बुंदेलखंड में जल की जद्दोजहद
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड में सूरज की तपन के साथ पीने के पानी की समस्या और भयावह होती जा रही है । बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी १३ जिलों से पानी को लेकर लोगों की जद्दो जहद जारी है । जैसे जैसे गर्मी अपने चरम पर पहुंचेगी हालात और भी गम्भीर होंगे । मध्य प्रदेश बुंदेलखंड इलाके की जल समस्या को लेकर तो पिछले दिनों सरकार के दो मंत्रियों के बीच तीखी तकरार भी हुई पर इस तकरार का कोई सार नहीं निकला । देखा जाए तो जल और जीवन एक ही राशि के शब्द हैं , जाहिर है जल बिन जीवन की कल्पना संभव नहीं है । इसी लिए शायद पुरखों की यह बात लोग आज भी याद करते हैं की जहां पानी के श्रोत ना हो ऐसे स्थान पर नहीं रहना चाहिए । जल ही जो जीवन का आधार और सम्रद्धि और विपत्ति का कारक भी है । इस महत्व पूर्ण तथ्य को जानते हुए भी सरकार के तंत्र और समाज ने इसके महत्व् को नहीं समझा । अब प्यास लगने पर कुए खोदने की दशा निर्मित हुई है । मध्य प्रदेश सरकार अब ठेके पर देगी नल जल योजनाएं ।
पिछले दिनों सागर से एक खबर अखबारों में सुर्खियों से छपी की सागर नगर को जिस राजघाट बाँध से पानी दिया जाता है वह डेड स्टोरेज की तरफ बाद रहा है। इस बाँध में जितना पानी है उससे सिर्फ 30 दिनों तक लोगों को पानी दिया जा सकता है । इस कारण नगर के लोगों पानी अब एक घंटे की जगह आधा घंटा दिया जाएगा । अभी तक सागर नगर के तीस हजार नल कनेक्शन धारियों को ६ करोड़ लीटर पानी सप्लाई किया जाता था । अप्रेल में जब यह हालात हैं तो आने वाले 90 दिनों में स्थिती क्या होगी अंदाजा लगाया जा सकता है । दरअसल नगर की पुरानी पाइप लाइनों के कारण अक्सर पाइप लाइने फूट जाती हैं और पानी सड़क पर बहता रहता है । इस स्थिती को सुधारने के लिए 200 करोड़ की लागत से मुख्य पाइप लाइनों में बदलाव किया जाएगा ।
सागर नगर निगम के अलावा यहां के जागरूक नागरिक भी सचेत हुए हैं , और उन्होंने नगर के बेकार पड़े कुओं का सफाई अभियान भी शुरू किया है । कुओं के सफाई के इस अभियान में यहां की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं । इस अभियान के तहत अब तक अनेको कुओं को उपयोग लायक बनाया गया है । दरअसल सागर के लोगों ने राजघाट बाँध से पानी आने के पहले पानी को लेकर कई तरह की परेशानियो का सामना किया है ।
देखा जाए तो जल संकट में सिर्फ सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरा जिला है । जिले में लगे 11 हजार से ज्यादा हेंड पम्पों में चार हजार से ज्यादा बंद पड़े हैं । 650 नल जल योजनाओं में से ३०० से ज्यादा नल जल योजनाएं बंद पड़ी हैं । ये हालात उस जिले के हैं जहां से बुंदेलखंड के सर्वाधिक सशक्त नेता गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह मंत्री हैं । मध्य प्रदेश के बाकी बुंदेलखंड इलाके का अंदाज लगाया जा सकता है ।
नलजल योजनाएं
