तीनों इस्लामिक देश हैं इसलिए स्वभाविक रूप से वहां धार्मिक आधार पर मुसलमानों का धार्मिक उत्पीडऩ नहीं हो सकता है।  
भारत में पश्चिम बंगाल में 1955 में, 1960 में, 1970 में, 1980 में और 1990 में या फिर 2014 में आए उन सभी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी।  कुछ लोग सोषल मीडिया पर पूछ रहे हैंकि घुसपैठियों और शरणार्थियों में फर्क क्या हैसाफ है कि ऐसे लोगों की बुद्धि खराब है या फिर वह स्वार्थों के कारण मुर्खतापूर्ण बातें कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ हैं। हम ऐसे लोगों को चुनौती देते हैं कि वे पूरे कानून में एक लाइन मुसलमानों के खिलाफ ढंूढकर बताएं। देश में बाहर के मुसलमानों को भी नागरिकता देने का प्रावधान है।  मोदी जी के शासनकाल में ही पिछले वर्षों में 566 मुसलमानों को नागरिकता दी गई है।  अदनाम सामी जैसे तमाम नामीग्रामी लोग आज भारत में रहकर गौरव का अनुभव कर रहे हैंलेकिन उसकी पूर्व निर्धारित प्रक्रिया है जिसके तहत वे आवेदन कर सकते हैं।
कांग्रेसीवामपंथी और मायावती जैसे लोग नागरिकता कानून का विरोध करके उस वर्ग पर भी अत्याचार कर रहे हैंजिसे हम अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग कहते हैंक्योंकि भारत आने वाले शरणार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति के पीडि़त भाई-बहन हैं।
क्यानागरिकता कानून का विरोध करने वाले हिन्दूसिखइसाईजैनबौद्धपारसी आदि की बेटियों और बहनों के साथ पाकिस्तानबांग्लादेश जैसे स्थानों पर किए जा रहे बलात्कारों का अप्रत्यक्ष समर्थन नहीं कर रहे हैंक्याऐसे लोग इन देशों में अल्पसंख्यों के कत्लेआम मंदिरों की तोडफ़ोड़ और संपत्तियों को आग लगाने की आतंकी कार्यवाही का समर्थन नहीं कर रहे?
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को देश को यह बताना चाहिए कि अगर यह पीडि़त शरणार्थी भारत में शरण नहीं लेंगे या भारत इन्हें नागरिकता नहीं देगा तो दुनिया में कौन सा ऐसा देश हैजो इन्हें नागरिकता देने के लिए तैयार होगा  नागरिकता संशोधन अधिनियम के संबंध में कहा 12 दिसम्बर 2019 को विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बना।
अफगानिस्तानबांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताडऩा के कारण आए लोग भारत के नागरिक बन सकेंगे। 
स्वाभाविक हैजिनकी धार्मिक प्रताडऩा हुई हैवह गैर इस्लामिक हैं।
ऐसे सभी लोग जो 31 दिसम्बर 2014 से पूर्व भारत में प्रवेश कर चुके हैं।  पहले यह प्रावधान 11 वर्षों का था और अब वर्षों की निवास अवधि प्रमाणित करनी होगी ।
 शर्मा ने   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह    सब कुछ जानकर भी वोटों के लालच में और अपने आकाओं को खुश करने के लिए नागरिकता कानून को मध्यप्रदेश में लागू नहीं करने की बात कह रहे हैं। 
जबकि नागरिकता देना और नहीं देना यह राज्यों का विषय ही नहीं होता। नागरिकता देश की होती हैप्रदेश की नहीं। यह कमलनाथ भी भलिभांति जानते हैंलेकिन दुर्भाग्य से इस मानवीय विषय पर भी वे वोटों की फसल उंगाने का प्रयास कर रहे हैं। 

