| MAHRAJPUR-48 | |||||||||
| NO | sn | Year | Name Of Candidate | Party | Vote | % | No | Votar | Voting |
| 1 | 1 | 1952 | Nathuram Ahirwar | Jansangh | 12466 | 3 | 62527 | 23178 | |
| 2 | DhaniRam Ahirwar | Congres | 8652 | 40.04% | |||||
| 3 | Puran | PSP | 2060 | ||||||
| 2 | 1 | 1967 | LaxmanDas Ahirwar | Congres | 11005 | 5 | 64577 | 24172 | |
| 2 | Nathuram Ahirwar | Jansangh | 9944 | 40.21 | |||||
| 3 | HariRam | PSP | 1222 | ||||||
| 3 | 1 | 1972 | Nathuram Ahirwar | Jansangh | 14478 | 4 | 69643 | 30215 | |
| 2 | LaxmanDas Ahirwar | Congres | 11230 | 43.39 | |||||
| 3 | SarjuLal | soslist | 1625 | ||||||
| 4 | 1 | 1977 | Ramdayal Ahirwar | JantaParty | 24088 | 62.8 | 3 | 93021 | 38363 |
| 2 | LaxmanDas Ahirwar | Congres | 13354 | 43.01 | |||||
| 3 | Babu Lal Ahirwar | IND | 921 | ||||||
| 5 | 1 | 1980 | LaxmanDas Ahirwar | Congres | 16604 | 5 | 100375 | 36328 | |
| 2 | Ramdayal Ahirwar | BJP | 11997 | 37.35 | |||||
| 6 | 1 | 1985 | Babu Lal Ahirwar | Congres | 17185 | 41.9 | 9 | 114978 | 42094 |
| 2 | Ramdayal Ahirwar | BJP | 15782 | 38.5 | 36.61 | ||||
| 3 | Dhuram Ahirwar | CPI | 3311 | 8.07 | |||||
| 4 | Nathuram Ahirwar | JantaParty | 1093 | 2.66 | |||||
| 7 | 1 | 1990 | Ramdayal Ahirwar | BJP | 35713 | 63.2 | 13 | 138785 | 58008 |
| 2 | LaxmanDas Ahirwar | Congres | 13925 | 24.6 | 41.79 | ||||
| 3 | Babu Lal Ahirwar | BSP | 559 | ||||||
| 4 | Dhuram Ahirwar | CPI | 1320 | 2.33 | |||||
| 8 | 1 | 1993 | Ramdayal Ahirwar | BJP | 32985 | 42.6 | 12 | 149858 | 77377 |
| 2 | Dhuram Ahirwar | CPI | 3566 | 4.74 | 51.63% | ||||
| 3 | Dashrath Ahirwar | BSP | 3247 | 4.32 | |||||
| 4 | RajaRam Ahirwar | Congres | 25722 | 33.2 | |||||
| 9 | 1 | 1998 | Ramdayal Ahirwar | BJP | 39819 | 46.6 | 7 | 162899 | 87286 |
| 2 | Khilaya Ahirwar | Congres | 26488 | 31 | 53.38 | ||||
| 3 | Dashrath Ahirwar | BSP | 6640 | 7.76 | |||||
| 4 | Chiriya Prajapati | S.P. | 8683 | 10.2 | |||||
| 10 | 1 | 2003 | Ramdayal Ahirwar | BJP | 47764 | 42.8 | 8 | 194032 | 111681 |
| 2 | BalaPrasad Ahirwar | Congres | 16064 | 14.4 | 57.56 | ||||
| 3 | R.D.Prajapati | BSP | 25331 | 22.7 | |||||
| 4 | Chiriya Prajapati | S.P. | 10227 | 9.16 | |||||
| Mahrajpur_Genral_48 | |||||||||
| 11 | 1 | 2008 | Manvendra Singh | IND | 19413 | 18.8 | 20 | 158343 | 103547 |
| 2 | Guddan Pathak | BJP | 18022 | 17.4 | 65.39% | ||||
| 3 | Anjul Saxena | S.P. | 8745 | 8.45 | |||||
| 4 | Vir Singh Rajpout | Congres | 9919 | 9.59 | |||||
| 5 | Rakesh Pathak | BSP | 15261 | 14.7 | |||||
| 6 | Mahesh Kushwaha | S>Dal | 9691 | 9.37 | |||||
| 7 | Virendr Chourasiya | Janshakti | 12931 | 12.5 | |||||
| 12 | |||||||||
02 दिसंबर, 2013