बुंदेलखंड जल समस्या की जानकारी लेने पिछले दिनों , भोपाल , दिल्ली , और मुंबई से पत्रकार भी इलाके में आते जाते रहे हैं । वे भी यह जानकार हैरान रह गए की बुंदेलखंड पैकेज से सागर,छतरपुर, दमोह ,टीकमगढ़ , पन्ना और दतिया जिले में 1287 नल जल योजनाएं तो बनी हैं । किन्तु इनमे से अधिकाँश सिर्फ आंकड़ों की शोभा हैं , इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है ।
इनमे छतरपुर जिले में 150 , पन्ना जिले में 280 , टीकमगढ़ में 200 दमोह में 249 , सागर में ३५० और दतिया में 58 नल जल योजनाएं बुंदेलखंड पैकेज से शुरू की गई । इसमें नलकूप आधारित प्रति नलजल योजना पर 6 लाख और कूप आधारित प्रति नलजल योजना पर दस लाख रु व्यय किये गए । इन नल जल योजनाओं का जब मौके पर जाकर देखा गया तो अजब नजारा देखने को मिला । इनमे से बहुतायत में नल जल योजनाएं बंद पाई गई । दिलचस्प तो ये देखने को मिला की दिसंबर 15 में विभाग की मंत्री ने विधान सभा में बताया था की 213 नल जल योजनाएं बंद हैं । इनमे 109 जल श्रोत सूखने के कारण , 126 बिजली कट जाने , 81 योजनाएं पंचायत द्वारा नहीं चलाने के कारण और 39 नल जल योजनाएं पाइप लाइन क्षति ग्रस्त होने के कारण बंद पड़ी हैं ।
इनमे दमोह जिले में 71 , टीकमगढ़ में 38 ,छतरपुर में 37 ,पन्ना में 31 ,सागर में 28 और दतिया में 8 नलजल योजनाएं बंद होने की बात स्वयं मंत्री ने विधान सभा में लिखित जबाब में स्वीकारी थी ।
मंत्री जी ने सत्ता धारी दल के ही विधायक विशवास सारंग को लिखित जबाब तो दे दिया , किन्तु ना मंत्री और ना उनके विभाग के अधिकारियाो ने यह जरुरी नहीं समझा की अल्प वर्षा के कारण गाँव -गाँव में जल के हालात को देखते हुए इन योजनाओं को दुरुस्त कराया जाए । बल्कि हालात इन नलजल योजनाओं के और भी ज्यादा बुरे हो गए ।
पन्ना विधान सभा क्षेत्र से चुनी गई पीएचई विभाग की मंत्री के पन्ना जिले में ही नल जल योजनाओं का बुरा हाल है । जिले की 339 नल जल योजनाएं में से 179 योजनाएं बंद हैं। इनमे 14 स्थानोंमें जलश्रोत सूखने के कारण , 7 स्थानों पर पाइप लाईन क्षतिग्रस्त होने के कारण , 54स्थानों पर पम्प खराब होने के कारण ,66 योजनाएं विद्दुत कनेक्शन काटने के कारण और 22 स्थानों पर पंचायत द्वारा नल जल योजनाओं का संचालन नहीं करने के कारण नल जल योजनाएं बंद हैं। 16 योजनाएंं विभिन्न कारणों से बंद पड़ी हैं । अब आप अंदाज लगा सकते हैं की विभाग का मंत्री अपने जिले में ही नल जल योजनाओं का ठीक ढंग से संचालन नहीं करा पा रहे हो , वह प्रदेश की क्या व्यवस्था कर पाएंगे । विभाग के लोग इनके चालू ना हो पाने के पीछे पंचायत को ज्यादा दोष देते नजर आये ।
दरअसल पी एच ई विभाग ग्रामीण इलाको में बुंदेलखंड पैकेज के अलावा भी नल जल योजनाएँ बनाता है । और इन नल योजनाओं में विभागीय नल जल योजना ,मुख्य मंत्री नल जल योजना के नाम से जाना जाता है । अबतक के ग्रामीण इलाकों की नल जल योजनाएं पंचायत को सौंपने के बाद विभाग अपने दायित्व से मुक्ति पा लेता है । सीमित बजट और बिजली की समस्या से जूझती ग्राम पंचायतें इन योजनाओं को सफलता पूर्वक संचालित करने में असमर्थ हो जाती हैं । वैसे यह सारा कार्य सरपंच और सचिव की इक्षा शक्ति पर भी निर्भर करता है ।
