29 सितंबर, 2019

बारिश से बेहाल हुआ बुंदेलखंड


बुंदेलखंड की डायरी  
रवीन्द्र व्यास

बुन्देलखण्ड से प्रकृति कुछ इस तरह से नाराज हैं कि कभी अवर्षा तो   कभी अति वर्षा से यहां के  किसानो  की जीवन से चैन चुराने में जुटी है लगातार सूखे की मार झेलते बुंदेलखंड में अब आफत की बारिश हो रही है मानसून की शुरुआती बारिश इतनी कमजोर थी की लोगों को भविष्य के पीने का संकट नजर आने लगा था उसी को देख किसानो ने फसल बोई थी बारिश के विदा होने के काल में ऐसा कहर बरपा है कि धान और मूंगफली को छोड़ कर सारी फसलें खेत पर ही सड़ने लगी हैं किसानो के सामने फिर से जो  हालात  बने हैं उसको लेकर किसान खासे चिंतित नजर आने लगे हैं बड़ी संख्या में किसानो के पलायन का सिलसिला भी शुरू हो गया है 


                             15 जून से 15  सितम्बर तक बुंदेलखंड के अधिकाँश जिलों के किसान औसत वर्षा की कामना कर रहे थे इसके बाद हुई वर्षा ने  बांधोनदी,नालों को लबालब कर दिया हालत ये हो गए कि छतरपुर जिले में  जिन बांधों के गेट लोगों ने वर्षों से नहीं खुले देखे थे वह गेट भी इस बार की बारिश में खुल गए लहचूरा बाँध ,रनगुंवा बाँध उर्मिल बाँध के गेट खोले गए जबकि गंगऊ,बेनीसागर  और बरियारपुर बाँध ओवर फ्लो सिस्टम पर कार्य करते हैं जिसके चलते ये बाँध के ऊपर से पानी बह रहा है 

महराजपुर विधान सभा क्षेत्र के सिंहपुर बाँध के जल भराव के कारण इसके नजदीक के एक दर्जन से ज्यादा गाँव प्रभावित हो गए |  जल भराव से प्रभावित  मुखर्रा और सिंहपुर गाँव का  महराजपुर विधायक नीरज दीक्षित और  कलेक्टर मोहित बुंदस ने दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना  | गाँव में  कलेक्टर और विधायक ने   पानी से प्रभावित फसलों ,और घरों को देख कर  फसल नुकसानी का सर्वे करने के आदेश दिए।  कलेक्टर और विधायक ने जरुरत पड़ने पर  बांध के गेट खोले जाने के लिए भी सहमति दी  ।

                                              बुंदेलखंड का सर्वाधिक बाँध वाला उत्तर प्रदेश का ललितपुर जिला भी इन दिनों  पानी के प्रलय से हलाकान है यह स्थिति सिर्फ छतरपुर या ललितपुर भर की नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश के सागर ,दमोहटीकमगढ़ निवारी ,पन्ना और उत्तर प्रदेश के झाँसी ,बांदा ,हमीरपुर ,बांदा जालौन ,और महोबा के भी हैं |  
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार  सितंबर माह में  32 वर्षों के बाद इतनी बारिश   देखने को मिली  है। मानसून के इस दौर में  जब सारा देश जल से  बेहाल था उस समय बुन्देलखण्ड के (सागर और दमोह जिले को छोड  कर) लोग सूखे  की आशंका से त्रस्त थे। लोगों को यह चिंता सता रही थी कि आने वाले समय में पीने के पानी की जुगाड़ कहा से हो पायेगी ।बारिश की कमी को देखते हुए अधिकांश किसानों ने कम पानी में होने वाली फसलें  तिलउरदमूँग बोई थी,  जिनके पास पानी के थोड़े बहुत साधन थे उन किसानों ने सोयाबीन बोया था पर जिस तरह से वर्षा हुई है उसको लेकर अब वह किसान भी खासे परेशान हैं । बारिश ने उनके अरमानो पर भी  पानी फेेर दिया है ।   सितंबर मध्य  से हो रही लगातार बारिश  ने किसानों की खुशी पर तो मानो ग्रहण ही लगा दिया । 