ELECTION rESULT_MAHRAJPUR_1952_2008
06 नवंबर, 2013
बुंदेलखंड में भारी पड़ेगी उमा भारती की उपेक्ष
रवीन्द्र व्यास
बुंदेलखंड _ में चुनावो का शंख नाद हो चुका है / मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी के नक़्शे कदम पर चलकर अपना खुद का वजूद पार्टी को बताने में जुटे हें / अपने इस अभियान के तहत उन्होंने मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनवाने वाली उमा भारती को दरकिनार कर दिया है \ मध्य प्रदेश के पहले चुनाव में 4 . 71 फीसदी वोट लेकर उमा भारती ने कांग्रेस को 2008 में सत्ता में आने से रोक दिया था , अन्यथा 5. 24 फीसदी मतों के अंतर से हारने वाली कांग्रेस कहीं और होती / बुंदेलखंड में तो यह आंकड़ा और भी खतरनाक है \ यहाँ उमा भारती को 12. 34 फीसदी मत मिले थे , और उसके दो प्रत्याशी चुनाव जीते थे चार स्थानो पर वे जीत कि कगार पर थे \ जब कि इस इलाके में कांग्रेस और बीजेपी के मतों मात्र 3. 63 फीसदी मतों का ही अंतर था । तीसरी बार सरकार बनाने का सपना संजोय शिवराज सिंह को बुंदेलखंड में उमा कि उपेक्षा भारी पड़ सकती है ।
देखा जाए तो मध्य प्रदेश में सत्ता के बाहर बैठी कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है और पाने के लिए प्रदेश कि सत्ता है \ इसको देख कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता अपना सब कुछ भुला कर एक मत से चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हें , जबकि बीजेपी के वे तमाम कार्यकर्ता टिकिट वितरण कि वर्त्तमान निति रीति से दुखी हें । हाल ही में बीजेपी ने 147 नामो की जो घोषणा की है उसको लेकर बीजेपी का अशंतोष खुलकर सड़क पर आ गया / ऐसे में उमा भारती की उपेक्षा करना बुंदेलखंड इलाके में पार्टी को कितना भारी पडेगा इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है । बुंदेलखंड का यह इलाका पिछड़ा वर्ग के समीकरण के लिए जाना जाता है । और उमा भारती को इस इलाके में वैसे सामन्ती शक्तियो को छोड़ दिया जाये तो हर कोई मानता है । सामन्ती शक्तिया उन्हे अपने दुश्मन के रूप में देखती हें । प्रदेश में संगठन कि बागडोर नरेंद्र सिंह तोमर के हाथ आते ही ये शक्तिया खुल कर सामने आ गई हें \ इसी का परिणाम बीजेपी के टिकिट वितरण में देखने को मिला है ।
पन्ना के पवई विधान सभा सीट पर मंत्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह का विरोध होने के बावजूद उन्हे टिकिट दिया गया /वे पिछला चुनाव जनशक्ति के प्रत्याशी से मात्र 0.81 फीसदी मतों के अंतर से जीत पाये थे / छतरपुर जिले के महराजपुर विधान सभा सीट से बीजेपी ने हाल ही में पार्टी में शामिल हुए मानवेन्द्र सिंह को टिकिट देकर कार्यकर्ताओ को अंगूठा दिखा दिया / दिग्विजय मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री रहे मानवेन्द्र सिंह कांग्रेस से टिकिट ना मिलने के कारण पिछला चुनाव निर्दलीय लड़े थे / और चतुष्कोणीय संघर्ष में वे बीजेपी के पुष्पेन्द्र पाठक से मात्र 1.35 फीसदी मतों के अंतर से चुनाव जीत पाए थे । बीजेपी कार्यकर्ताओ का इस सीट पर असंतोष इस कारण और भी ज्यादा है क्यों कि यह सीट 1962 से अब तक सुरक्षित सीट रही । 2003 तक हुए दस चुनावो में 7 बार बीजेपी 3 बार कांग्रेस चुनाव जीती । इस कारण भी यहाँ के कार्यकर्ताओ की अपेक्षाए कुछ ज्यादा थी । पर शायद वे ये नहीं जानते की नैतिकता का पाठ सिर्फ कार्यकर्ताओ के लिए होता है , पार्टी के सत्ता धीशों के लिए सत्ता ज्यादा जरुरी होती है /
