बुन्देलखण्ड

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26 फ़रवरी, 2025

महिलाओं को अपनी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रयास करें :: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

 महिलाओं को अपनी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रयास करें :: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 

 













26 FEB 2025 
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज (26 फरवरी, 2025) मध्य प्रदेश के गढ़ा, छतरपुर में श्री बागेश्वर जन सेवा समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुईं। राष्ट्रपति की ओर से वधुओं को साडी और वर को सूट प्रदान किये गए | प्रतीकात्मक तौर पर तीन जोड़ों को यह भेंट भी दी गई | 

राष्ट्रपति ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमारा देश महिलाओं के विकास से महिलाओं के नेतृत्व में विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में हम सभी को अपनी बेटियों और बहनों को सशक्त और सक्षम बनाने में योगदान देना चाहिए। उन्होंने लोगों से महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारे छोटे-छोटे प्रयास उन्हें सशक्त बनाएंगे। उन्होंने महिलाओं को अपनी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रयास करने की सलाह भी दी।



भारत की संत परम्परा 
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी परंपरा में संतों ने सदियों से जनमानस को राह दिखाई है। उन्होंने समकालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई है। उन्होंने जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव के खिलाफ भी आवाज उठाई है। चाहे गुरु नानक हों, संत रविदास हों, संत कबीर दास हों, मीरा बाई हों या संत तुकाराम हों, सभी ने अपने उपदेशों  के माध्यम से लोगों को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया है। भारतीय समाज में उनके योगदान ने उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाया है। उन्होंने कहा कि समकालीन आध्यात्मिक गुरु आत्मनिर्भर, सामंजस्यपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए उन्हें तुलसी की माला , हनुमान यंत्र , हनुमान जी का विग्रह और सनातन साहित्य के साथ स्मृति चिन्ह भेंट किया | उन्होंने राष्ट्रपति के स्वागत भाषण में कहा यह हम सबका सौभाग्य है कि छोटे से गाँव में राष्ट्रपति जी पधारी हैं | उन्होंने कहा कि समिति में २०० लोगों ने इन २५१ कन्याओं का चयन किया | जिसमे १०८ आदिवासी समाज की बेटियां हैं | अगर भारत के मंदिरों की दान पेटियों को गरीबों के लिए खोल दिया जाए तो भारत विश्व गुरु बन जाएगा | उन्होंने लोगों से प्रार्थना भी की जिनका कोई ना हो उनका सहारा तो बनकर देखो  | 
विवाह समारोह में एमपी के मुख्यमंत्री डॉ  मोहन यादव ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए कहा कि सरकार की कन्यादान योजना के तहत यहां हो रहे विवाह समारोह के वर वधु को ५१ हजार रु भी दिए जाएंगे | उन्होंने धीरेन्द्र शास्त्री के इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज में ऊंच नीच ,जातीय समस्या सहित ५० तरह की झंझटों से मुक्ति मिलेगी | 
 राज्यपाल मांगू भाई पटेल ने  कहा कि देवादिदेव महादेव की कृपा आज यहां आये सभी वर वधुओं को मिलेगी | धीरेन्द्र शास्त्री के इस कार्य को उन्होंने सराहनीय बताते हुए कहा इनको जो समा दिया जा रहा वह स्वावलंबी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण  है || 
२०१९ से शुरू हुआ 
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने २०१९ से निराश्रित कन्याओं के विवाह की शुरुआत की थी | अब तक  1100  विवाह यहाँ हो चुके हैं | 

भगवान बालाजी के दर्शन कर प्राप्त किया आशीर्वाद



महामहिम राष्ट्रपति ने गढ़ा के बागेश्वर धाम आगमन पर बालाजी मंंदिर पहुंचकर दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने देशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर यज्ञशाला में आहुति भी दी। इस मौके पर  प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं राष्ट्रपति की पुत्री इतिश्री मुर्मू भी उपस्थित रहीं।
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Political_सनातन पर आघात और प्रतिघात

