| बुंदेलखंड की डायरी |
केन बेतवा लिंक परियोजना पर लगता ग्रहण
रवीन्द्र व्यास
अप्रेल 2011 में तत्कालीन केंद्रीय वन एव पर्यावरण मंत्री जय राम रमेश ने केन बेतवा लिंक परियोजना पर कहा था कि ,मेने पी.एम्.. को पत्र लिखा है कि अगर ये केन बेतवा लिंक बनेगा तो ये सारा पन्नाटाइगर रिजर्व ख़त्म हो जाएगा , करीब ६० वर्ग कि.मी.एरिया जो शेरों के रहवास क्षेत्र का प्रमुखस्थान है इसका सत्यानाश हो जाएगा । , केन बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व कोख़तरा है हमारा मंत्रालय तो इसकी अनुमति नहीं देगा | जयराम रमेश की बात को सेन्ट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी ) की रिपोर्ट ने सत्य साबित कर दिया है | उच्चतम न्यायलय को 30 अगस्त को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सीईसी ने साफ़ कर दिया है कि इस परियोजना के नाम पर 28 हजार करोड़ रूपये बर्बाद होंगे जो लाभ और पानी के समीकरण बताये जा रहे हैं वह वास्तविकता से दूर हैं | सीईसी की इस रिपोर्ट के बाद केन बेतवा लिंक परियोजना पर ग्रहण के बादल छाने लागे हैं |
देखा जाए तो सरकार का उदेश्य इस तरह की योजनाओ से सिचाई की सुविधा को बढ़ाना ताकि कृषि को लाभकारी बनाया जा सके | सीइसी का मानना है कि वर्षा आधारित केन बेतवा नदी के जोड़ने के पहले सरकार के तंत्र ने इसके वास्तविक उदेश्य को ना समझा और ना ही इसके व्यवहारिक पक्ष को समझा गया | इस योजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का पारिस्थितिकी तंत्र तो प्रभावित होगा ही साथ ही टाइगर के रहवास पर विपरीत असर पड़ेगा | वनव जीवो और वनो के नुक्सान की भरपाई करना संभव नहीं हो सकेगा | सिचाई क्षमता को लेकर जो दावे किये जा रहे हैं वह भी धरातल पर सटीक नहीं बैठते | योजना का विस्तृत अध्ययन करने से स्पस्ट होता है की सिचाई में मामूली सी वृद्धि होगी | सीईसी की रिपोर्ट के अनुसार अनिश्चित वर्षा , नदियों में कम होते बहाव को देखते हुए योजना बनाने वालों को चेक डेम निर्माण ,जल संरक्षण के अन्य उपायों को प्रोत्साहित करना चाहिए इससे बगैर नुक्सान के कृषि को बड़वा दिया जा सकता है |
केन बेतवा लिंक परियोजना पर बिट्टू सहगल और मनोज मिश्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की थी | इनके तथ्यों को ध्यान में रख कर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति सीईसी का गठन किया था | सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी को केन बेतवा लिंक परियोजना पर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया था | जिस पर सीईसी ने 27 से 30 को केन परियोजना क्षेत्र का दौरा कर ३० अगस्त को 93 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी | सीईसी की ओर से दी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का पारिस्थितिकी नष्ट हो सकता है।सीईसी ने परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति द्वारा 23 अगस्त, 2016 को वन्यजीव मंजूरी दिए जाने पर भी सवाल उठाया है। परियोजना के लिये 6017 हेक्टेयर वन भूमि अधिगृहित की जा रही है। इस वन क्षेत्र के डूब में आने से 10,500 हेक्टेयर वन क्षेत्र और प्रभावित होगा। जिससे वन्य प्राणियों का स्वाभाविक विचरण प्रभावित होगा , पन्ना टाइगर रिजर्व दो टुकड़ों में विभाजित हो जाएगा | केन नदी के पानी का बहाव भी मुड़ जाएगा जिससे केन घड़ियाल अभ्यारण्य को भी नुकसान होगा।
परियोजना के लिए पानी की उपलब्धता ::
अपनी रिपोर्ट में सीईसी ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है जिस पानी के नाम पर इस केन बेतवा लिंक परियोजना की बुनियाद तैयार की जा रही है वही पानी परियोजना को कैसे मिल पायेगा यह कैसे सुनिश्चित होगा ? दरअसल केन और बेतवा नदी का भराव क्षेत्र वर्षा जल पर निर्भर है | सूखे पर तमाम रिपोर्ट यह बताती हैं कि सूखे के हालात में दोनों ही नदियों के बेसिन में जल पार्यप्त मात्रा में नहीं रहता है |