बुन्देलखण्ड के किसान एक बार फिर से सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है । छतरपुर जिले में तो किसानो के प्रदर्शनों का दौर ही शुरू हो गया है | पिछले दिनों लवकुशनगर में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानो ने प्रदर्शन कर एसडीएम को खराब हुई फसलें दिखाई और ज्ञापन सौंपा |  छतरपुर में  राजयपाल के नाम   अतिवर्षा के कारण खराब हुई  फसलों का मुआवजाकिसान त्रण माफीप्रधानमंत्री बीमा योजनासरकारी अव्यवस्था जैसी  मांगों पर प्रदर्शन कर किसानों ने  ऐ.डी.एम छतरपुर को सौंपा। आप पार्टी के नेता अमित भटनागर कहते हैं की असल में बुंदेलखंड के किसान और आम जन को कई  मोर्चे पर लड़ाई लड़ना पड़ रही है | एक तो प्रकृति उससे रूठी है कभी सूखा पड़ता है कभी ओले में बर्बाद होता है और कभी कभी अति वृष्टि से बर्बाद हो जाता है | दूसरा इस इलाके की राजनैतिक पार्टिया चाहे वे कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही उसके साथ छल करती हैं चाहे वह फसल बीमा हो ,ऋण माफ़ी का ख्वाब हो अथवा फसल के उचित मूल्य मिलने की बात हो | तीसरा उसे स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं से भी संघर्ष करना पड़ता है राजस्व, बिजली , स्वास्थ्य जैसी समस्यायों से उसे हर रोज जूझना पड़ता है | 
                    सागर  कमिश्नर ने पानी से बर्बाद हुई फसलों के सर्वेक्षण के आदेश पर खराब हुई खरीफ फसल के सर्वे कराया जा रहा है | 
असल में बुंदेलखंड के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश वाले बुंदेलखंड के 14 में वर्षा का औसत 750 से 1200 मिमी का है | इस मानसून में बारिश की अनियमितता के बाद हुई लगातार बारिश ने बाँध तालाब तो भर दिए पर खेत उजाड़ दिए | बीहड़ों का रकबा और बड़ा दिया | ये उस बुंदेलखंड की दशा है जहां सूखा एक स्थाई नियति बन गया है | वर्षा के दिन घट गए हैं वर्षा के औसत में भी लगातार गिरावट दर्ज होती रही है | मानो बुंदेलखंड के किसानो की हर मेहनत पर प्रकृति पानी फेरने पर जुटी हो | 
 घर गिरे और जान भी गई :         अतिवृष्टि से ना सिर्फ फसलें बर्बाद हुई हैं बल्कि बुंदेलखंड के एक सैकड़ा से ज्यादा कच्चे घर धरासाई हो गए |  पानी में बहने , घरों में दबने और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से उत्तर प्रदेश औरमध्य प्रदेश के  बुंदेलखंड इलाके में 84 से ज्यादा लोगों की जाने चली गई | 
पलायन की शुरुआत :
हालांकि अभी सामने दीपावली जैसा त्यौहार सामने है पर हालात को देखते हुए मजबूर आदिवासी समाज का पलायन आंशिक तौर पर शुरू हो गया है | निकट के  नगरीय क्षेत्र में मजदूरी की तलाश में दूर से किसान भी आने लगे हैं | दीपावली और ग्यारस के बाद पलायन का क्रम बढ़ेगा | हालांकि पानी की उपलब्धता बढ़ने के कारण किसान को रवि फसलों से बड़ी उम्मीद अभी भी है | 
            
             

25 सितंबर, 2019

पंचायत भवन के सामने शौच करने पर दलित मासूमों की हत्या

पंचायत भवन के सामने  शौच करने पर  दलित  मासूमों की  हत्या

भोपाल/ एमपी/  25 सितंबर19

  मध्यप्रदेश के शिवपुरी   जिला के  ग्राम भाव खेड़ी में एक व्यक्ति ने  आज सुबह   पंचायत भवन के सामने  खुले में शौच कर रहे  दलित  परिवार के दो बच्चों की लाठियों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या के आरोप में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है ।

सिरसौद थाना प्रभारी आर एस धाकड़ के अनुसार   गांव  में आज सुबह गांव के रहने वाली रोशनी  पुत्री कल्ला बाल्मीक (12 ),आविनाश पुत्र मनोज बाल्मीकि (10)  गांव के पंचायत भवन के पास सडक पर  खुले में शौच कर रहे थे। तभी गांव का ही रहने वाला हाकिम सिंह यादव अपने साथी रामेश्वर यादव  के साथ वहां आया और खुले के शौच कर रहे इन दोनों मासूमो बच्चो को  दोनो लाठी से पीटने लगा ।जिसके चलते दोनों की हालत गंभीर हो गई ।  घायल बच्चो को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां  डॉक्टरो ने मृत घोषित कर दिया।थाना प्रभारी का कहना है कि ग्रामीण हत्यारोपी हाकिम यादव की मानसिक स्थिति ठीक नहीं बता रहे ।पुलिस को उसकी मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है
फरार हत्यारोपी हाकिम यादव और रामेश्वर यादव  को मनोज वाल्मीकि की रिपोर्ट पर  पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 