 सनातन पर आघात और प्रतिघात 


  रवीन्द्र व्यास 

बुंदेलखंड अपनी अलग दशा और दिशा के कारण  हमेशा सुर्खियों बटोर ही लेता है |  बुंदेलखंड के छतरपुर जिला मुख्यालय का समीपवर्ती गाँव  गढ़ा बागेश्वर धाम इन दिनों सुर्ख़ियों में है | रविवार को यहां आये प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी प्रसिद्धि में चार चाँद और लगा दिए | बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म की कट्टर छवि के लिए जाने जाते हैं | इसी मंच से पी एम् मोदी ने सनातन द्रोहियों को ऐसा सख्त सन्देश दे दिया जो आने वाले चुनावों का एजेंडा तय करेगा | 
                  दरअसल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहाँ  बागेश्वर धाम मेडिकल साइंस और रिसर्च सेंटर (कैंसर हॉस्पिटल } का शिलान्यास करने आये थे । यहां उन्होंने बागेश्वर धाम के हनुमान मंदिर में मत्था भी टेका आरती भी की और  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की  माता जी से मुलाकात भी की ।

 धीरेंद्र महाराज  की पहचान देश दुनिया में एक ऐसे बाबा के रूप में है जो लोगों की समस्याओ का समाधान पर्चा निकाल कर करते हैं , पर इससे भी बड़ी पहचान उनके कट्टर सनातनी होने और खुल कर हिंदुत्व की बात कहने वाले एक संत के रूप में हो गई है | इन दिनों बागेश्वर धाम का मंच सनातन  सभ्यता , और  संस्कृति  के साथ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने वाला मंच भी माना जाता है | बागेश्वर धाम से ही  धीरेन्द्र शास्त्री ने हिन्दू राष्ट्र की हुंकार भरी थी , और हिन्दू जोड़ो पदयात्रा भी निकाली थी |  आदिवासी समाज का सम्मलेन भी किया और उनकी आर्मी बनाने की दिशा में भी आगे बड़े | वे एक ऐसे संत हैं जो खुले तौर पर एक करोड़ कट्टर हिन्दू बनाने की जरुरत पर जोर देते हैं | 
                                         ऐसे मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  बगैर किसी नेता का नाम  लिए सनातन विरोधियों पर निशाना साधा | उन्होंने   कहा कि  आज कल हम देखते हैं नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मखौल उड़ाता है, लोगों को तोड़ने में जुटा है, और बहुत बार  विदेशी ताकते भी इन लोगों का साथ देकर देश व धर्म को कमजोर करने की कोशिश करती दिखती हैं।हिंदू आस्था से  नफरत करने वाले ये  लोग सदियों से किसी न किसी वेश  में रहते रहे हैं । गुलामी की मानसिकता से घिरे हुए ये लोग हमारे मत , मान्यताओं ,और मंदिरों पर हमारे  संत, संस्कृति और परंपराओं पर हमला करते रहे हैं।ये लोग हमारे पर्व , परंपराओं और प्रथाओं को गाली देते हैं जो धर्म जो संस्कृति स्वभाव ऐसी प्रगतिशील  है उस पर कीचड़ उछालने   की यह हिम्मत दिखाते हैं | हमारे समाज को बांटना उसकी एकता को तोड़ना ही इनका एजेंडा है | इस माहौल में मेरे छोटे भाई धीरेंद्र शास्त्री जी काफी समय से एकता के मंत्र  को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं | 
