छतरपुर/ पुलिस का कहर पत्रकारों पर बा दस्तूर जारी है | पुलिस अधीक्षक शियास ए. ने आश्वासन दिया है कि सरवई में पत्रकार के भाई के विरुद्ध दर्ज किए गए मामले की जांच खजुराहो एसडीओपी से कराई जाएगी। सरवई थाना प्रभारी के खिलाफ पत्रकारों के एक प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को एसपी से इस आशय की लिखित शिकायत कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई थी। एसपी ने तत्काल सरवई थाना प्रभारी से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी ली और केस डायरी खजुराहो एसडीओपी के पास भेजने की निर्देश दिए।
पुलिस अधीक्षक को सौंपी शिकायत में बताया गया है कि सरवई में 2/3 अगस्त की रात दो अलग-अलग वारदातों में कुछ नगदी व जेवरात चोरी हो गए थे। पुलिस ने संदेह के आधार पर लारा कुशवाहा को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी लेकिन उसने चोरी से साफ इंकार करते हुए कहा था कि वह रामनरेश उर्फ लक्कू शुक्ला के साथ घटना की रात 9 बजे अपने घर चला गया था। मामले का खुलासा न होने के बावजूद थाना प्रभारी जीडी वर्मा ने दोनों पर बेरहमी से जुल्म ढाते हुए शांतिभंग के आरोप में सीआरपीसी की धारा 151 के तहत गिरफ्तारी दिखाकर लवकुशनगर भेज दिया था जहां से वे जमानत पर रिहा हो गए थे। आरोपी बनाए गए लक्कू शुक्ला के भाई पत्रकार अवधेश शुक्ला ने थाना प्रभारी के इस कारनामे की रिपोर्ट अखबार में छपवा दी थी। अखबार में खबर छपने से खुन्नस खाकर थाना प्रभारी ने दोनों लोगों को एक बार फिर थाने बुलवाया। उनके साथ गांव के ही बल्ली अहिरवार को भी बुलवाया गया और उसकी पिटाई कर उससे जबरन यह कहलवाया गया कि उसने लक्कू शुक्ला और लारा कुशवाहा के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। उन्होंने तीनों के विरुद्ध चोरी का मुकदमा दर्ज कर जेल भिजवा दिया तथा बरामदगी में अपनी ओर से 500-500 रुपए दर्शा दिए।
पत्रकारों के प्रतिनिधि मंडल ने एसपी से कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि जांच में श्री शुक्ला दोषी पाए जाते हैं तो बेहिचक उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। हालांकि श्री शुक्ला फोटोग्राफी की दुकान चलाते हैं और उनके खिलाफ आज तक कोई अपराध पंजीबद्ध नहीं है। शिकायत की प्रतियां कलेक्टर, डीआईजी, आईजी, पुलिस महानिदेशक, मानव अधिकारी आयोग तथा मुख्यमंत्री को भी भेजी गई हैं।
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