 रोशनी और अविनाश रिशते में बुआ भतीजे बताए जा रहे हैं।
   यादव बाहुल्य इस  गांव में दलित परिवार का एक ही घर  हैं,। घटना की खबर लगते ही  दलित परिवार के रिश्तेदार इस गांव में पहुंचना शुरू हो गए हैं। दूसरी तरफ तनाव की स्थिति को देखते हुए  पुलिस बल गांव  में पहुंचा दिया गया है ।
 

भिंड जिले में हुआ क्रैश एयरफोर्स का मिग-21




, दोनों पायलट सुरक्षित

   भोपाल/ एमपी/  एक मिग-21 एयरक्राफ्ट आज   सुबह भिंड जिले के गोहद इलाके में क्रैश हो गया। क्रैश होते ही  एयरक्राफ्ट में आग लग गई।  दोनों पायलट  ने कूद कर अपनी जान बचाई । 


 बताया  जाता है कि आज  सुबह साडे दस  बजे यह हादसा भिंड जिले के आलोरी गांव के पास चौधरी का पुरा खेतों में  हुआ।जहां एयरफोर्स का मिग-21 एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया।   दोनों पायलट  एयरक्राफ्ट में आग लगते ही सुरक्षित बाहर कूद कर निकलने में सफ़ल रहे। घटना की खबर लगते ही ग्वालियर से एयर फोर्स के दो हेलिकॉप्टर मौके पर पहुंच गए ।  एयरफोर्स की सेंट्रल कमांड अब     एयरक्राफ्ट के क्रैश होने के कारणों की पड़ताल करने में जुटी है ।

17 सितंबर, 2019

As soon as hearing the punishment, the accused of rape ravaged the neck

सजा सुनते ही दुष्कर्म के आरोपी ने काट ली गर्दन की नश 

 
छतरपुर। मंगलवार की शाम जिला न्यायालय परिसर में स्थित न्यायाधीश नोरिन निगम की अदालत में एक सनसनीखेज घटना सामने आई। अदालत के कटघरे में खड़े एक रेप के आरोपी ने सजा सुनते ही अपने गले को चाकू से काट लिया। आरोपी अपने साथ चाकू छिपाकर अदालत में आया था जैसे ही अदालत ने उसे 10 साल की कैद और पांच हजार रूपए के जुर्माने की सजा सुनाई उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के बाद अदालत परिसर में हडक़ंप मच गया। अदालत में मौजूद पुलिसकर्मी और आरोपी के परिजन उसे जिला अस्पताल लाए जहां से गंभीर हालत में उसे ग्वालियर रिफर कर दिया गया है।


मूलत: सागर जिले के बीना का रहने वाला एवं यहां स्थित रिफाइनरी में कार्यरत ओमकार अहिरवार पर  28.10.2015 में सिविल लाईन थाना पुलिस द्वारा एक लडक़ी की शिकायत पर रेप का मामला दर्ज किया गया था। आरोपी पिछले दिनों ही अग्रिम जमानत पर रिहा हुआ था। मंगलवार को उसके मामले में फैसले की घड़ी थी। शाम करीब 5 बजे न्यायाधीश श्रीमती नोरिन निगम ने तमाम गवाहों और सबूतों को सुनकर अपना फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपी को 10 साल की कैद एवं 5 हजार रूपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। सजा सुनते ही आरोपी ओमकार कांपने लगा और उसने जेब से चाकू निकालकर अपने गले को रेत डाला। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
फेसबुक से हुआ था प्यार, ब्लेकमेल कर रही थी लडक़ी: वकील

इस मामले में बचाव पक्ष के वकील राजेन्द्र सक्सेना ने मीडिया को बताया कि आरोपी ओमकार अहिरवार मूलत: बीना का निवासी था। लगभग 4 साल पहले उसे छतरपुर की एक लडक़ी ने फेसबुक पर फे्रंड रिक्वेस्ट भेजी और इस तरह वह उस लडक़ी के संपर्क में आया। लडक़ी और उसके बीच प्रेम संबंध निर्मित हो गए। बाद में लडक़ी उक्त लडक़े को ब्लेकमेल करती रही और जब ब्लेकमेलिंग में कामयाब नहीं हुई तो उसने लडक़े के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज कराई थी। अपने विरूद्ध  झूठा मुकदमा दर्ज होने के कारण ओमकार पिछले चार वर्षों से लगातार परेशान था इसी कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया है। जिस वक्त यह घटना घटित हुई उस वक्त लडक़े का पिता और भाई भी अदालत परिसर में मौजूद थे। 