          पी एम् मोदी यहीं नहीं रुके उन्होंने मठ और मंदिरों के सामाजिक कार्यों  को भी बताया | उन्होंने कहा   हमारे मंदिर हमारे मठ हमारे धाम एक ओर  ध्यान और साधना के केंद्र रहे हैं दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक चिंतन और चेतना  के भी केंद्र है | हमारे ऋषियों ने ही हमें हमें आयुर्वेद का विज्ञान दिया , हमारे ऋषियों ने ही हमें  योग का विज्ञान दिया जिसका परचम आज पूरी दुनिया में लहरा रहा है।भारत में कितने बड़े-बड़े अस्पताल भी हमारी धार्मिक संस्थान द्वारा चलाए जा रहे, साइंस से जुड़े कितने रिसर्च इंस्टीट्यूट चलाए जा रहे हैं ,करोड़ों गरीबों का इलाज और सेवा इन संस्थानों में होता  है|इस गौरवशाली परंपरा में बागेश्वर धाम के रूप में एक और नया अध्याय जोड़ने जा रहा हूं अब बागेश्वर धाम में आरोग्य का आशीर्वाद भी  लोगों को मिलेगा |  हमारी तो मान्यता  ही है , परहित सरस धर्म  नहीं भाई , दूसरों की सेवा दूसरों की पीड़ा का निवारण ही हमारा संकल्प है ,  नर  में नारायण जीव में शिव इस भाव से मानव मात्र की सेवा यही हमारी परंपरा रही है | 
              प्रयागराज कुंभ को   एकता का महाकुंभ बताकर  पीएम मोदी ने उन तमाम विरोधियों को भी जवाब दे दिया जो सनातन धर्म  को जाति और सम्प्रदाय में बांटने का जतन कर रहे हैं | बहुत ही कम दिनों में मुझे बुंदेलखंड आने का दुबारा  सौभाग्य मिला है। इस बार तो बालाजी बागेश्वर धाम का बुलावा आया है। यह हनुमान जी की कृपा है की आस्था का यह केंद्र अब आरोग्य का भी केंद्र बनने जा रहा है। 
           दरअसल  पिछले कुछ समय से राजनेताओं , कथित नामचीन हस्तियों द्वारा सनातन हिन्दू धर्म  पर विवादित टिप्पणियां की है तो कुछ ने अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणियां की हैं  | इसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे , अखिलेश  यादव , ममता बनर्जी , उदयनिधि स्टालिन , असद्दुदीन उवेशी,मौलाना तौकीर रजा ,अफजाल अंसारी सहित ना जाने कितने ऐसे नाम हैं जो हिन्दू धर्म और दर्शन पर विवादित बोल बोलने से परहेज नहीं करते | इनका उद्देश्य  आम जन मानस सिर्फ यह मानता है कि ये लोग मुस्लिमो को रिझाने के लिए इस तरह की बयान बाजी करते हैं , और हिन्दू धर्म के लोगों को विभाजित करने का षड्यंत्र करते हैं | 
                         राजनीति के जानकार कहते हैं कि राजनीति करने वाले ये लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि देश से वाम पंथ का एक तरह से सफाया क्यों हुआ ? भारत देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ और  आपने सत्ता पाने के बाद क्या किया , सबसे ज्यादा आघात   उसी वर्ग पर किया जो इस देश का आधार है | यह वे लोग हैं अथवा उस परिवार से आते हैं  जिनके पूर्वजो ने भय और लालच से अपना धर्म नहीं छोड़ा | अब अगर ऐसे लोगों के धर्म पर  आप टिप्पणियां करोगे तो वे मौन तो नहीं बैठेंगे | मोदी जी एक कुशल राज नेता हैं ,वे बीते तीन चुनावों में यह समझ चुके हैं कि उनका साथ सिर्फ सनातनी ही देंगे , जिनको वे लुभाने का वह जतन कर रहे थे वह एक तरह से उनका भ्रम था | इसी को देखते हुए उन्होंने बागेश्वर धाम के मंच से जो कहा वह एक दूर का राजनैतिक एजेंडा है | उन्होंने बताया कि इन नेताओं को " बटेंगे  तो कटेंगे " की बात और उसके बाद आये राज्य  के चुनावी परिणामो से भी यह लोग समझ नहीं पा रहे हैं | 
     

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23 फ़रवरी, 2025

Bageshwar_नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मखौल उड़ाता है, लोगों को तोड़ने में जुटा है, पी एम् मोदी

नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मखौल उड़ाता है, लोगों को तोड़ने में जुटा है, 
पी एम् मोदी  
छतरपुर /
 गढ़ा गांव के बागेश्वर धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, बागेश्वर धाम मेडिकल साइंस और रिसर्च सेंटर का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने बागेश्वर धाम के हनुमान मंदिर में मत्था भी टेका , धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की माता जी का पर्चा भी निकाला और उनकी माता जी से मुलाकात भी की ।
  इस मौके पर जनसमूह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 
बहुत ही कम दिनों में मुझे बुंदेलखंड आने का दुबारा  सौभाग्य मिला है। इस बार तो बालाजी बागेश्वर धाम का बुलावा आया है। यह हनुमान जी की कृपा है की आस्था का यह केंद्र अब आरोग्य का भी केंद्र बनने जा रहा है।  बागेश्वर धाम मेडिकल साइंस इंस्टीट्यूट का  वर्चुअल भूमि पूजन करने के बाद  उन्होंने कहा  10 एकड़ में बनेगा ,इसमें 100 बेड की सुविधा तैयार होगी। इस पुनीत कार्य के लिए श्री धीरेंद्र शास्त्री जी का अभिनंदन करता हूं , और बुंदेलखंड के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
              इस मौके पर भी उन्होंने बगैर किसी नेता का नाम   लिए कहा कि  आज कल हम देखते हैं नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मखौल उड़ाता है, लोगों को तोड़ने में जुटा है, और बहुत बार  विदेशी ताकते भी इन लोगों का साथ देकर देश वा धर्म को कमजोर करने की कोशिश करती दिखती हैं।हिंदू आस्था से  नफरत करने वाले ये   लोग सदियों से किसी न किसी वेश  में रहते रहे हैं । गुलामी की मानसिकता से घिरे हुए ये लोग हमारे मान्यताओं ,और मंदिरों पर हमारे  संत, संस्कृति और परंपराओं पर हमला करते रहे हैं।ये लोग हमारे पर्व , परंपराओं और प्रथाओं को गाली देते हैं जो धर्म जो संस्कृति स्वभाव ऐसी प्रगतिशील  है उस पर कीचड़ उछलने  की यह हिम्मत दिखाते हैं | हमारे समाज को बांटना उसकी एकता को तोड़ना ही इनका एजेंडा है | इस माहौल में मेरे छोटे भाई धीरेंद्र शास्त्री जी काफी समय से एकता के मंत्र  को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं | 

अब  उन्होंने समाज और मानवता के हित में एक और संकल्प लिया है इस कैंसर संस्थान के के निर्माण की ठानी है यानी अब यहां बागेश्वर धाम में भजन ,भोजन  और निरोगी जीवन तीनों का आशीर्वाद मिलेगा। हमारे मंदिर हमारे मठ हमारे धाम एक ओर  ध्यान और साधना के केंद्र रहे हैं दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक चिंतन और चेतना  के भी केंद्र है | हमारे ऋषियों ने ही हमें हमें आयुर्वेद का विज्ञान दिया , हमारे ऋषियों ने ही हमें  योग का विज्ञान दिया जिसका परचम आज पूरी दुनिया में लहरा रहा है। हमारी तो मान्यता  ही है , परहित सरस धाम नहीं भाई , दूसरों की सेवा दूसरों की पीड़ा का निवारण ही हमारा संकल्प है ,  नर  में नारायण जीव में शिव इस भाव से मानव मात्र की सेवा यही हमारी परंपरा रही है | 
एकता का महाकुंभ 
प्रयागराज  महाकुंभ पर उन्होंने कहा कि  हर तरफ  इसकी चर्चा हो रही है,  करोड़ों लोग वहां पहुंचे और  लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई |  संतो के दर्शन किए हैं \ यह एकता का महाकुंभ है आने वाली सदियों तक 144 वर्ष बाद हुआ यह महाकुंभ एकता के महाकुंभ के रूप में प्रेरणा देता  रहेगा और  देश के लिए मजबूती का अमृत देगा |   इस एकता के महाकुंभ में स्वच्छता के कार्य को संभाल रहे मैं  स्वच्छता के साथियों का  आदरपूर्वक नमन भी उन्होंने किया  । वही   पुलिसकर्मियों के   सेवा भाव  और  नम्रता के लिए   पुलिसकर्मियों को   बधाई भी दी   |

