बजट में नहीं दिखी बुंदेलखंड की त्रासदी
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड इलाक दो राज्यों में विभक्त बुन्देलखंडियों की किस्मत का फैसला भी दो सरकारें करती हैं ।
एक है उत्तर प्रदेश की और दूसरी है मध्य प्रदेश की । इन दोनों सरकारों के ऊपर है एक केंद्र सरकार ,बुंदेलखंड
में केंद्रीय मंत्रियो के दौरों से यह उम्मीद बुन्देलखंडियो ने लगा ली थी की इस बार केंद्र के बजट में के लिए कुछ
विशेष प्रावधान रखे जाएंगे । मोदी के इस बजट में भी बुंदेलखंड को बदहाल ही रखा गया है । एक और जहाँ
उत्तर प्रदेश सरकार मुक्त हाथ से जनता के दुःख दर्द दूर करने में जुटी है वहीँ मध्य प्रदेश इलाके की सरकार
बुन्देलखंडियों को अकाल से मुकाबला के लिए भगवान के रहमो करम पर छोड़े है । इसके पीछे राजनैतिक
जानकार कहते हैं की दरअसल उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव सर पर हैं और मध्य प्रदेश में अभी दूर हैं ।
सोमवार को जब केंद्र की मोदी सरकार के बजट से लोगों को लग रहा था इस बार
बुंदेलखंड के लिए कुछ खाश होगा । इस सोच के पीछे कुछ वजह भी मानी जाती है < पहली बार बजट के पहले
केंद्र मंत्रियों ने बुंदेलखंड का दौरा किया । केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने तो बाकायदा स्पस्ट टूर पर कहा
भी था की बजट में बुंदेलखंड की दशा को ध्यान में रखा जाएगा । इसके बाद आई केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने टीकमगढ़ ,
महोबा और छतरपुर जिले का दौरा किया था । दोनों मंत्री किसानो और बुंदेलखंड की दशा देख कर चली गई थी । मंत्री
के इस मजमे के कारण ही लोगों को लगा था की बुंदेलखंड का कुछ भला होने वाला है केंद्र के बजट में ।
असल में बुंदेलखंड के लोग मोदी सरकार की भाषा को समझने में चूक कर गए । मोदी जी ने कुछ दिनों
पहले किसानो की रैली में कहा था 2022 तक देश के किसानो की आय दो गुनी कर देंगे उसमे बुंदेलखंड भी आता है ।
अब कम से कम मोदी जी की बात पर भरोषा कर सात साल तो इन्तजार कर ही सकते हैं । मोदी सरकार क्षेत्रीयता वाद
में नहीं पड़ती , इस लिए उसने बजट में समग्र भारत को ध्यान में रख कर किसानो के कर्ज को कम करने के लिए 15
हजार करोड़ का प्रावधान रखा है । देश के कुछ जिलों में खाद की सब्सिडी सीधी किसानो के खाते में भेजने की बात भी
कही है , अब यह एक रहष्य है की इसमें बुंदेलखंड के कितने जिले सम्मलित किये जाएंगे । गांव के विकाश के लिए
87795 करोड़ रुपये ,सड़को के लिए 19 हजार करोड़ और मनरेगा के लिए 38500 करोड़ रु का प्रावधान किया गया है ,
मनरेगा के बजट में इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा की एक वर्ष में तालाब और कुँए देश में बने । सरकार ने गिरते
भूजल स्तर पर भी चिंता जताई है और इसके लिए 60 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है । पांच साल में देश में 28
लाख हेक्टेयर में सिचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 86500 करोड़ रु का बजट में प्रावधान किया गया है । ,
मई 2018 तक देश के सभी गाँवों तक बिजली पहुचाने के लिए 8500 करोड़ रु व्यय होंगे । फसल बीमा के लिए
55 सौ करोड़ और दाल उतपादन के लिए 500 करोड़ रु रखे गए हैं । जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जातां किये जाएंगे ।
देश के सन्दर्भ में बनी सरकार की इन नीतियों का लाभ बुंदेलखंड इलाके के लोगों को कितना
मिलेगा यह आने वाले समय में ही साफ़ होगा । किन्तु मोदी सरकार का यह बजट बताता है की सरकार धरती से गायब
होती नमी को लेकर चिंतित है । और सूखे का मुख्य कारण जल प्रबंधन का अभाव मानती है । शायद इसी कारण सरकार
ने भू जल रिचार्जिंग , तालाब और कुआ ,निर्माण , पांच वर्ष में सिचाई लक्ष बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किये हैं ।
सवाल फिर वही सामने आकर खड़ा होता है की हर सरकार की नीतियाँ तो अच्छी होती हैं
उसका क्रियान्वन गड़बड़ होता है । योजना को लागू करने वाली अफसर शाही पर निर्भर रहता है की वह योजना को किस
तरह से क्रियान्वित करते हैं । बुंदेलखंड के लोग राहुल गांधी के बुंदेलखंड पैकेज के बंटाधार को शायद भूले ना होंगे ।
पैकेज से बने स्टॉप डेम में अधिकाँश में फाटक ही नहीं लगाए गए । बनाये गए तालाबों में पानी के श्रोत को समझने
का प्रयास ही नहीं किया गया । वृक्षारोपड जैसे कार्य कागजों पर सम्पन्न हुए । मनरेगा के तहत बने कुए में कई ऐसे
भी कुए थे जो पुराने थे उनको नया बताकर पैसा निकाला गया । नल जल योजनाओ के भ्रष्टाचार की जांच के लिए
हाईकोर्ट को आदेश देना पड़ा था । जांच में यह पाया गया था की मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके की नल जल योजनाओ
का वास्तविक लाभ ग्रामीणो को नहीं मिल पा रहा है ,क्योंकि अधिकाँश बंद पाई गई थी । उम्मीद की जा सकती है की
मोदी सरकार की योजनाओ का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से हो ।


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