राजनगर विधान सभा सीट से बीजेपी ने कांग्रेस के विधयक विक्रम सिंह (नाती राजा) के विरुद्ध अपने मंत्री राम कृष्ण कुशमारिया को चुनाव मैदान में उतारा है / डॉ। कुशमरिया ने पिछला चुनाव दमोह जिले कि पथरिया विधान सभा सीट से लड़ा था , और बा मुशकिल वे आधा फीसदी मतों के अंतर से बीएसपी प्रत्याशी पुष्पेन्द्र सिंह हजारी को हरा पाये थे / उनके इस विधान सीट पर उनका जमकर विरोध था । पर वे सरकार में मंत्री हें और पार्टी में उन्हे पटेलों (कुर्मी) का बड़ा नेता माना जाता है इस कारण उन्हे छतरपुर जिले कि पटेल बाहुल्य सीट से मैदान में उतारकर बीजेपी मैदान मारना चाहती है / यहाँ पर उनका विरोध जैम कर हो रहा है , पर ऊन्हे इस सीट पर कांग्रेस के अन्तरकलह का लाभ मिल सकता है /
बुंदेलखंड में बीजेपी के इन हालातो को देख कर कांग्रेसी उत्साहित हें , वहीं उमा भारती से जुड़े नेताओं का मानना है की ये सारी स्थितियां बीजेपी की तिकड़ी द्वारा जानबूझ कर बनाई जा रही है , ताकि बुंदेलखंड में हार का ठीकरा उमा के सर पर फोड़ा जाए /
30 अक्टूबर, 2013
कोई भी संत भगवान की पूरी लीला का वर्णन नहीं कर सकता//।मैथिलीशरण भाईजी
(लखनलाल
असाटी)
छतरपुर, । कल्याण मंडपम् में शरदपूर्णिमा की रात्रि में रामकथा कहते
हुए मैथिलीशरण भाईजी ने कहा कि शरदपूर्णिमा को ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में महा
रासलीला की थी और शरदपूर्णिमा को ही जनकपुर में भगवान श्रीराम व किशोरीजी ने पुष्प
वाटिका में एक दूसरे को पहलीबार देखा था। देवता भी जानते हैं कि अमृत से शरीर को तो
तृप्त किया जा सकता है पर मन को तृप्त करने के लिए भगवान के रूपामृत की जरुरत है इसलिए
अमृत पान करने वाले सभी देवता आकाश में स्थिर होकर भगवान की मनोहारी महा रासलीला का
आनंद लेने से नहीं चूके।
भाईजी ने कहा कि भगवान तो भाव के ग्राहक
हैं इसीलिए तो गोपियों के साथ महारास में श्रीकृष्ण गोपियों का भाव रखने अनेक रुपों
में प्रगट हो गए और प्रत्येक गोपी के हाथों को हाथ में लेकर उन्होंने नृत्य किया। यही
स्थिति वनवास से लौटकर अयोध्या में भगवान राम की थी। गुरु, माताएं, भाई, सखा, सेवक
सभी भगवान से अपने-अपने भाव अनुरुप मिलना चाह रहे हैं।
प्रेमातुर सब लोग निहारी। कौतुक कीन्ह
कृपाल खरारी।।
अमित रुप प्रगटे तेहि काला। जथा जोग मिले
सबहि कृपाला।।
उसी समय कृपालु श्रीराम जी असंख्य रुपों
में प्रकट हो गए और सबसे एक ही साथ यथायोग्य मिले। हरि अनंत हरि कथा अनंता विषय का
विस्तार करते हुए भाईजी ने कहा कि अपनी-अपनी मति के अनुसार संत भगवान की कथा कहते हैं
परन्तु कोई भी संत भगवान की पूरी लीला का वर्णन नहीं कर सकता। पद्मभूषण रामकिंकरजी
कथा कहने के बाद मंच की सीढिय़ों से उतरते वक्त सदैव यही सोचते थे कि वह आज क्या-क्या