15 सितंबर, 2019

केन बेतवा लिंक परियोजना पर लगता ग्रहण


बुंदेलखंड की डायरी 



केन बेतवा लिंक परियोजना पर लगता ग्रहण   

रवीन्द्र व्यास 

  अप्रेल 2011  में तत्कालीन  केंद्रीय वन एव पर्यावरण  मंत्री जय राम रमेश  ने   केन बेतवा लिंक परियोजना पर कहा था कि ,मेने पी.एम्.. को पत्र लिखा है कि अगर ये केन बेतवा लिंक बनेगा तो ये सारा पन्नाटाइगर रिजर्व ख़त्म हो जाएगा , करीब ६० वर्ग कि.मी.एरिया जो शेरों के रहवास क्षेत्र  का प्रमुखस्थान है  इसका सत्यानाश हो जाएगा । , केन बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व कोख़तरा है हमारा मंत्रालय तो इसकी अनुमति   नहीं देगा | जयराम रमेश की बात को सेन्ट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी ) की रिपोर्ट ने सत्य साबित कर दिया है | उच्चतम न्यायलय को 30  अगस्त को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सीईसी ने साफ़ कर दिया है कि  इस परियोजना के नाम पर 28 हजार करोड़ रूपये बर्बाद होंगे जो लाभ और पानी के समीकरण बताये जा रहे हैं वह  वास्तविकता से दूर हैं | सीईसी की इस रिपोर्ट के बाद केन बेतवा लिंक परियोजना पर ग्रहण के बादल छाने लागे हैं |  

                            देखा जाए तो  सरकार का उदेश्य इस तरह की योजनाओ से सिचाई की सुविधा को बढ़ाना ताकि  कृषि  को  लाभकारी बनाया जा सके  | सीइसी का मानना है कि   वर्षा आधारित केन बेतवा नदी के जोड़ने के पहले सरकार  के तंत्र ने इसके  वास्तविक उदेश्य को ना  समझा और ना ही इसके  व्यवहारिक पक्ष को समझा गया | इस योजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का  पारिस्थितिकी तंत्र तो प्रभावित होगा ही साथ ही टाइगर के रहवास पर विपरीत असर पड़ेगा |  वनव जीवो और वनो के नुक्सान की भरपाई करना संभव नहीं हो सकेगा |  सिचाई क्षमता को लेकर जो दावे किये जा रहे हैं वह भी धरातल पर  सटीक नहीं बैठते | योजना का विस्तृत अध्ययन करने से स्पस्ट होता है की सिचाई में मामूली सी वृद्धि होगी | सीईसी की रिपोर्ट के अनुसार अनिश्चित वर्षा , नदियों में कम होते बहाव को देखते हुए  योजना बनाने वालों को चेक डेम निर्माण ,जल संरक्षण के अन्य उपायों को प्रोत्साहित करना चाहिए इससे  बगैर नुक्सान के कृषि को बड़वा दिया जा सकता है | 
                    केन बेतवा लिंक परियोजना पर    बिट्टू सहगल और मनोज मिश्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई  की थी | इनके तथ्यों को ध्यान में रख कर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति  सीईसी का गठन  किया था | सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी  को  केन बेतवा लिंक परियोजना पर  विस्तृत रिपोर्ट  देने के लिए आदेशित किया था | जिस पर सीईसी ने 27 से 30 को केन परियोजना क्षेत्र का दौरा  कर ३० अगस्त को 93  पेज की विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी | सीईसी की ओर से  दी गई  रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना  के कारण  पन्ना टाइगर रिजर्व का  पारिस्थितिकी नष्ट हो सकता  है।सीईसी ने  परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति द्वारा  23 अगस्त, 2016 को  वन्यजीव मंजूरी दिए जाने  पर भी  सवाल उठाया है।  परियोजना के लिये 6017 हेक्टेयर वन भूमि  अधिगृहित की जा रही है। इस वन क्षेत्र के डूब में आने से 10,500 हेक्टेयर वन क्षेत्र और प्रभावित होगा। जिससे वन्य प्राणियों का स्वाभाविक विचरण प्रभावित होगा , पन्ना टाइगर रिजर्व दो टुकड़ों में विभाजित हो जाएगा |  केन  नदी के पानी का बहाव भी मुड़ जाएगा जिससे केन घड़ियाल अभ्यारण्य को भी नुकसान होगा। 

