बेदम होती सुनार नदी
रवीन्द्र व्यास
आज जब भी नदियों की बात होती है तो बड़ी नदियों को केंद्र में रखा जाता है किन्तु इन बड़ी नदियों को जीवंतता देने वाली सहांयक नदियों को हम भूल जाते हैं । ये छोटी छोटी नदिया और नाले ही होते हैं जो ना सिर्फ बड़ी नदियों की अविरल जल धारा को बनाये रखते हैं बल्कि आस पास के सरोवरों को भी जल से भरपूर बनाये रखते हैं । बुंदेलखंड इलाके की महत्व पूर्ण केन नदी की जल धारा में ऐसी ही कई सहायक नदीयां अपना योगदान देती हैं । जिसके तट पर बुंदेलखंड के कई गाँवों की संस्कृति और सभ्यताओ का विकाश हुआ है । सहायक नदियों के अस्तित्व पर यदि संकट होगा तो मुख्य नदी कैसे जीवन्त रहेगी ।
कैमूर की पहाड़ियों से निकलने वाली केन नदी की अविरल जल धारा को बढ़ाने में उसकी सहायक नदियों महत्व पूर्ण योगदान माना जाता है । अकेले मध्य प्रदेश इलाके से इस नदी में 24472 हे वर्ग किलो मीटर और उत्तर प्रदेश में 3586 हे वर्ग किमी जल ग्रहण क्षेत्र है । इस विशाल जल ग्रहण क्षेत्र का जल केन की सहायक नदियों और नालो से ही पहुंचता है । एशिया की सबसे गैर प्रदूशित इस नदी तक , व्यारमा , मिडासन ,सोनार , श्यामरी ,बन्ने , कुटनी ,केल ,उर्मिल , और चंद्रावल जैसी सहायक नदियां अपनी जल राशि के साथ केन नदी में विलीन होती हैं । और यह केन नदी उत्तर प्रदेश के बांदा में चिल्ला में यमुना में विलीन होती है ।
केन में विलीन होने वाली सुनार नदी की भी कहानी कुछ ऐसी ही है । सागर जिले के टडा केसली गौरझामर से निकलने वाली सुनार नदी का इस सूखे के साल में जल स्तर प्रवाहमान नहीं रह गया है । दमोह जिले के हटा , नरसिंह गढ़ और सागर जिले के रहली जैसे कस्बे के लोगों की प्यास बुझाने वाली सुनार नदी का पानी चुराने का आरोप मायसेम सीमेंट फैक्ट्री वालों पर लगा था । पिछले दिनों नदी से सीमेंट फैक्ट्री वालों द्वारा पानी चुराने की जब शिकायत गाँव वालों ने कलेक्टर से की थी । कलेक्टर के आदेश पर उनके पम्प सील कर दिए थे । सागर और दमोह जिले के सौ से भी ज्यादा गाँव के जीवन का आधार ही सोनार नदी है ।
दमोह जिले की मुख्य नदियों में शुमार सुनार नदी के बारे में कई तरह की किवदंतियाँ भी प्रचलित हैं । कहते हैं की इस नदी में हर तीन साल में बाढ़ आती है और एक कुपात्र की बली लेती है । नदी की बाढ़ तभी शांत होती है जब नदी के सीतानगर तट पर गाँव के प्रतिष्ठित पुरुष और महिलाये पूर्ण सुसज्जित होकर पूजन करते हैं । पूजन की यह विधि भी कम दिलचस्प नहीं है । पूजन के समय एक दही की हांड़ी पूर्णतः सुसज्जित कर नदी में अर्पित की जाती है , और पूजन किया जाता है , जिसके बाद नदी की बाढ़ का पानी घटना शुरू होता है ।
दमोह के वरिष्ठ पत्रकार राम शरण पाराशर बातचीत के दौरान कहने लगे कि सूखा के कारण नदी कई जगह सूख गई है पर सीतानगर और मडकोलेशवर मे पानी का अच्छा खासा भराव है । सीतानगर के पास ही में इस नदी में कोपरा और जूडी नदी आ कर मिलती हैं । इसी नदी के तट पर बसा है दमोह जिले का मुख्य नगर हटा । दमोह जिले में सुनार नदी पर तीन जगह स्टॉप दम भी बनाये गए हैं । इस पर एक बड़ी सिचाई योजना पंचम नगर प्रस्तावित है ।
हर तीसरे साल बाढ़ से बेहाल होती और सूखा से सूखती सुनार नदी की कहानी सिर्फ यही नहीं रूकती दरअसल इस नदी को इससे भी बड़ा ख़तरा प्रदुषण का भी है । 27 मई 2008 में मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हटा दौरे के समय इस नदी में बढ़ते प्रदुषण की रोकथाम और सफाई के लिए 50 लाख रु स्वीकृत करने की घोषणा की थी । नगर पालिका की कर्तव्य परायणता के कारण तीन साल तक इस राशि का कोई उपयोग नहीं हुआ और ना ही सफाई हुई । सागर संभाग के आयुक्त ने जब इस पर पहल की तो पैसा तो खर्च हो गया पर हालात जस के तस हैं । नगर पालिका को मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल सागर ने एक ड्राइंग डिजाइन करके और प्रोजेक्ट बना कर सौंपा था । किन्तु नगर पालिका ने अपनी व्यवस्था के तहत अपने ठेकेदार से काम कराया ,जिसका परिणाम ये हुआ की ट्रीटमेंट प्लांट जहां से नाले का गंदा पानी साफ़ होकर नदी में मिलना था वह सिर्फ दिखावटी ही रहा ।
हटा के युवकों ने इस नदी को बचाने संकल्प लेते हुए जनवरी के अंतिम सप्ताह में सफाई अभियान शुरू किया । नदी में मिल रहे नाले गंदे पानी को रोकने के लिए बोरी बंधान भी बनाया । कुछ समय तक चले इस अभियान से भी नदी की दशा कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं हो सका । नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण इसके स्थाई साथी जलचर भी यहां से दूर ही हो गए । स्थानीय लोग नदी में नहाने से कतराने लगे क्योंकि इसके जल के उपयोग से कई लोगो को त्वचा सम्बन्धी बीमारियो का सामना करना पड़ा । अब लोगों की जागरूकता पर निर्भर करता है वे नदी में जा रहे गंदे नाले और गंदगी को कैसे रोकते हैं । और कैसे उप काशी कहे जाने वाले हटा की इस नदी की पवित्रता और स्वक्षता बरकरार रख पाते हैं ।
दरअसल सुनार नदी की स्थिति को देख कर यह कहा जा सकता है की इसके जल प्रबंधन की महती जरुरत है । नदी से लिंक केनाल के जरिये आस पास के गाँवों के तालाब को जोड़ा जाए , ताकि जब भी इसका पानी तट बंध तक लगे तो उस पानी को तालाबों को भरने में उपयोग किया जा सके ।


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