नहीं कह सके। भाईजी ने कहा कि लोग अपनी-अपनी बुद्धि से कथा कहते हैं और प्रभु उसे भाव
से सुनते हैं। जीवन में भाव की उदारता या भाव की प्रगाढ़ता हुई तो भगवान प्रकट हो जाएंगे
क्योंकि वे भाव वत्सल हैं।
भाईजी ने कहा कि लोग अपनी पत्नी, परिवार
और बच्चों से प्यार करना तो स्वत: सीख जाते हैं पर भगवान से प्रेम कैसे किया जाए यह
जरुर पूछते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार के भाव आपके अपने परिवार और संसार के प्रति
हैं वही प्रेमाभव भगवान के प्रति क्यों नहीं। लक्ष्मणजी से प्रेम करना सीखिए।
सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि।
जिमि अबिबेकी पुरुप सीरीरहिं।।
वह प्रभु की सेवा ऐसे करते हैं जैसे अज्ञानी
मनुष्य शरीर की करते हैं।
छिनु-छिनु लखि सीय राम पद जानि आपु पर
नेहु।
करत न सपनेहुं लखनु चितु बंधु मातु पितु
गेहु।।
लक्ष्मनजी स्वप्न में भी भाइयों, माता-पिता
और घर की याद नहीं करते। भाईजी ने कहा कि उर्मिला जी का त्याग लक्ष्मण जी के त्याग
से ज्यादा है। वह वनवास को जाते लक्ष्मणजी से भेंट नहीं करती हैं। उर्मिला जी सोचती
हैं कि कहीं मेरे कष्ट को मेरी आंखों में देखकर लक्ष्मनजी के मन में कोई विक्षेप न
आ जाए और उतनी देर के लिए वह भगवान की सेवा से च्युत न हो जाएं। भाईजी ने कहा कि जब
तक हम शरीर भाव से ऊपर नहीं उठेंगे भाव तत्व को नहीं जान पाएंगे।
भाईजी ने कहा कि घर में आप भगवान की पूजा
करते हैं, भगवान की मूर्ति को स्नान कराते हैं, वस्त्र पहनाते हैं, श्रृंगार करते हैं,
प्रसाद लगाते हैं, आरती करते हैं। एक बार पूजा की यह क्रिया पूरी करने के बाद आंख बंद
कर भाव से भगवान की पूजा जरुर करें और जो भी पूजा क्रियाएं की हैं उसे भाव में देखिये
तो आपको अद्भुत आनंद आएगा।
भाईजी ने वनवास के दौरान गांव की स्त्रियों
द्वारा सीताजी से राम-लक्ष्मन का परिचय जानने की कथा का बड़ा ही भावपूर्ण चित्रण किया।
उन्होंने कहा कि सीताजी ने लक्ष्मणजी का परिचय तो वाणी से दिया पर रामचंद्रजी का परिचय
वाणी की जगह इशारे से दिया।
सहज सुभाय सुभग तन गोरे। नामु लखनु लघु
देवर मोरे।।
बहुरि बदनु बिधु अंचल ढांकी। पिय तन चितई
भौंह करि बांकी
खंजन मंजु तिरीछे नयननि। निज पति कहेउ
तिन्हहिं सियं सयननि।
भाईजी कहते हैं कि जो सर्व गुण संपन्न
हैं, सर्व व्याप्त हैं उसका परिचय शब्दों में कैसे किया जा सकता है। फिर सीताजी यह
भी संदेश देना चाह रहीं हैं कि हमारे और इनके बीच कोई भेद नहीं हैं अर्थात सीता-राम
एक ही हैं और अद्धैत हैं।
मृत्यु और जीवन एक दूसरी के पूरक हैंooभाईजी
(लखन लाल असाटी)
छतरपुर, व्यक्ति के जीवन रूपी धारा के दो घाटों का नाम हरिकृपा और हरि इच्छा है। जब भी कुछ अनुकूल घटे तो उसे हरिकृपा और जब प्रतिकूल घटे तो उसे हरिइच्छा मानकर संतोष कर लीजिए। अनुकूल और प्रतिकूल दोनों ही परिस्थितियों में भगवान को नहीं भूलिए।छतरपुर के कल्याण मण्डपम् में ''हरि अनंत हरि कथा अनंता" पर तीसरे दिन प्रवचन करते हुए मैथिलीशरण भाई जी ने कहा कि जब हम मौसम में 'पतझड़ को सहजता से स्वीकार कर लेते हैं तो जीवन में प्रतिकूलता को क्यों नहीं?