 परियोजना के लिए पानी की उपलब्धता :: 
  अपनी  रिपोर्ट में सीईसी  ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है जिस पानी के नाम पर  इस केन बेतवा लिंक परियोजना की बुनियाद तैयार की जा रही है  वही पानी परियोजना को कैसे मिल पायेगा  यह कैसे सुनिश्चित होगा ? दरअसल केन और बेतवा नदी का  भराव क्षेत्र  वर्षा जल पर निर्भर है | सूखे पर तमाम रिपोर्ट यह बताती हैं कि सूखे के हालात में दोनों ही नदियों के बेसिन में जल पार्यप्त मात्रा में नहीं रहता है | 
परियोजना के  तहत  केन के सरप्लस  पानी को बेतवा में मिलाने को सीईसी  उचित नहीं मानती |  डीपीआर के अनुसार  बेतवा में 384 एमसीएम पानी इस्तेमाल किया जाएगा जबकि उत्तर प्रदेश  50 फीसदी यानी 530 एमसीएम पानी की मांग कर रहा है |  जाहिर है केन के पास जब सरप्लस पानी होगा ही नहीं इस दशा में परियोजना विफल हो जायेगी | 

केन बेतवा लिंक परियोजना से मात्र 0.38 लाख हेक्टेयर सिचाई क्षेत्र बढ़ेगा  


केन बेतवा लिंक परियोजना से दावा किया जा रहा है कि 2. 52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई होगी , जब की केन नदी पर बनी बरियारपुर  परियोजना से 2. 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई हो रही है | जाहिर तौर पर उसी केन नदी पर एक और बाँध बनाकर  मात्र 0.38 लाख हेक्टेयर सिचाई क्षेत्र का रकबा  बढ़ाने के लिए सरकार  जनता के २८ हजार करोड़ रु  स्वाहा करेगी | 

केन की अविरल धारा 
 
 केन नदी म.प्र. के कटनी जिले की  कैमूर की पहाड़ी से निकलती है और 427 किमी की दूरी तय करने के बाद उ.प्र. के बांदा जिले  में यमुना नदी से मिल जाती है। केन एशिया की ऐसी प्रमुख नदी है जो प्रदुषण से मुक्त मानी जाती है |    म.प्र. के  रायसेन जिले से निकलने वाली बेतवा नदी  590 किमी की दूरी तय कर  उ.प्र. के हमीरपुर जिले में यमुना से मिल जाती है।  केन का 28,058 वर्ग किमी और  बेतवा का  46,580  वर्ग किमी का भराव क्षेत्र   है|  केन की कई सहायक नदियों पर कई बाँध और और स्टाप डेम बनने से भी केन की जल धारा प्रभावित हुई है | 

केन बेतवा लिंक परियोजना 

              सरकार और इंजीनियरों की नजर में  बुंदेलखंड के छतरपुर,पन्ना,टीकमगण ,झाँसी जिले के लोगों की तक़दीर और तस्वीर  बदलने वाली है   केन -बेतवालिंक परियोजना।  अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब देश की 37  नदियों को आपस मेंजोडने का फैसला लिया गया ,उनमे से एक यह भी थी | देश की इन 37  नदियों को आपस में जोडने पर 5 लख 60  हजार करोड़ रु .व्यय होने का अनुमान लगाया गया था | |यह देश की वह परियोजना है जिसे सबसे पहले शुरू होना था | परियोजना के सर्वेक्षण कार्य पर 30  करोड़ रु,व्यय किये गए हें | 6  हजार करोड़ की इस  परियोजना  की  लागत  अब बाद कर 28  हजार  करोड़ रु  हो गई है । इसका   मुख्य बाँध पन्ना टाइगर रिजर्व  के ढोंडन  गाँव में बनना है |बाँध वा नहरों के कारण सवा पांच हजार हेक्टेयर वन  क्षेत्र  नष्ट हो जाएगा ,छतरपुर जिले के दस गाँव डूब जायेंगे |
केन बेतवा लिंक परियोजना में चार बाँध बनाए जायेंगे |