ठेके पर नल जल योजनाएं
मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन्होंने विधान सभा चुनाव के समय अपनी बहनो से वायदा किया था की ,पानी के लिए अब दूर नहीं जाना पडेगा और ना हेंड पम्प चलाना पडेगा बस टोंटी खोली और पानी भर लिया । चुनाव के ढाई साल बाद भी महिलाओ के लिए पानी की समस्या जस की तस रही । बल्कि बुंदेलखंड जैसे इलाके में तो और भी विकराल हो गई । अब मुख्य मंत्री जी ने इसका समाधान ठेका पद्धत्ति में तलाशा है । अब नल जल योजनाओं का निर्माण कार्य पी एच ई नहीं करेगा बल्कि एजेंसी करेगी और उसके संचालन और संधारण का काम भी 20 साल तक एजेंसी को करना होगा । इस योजना के लिए नाबार्ड ने २हजार करोड़ रु दिए हैं ।
प्रदेश में 15058 नल जल योजनाओं में से 12622 चालू और 2436 बंद पड़ी हैं । मध्य प्रदेश में 528637 हेंड पम्पो में से विभाग के आंकड़े 22686 हेंड पम्प बंद बताये जा रहे हैं । जबकि वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा हेंड पम्प बंद पड़े हैं ।
जलसंकट को लेकर मुख्य मंत्री भले ही चिंतित हो पर उनके ही मंत्री मंडल के सदस्य इस बात को लेकर कतई गम्भीर नजर नहीं आ रहे हैं ।
कागजी योजनाएं
सरकार के मंत्री और जन प्रतिनिधि जब गाँव और कस्बों में आते हैं तो बड़ी- बड़ी बातें करते हैं । हर समस्या का समाधान मंच से कर देते हैं पर उनके अमली जामा पहनाने वाले सरकार के तंत्र में इतनी विसंगतियां हैं की उनके क्रियान्वयन में ही वर्षो बीत जाते हैं । दमोह जिले के हटा कस्बे में 2001 में जल आवर्धन योजना शुरू की गई । इसके लिए फ़िल्टर प्लांट , पाइप लाइन टंकी वगैरह का काम शुरू किया गया । 15 वर्ष बाद भी यह योजना शुरू नहीं हो सकी । 5 किमी दूर नदी से टंकी तक आने वाली पाइप लाइन जगह जगह से टूटी -फूटी है । इस मामले में पी एच ई और नगर पालिका एक दूसरे को दोषी ठहराती हैं ।
छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा विकाश खण्ड के बोंकना गाँव में 2008 में एक नलजल योजना बनाई गई थी । योजना के तहत गाँव के २००० लोगों को पानी पहुंचाने के लिए एक बड़ी टंकी का निर्माण किया गया था और गाँव में पाइप लाइन बिछाई गई थी । इस योजना से गाँव वालों को आज तक एक बूंद पानी नहीं मिला । अब विभाग के लोगों ने गाँव वालों को बताया है की गाँव में कोई जल श्रोत नहीं है , चार पांच बोर करवाए हैं वे भी सफल नहीं हैं । अब नदी के पास बोर करवाया है उससे सीधा पानी सप्लाई किया जाएगा ।
यहां विभाग ने यह जरुरी नहीं समझा की जिस नल जल योजना को वो जाल बना रहें हैं , उसका मुख्य तत्व जल कहाँ है ? विभाग के विद्वान इजीनियर असल में योजना के निर्माण के नाम पर मिलने वाली धन राशि के कारण जल्द बाजी में इस तरह की योजनाएं बनाते हैं जो बाद में किसी काम की नहीं रहती । धन , समय और श्रम बर्बाद होता सो अलग । कोई प्रतिनिधि इनसे यह सवाल नहीं पूंछता की जब आप मकान या खेती की जमीन खरीदते हैं तो वहां के जल श्रोत का पता करते हैं या नहीं ?


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