परियोजना के तहत केन के सरप्लस पानी को बेतवा में मिलाने को सीईसी उचित नहीं मानती | डीपीआर के अनुसार बेतवा में 384 एमसीएम पानी इस्तेमाल किया जाएगा जबकि उत्तर प्रदेश 50 फीसदी यानी 530 एमसीएम पानी की मांग कर रहा है | जाहिर है केन के पास जब सरप्लस पानी होगा ही नहीं इस दशा में परियोजना विफल हो जायेगी |
केन बेतवा लिंक परियोजना से मात्र 0.38 लाख हेक्टेयर सिचाई क्षेत्र बढ़ेगा
केन बेतवा लिंक परियोजना से दावा किया जा रहा है कि 2. 52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई होगी , जब की केन नदी पर बनी बरियारपुर परियोजना से 2. 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई हो रही है | जाहिर तौर पर उसी केन नदी पर एक और बाँध बनाकर मात्र 0.38 लाख हेक्टेयर सिचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने के लिए सरकार जनता के २८ हजार करोड़ रु स्वाहा करेगी |
केन की अविरल धारा
केन बेतवा लिंक परियोजना से मात्र 0.38 लाख हेक्टेयर सिचाई क्षेत्र बढ़ेगा
केन बेतवा लिंक परियोजना से दावा किया जा रहा है कि 2. 52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई होगी , जब की केन नदी पर बनी बरियारपुर परियोजना से 2. 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई हो रही है | जाहिर तौर पर उसी केन नदी पर एक और बाँध बनाकर मात्र 0.38 लाख हेक्टेयर सिचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने के लिए सरकार जनता के २८ हजार करोड़ रु स्वाहा करेगी |
केन की अविरल धारा
केन नदी म.प्र. के कटनी जिले की कैमूर की पहाड़ी से निकलती है और 427 किमी की दूरी तय करने के बाद उ.प्र. के बांदा जिले में यमुना नदी से मिल जाती है। केन एशिया की ऐसी प्रमुख नदी है जो प्रदुषण से मुक्त मानी जाती है | म.प्र. के रायसेन जिले से निकलने वाली बेतवा नदी 590 किमी की दूरी तय कर उ.प्र. के हमीरपुर जिले में यमुना से मिल जाती है। केन का 28,058 वर्ग किमी और बेतवा का 46,580 वर्ग किमी का भराव क्षेत्र है| केन की कई सहायक नदियों पर कई बाँध और और स्टाप डेम बनने से भी केन की जल धारा प्रभावित हुई है |
केन बेतवा लिंक परियोजना
सरकार और इंजीनियरों की नजर में बुंदेलखंड के छतरपुर,पन्ना,टीकमगण ,झाँसी जिले के लोगों की तक़दीर और तस्वीर बदलने वाली है केन -बेतवालिंक परियोजना। अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब देश की 37 नदियों को आपस मेंजोडने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी | देश की इन 37 नदियों को आपस में जोडने पर 5 लख 60 हजार करोड़ रु .व्यय होने का अनुमान लगाया गया था | |यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था | परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर 30 करोड़ रु,व्यय किये गए हें | 6 हजार करोड़ की इस परियोजना की लागत अब बाद कर 28 हजार करोड़ रु हो गई है । इसका मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व के ढोंडन गाँव में बनना है |बाँध वा नहरों के कारण सवा पांच हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो जाएगा ,छतरपुर जिले के दस गाँव डूब जायेंगे |
केन बेतवा लिंक परियोजना में चार बाँध बनाए जायेंगे |
केन बेतवा लिंक परियोजना में चार बाँध बनाए जायेंगे |
केन नदी पर ढोढन बाँध बनेगा 77 मी.ऊँचा वा 19633 वर्ग कि.मी. जलग्रहण छमता वाले इस मुख्य बाँधमें 2853 एम्.सी.एम्.पानी भंडारण कि छमता होगी| इस बाँध से दो बिजली घर बनेंगे जिससे 78 में.वा. बिजली बनेगी |इस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व कि 5258 हेक्टेयरजमीन सहित कुल 9 हजार हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी | इस जमीन पर बसे सुकुवाहा ,भावरखुवा ,घुगारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा ,डोंदन ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँव का अस्तित्वसमाप्त हो जाएगा | बाँध से 221 कि.मी.लम्बी मुख्य नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकरमिलेगी | इस नहर से 1074 एम्.सी.एम्. पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमेसे 659 एम्.सी.एम्. पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा |
ढोंडन बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर बनेंगे |रायसेन , विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र में,बरारी बेराजसे 2500 हे.वा केसरी बेराज से 2880 हे. क्षेत्र में सिचाई होगी | लिंक नहर से मार्गोंमें 60294 हे. क्षेत्र सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के 46599 हे. वा उत्तर प्रदेशके 13695 हे.क्षेत्र में सिचाई होगी | ढोंडन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि 3.23 लाख हे.जमीन सिंचित होगी होने का दावा किया जा रहा है ।
ढोंडन बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर बनेंगे |रायसेन , विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र में,बरारी बेराजसे 2500 हे.वा केसरी बेराज से 2880 हे. क्षेत्र में सिचाई होगी | लिंक नहर से मार्गोंमें 60294 हे. क्षेत्र सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के 46599 हे. वा उत्तर प्रदेशके 13695 हे.क्षेत्र में सिचाई होगी | ढोंडन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि 3.23 लाख हे.जमीन सिंचित होगी होने का दावा किया जा रहा है ।
असर :
इस बाँध को बनाने के लिए सरकार 9 हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगी , इस भूमि में अकेले टाइगर रिजर्व की 52 58 हेक्टेयर भूमि जा रही है । जिसके कारण टाइगर रिजर्व के लगभग 13 लाख पेड़ डूब जाएंगे , मानव और वन्य जीव पर ख़तरा होगा सो अलग । जिन बाघों से इस इलाके का नाम दुनिया में रोशन हो रहा है उनके घर भी छिन जाएंगे । इस नदी पर बने केन घड़ियाल अभ्यारण्य के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा ।केन घड़ियाल अभ्यारण्य रनेह फाल पर स्थित है । बाँध बनने से पानी बाँध में ही रुक जाएगा जिसके चलते विदेशी सेलानियो के आकर्षण का केंद्र यह सुन्दर फाल जिसे लोग मिनी नियाग्रा फाल के नाम से भी सम्बोधित करते हैं समाप्त हो जाएगा । यहां रहने वाले जलचर घड़ियाल का तो भगवान ही मालिक होगा ।
उजड़ेगा गिद्धों का घरौंदा भी _ इस परियोजना के बनने से पार्क के अंदर पाये जाने वाले 7प्रजातियो के गिद्ध का घरोंदा भी उजड़ जाएगा । यहां लगभग दो हजार से ज्यादा गिद्ध पाये जाते हैं | दरअसल दुनिया में और भारत में गिद्ध और बाघ तेजी से समाप्त हो रहे हैं, ऐसे में धरा की इस नस्लों को बचाने के लिए दुनिया भर प्रयास हो रहे हैं । दुनिया में भारत्त ही ऐसा देश होगा जहां इन नस्लों को नेस्तनाबूत करने की योजना सरकार ने बनाई है ।
सरकार और उसके नुमाइंदो को विकाश की और सिचाई वा पानी की बर्बादी रोकने की इतनी ही चिंता है तो सबसे पहले उसे बुंदेलखंड के भूगोल और भूगर्भ समझना होगा । बुंदेलखंड की टोपोग्राफी इतनी शानदार है की कम लागत में यहां के गाँव -गाँव में विशाल सरोवरों का निर्माण किया जा सकता है । जिससे यहां के किसानो की सिचाई का संकट दूर होगा साथ ही जलीय फसल और मछली उत्पादन का काम गाँव वालों को मिलेगा । इन तालाबों को बाढ़ वाली नदियों से चैन सिस्टम से भरा भी जा सकता है ।
जिस केन नदी पर इस विशाल बाँध को बनाया जा रहा है वह दरअसल बाढ़ वाली नदी नहीं कही जा सकती । कटनी जिले से निकल नदी बांदा जिले में यमुना में कर विलीन हो जाती है । एशिया की यह साफ़ सुथरी नदियों में गिनी जाती है । निर्मल प्रवाह से से टाइगर रिजर्व के जीवों की प्यास भी बुझती है | इस परियोजना पर जितना पैसा लगाया जा रहा है यदि उसे गाँव का पानी गाँवमें रोकने पर खर्च किया जाए तो बुंदेलखंड के हर गाँव में खुशहाली छा जायेगी |
अब यहाँ सरकार को यह बात समझ में शायद नहीं आती की ,या वह समझना नहीं चाहती कीएक ओर पन्ना टाइगर रिजर्व हे , जिसको बचाए रखने का दावा सरकार करती रहती है | बाघोंको बचाने के लिए सरकार ने खजाना खोल रखा है " दूसरी ओर वही सरकार पार्क एरिया में बाँधबनाकर बाघों को भी विस्थापित करने पर आमादा है ।

1 टिप्पणी:
की शानदार खबर तथ्यों से भरपूर सटीक जानकारी कारण निदान खबर पढ़कर सोचने को मजबूर बहुत ही शानदार जानकारी
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