 केन नदी पर ढोढन  बाँध बनेगा 77  मी.ऊँचा वा 19633  वर्ग कि.मी. जलग्रहण छमता  वाले इस मुख्य बाँधमें 2853  एम्.सी.एम्.पानी भंडारण कि छमता होगी| इस बाँध से दो  बिजली घर बनेंगे जिससे 78  में.वा. बिजली बनेगी   |इस बाँध के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व  कि 5258  हेक्टेयरजमीन  सहित कुल 9  हजार हेक्टेयर जमीन डूब जाएगी | इस जमीन पर बसे सुकुवाहा ,भावरखुवा ,घुगारी ,वसोदा ,कुपी,शाहपुरा ,डोंदन ,पल्कोहा ,खरयानी,और मेनारी गाँव का अस्तित्वसमाप्त हो जाएगा | बाँध से 221  कि.मी.लम्बी मुख्य  नहर उत्तर प्रदेश के बरुआ सागर में जाकरमिलेगी | इस नहर से 1074  एम्.सी.एम्. पानी प्रति वर्ष भेजा जाएगा ,जिसमेसे 659  एम्.सी.एम्. पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा |
ढोंडन  बाँध के अलावा तीन और बाँध भी मध्य प्रदेश कि जमीन पर बेतवा नदी पर  बनेंगे |रायसेन , विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बाँध से 5685 हेक्टेयर क्षेत्र  में,बरारी बेराजसे 2500  हे.वा केसरी बेराज से 2880  हे. क्षेत्र  में  सिचाई  होगी | लिंक नहर से मार्गोंमें 60294  हे. क्षेत्र  सिंचित होगा ,इसमे मध्यप्रदेश के 46599  हे. वा उत्तर प्रदेशके 13695  हे.क्षेत्र  में सिचाई होगी | ढोंडन बाँध से छतरपुर और पन्ना जिले कि 3.23  लाख हे.जमीन सिंचित होगी होने का दावा किया जा रहा है । 

 असर :

इस बाँध को बनाने के लिए सरकार 9  हजार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगी , इस भूमि में अकेले टाइगर रिजर्व की 52 58 हेक्टेयर भूमि जा रही है । जिसके कारण  टाइगर रिजर्व के लगभग 13 लाख पेड़ डूब  जाएंगे , मानव और वन्य जीव पर ख़तरा होगा सो अलग । जिन बाघों से इस इलाके का नाम दुनिया में रोशन हो रहा है उनके  घर भी छिन  जाएंगे ।  इस नदी पर बने  केन घड़ियाल अभ्यारण्य के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा ।केन घड़ियाल अभ्यारण्य  रनेह फाल पर  स्थित है । बाँध बनने से पानी बाँध में ही रुक जाएगा जिसके चलते विदेशी सेलानियो के आकर्षण का केंद्र  यह सुन्दर फाल जिसे लोग मिनी नियाग्रा  फाल के नाम से भी सम्बोधित करते हैं समाप्त हो जाएगा । यहां रहने वाले जलचर  घड़ियाल का तो भगवान ही मालिक होगा । 



उजड़ेगा गिद्धों का घरौंदा भी  _ इस परियोजना के बनने से पार्क के अंदर पाये जाने वाले  7प्रजातियो के गिद्ध का घरोंदा भी उजड़ जाएगा ।     यहां  लगभग दो हजार से ज्यादा  गिद्ध पाये जाते हैं | दरअसल दुनिया में और भारत में गिद्ध और बाघ तेजी से समाप्त हो  रहे  हैं, ऐसे में धरा की इस नस्लों को बचाने के लिए दुनिया भर  प्रयास हो रहे हैं ।  दुनिया में भारत्त ही ऐसा देश होगा  जहां इन नस्लों को नेस्तनाबूत करने की योजना सरकार ने बनाई है ।
                 सरकार और उसके नुमाइंदो को विकाश की  और सिचाई वा पानी की बर्बादी रोकने की इतनी ही चिंता है तो सबसे पहले उसे बुंदेलखंड के भूगोल और भूगर्भ  समझना होगा ।  बुंदेलखंड की टोपोग्राफी इतनी शानदार है की कम लागत में  यहां के गाँव -गाँव में विशाल सरोवरों का निर्माण किया जा सकता है । जिससे  यहां के किसानो की सिचाई का संकट दूर होगा साथ ही जलीय फसल और मछली उत्पादन का काम गाँव वालों को  मिलेगा । इन तालाबों को बाढ़ वाली नदियों से  चैन सिस्टम से भरा भी जा सकता है ।

