23 जनवरी, 2020

अंग्रेजी मीडिया मुझे बदनाम करने में लगा है० विवेक अग्निहोत्री

एक संवाद विवेक अग्निहोत्री के साथ_

//रवीन्द्र व्यास//
खजुराहो में  तीन-दिवसीय खजुराहो लिटरेचर फेस्टिवल (केएलएफ 2020)   सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। भारतीय संस्कृति , भारत और भारतीयता के नाम यह   सम्मेलन  खजुराहो में लोकनीति द्वारा आयोजित किया गया था | सम्मलेन में भाग लेने आये जाने माने  फिल्म निर्माता ,निर्देशक और लेखक विवेक अग्निहोत्री ने भाषा से  चर्चा में भारतीय धर्म ,लोक धर्म और आधुनिक पीढ़ी के भटकाव पर चिंता जताई |  

  फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने एक सवाल के जबाब में कहा कि  नई जनरेशन जो है वह  कला साहित्य इन सब से दूर होती  जा रही  है|   मेन कारण यह है कि हम लोग बातें चाहे जितनी करें पर सभी की आकांक्षा यही रहती  है कि बच्चा कान्वेंट में जाए|  हमें लगता है कि हम लोग मॉडर्न हो रहे हैं हम मॉडल नहीं हो रहे हैं बल्कि और पिछड़ रहे हैं अपनी पहचान को अपने अस्तित्व को छोड़ो रहे हैं ,ओढ़ा  हुआ व्यक्तित्व कभी जीवन में खुशी नहीं दे सकता | जो अपनी जड़ों  को ही नहीं  पहचानता उसमें फल नहीं लग सकते ,ऐसा मेरा सोचना है ऐसा मेरा अनुमान है |  मैं भोपाल में पड़ा मुझे कभी खजुराहो के बारे में नहीं पढ़ाया नहीं गया मुझे कभी भोपाल मांडू या ग्वालियर के बारे में पढ़ा या नहीं गया , पढ़ाया गया बड़ी बड़ी चीज  रोमन एंपायर अकबर के बारे में, जब आपको लोकल हिस्ट्री ही नहीं पता आप कुछ भी पढ़ ले तो उससे आपको कोई फायदा नहीं होने वाला|   नई जनरेशन को सही दिशा देने का  दायित्व हमारा ,परिवार  समाज का भी है मीडिया का भी है सरकार का भी है कि सबका कलेक्टिव दाइत्व  है कि उसको संस्कृति और साहित्य से अवगत कराएं |
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  फ़िल्मी दुनिया की व्यस्तता के बावजूद सामाजिक जागरूकता  के लिए सतत कार्य करने के सवाल पर अग्निहोत्री जी ने बताया कि  जो फ्रीडम मूवमेंट आया था उसमें बहुत वॉलिंटियर ने काम किया देश के लिए बहुत काम किया|  अब हम लोग धीरे-धीरे अपने में ही सीमित होते जा रहे हैं ,अपने लिए ही काम करते हैं, देश जाए  भाड़ में ||  बातें खूब करते हैं सोशल मीडिया में लिख दी  दो चार बातें प्रदूषण मत करो पेड़ मत काटो और हमारी जिम्मेदारी खत्म |  मैंने यह सोचा कि मैं क्या कर सकता हूं कोई धन्ना सेठ तो हूं नहीं कि उनको पैसे दे पाऊं पूरी दुनिया में घूमता हूं देखता हूं समझता हूं वह कहानी मैं लोगों को सुना सकता हूं |  इसलिए मैंने जगह जगह जाकर लोगों को कॉलेज में यूनिवर्सिटी में स्कूल में यूथ को अपने स्टोरी से प्रेरणा मिल सके  और उनको भी आप अपने समाज और देश के प्रति गर्व हो सके और भारत के पुनर्निर्माण में अपना योगदान दे सकें |   इसमें अपना छोटा सा हिस्सा प्ले कर सकूं इसलिए ये सब करता हूँ |  इसलिए मैंने एक किताब भी लिखी  इस तरह की फिल्में भी बनाई आप देखिए कि मैं लेख लिखता रहता हूं वीडियो बनाता रहता हूं और उसी दिशा में सारे कार्य हैं | 


 इन दिनों वालीवुड पर ये आरोप लगते हैं कि  हिन्दू विरोधी मानसिकता से फिल्मे बनाई जा रही हैं ?  फिल्मों में हिंदुत्व के विरुद्ध  लगातार किए जा रहे हमले के पीछे के कारणों के संबंध में उन्होंने कहा कि हमारी उपेक्षा का परिणाम है , लोग आप का मजाक उड़ाते रहे ,आपने उस पर ध्यान नहीं दिया उसका कोई जवाब नहीं दिया और आप अपने में ही मशगूल रहे|  आप अपना ही काम करते रहे इसलिए भी धीरे-धीरे यह  जो लोग हैं जिनका कार्य ही यह है जिनको पैसे ही इसी  बात के मिलते  हैं कि वह केवल समाज को तोडे ,|   गलत प्रचार करते रहे हम सहन करते रहे सुनते रहे लेकिन लेकिन अब जो नई जनरेशन हैं वह जागरूक हो गई है इस बात पर वह सवाल खड़े करने लगी है इस बात पर इतने साल से कोई नहीं बोला अब सवाल उठने लगे हैं कि यह गलत हो रहा है यह बात आपने भी नोटिस की होगी बहुत अच्छा परिवर्तन है धीरे-धीरे हालात सुधरेंगे अभी मैं अकेला हूं।  सारा बॉलीवुड एक तरफ मैं अकेला लड़ाई लड़ रहा हूं धीरे धीरे और नए लोग जुड़ते जाएंगे और नए लोगों को प्रेरणा मिलेगी वह सामने आते रहेंगे | 

 अकेले क्यों हैं के सवाल पर उन्होंने कहा के अंग्रेजी मीडिया किसी भी तरह से मुझे बदनाम करने में मेरा बुरा करने में लगा रहता है लेकिन देश का जो रीजनल मीडिया है जो असली मेहनत करने वाले लोग हैं जिनके पास करोड़ों की प्रॉपर्टी नहीं है उन लोगों में मेरा बड़ा प्रेम का रिश्ता है  वह में मेरी बात भी समझते हैं|  फिल्म ताशकंद फाइल को बनाने के पीछे अपने मकसद को उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा मकसद था 1  भारत के नागरिकों को जो मौलिक अधिकार जो होना चाहिए कि हर सच वह जाने हमें हर सच पता चले हमें पता ही नहीं चला देश  के  पीएम की मृत्यु का सच ही पता ना चला तो आप छोटे-मोटे सच के बारे में भूल ही जाइए उसके खिलाफ आवाज उठाने की एक छोटी सी मुहिम थी इसी तरह हमने कश्मीर फाइल भी बनाई उसका सच भी सबके सामने  आया बहुत सारी चीजें हैं जो इस देश में | 

 खजुराहो आए फिल्म निर्माता निर्देशक और लेखक विवेक अग्निहोत्री ने खजुराहो लिट्रेटचेर फेस्टिवल में अपने  विचार व्यक्त करते हुए देश के मौजूदा हालातों के साथ ,धर्म ,अध्यात्म, खजुराहो के मंदिर ,काश्मीर के हिन्दुओं के उत्पीड़न,,राष्ट्र पुनर्निर्माण ,भविष्य के अखंड भारत के बारे में विस्तार से अपने विचार व्यक्त किये थे | 

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