27 मार्च, 2016

Bundelkhand Dayri


अकाल में याद आई जल सुरंगे 
रवीन्द्र व्यास 


अकाल से जूझते बुंदेलखंड में लोगों को  सदियों पुरानी जल सहेजने  परम्परा  और  उसका महत्त्व समझ  आने लगा है  मानो अकाल ने लोगों की अकल के ताले  खोलने में चाबी का काम किया  1744 में पड़े भीषण अकाल ने पन्ना  नगर में एक ऐसा जल तंत्र विकसित हुआ की पत्थरों के इस नगर में कभी पानीका संकट पैदा नहीं हुआ  पर इस  बार के अकाल  ने पन्ना में भी पानी का 
संकट पैदा  कर दिया  संकट पैदा हुआ तो  अब समाधान की दिशा में प्रशासन और लोगों के प्रयास 
शुरू हो गए  अब लोगों को अपने धर्म सागर तालाब और उसकी 56  कुओं से जुडी   जल सुरंगो की 
याद आने लगी है  

   इस बार जब पन्ना का  कभी ना सूखने वाला धर्म सागर तालाब  जब सूखने लगा तो  प्रशासन को आने वाले खतरे का 
अहसास हुआ   पन्ना कलेक्टर शिव नारायण सिंह चौहान स्वयं तालाब देखने पहुंचे  उन्होंने  तालाब  और  उससे जुडी जल
 सुरंगों को समझा  विश्व जल दिवस के मौके पर नगर के बदहाल  तालाबों की  दशा सुधारने के लिए    बैठक  हुई   बैठक   
में प्रशासन , प्रेस ,पॉलिटीशियन , और पब्लिक ने  नगर के मुख्य सरोवर धर्म सागर की  दुर्दशा पर ना सिर्फ चिंता व्यक्त की
 बल्कि दुनिया के  अपने इस  अनोखे जल  सिस्टम वाले तालाब की दशा सुधारने  संकल्प भी लिया   

                    बैठक में कलेक्टर श्री  चौहान ने  धरम सागर तालाब को  पन्ना की पहचान बताते हुए कहा की  यह  प्राचीन 
शासकों की दूरदर्शिता तथा श्रेष्ठ निर्माण कला का प्रतीक है।  सूखे के इस अभिशाप को तालाब का जीर्णोद्धार
 करके हम  बरदान में बदलेंगे। इसके लि जनभागीदारी योजना से 15 लाख , तथा नगरपालिका से 15 लाख 
रूपये की राशि दी जाएगी। जनसहयो से जितनी राशि प्राप्त होगी तनी  ही राशि जनभागीदारी से जारी कर दी जाएगी।
 तालाब की साफ सफाई तथा खुदाई  कार्य  30 मार्च से  30 अप्रैल तक चलेगा   उन्होंने  अपील की इस लक्ष्य को पूरा करने
 के लिए  आम जनता तन मन और धन से सहयोग करें 
            कलेक्टर ने कहा कि धरम सागर तथा लोकपाल सागर को भरने के लिए किलकिला फीडर नहर का  अतिक्रमण हटाए 
जाएंगे।  नगरपालिका धरम सागर सहित सभी  तालाब की साफ सफाई कराए , कचरा डालने वालों पर जुर्माना लगाए। तालाब का 
जीर्णोद्धार करना  हम सबकी जिम्मेदारी है। इसे गहरा करने में  टोकरी मिट्टी हटाने का भी किया गया 
सहयोग अमूल्य होगा। जनभागीदारी योजना से कराए जा रहे इस कार्य में एक एक रूपये का पूरा हिसाब रखा जाएगा। कार्य प्रारंभ 
होने से लेकर कार्य समाप्त होने तक वीडियोग्राफी तथा फोटोग्राफी कराई जाएगी। 
 बैठक में कलेक्टर के आव्हान पर  धरम सागर तालाब जीर्णोद्धार  लिए लोगों ने दिल खोल कर ना सिर्फ 5 लाख 77  
हजार 3 सौ रु की  राशि देने की तत्काल घोषणा की  बल्कि पुष्पेंद्र सिंह  ने अपने संसाधनों से तालाब के एक एकड़  
हिस्से के गहरीकरण का जिम्मा लियातो ब्रजेंद्र सिंह ने १०० डम्पर  मिटटी के परिवहन की जिम्मेदारी ली  समाज 
के सबसे महत्त्व पूर्ण और सामाजिक सरोकारों के लिए अपना जीवन खपाने वाले यहां के पत्रकारों ने भी अपनी क्षमता 
 कहीं ज्यादा धन राशि देने की घोषणा की  लोगों का यह सहयोग बताता है की यहां के लोग किस तरह से अपनी 
पानी की धरोहर को बचाने के लिए बेचैन हैं  जरुरत है सिर्फ उनके इस जज्बे को  एक सही दिशा देने की  
क्या है धर्म सागर तालाब

