रवीन्द्र व्यास
मध्य प्रदेश में छतरपुर कोर्ट का फैसला आज सदेव याद रखा जाएगा | कोर्ट ने पुलिस के अनुसन्धान और विवेचना की कार्यावाही पर सवालिया निशान लगा दिया है | ७९ पेज के फैसले में कोर्ट ने दोषी विवेचना अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की भी सिफारिश की है |
पुलिस प्रतारणा के कारण दो सगी बहनों ( दीपांजलि और पुष्पांजलि ) ने मई २०१० में आत्म ह्त्या की थी | आज छतरपुर कोर्ट में ड़ी.जे. विमल जैन ने इस मामले में सजा सुनाई _ आरक्षक अरविन्द पटेल को दस साल की कैद और 9 हजार रु. जुर्माना(| तीन अन्य पुलिस कर्मी प्रवीण त्रिपाठी , दिनेश सिंह, और कन्हया लाल को बरी कर दिया गया है | अनुसन्धान में गंभीर त्रुटी पाते हुए , एडिसनल एस,पी. सुनील तिवारी और तत्कालीन टी.आई. आर.के रावत के विरुद्ध कार्यावाही की सिफारिश की गई है |
ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश विमल जैन ने आज जब यह फैसला सुनाया कोर्ट में बड़ी संख्या में लोग मोजूद थे | हर किसी को इस बहु चर्चित मामले के फैसले का इन्तजार था | शासकीय अधिवक्ता राकेश शुक्ल ने बताया की विद्वान् न्याधीश ने आरक्षक अरविन्द पटेल को ३०६ में १० साल ३५४ में एक साल ५०६/१ में एक साल और ३८४ और ३८५ में दो-दो साल की और ९ हजार रु जुर्माना की सजा सुनाई | ९ हजार की इस राशि में से ७ हजार रु, मृतिका के पिता को दी जायेगी | इन्ही धाराओं में कनाहिया लाल को तथा भा.डी.वी. की धारा ५०६ बी और ३०६ में प्रवीण त्रिपाठी और दिनेश सिंह को बारी कर दिया गया |
इस मामले में ड़ी,जे. ने पुलिस के अनुसन्धान , पहचान और मोबाईल डिटेल ना निकलवाने और जाँच में लापरवाही बरतने पर कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाईं | ड़ी.जे. ने एक पत्र फैसले की कोपी के साथ ड़ी.जी. पुलिस भोपाल को भेजने के आदेश दिए जिसमे कार्यावाही और अनुसन्धान में गंभीर त्रुटी पाते हुए , एडिसनल एस,पी. सुनील तिवारी और तत्कालीन टी.आई. आर.के रावत के विरुद्ध कार्यावाही की सिफारिश की गई है |
२६ मई २०१० को शिक्षक राजकुमार सिंह की बेटी दीपांजलि और पुष्पांजलि ने पुलिस प्रतारणा से तंग आ कर जहर खा कर आत्म ह्त्या कर ली थी |घटना के पीछे की कहानी में दीपांजलि को उसके दोस्त हिमांशु के साथ देखने पर पुलिस आरक्षक अरविन्द पटेल और कन्हया लाल तिवारी ने ,इसके साथ अश्लील हरकत की थी और कपडे उतरवाकर वीडियो बनाया था | जिसकी कीमत भी दस हजार मांगी थी |दीपांजलि ने एस.पी. और ए.एस.पी. से शिकायत कर न्याय मांगा था | मामले की जाँच कर एस.पी. ने दोनों आरक्षकों को निलंबित कर दिया था | निलंबित आरक्षकों के सहयोगी प्रवीण त्रिपाठी और दिनेश सिंह उसके घर पहुंचे और धमकाया थाजिसके कारण दोनों बहनों ने जहर खा लिया था जिसमे उन दोनों की मौत हो गई | चक्का जाम कर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाये |
इस मामले की विशेष जांच करने ए.डी.जे.सी.आई.डी. रमेश चन्द्र अरोरा भी आये थे , इन सबके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने दोषी पुलिस करनियों को बचाने के लिए कोर्ट में सभी साक्ष्य पेश नहीं किये | वह भी तब जब शासकीय अधिवक्ता बार- बार इनसे साक्ष्य के लिए कहते रहे | न्यायाधीश ने साक्षों में पुलिस द्वारा की गई लापरवाही को देख कर फैसले दोषी अधिकारियों को भी नहीं बक्शा |
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