बुंदेलखंड की डायरी
रवीन्द्र व्यास
बुन्देलखण्ड से प्रकृति कुछ इस तरह से नाराज हैं कि कभी अवर्षा तो कभी अति वर्षा से यहां के किसानो की जीवन से चैन चुराने में जुटी है | लगातार सूखे की मार झेलते बुंदेलखंड में अब आफत की बारिश हो रही है | मानसून की शुरुआती बारिश इतनी कमजोर थी की लोगों को भविष्य के पीने का संकट नजर आने लगा था , उसी को देख किसानो ने फसल बोई थी बारिश के विदा होने के काल में ऐसा कहर बरपा है कि धान और मूंगफली को छोड़ कर सारी फसलें खेत पर ही सड़ने लगी हैं | किसानो के सामने फिर से जो हालात बने हैं उसको लेकर किसान खासे चिंतित नजर आने लगे हैं | बड़ी संख्या में किसानो के पलायन का सिलसिला भी शुरू हो गया है |
15 जून से 15 सितम्बर तक बुंदेलखंड के अधिकाँश जिलों के किसान औसत वर्षा की कामना कर रहे थे | इसके बाद हुई वर्षा ने बांधो, नदी,नालों को लबालब कर दिया | हालत ये हो गए कि छतरपुर जिले में जिन बांधों के गेट लोगों ने वर्षों से नहीं खुले देखे थे वह गेट भी इस बार की बारिश में खुल गए | लहचूरा बाँध ,रनगुंवा बाँध , उर्मिल बाँध के गेट खोले गए जबकि गंगऊ,बेनीसागर और बरियारपुर बाँध ओवर फ्लो सिस्टम पर कार्य करते हैं जिसके चलते ये बाँध के ऊपर से पानी बह रहा है |
महराजपुर विधान सभा क्षेत्र के सिंहपुर बाँध के जल भराव के कारण इसके नजदीक के एक दर्जन से ज्यादा गाँव प्रभावित हो गए | जल भराव से प्रभावित मुखर्रा और सिंहपुर गाँव का महराजपुर विधायक नीरज दीक्षित और कलेक्टर मोहित बुंदस ने दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना | गाँव में कलेक्टर और विधायक ने पानी से प्रभावित फसलों ,और घरों को देख कर फसल नुकसानी का सर्वे करने के आदेश दिए। कलेक्टर और विधायक ने जरुरत पड़ने पर बांध के गेट खोले जाने के लिए भी सहमति दी ।
महराजपुर विधान सभा क्षेत्र के सिंहपुर बाँध के जल भराव के कारण इसके नजदीक के एक दर्जन से ज्यादा गाँव प्रभावित हो गए | जल भराव से प्रभावित मुखर्रा और सिंहपुर गाँव का महराजपुर विधायक नीरज दीक्षित और कलेक्टर मोहित बुंदस ने दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना | गाँव में कलेक्टर और विधायक ने पानी से प्रभावित फसलों ,और घरों को देख कर फसल नुकसानी का सर्वे करने के आदेश दिए। कलेक्टर और विधायक ने जरुरत पड़ने पर बांध के गेट खोले जाने के लिए भी सहमति दी ।
बुंदेलखंड का सर्वाधिक बाँध वाला उत्तर प्रदेश का ललितपुर जिला भी इन दिनों पानी के प्रलय से हलाकान है | यह स्थिति सिर्फ छतरपुर या ललितपुर भर की नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश के सागर ,दमोह, टीकमगढ़ , निवारी ,पन्ना और उत्तर प्रदेश के झाँसी ,बांदा ,हमीरपुर ,बांदा , जालौन ,और महोबा के भी हैं |
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सितंबर माह में 32 वर्षों के बाद इतनी बारिश देखने को मिली है। मानसून के इस दौर में जब सारा देश जल से बेहाल था उस समय बुन्देलखण्ड के (सागर और दमोह जिले को छोड कर) लोग सूखे की आशंका से त्रस्त थे। लोगों को यह चिंता सता रही थी कि आने वाले समय में पीने के पानी की जुगाड़ कहा से हो पायेगी ।बारिश की कमी को देखते हुए अधिकांश किसानों ने कम पानी में होने वाली फसलें तिल, उरद, मूँग बोई थी, जिनके पास पानी के थोड़े बहुत साधन थे उन किसानों ने सोयाबीन बोया था पर जिस तरह से वर्षा हुई है उसको लेकर अब वह किसान भी खासे परेशान हैं । बारिश ने उनके अरमानो पर भी पानी फेेर दिया है । सितंबर मध्य से हो रही लगातार बारिश ने किसानों की खुशी पर तो मानो ग्रहण ही लगा दिया ।