 लगभग 75 हजार की आज की जनसंख्या वाले इस पन्ना नगर  और जिले की पहचान देश  दुनिया में एक प्रमुख हीरा 
उत्पादन केंद्र के तौर पर है  मंदिरो , झीलों और प्राकृतिक वातावरण से परिपूर्ण यह इलाका पत्थरों पर बसा है ।                

 ऐसेइलाके में जल व्यवस्था बनाना  दुष्कर कार्य था 17  वी सदी में सभा सिंह को 1739 में पन्ना रियासत का 
राजा घोषित किया गया । उनके राज सम्हालने के बाद 17 44   में  भयानक अकाल पड़ा । लोग दुर्भिक्ष के शिकार होने 
लगे , जल के लिए तरशने लगे , ऐसे समय तत्कालीन राजा ने पन्ना नगर के मदार टुंगा पहाड़ी की तलहटी में विशाल 
तालाब का निर्माण 1745 में धर्म कुंड से  शुरू कराया । कुंड के प्रति लोगों की आस्था को देखते हुए यहां शिव मंदिर का भी 
निर्माण किया गया ।  1752 में जब यह तालाब पूर्ण हुआ तो लोगों ने इसे धर्म सागर नाम  दे दिया । 
    जल सुरंग  
 जब जल सुरंगों की बात आती है तो मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की चर्चा की जाती है । बुरहानपुर में जमींन के 80 फिट अंदर 
डेड किमी की जल सुरंग बनी है जिस पर 10 कुए  बने हैं । ये सभी कुए इस जल सुरंग से लबालब भरे रहते हैं । बुरहानपुर 
की इस जल प्रदाय प्रणली की चर्चा तो देश दुनिया में होती है किन्तु पन्ना नगर की इस जल सुरंग प्रणाली की चर्चा कहीं नहीं होती                   पत्थरों पर बसे पन्ना नगर के लिए और यहाँ के राजमहल के लिए जरुरत थी गर्मी के दिनों में भी जल 


व्यवस्था बनाये रखने की । तालाब निर्माण के दौरान  56  से ज्यादा जल सुरंगे बनाई गई थी ,और  सुरंगों को नगर के कुओं 
,पार्क और महल के तालाब से जोड़ा गया था  ।  धर्म सागर तालाब से नगर के कुओं तक जल सुरंगों का जोड़ना अपने आप 
में एक अनोखा प्रयोग था ,। और 264 वर्षों से ये जल सुरंगे कार्य कर रही हैं यह भी आधुनिक इंजीनयरिंग के लिए  किसी 
चमत्कार से कम नहीं है । यदि इन जल सुरंगों को पन्ना की जल धमनिया कहा जाए तो कोई अति संयोक्ति  नहीं होगी ।
                                     जलसंसाधन विभाग में कार्य पालन यंत्री रह चुके और मूलतः पन्ना निवासी  एस के श्रीवास्तव 
बताते हैं की  पन्ना नगर के लिए ये जल सुरंगे किसी वरदान से  कम नहीं हैं । आज जरुरत है ऐसी जल व्यवस्था को समझने 
की और इसको संरक्षित और सुरक्षित रखने की । वे कहते हैं  पन्ना की जल सुरंगों पर व्यापक शोध की आवश्यकता है ।  
                      
क्यों सूखा तालाब  




पन्ना का75  एकड़ में फैला  यह ऐतिहासिक धर्म सागर तालाब  इस बार के अकाल में सूख गया है । बुंदेलखंड इलाके का यह 
 एक ऐसा तालाब है जिसका प्राकृतिक केचमेंट एरिया जबरदस्त है । इसके अलावा  यह ऐसे भू आकृति वाला तालाब है जिसे 
तभी बरबाद किया जा सकता है जब तक  लोग इसके विनाश का संकल्प ना ले लें ।  यहाँ भी ऐसा ही कुछ हुआ ,इसके पीछे
 वजह बताई बताई जा रही है की इसके जल  श्रोत पर अवैध अतिक्रमण कर लिया गया । तालाब के इर्द गिर्द की 
भूमि पर लोगों ने अपनी बसाहट बना ली ।  इन सब का परिणाम हुआ की तालाब  सूख गया । पन्ना के लोग बताते हैं की  पहली 
बार धर्म सागर तालाब को सूखते हुए देखा है । 


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