 जिस केन नदी पर इस विशाल बाँध को बनाया जा रहा है वह दरअसल बाढ़ वाली नदी नहीं कही जा सकती  । कटनी  जिले से निकल  नदी बांदा जिले में यमुना में कर विलीन हो जाती है । एशिया की यह साफ़ सुथरी नदियों में गिनी जाती है ।  निर्मल प्रवाह से से टाइगर रिजर्व के जीवों की प्यास भी बुझती है | इस परियोजना पर जितना पैसा लगाया जा रहा है यदि उसे गाँव का पानी गाँवमें रोकने पर खर्च किया जाए तो बुंदेलखंड के हर गाँव में खुशहाली छा जायेगी |
अब यहाँ सरकार को यह बात समझ में शायद नहीं आती की ,या वह समझना नहीं चाहती कीएक ओर पन्ना टाइगर रिजर्व हे , जिसको बचाए रखने का दावा सरकार  करती रहती है | बाघोंको बचाने के लिए सरकार ने खजाना खोल रखा है  " दूसरी ओर वही सरकार पार्क एरिया में बाँधबनाकर बाघों को भी विस्थापित करने पर आमादा है ।

09 सितंबर, 2019

कलेक्टर हटाने का विधायक का अल्टीमेटम दाखिले दफ्तर


बुंदेलखंड की डायरी

 कलेक्टर हटाने का  विधायक  का अल्टीमेटम दाखिले दफ्तर

रवीन्द्र व्यास

मध्य प्रदेश के   छतरपुर  जिले  का   बिजावर विधानसभा क्षेत्र  इन दिनों फिर सुर्ख़ियों में है | पुराने लोगों को 1965-67  का वह दौर याद आने लगा है जब  प्रदेश में संविद सरकार बनी थी | संविद सरकार बनवाने में बुंदेलखंड के बिजावर के राजपरिवार की प्रमुख भूमिका थी | बिजावर ही वह जगह थी जहाँ कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने की सियासी रणनीति बनी थी | हाल ही में 2008 से 2013 के विधान सभा  कार्यकाल में बिजावर तब सुर्ख़ियों में जब यहाँ की बीजेपी विधायक के  समजावादी  पति पर कानून का शिकंजा कसा था | अब फिर बिजावर सहित सम्पूर्ण छतरपुर जिला प्रदेश में राजनैतिक सुर्ख़ियों में है | असल में बिजावर के सपा विधायक  राजेश शुक्ल   सहित जिले के  सभी कांग्रेसी विधायक  मध्य प्रदेश सरकार के वर्तमान हालात और बेलगाम ब्यूरोक्रेसी को देख कर खफा हैं | इनकी नाराजगी मंत्री से कही ज्यादा यहां के कलेक्टर को लेकर है | छतरपुर कलेक्टर ने भी ऐसा दांव चला कि विधायक जी द्वारा हफ्ते भर का अल्टीमेटम सरकार ने दाखिले दफ्तर कर दिया |

   समाजवादी पार्टी के प्रदेश के इकलौते  विधायक राजेश शुक्ला   ने पिछले दिनों छतरपुर के पत्रकारों से   चर्चा में कहा था   कि छतरपुर कलेक्टर का तबादला एक हफ्ते के अंदर हो जाएगा। इसके लिए मुझे भोपाल में डेरा डालना पड़े तो मै डालूगा। बिजावर विधायक ने कहा कि जिले में कलेक्टर विधायकों की अनुशंसा पर ही  रहेंगे। यदि छतरपुर में किसी को कलेक्टरी करना है तो उन्हें विधायकों की बात सुननी पड़ेगी। अन्यथा वह इस जिले में नहीं रह पाएंगे। विधायक शुक्ला ने यह भी कहा कि प्रदेश में कमलनाथ के मंत्री विधायकों को महत्व कम दे रहे हैं|  हफ्ता भर बीत गया विधायक जी के सूत्र बताते हैं कि  जिले के  सरकार समर्थक पांचो विधायकों ने  मुख्य  मंत्री से कलेक्टर को  मोहित बुन्दस को जिले से हटाने की मांग की थी | विधायकों की कमलनाथ सरकार ने नहीं सुनी ,इसके पीछे भी सियासी कारण बताये जाए रहे हैं |
              कांग्रेसी सियासत से जुड़े लोग ही बताते हैं की कलेक्टर मोहित बुन्दस के स्थानांतरण ना होने के पीछे कई कारण हैं | एक तो कलेक्टर मोहित बुन्दस अजाक्स जैसे संगठन  से जुड़े हैं , उनकी छतरपुर में नियुक्ति एक सोची समझी सियासी रणनीति के तहत की गई थी | उनको यहां  भेजने के पीछे  जहां कांग्रेस के दिग्गज नेता  दिग्विजय सिंह का हाथ था वही अजाक्स के प्रमुख कंसोटिया जी का भी वरद हस्त था | इसके पीछे सियासी  अतीत दोहराने की  एक सोची समझी रणनीति है |  यही कारण है कि पांच विधायकों ने जब मुख्य मंत्री से कलेक्टर के स्थानांतरण की बात तो साथ में की |   बाद में दो विधायकों ने  मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि  हम तो साथ आ गए हमें कलेक्टर से कोई आपत्ति नहीं है | दूसरी तरफ सरकार चलाने वाले रणनीति कारों ने कलेक्टर मोहित बुन्दस से  विधयाकों के उन तमाम काले सफ़ेद कामो की सूचि भी एकत्र कर  ली जो पिछले आठ माह में कराये गए | सूत्रों के अनुसार  रणनीतिकारों ने यह सूचि सरकार के मुख्य सचिव के माध्यम से एकत्र की  स्वयं मोहित बुन्दस ने यह सूचि मुख्य सचिव को सौंपी थी |  बताते हैं की मुख्य सचिव ने सारी जानकारी मुख्य मंत्री को दी उसके बाद कलेक्टर को अभय दान प्राप्त हो गया |