युगतुलसी पं. राम किंकर प्रवचन माला में उनके शिष्य भाई जी ने कहा कि जब सूर्य उदित हो रहा होता है तो वह सबसे पहले पश्चिम को ही देखता है, जहां उसे अस्त होना है। इसी तरह अस्ताचल सूर्य की नजर पूरब पर होती हैं, जहां अगली सुबह उसका उदय होना तय है। सूर्य के उदय और अस्त होने के उदाहरण को उन्होने मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुये उन्होनें कहा कि मृत्यु और जीवन एक दूसरी के पूरक हैं। जीवन में जो मिल रहा है उसे हरिकृपा माने और दु:खो को भगवान के चरणों में विलीन कर दें। जीवन में पश्चिम आने का तात्पर्य है कि जीवन में सूर्य के उदय का समय निकट है।
सर्वजन सुखाय-सर्वजन हिताय
भाई जी ने कहा कि हमारी संस्कृति सर्वजन सुखाय-सर्वजन हिताय की रही है। गोस्वामी तुलसीदास जी राम चरित मानस की रचना ' स्वान्त:सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा, अर्थात खुद के सुख के लिए करते हैं। पर सारा संसार आज इसे पढक़र सुख पा रहा है। इसी तरह राजा भगीरथ अपने पितरों के मोक्ष हेतु गंगा जी को पृथ्वी पर लाये पर आज गंगा जी हम सभी को मोक्ष प्रदान करती हैं। भाई जी ने कहा कि यदि आपका प्रयोजन आपका स्वार्थ आपका सुख वास्तविक और सात्विक है तो इससे आपके साथ-साथ सारे संसार को भी सुख मिलेगा।
भाई जी ने कहा कि छिपाने की वृत्त्ति का नाम कपट है। जो है उसको छिपाने की चेष्टा कपट कहलाती है। और जो नहीं है उसे दिखाने की वृत्ति दंभ है। कपट और दंभ का संयुक्त उपयोग माया का रूप है। माया का अर्थ है कि जो वास्तव में है वह दिखाई न दे।
भ्रम की सृष्टि संध्याकाल में
भाई जी ने कहा कि भ्रम की सृष्टि संध्याकाल में होती है। दिन के प्रकाश में सब स्पष्ट दिखाई देता है रात में अंधकार में कुछ भी नहीं। भाई जी ने नारद मोह की कथा कहते हुए कहा कि नारद जी ने काम को जीत लिया, कामदेव पर गुस्सा न करे क्रोध को भी जीत लिया। उन्होंने इन्द्र को आश्वस्त कर लोभ भी जीत लिया परन्तु इसके बावजूद उन्हें बाद में मोह हो गया। यह माया जन्य विकृति प्रभु की ओर सी आई। क्योकि नारद जी जब तक भगवान के भजन में लीन थे कामदेव ने सारे उपाय कर लिये पर भगवान उनकी रक्षा कर रहे थे। पर बाद में वह यह ध्यान नहीं रख पाये कि उन्होने काम क्रोध लोभ को प्रभु की कृपा से ही जीता है।
उन्हें यह अभिमान हो गया कि शंकर जी भी सिर्फ काम को जीत सके थे पर क्रोध नहीं जीत सके थे। इसलिये उन्होंने कामदेव को भष्म कर दिया था। भगवान ने लीला के द्वारा नारद जी के अभिमान को दूर किया। सच्चा भक्त अपनी प्रशंसा भगवान के चरणों में अर्पित कर देता है। भाई जी ने कहा कि संत का तात्पर्य केवल उसके वेष से नहीं है। साधारण गृहस्थ व्यक्ति भी अच्छा संत हो सकता है। जीवन में भगवान की कृपा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। इसलिये जीवन में अगर कुछ कहने या सपने देखने का अभ्यास करना है तो असली अभ्यास 'भगवान की कृपा कहने का है। सपना हमारे चित्त का प्रतिबिम्ब होता है। जब चित्त में भक्ति के संस्कार आ जाते है तो सपने भी वैसे ही दिखने लगते है।
