24 अप्रैल, 2016

Bundelkhand Dayri


 संकट में समाधान की तलाश 


रवींद्र व्यास 


बुंदेलखंड में जल को लेकर हालात दिन बा दिन बदतर होते जा रहे हैं । बुंदेलखंड के अथाह जल श्रोत का केंद्र माने जाने वाले छतरपुर जिले के भीमकुंड का पानी भी इस बार  नीचे खिषक गया है । भीम कुंड का इतना नीचे पहुंचा जल स्तर यहां के लोगों ने अपनी याद में पहली बार देखा है । केंद्रीय भूजल बोर्ड की सर्वे रिपोर्ट बताती  हैं की देश में 2001 के आंकड़ों के अनुसार प्रति व्यक्ति 5120 लीटर पानी बचा है ।  2025 तक पानी की उपलब्धता 25 फीसदी ही रह जायेगी । 



                                बुंदेलखंड में जल के संकट का सामना  लगभग हर नगर ,कस्बे  और गाँव के जीव  कर रहे हैं ।  छतरपुर नगर के मुख्य जल प्रदाय वाली धसान नदी और खोप ताल सूख गया है । बूढ़ा बाँध से भी 15 मई तक ही पानी की जुगाड़ हो पाएगी । शेष 45 दिनों कैसे चलेगा काम यह बड़ा सवाल लोगों को बेचैन कर रहा है । छतरपुर नगर पालिका प्यास लगने पर कुआं खोदने की कहावत को चरितार्थ कर रही है । पिछले एक हफ्ते के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से जारी बयानों में यह बताने का प्रयास किया गया की वे नगर की भीषण होती जल समस्या के प्रति बहुत चिंतित हैं । एक आदेश भी जारी किया गया की नगर के सभी मकान मालिकों को अपने यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना अनिवार्य होगा । गिरते जल स्तर को बनाये रखने के लिए यह एक अच्छा प्रयास माना जा सकता है , बशर्ते इसमें प्रचार की लालशा ना हो और नेक नियति से काम की ललक हो । 



  गिरते भू जल स्तर को बनाये  रखने के लिए  वाटर हार्वेस्टिंग की योजना सरकार ने वर्षो पहले शुरू की थी ।  पर विडंबना देखिये खुद सरकारी भवनों में ही वाटर हार्वेस्टिंग को नहीं अपनाया जाता । हमें एक एन जी ओ के प्रमुख मिले वे बताने लगे की आज नगर पालिका वाटर हार्वेस्टिंग की बात कर रही है जबकि  हम जब इनके पास  इस योजना को लेकर गए थे तो इसे खर्चीला बताकर नकार दिया  था । अब ये गए या नहीं गए , बात किससे कर आये ये अलग बात है ? पर वाटर हार्वेस्टिंग योजना जल स्तर बनाये रखने के लिए एक अच्छी पहल है , यही कहा जा सकता है की देर आये दुरुस्त आये । इसमें कुछ कार्य और भी किये जा सकते हैं  जैसे नगर के बेकार पड़े कुओं की सफाई ,और उनमे आस पास के घरों की छतों के वर्षा जल को जोड़ा जाए इससे ना सिर्फ कुए उपयोगी बने रहेंगे बल्कि उनसे जल स्तर भी बना रहेगा । देखा जाए तो जब ट्यूब वेल से पानी निकाला  जाता है तो उससे आस पास का जल बड़ी तेजी से पम्प खींचता है जो  बिगड़ते जल स्तर का एक बड़ा कारण बनता है । 
       
                 इंदौर में वहां के कलेक्टर ने टैंकों से जल विक्रय पर प्रतिबन्ध लगा दिया है , ट्यूब वेल खोदने पर रोक लगा दी है , यदि कही खोदा जाता है तो इसकी जिम्मेदारी सम्बंधित एस डी एम की होगी , और उसके विरुद्द कार्यवाही होगी । इसी तरह पर्याप्त जल क्षमता वाले  ट्यूब वेल  जिला प्रशासन ने अधिग्रहित करने के आदेश दे दिए हैं । छतरपुर जिला प्रशासन ने खनन पर रोक तो लगा दी किन्तु नगर के पर्याप्त जल क्षमता वाले ट्यूब वेल अधिग्रहण हेतु नगर पालिका परिषद आगे आई है । परिषद को अब याद आई है की नगर का प्रमुख जल श्रोत खोप ताल का गहरीकरण कराकर अधिक जल संग्रहित किया जा सकता है , इस लिए शनिवार को इसका  शुभारंभ पूजन के बाद शुरू किया गया । इसके लिए नगर पालिका ने ५० लाख की धन राशि तय की है । 


                                     नगर के सिकुड़ते  तालाब भी  सूखते जा रहे हैं , नरसिंह मंदिर का तालाब पूर्णतः मैदान सा बन गया है , इन हालातों में गिरते जल स्तर के कारण अधिकांश  हेंड पम्प और ट्यूब वेळ ने साथ छोड़ दिया है । नगर की पेय जल दशा को बनाये रखने के लिए  नगर पालिका टेंकरो से लोगों तक पानी पहुंचाने का दावा करती है । जब की दूसरी तरफ लोग कहतें हैं की उनके नलों में  पानी नहीं आता ,टेंकर भी नहीं आता , मजबूरन खरीद कर पानी लेना पड़ता है ।




                                दरअसल रियासत काल में नगर के जल प्रबंधन को बनाये रखने के लिए तालाब , बावड़ी और कुए बनवाए थे ।       छतरपुर नगर में प्रताप सागर , राव सागर , किशोर सागर , रानी तलैया , विंध्यवासनी तलैया , ग्वालमगरा तालाब , नरसिंह मंदिर तालाब , पठापुर का ताल और  गायत्री मंदिर तालाब  नगर के जल स्तर बनाये रखने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाते थे ।  तालाबों पर कांक्रीट के जंगल उग गए , तालाबों तक पहुँचने वाले जल श्रोतो पर अवरोध उत्पन्न हो गए परिणामतः जल भराव पूर्णतः नहीं हो पाता । नगर पालिका धसान नदी से जल भराव की बात करती है ,। पर   नगर पालिका और प्रशासन इन तालाबों और इनके श्रोतो पर हुए अतिक्रमण को हटाने की बात नहीं करती है ।  नगर की  नजर बाग़ , पुलिस लाइन , गांधी आश्रम , मोटे के महावीर , नारायण बाग़ ,संकट मोचन , सरानी दरवाजा , सिद्ध गणेशन मार्ग सहित लगभग एक दर्जन से ज्यादा बावड़ी में से अधिकाँश कचरा घर का रूप ले चुकी हैं । बुंदेलखंड के सागर नगर की तरह यदि छतरपुर नगर में भी नगर पालिका और नागरिक इन बावड़ियों के रख रखाव का प्रयास करती तो एक एक बड़े संकट से कुछ तो निजात  मिलती ।

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