बच्चों की ग्राम सभा :
रवीन्द्र व्यास
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड का यह इलाका वह बदनसीब इलाका है जो दोहरी गुलामी का शिकार रहा जिसका असर आजादी के ६५ साल बाद भी देखने को मिल जाता है | एसे ही इलाके के छतरपुर जिले के एक छोटे से गाँव पनागर के स्कूली बच्चों ने आजादी दिवस के एक दिन पूर्व एक अनोखी बाल ग्राम सभा लगा डाली |
जिसमे मासूम बच्चों ने देश के ४० फीसदी बच्चों के अधिकारों की आवाज उठा कर हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया | सभा में उठाये बच्चों के सवालों के जबाब वहां मोजूद गुरु जानो और पंचों के पास भी नहीं थे |
सुबह से ही गाँव में उत्साह का वातावरण बच्चों में था | हर बालक स्कूल पहुँचने की जल्दी में था | आखिर स्कूल के मैदान में उनकी सभा जो होना थी | बच्चे जुटे शिक्षक और पंच भी जुट गए | बच्चों ने मंच पर पहुँच कर सवाल करना शुरू किये _ आखिर हमारा क्या दोष है जिसके कारण शिक्षक पढाई नहीं कराते और हाफ टाइम के बाद गायब हो जाते हें ? स्कूल में गन्दगी पड़ी रहती है , सफाई नहीं होती , पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है , शोचालय तो बन गए किन्तु उनमे फाटक नहीं , खेल का कोई सामान नहीं ?
बच्चों के इन सवालों पर जब गाँव के शिक्षकों को बुलाया गया तो वे कुछ बोल नहीं पाए , गाँव के उप सरपंच ने तो ना बोलने में ही अपनी भलाई समझी |बड़ी मुश्किल में सचिव महोदय ने काम कराने का भरोषा दिलाया |
इसके बाद दौर आया बाल ग्राम सभा के प्रस्ताव पास करने का | बाल ग्राम सभा की----------- ने बच्चों की ओर से प्रस्ताव रखा की गाँव की ग्राम सभा में बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए कार्य योजना निर्माण की जाए , |१४ नवम्बर को बाल दिवस के मौके पर ज़िला में बाल सभा {ग्राम साभा } आयोजित की जाए | बच्चों के अधिकारों के हनन और उनके साथ होने वाली हिंसा को रोकने के प्रयास किये जायं | ज़िला स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति को को सक्रीय बनाया जाए | प्रत्येक ज़िला में बेसहारा और परिताक्त बच्चों के लिए केंद्र खोले जाएँ |
ये बच्चे पिछले काफी समय से अपने ऊपर हो रहे अन्याय से दुखी थे | गाँव के इन बच्चों ने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए सोचा क्यों ना गाँव की ग्राम सभा की तरह हम भी अपनी बाल ग्रामसभा करें | बच्चों के इस विचार को आवाज दी जिले की महिला समिति ने , जिले के बिजावर विकाश खंड के ३४ गाँव में बाल समिति गठित की गई | इसका अध्यक्ष पूजा दुबे को बनाया गया | पूजा दुबे के अनुसार _ देश में ४० फीसदी बच्चे हें जिनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है |गाँव के बडे तो अपनी समस्या सुना लेते हें किन्तु बच्चों की कोई नहीं सुनता | इस कारण हमने यह सभा की |
बच्चों ने सभा करने के बाद कलेक्टर राजेश बहुगुणा को ज्ञापन भी सौंपा |