बुन्देलखण्ड के किसान एक बार फिर से सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है । छतरपुर जिले में तो किसानो के प्रदर्शनों का दौर ही शुरू हो गया है | पिछले दिनों लवकुशनगर में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानो ने प्रदर्शन कर एसडीएम को खराब हुई फसलें दिखाई और ज्ञापन सौंपा | छतरपुर में राजयपाल के नाम अतिवर्षा के कारण खराब हुई फसलों का मुआवजा, किसान त्रण माफी, प्रधानमंत्री बीमा योजना, सरकारी अव्यवस्था जैसी मांगों पर प्रदर्शन कर किसानों ने ऐ.डी.एम छतरपुर को सौंपा। आप पार्टी के नेता अमित भटनागर कहते हैं की असल में बुंदेलखंड के किसान और आम जन को कई मोर्चे पर लड़ाई लड़ना पड़ रही है | एक तो प्रकृति उससे रूठी है कभी सूखा पड़ता है कभी ओले में बर्बाद होता है और कभी कभी अति वृष्टि से बर्बाद हो जाता है | दूसरा इस इलाके की राजनैतिक पार्टिया चाहे वे कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही उसके साथ छल करती हैं चाहे वह फसल बीमा हो ,ऋण माफ़ी का ख्वाब हो अथवा फसल के उचित मूल्य मिलने की बात हो | तीसरा उसे स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं से भी संघर्ष करना पड़ता है राजस्व, बिजली , स्वास्थ्य जैसी समस्यायों से उसे हर रोज जूझना पड़ता है |
सागर कमिश्नर ने पानी से बर्बाद हुई फसलों के सर्वेक्षण के आदेश पर खराब हुई खरीफ फसल के सर्वे कराया जा रहा है |
असल में बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड के 14 में वर्षा का औसत 750 से 1200 मिमी का है | इस मानसून में बारिश की अनियमितता के बाद हुई लगातार बारिश ने बाँध तालाब तो भर दिए पर खेत उजाड़ दिए | बीहड़ों का रकबा और बड़ा दिया | ये उस बुंदेलखंड की दशा है जहां सूखा एक स्थाई नियति बन गया है | वर्षा के दिन घट गए हैं वर्षा के औसत में भी लगातार गिरावट दर्ज होती रही है | मानो बुंदेलखंड के किसानो की हर मेहनत पर प्रकृति पानी फेरने पर जुटी हो |
घर गिरे और जान भी गई : अतिवृष्टि से ना सिर्फ फसलें बर्बाद हुई हैं बल्कि बुंदेलखंड के एक सैकड़ा से ज्यादा कच्चे घर धरासाई हो गए | पानी में बहने , घरों में दबने और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से उत्तर प्रदेश औरमध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में 84 से ज्यादा लोगों की जाने चली गई |
पलायन की शुरुआत :
हालांकि अभी सामने दीपावली जैसा त्यौहार सामने है पर हालात को देखते हुए मजबूर आदिवासी समाज का पलायन आंशिक तौर पर शुरू हो गया है | निकट के नगरीय क्षेत्र में मजदूरी की तलाश में दूर से किसान भी आने लगे हैं | दीपावली और ग्यारस के बाद पलायन का क्रम बढ़ेगा | हालांकि पानी की उपलब्धता बढ़ने के कारण किसान को रवि फसलों से बड़ी उम्मीद अभी भी है |







