22 अक्टूबर, 2009

सत्ता का सामंतवाद

छतरपुर/ न्यायलय ने आज एक आदेश में ,सियासत के सामंती गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है मध्य प्रदेश में सियासत का एक एसा खेल खेला जा रहा है जिसमे जोर जुल्म ओर जालिमो को बाकायदा सरकार का संरक्षण दिया जा रहा है एसा ही संरक्षण पूर्व विधायक विजय बहादुर सिंह (बी.जे.पी.) को दिया गया था जिस पर २२ अक्तुबर०९ को न्यायलय ने सक्त एतराज जताया ,ओर सत्ता की सियासत के दबाव में हटाई गई धाराए पुनः जोड़ दी वा पूर्व विधायक जी को जेल का रास्ता दिखा दिया \ ये अलग बात है की नेता जी जेल के नाम से बीमार हो गए और उन्हें हॉस्पिटल में भरती करा दिया गया
बुंदेला जी ने विधान सभा चुनाव इस बार भाजपा के टिकट पर लड़ा था ,पर विधान सभा एरिया बदल जाने के कारण वे चुनाव हार गए जाहिर है उनके सपने टूट गए ,अब जिसके सपने टूटते है वे दुखी होते है ,सपने टूटने के कारण तलाशते है ,अब ऐसी दशा में उन्हें कारण समझ आया की हमारी पार्टी के लोगो ने धोखा दिया है , उनकी नजर में सबसे बड़ा धोखे बाज प्रकाश पांडे था , ऐसे धोखे बाज को सबक सिखाने के लिए नेता जी खुद निकल पड़े ,उन्होंने अपने दल बल के साथ पांडे जी की जमकर मरम्त कर दी मर्नासन्य दशा में पांडे जी को छतरपुर से ग्वालियर हॉस्पिटल भेज दिया गया अब जिस राजनगर थाना एरिया में ये घटना घटी ,उस थानेदार ने कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया , शायद उस बेचारे को ये पता नहीं था की मध्य प्रदेश में सरकार वाली पार्टी के लोगो पर बगेर अनुमति के मामला दर्ज नहीं किया जाता हत्या के प्रयास ,लूट ,मारपीट ,गाली-गलो़च दर्ज करने वाले थानेदार की जमकर लानत मलानत हुई ,अधकारियो ने जमकर कोशा, अंततः जाँच में मामला लिया गया ओर ३०७,३९४,५०६ बी की धाराए हटा दी गयी विधायक (पूर्व) बेखोफ घूमते रहे ओर जनता सवाल करती रही की ,ये कैसा कानून है जिसमे अपराधो के आरोपी के सामने कानून के रक्षक नत मस्तक है,\ पर ये है मध्य प्रदेश में जहा कानून को हाथ में लेने वालो का होता है सम्मान बशर्ते वह भाजपाई हो \

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