कोई भी ज्ञानी या मूर्ख नहीं होता ;;भाई जी
(लखन लाल असाटी)
छतरपुर, । भगवान राम ने किसी के अंदर कोई परिवर्तन करने की जगह उसके स्वभाव को जस का तस स्वीकार कर लिया, यही राम राज्य बनाने की कला है। जो व्यक्ति जैसा है, उसमें जो गुण है उसे स्वीकार कर लीजिए। यह कथा युग तुलसी रामकिंकर जी के कृपा पात्र मैथिलीशरण भाई जी ने बुन्देलखण्ड परिवार द्वारा कल्याण मंडपम् में आयोजित सप्त दिवसीय रामकथा के पहले दिन क ही। प्रांरभ में कथा प्रसंग से परिचय कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार व संपादक विनीत खरे ने साकेतवासी नारायणदास अग्रवाल बड़े भैया को स्मरण कर उनके प्रयासों को सतत जारी रखने के लिए कथा आयोजक जयनारायण अग्रवाल जय भैया व कथा रसिक श्रोताओं का स्वागत किया। रामकथा सुनने अपर आयुक्त वाणिज्यकर व पूर्व कलेक्टर राजेश बहुगुणा, जिला जज उपभोक्ता फोरम पी.के.श्रीवास्तव, ए.डी.जे. कृष्ण मूर्ति मिश्रा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
''हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहि बहुबिधि सब संता।।
प्रसंग पर कथा कहते हुए भाई जी ने कहा कि जब अनेक रंगो को मिलाकर एक सुंदर चित्र की रचना हो सकती है तो अलग -अलग स्वभाव व वृत्तियों के लोगों को मिलाकर सुंदर समाज और संसार की रचना क्यों नहीं की जा सकती है। रामराज्य बनाने की यही तो कला है जो जैसा है उसे स्वीकार कर लें। भगवान राम ने हनुमान, सुग्रीव, विभीषण सभी को जैसा का तैसा स्वीकार कर लिया उनके अंदर परिवर्तन का प्रयास नहीं किया। समाज में कोई छोट बड़ा नहीं है, सब भगवान के ही स्वरूप हैं।भाई जी ने कहा कि संसार में जो भेद दिखाई देता है उसे भेद नहीं पूरक भेद मानिए। अर्थात सभी एक दूसरे के पूरक हैं। समुद्र का जल खारा है परन्तु जब वह थोड़ा ऊपर उठकर बादल बनकर फिर नीचे बरसता है तो मीठा हो जाता है। यदि आप भी समाज का कल्याण करना चाहते हैं तो अपने आपसे थोड़ा ऊपर उठना सीखिए।
स्वार्थी नहीं उपयोगी बनिए-
भाईजी ने कहा कि वृक्ष के फल, पत्तों का तो व्यक्ति उपयोग करता है सूख जाने पर उसकी लकडिय़ों को भी जलाने में उपयोग में ले लेता है। इसी तरह प्रत्येक व्यक्ति हर तरीके से उपयोगी वस्तु खोजता है, वह चाहता है कि समाज उसके उपयोग में आये। पर जब उसका खुद का उपयोग कोई अन्य व्यक्ति करना चाहे तो वह उसे स्वार्थी बताने लगता है। भाई जी ने कहा कि समाज आपके उपयोग में आये इसके लिये जरूरी है कि आप भीदूसरों के लिए उपयोगी बन जाए। संसार का प्रत्येक व्यक्ति स्वार्थी और परमार्थी दोनो ही है। हम जड़ वस्तुओं से बहुत पाने की आशा रखते हैं पर खुद चैतन्य होकर भी दूसरों को कुछ देना नहीं चाहते।
वर्तमान की चिंता कीजिए