कलेक्टर ही नहीं मंत्रियो के कामकाज से भी ख़फ़ा हैं विधायक :

सियासत का एक दौर था जब बुंदेलखंड  के विधायकों  के सवालों  पर  अच्छी अच्छी सरकारें कटघरे में खड़ी हो जाती थी |  अब वह दौर देखने को मिल रहा है जब सरकार से जुड़े विधायक अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर खुले तौर पर भ्रस्टाचार के आरोप लगा रहे हैं |  हद तो तब हो जाती है जब सांसद के द्वारा मंत्रियो को पत्र लिख कर उनके कामकाज का हिसाब माँगा जाता है | कमरे के अंदर की ये बाते बाहर क्यों आती हैं ? ये सब क्यों होता है और किसके इसारे पर होता है यह  सियासत के जानकार भली भाँती जानते हैं |
 मध्यप्रदेश सरकार को समर्थन दे रहे   इकलौते समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला का साफ़ कहना है  कि प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों के कारण पूरी सरकार की छवि खराब हो रही हैं । ये आम चर्चा है कि ये  मंत्री पैसा लेकर काम करते हैं । लोग बीजेपी सरकार जैसे भ्रष्टाचार की बात कहते हैं । उन्होंने बताया कि विधायक यदि इनको किसी कार्य का पत्र दे तो यह उस पर कार्य नहीं करते । वहीं कार्य यदि अधिकारी कहे तो तत्काल मंत्री जी कार्य करते हैं । यह यही साबित करता है कि ये मंत्री पैसा लेकर काम करते हैं । असल में ये  कुछ  मंत्री अपने आपको भगवान समझते हैं । पिछले कुछ दिनों में जिस तरह के विवाद के हालात सरकार के सामने बने उसमे राजेश शुक्ला कोई अकेले विधायक नहीं है जिन्होंने इस तरह के आरोप लगाए हैं | सत्ता धारी दल के कई विधायकों ने सरकार के मंत्रियों और प्रशासन के  कामकाज को लेकर  खुले तौर पर नाराजगी जताई है |

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद  बुंदेलखंड के लोगों  को उम्मीद थी की एक बेहतर प्रशासनिक तंत्र वाला कामकाज  लोगों को देखने को मिलेगा | पर जिस तरह का प्रशासनिक तंत्र लोगों को देखने को  मिला उसने आम जन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया | जिसकी एक बानगी लोक सभा चुनाव में देखने को मिली थी | हालांकि  इस मामले में यह भी स्पष्ट  है कि  गलतिया  अकेले प्रशासनिक तंत्र की नहीं मानी जा सकती है बहुत कुछ विधयाकों के व्यवहार और उनकी कार्य के प्रति वचनबद्धता पर भी निर्भर करता है | छतरपुर और बुंदेलखंड से चुने गए अधिकाँश विधायक जितने के बाद अपनी अपनी जातियों तक सिमट गए याहं तक तो ठीक था पर दूसरी जाति के लोग उन्हें दुश्मन नजर आने लगें यह उनके सियासी स्वास्थ्य के हिसाब से खराब ही कहा जा सकता है | 
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