पाकिस्तानबांग्लादेश आदि स्थानों पर अल्पसंख्यकों के ऊपर जो अत्याचार हुए हैंउनका विषय आज का नहीं हैजो कांग्रेसी और वामपंथी हंगामा कर रहे हैं। वे जरा यह जान लें कि इस विषय पर कबकिसने क्या कहा:-
साल 2005 में यूपीए सरकार में मंत्री विदेश राज्य मंत्री ई. अहमद ने हयूमन राइट्स कमीषन ऑफ पाकिस्तान की रिपोट्र्स का हवाला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा हो रही है।
साल 2007 में विदेश राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बताया कि पाकिस्तान से हिंदू भारी संख्या में भारत आ रहे हैं। इसके लिए पूर्ववर्ती और तत्कालीन सरकारों ने राहत भी प्रदान की थी ।
साल 2010 में लोकसभा में विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने बताया कि सरकार को पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों की जानकारी है ।
साल 2011 में भी विदेश राज्य मंत्री प्रणीत कौर ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार हिंदुओं के उत्पीडऩ पर चिंतित है ।
साल 2014 में यूपीए सरकार ने आधिकारिक रूप से बताया कि 1,11,754 पाकिस्तानी नागरिक साल 2013 में वीजा लेकर भारत आये हैंलेकिन बड़ी संख्या मं हिंदू और सिख वीजा की अवधि खत्म होने पर भी भारत में रह रहे हैं। 
ऐसा ही बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीडऩ की जानकारी भी सरकारों की जानकारी में थी। साल 2003 में विदेश राज्यमंत्री विनोद खन्ना ने बताया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा और अत्याचार की खबरें समय-समय पर मिलती रहती हैं।
 असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को 20 अपै्रल, 2012 को एक मेमोरंडन दिया था। उन्होंने बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर उत्पीडि़तों को भारतीय बताते हुए कहा कि उन्हें भारत सरकार विदेषियों की तरह बर्ताव न करे। 
 कांग्रेस जिस कानून का विरोध कर रही हैउसके निमित किस महापुरूष ने क्या कहा-12 जुलाई, 1947 की प्रार्थना सभा में महात्मा गांधी ने कहा - जिन लोगों को पाकिस्तान से भगाया गया थाउन्हें पता होना चाहिए कि वे पूरे भारत के नागरिक थे.... उन्हें यह महसूस करना चाहिए कि वे भारत की सेवा करने और उनकी महिमा से जुडऩे के लिए पैदा हुए हैं। 
 27 फरवरी 1950 को कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में जारी बयान पट्टाभि सीतारमैया ने कहा - संघर्ष और पीड़ा का वह सिलसिला जारी है और बार-बार संकट पैदा करता है। वर्तमान में अनिवार्य रूप से पूर्व और पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों की रक्षा करने का मुद्दा है। 
15 नवंबर 1947 को एआईसीसी में जे.बी. कृपलानी ने कहा - हमें पाकिस्तान से आने वालों के लिए भारती संघ के सेवा और समझौतों के संदर्भ में केंद्रीय और प्रांतीय नियमों को सहज कर देना चाहिए।
 25 जनवरी 1948 को नेषनल हेराल्ड में जवाहर लाल नेहरू ने कहा - मुझे लगता है कि केंद्रीय राहत कोष का उपयोग करना वांछनीय होगाजिसका उपयोग किसी भी प्रकार की आपातकालीन राहत के लिए किया जा सकता हैलेकिन जिसका उपयोग अब विषेष रूप से पाकिस्तान से शरणार्थियों के राहत और पुनर्वास के लिए किया जाना चाहिएजो भारत आए हैं।
 फरवरी 1948 को सरदार पटेल के भेजे गये पत्र में अबुल कलाम आजाद ने कहा - षिक्षा मंत्रालय पाकिस्तान से पलायन कर दिल्ली आए सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकांष शरणार्थी षिक्षकों को अवसर प्रदान करने की कोषिष कर रहा है।
 19 अप्रैल 1950 को उद्योग और आपूर्ति मंत्री पद से इस्तीफे पर संबोधन में श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कहा- मैं एक बात कहना चाहता हॅू कि बंगाल की समस्या एक प्रांतीय समस्या नहीं है। यह एक अखिल भारतीय मुद्दे को उठाती है और इसके उचित समाधान पर पूरे देश की आर्थिक और राजनीतिक दोनों तरह की शांति और समृद्धि निर्भर करेगी।
इस सबके बावजूद कांग्रेस और अन्य देशद्रोही ताकतें जो कर रही हैं उसके विरूद्ध जनमानस खड़ा हो चुका

रवीन्द्र व्यास 

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