भाई जी ने कहा कि भूत और भविष्य तो वर्तमान काल के ही दो कल्पित नाम हैं। जिसने वर्तमान को पहचान लिया वह तीनों का सही-सही उपयोग कर लेगा। वर्तमान को पहचान लेने से भविष्य आनंदमय होगा तथा भूत के दु:ख चिंतन का मौका नहीं आयेगा। जो सारे संसार में ईश्वर को देख रहा हो वह क्यों किसी से विरोध करेगा। जो व्यक्ति दूसरों में अज्ञान व अपने आप में ज्ञान देख रहा हो वह अद्वैत नहीं द्वैत देख रहा है। अपने अंदर ईश्वर दिखे तो खुद को ज्ञानी मानिए, भगवान में ईश्वर दिखे तो प्रेमी और सबमें ईश्वर दिखे तो दास समझिए।
रिष्यमूक पर्वत के निकट भगवान राम और हनुमान के मिलन प्रसंग की चर्चा करते हुए भाई जी ने कहा कि संसार के लोग अपना परिचय गुणों को जोडक़र देते हैं पर भगवान अपना परिचय गुणों को हटाकर देते हैं। तभी तो हनुमान जी द्वारा परिचय पूछे जाने पर भगवान राम कहते है।
''कोसलेस दसरथ के जाए। हम पितु बचन मानि बन आए।।
नाम राम लछिमन दोउ भाई। संग नारि सुकुमारि सुहाई।।
इहां हरी निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही।।
आपन चरित कहा हम गाई। कहहु बिप्र निज कथा बुझाई।।
भगवान राम ने अपने किसी भी गुण का बखान नहीं किया। पर हनुमान ने उन्हें पहचान लिया क्योंकि वे सच्चे भक्त हैं जिनकी भक्ति त्रिकाल अबाधित है जो हमेशा अखंड रहती है। भाई जी ने कहा कि जिसने गुण को स्वीकार किया वह गुणाभिमानी हुए बगैर नहीं रहेगा। और अभिमान तो कभी न कभी खंडित होना ही है।
भाईजी ने रामकथा का विस्तार करते हुए कहा कि हनुमान, शंकर और सती तीनों ने ही राम को एक ही अवस्था में देखा अर्थात सीता हरण के बाद रोते-विलपते हुए। पर शंकर जी और हनुमान जी को कोई भ्रम नहीं हुआ।
''संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियॅ अति हरषु बिसेषा।।
इसी तरह साधारण मानव के रूप में भी राम लक्ष्मन को देखने के बावजूद हनुमान जी उनसे पूंछ रहे हैं।
की तुम्ह तीनि देव महॅ कोऊ। न नारायन की तुम्ह दोऊ।।
भाई जी ने कहा कि रोते -विलखते तथा वैभव -एश्वर्य हीन राम को शंकर और हनुमान ने तो पहचान लिया क्योकि जो सत् चित आनंद भगवान के अंदर है वह सच्चे भक्त के अंदर भी है। पर सती को मोह हो गया कि जो निर्गुण ब्रह्म है वह सगुण कैसे हो गया। शंकर जी से रामकथा सुनते हुये पार्वती जी को उस समय बड़ा आश्चर्य हुआ कि नारद जैसे परम ज्ञानी संत को भी मोह हो गया। तो भगवान शंकर ने कहा कि
''बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।
जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।
कोई भी ज्ञानी या मूर्ख नहीं होता यह सब तो भगवान की माया है। भक्तों में माया व्याप्त होती है। परन्तु राक्षसों में यह विकृ ति होती है क्योंकि विकृति तो राक्षस का चरित्र होता है। भगवान के भक्त के जीवन में माया जनित क्लेश तो कभी-कभी ही दिखाई देते है। भगवान तो कृपा के अतिरिक्त कुछ करते ही नहीं क्योंकि भगवान का स्वभाव ही कृपालु है जब हमसे कोई कार्य होता दिखे तो अपने ज्ञान का मान न करें इसे भगवान की कृपा समझे।
24 अक्टूबर, 2013
वोट हमारा, उम्मीदवार हमारा "
लोकउम्मीदवार की खोज
बुंदेलखंड के छतरपुर
जिले के बिजावर विधान सभा क्षेत्र में लोकतंत्र का एक नया चेहरा देखने को मिल रहा है / राष्ट्रिय युवा संगठन नामक संगठन गाँव-गाँव में मतदाता चौपाल लगा रहा है / चौपाल में " हमारा विधायक कैसा हो" जैसे गंभीर विषय पर ग्रामीण चर्चा कर रहे है //ये लोग "वोट हमारा, उम्मीदवार हमारा "की तर्ज पर लोकउम्मेदवार की खोज कर रही है /
सगठन के प्रान्तीय संयोजक अमित भटनागर बताते हें की पिछले १० माह से लोकतंत्र अभियान के तहत वोट हमारा, उम्मीदवार हमारा की तर्ज पर लोकउम्मेदवार की प्रक्रिया चलायी जा रही है,/ ग्रामीण अपने उम्मीदवार में अपराध, नशा, भ्रष्टाचार से दूर किसी स्वच्छ छवि के गैर राजनैतिक व्यक्ती की ख़ोज कर रहे है,\ इसके लिए गाँव में चौपाल लगाईं जा रही है, / चौपाल में मतदाताओ का उत्साह देखते ही बनता है,/ पहली बार मतदाताओ को अपना उमीदवार चुनने का मौका मिला है,//
बिजावर विधानसभा के गाँव-वार्ड में पहुच मतदाता को जागरूक किया है, जिससे प्रेरित हो 250 गाँव/वार्ड के मतदाताओं ने अपने गाँव/वार्ड में मतदाता परिषद् का गठन किया है, हर मतदाता परिषद ने सर्व सम्मती से अपने प्रतिनिधियों को चुना इन 250 प्रतिनिधियों से मिलकर ही बिजावर विधानसभा के हाईकमांड का निर्माण किया गया है जो अपने से अलग विधानसभा के किसी एक मतदाता को विधायक का टिकिट देंगे, उससे पहली सभी प्रतिनिधी अपने गाँव-कस्वे व सर्किल में लोकउम्मीदवार ख़ोज रहे है|
विजावर विधानसभा के सभी गाँव व वार्ड के प्रतिनिधियों से विधानसभा की हाईकमांड का निर्माण किया गया है जिसका सम्मलेन २५-२६ अक्टूवर को बिजावर में आयोजित की जा रही है, 25 अक्टूवर को लोकउमीदवार हेतु सभी प्रस्तावित लोगो को बुलाया जा रहा है, जिसमे से हाईकमांड की सर्वसहमती से २६ अक्टूवर को लोकुउमीदवार की घोषणा की जायेगी,
11 अक्टूबर, 2013
देवी को प्रसन्न करने चडाई जीभ
छतरपुर/ एम. पी. /
11 अक्टूबर 13
जिला मुख्यालय से ८० किलोमीटर दूर बछोन गाँव में अंध श्रद्धा का एक मामला सामने आया / लवकुश नगर थाना इलाके के बछोन गाँव के काली देवी मंदिर में एक भक्त ने अपनी जीभ काट कर चडा दी / उसे इलाज के लिए छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है ।
नवरात्रि के मोके पर तेजराम पाल (22 )नाम के युवक ने नो दिन का उपवास रखा था / 10 _11 अक्तूबर की मध्य रात्रि ये भक्त देवी मंदिर पहुंचा और माँ को खुश करने हेतु उसने अपनी जीभ चाक़ू से काट कर माँ के चरणों में अर्पित कर दी / तेजराम के भाई रामचंद्र ने बताया की उसे सपने में माँ ने जीभ चडाने को माता ने कहा था , इसी लिए उसने ये बलि चडाई है / घटना की जानकारी सुबह लगी तब उसे इलाज के लिए लवकुश नगर ले गए फिर यहाँ जिला अस्पताल में भर्ती किया है । द्र. सुनील चौरसिया ने बताया की खून ज्यादा बह जाने के कारण हालत चिन्ताजनक है , इलाज चल रहा है , ठीक हो जाएगा \
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