पी एम् मोदी ने कहा   प्रयागराज के इसी महाकुंभ में  सेवा भावना के साथ अनेक अनेक समाज सेवा के प्रकल्प चल रहे हैं, इस तरह मीडिया का ध्यान नहीं जाता  है |  महाकुंभ में नेत्र महाकुंभ चल रहा है इस नेत्र महाकुंभ में देश के  कोने-कोने से आए यात्री गरीब परिवार के आए हुए लोग मुफ्त में लोगों को इलाज मिला। ऐसे कितने ही अनुष्ठान इस एकता के महाकुंभ में चल रहे हैं |  हमारे साधु संतों के  मार्गदर्शन में  हजारों डॉक्टर हजारों स्वयंसेवक सेवा भाव से समर्पण भाव से इसमें लगे हुए हैं जो लोग एकता के महाकुंभ में जा रहे हैं वह इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं | 
भारत में कितने बड़े-बड़े अस्पताल भी हमारी धार्मिक संस्थान द्वारा चलाए जा रहे, साइंस से जुड़े कितने रिसर्च इंस्टीट्यूट चलाए जा रहे हैं ,करोड़ों गरीबों का इलाज और सेवा इन संस्थानों में होती है दीदी मां यहां बैठे अनाथ बालिकाओं के लिए समर्पण भाव से जिस तरह इसके सेवा में  अपना जीवन उनके लिए समर्पित कर दिया यह एक साधना  है | 

हमारे बुंदेलखंड का चित्रकूट प्रभु राम से जुड़ा यह पवित्र तीर्थ दिव्यंगियां  की सेवा का कितना बड़ा केंद्र है | 
इस गौरवशाली परंपरा में बागेश्वर धाम के रूप में एक और नया अध्याय जोड़ने जा रहा हूं अब बागेश्वर धाम में आरोग्य का आशीर्वाद भी मिलेगा मुझे बताया गया है यहां दो दिन बाद महाशिवरात्रि के दिन 251 बेटियों के सामूहिक विवाह महोत्सव का भी आयोजन होगा मैं इस पुण्य कार्य के लिए भी बागेश्वर धाम की सराहना करता हूं मैं सभी को बेटियों को सुंदर और सुखी जीवन के लिए अग्रिम बधाई देता था आशीर्वाद देता हूं |  देश ने मुझे सेवा का मौका  दिया  है तो मैं "" सबका साथ सबके विकास को जनमानस का संकल्प बनाया "" सबको इलाज सबको आरोग्य इस विजन को पूरा करने के हम अलग-अलग स्तर पर फोकस कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं की भी यहां चर्चा की और उससे मिलने वाले लोगों के लाभ को भी उन्हें बताया और साथ यह भी कहा कि मैं हर बार हर सभा में अपनी सरकार की योजनाओं की चर्चा सिर्फ इसलिए करता हूं ताकि एक भी व्यक्ति इन योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए कोई छूट न जाए कोई जरूरतमंद छूट न जाए। 
 
 बागेश्वर बागेश्वर धाम में कैंसर मरीजों के लिए इतना बड़ा अस्पताल खुलने जा रहा है क्योंकि कैंसर अब हर जगह बड़ी परेशानी बन रहा है इसलिए अब सरकार समाज संत सब कैंसर के खिलाफ लड़ाई में मिलकर प्रयास कर रहे हैं गांव में अगर किसी को कैंसर हो जाए उससे लड़ना कितना मुश्किल हो जाता है। 
 उन्होंने कहा हमारी सरकार इसके  समाधान में लगी है इस बार के बजट में भी कैंसर से लड़ने की कई तरह की घोषणाएं की गई ,कैंसर की दावों को सस्ता किया जाएगा अगले तीन वर्ष में देश के हर जिले में कैंसर डे केयर सेंटर खोले जाएंगे इसमें जांच भी होगी और आराम करने की सुविधा भी होगी  जिला अस्पताल है चिकित्सा केंद्र है वहां कैंसर क्लिनिक भी खोले जा रहे हैं | कैंसर  से सुरक्षा के लिए  सावधान और जागरूकता  को बताते हुए उन्होंने कहा कि  कैंसर की पड़ताल कराना आवश्यक है |  इसलिए हम 30 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों  की जांच के लिए एक अभियान चला रहे  है|   हम सावधानी रखेंगे तो बागेश्वर धाम के कैंसर अस्पताल में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी \

मोदी आपका सेवक बनाकर आपकी सेवा में जुटा  है पिछली बार जब मैं आया था 45000 करोड़ की  लिंक परियोजना का लोकार्पण किया था आपको ध्यान होगा  यह परियोजना कितने दशकों से लटकी पड़ी थी कितनी सरकारी आई हो चली गई पार्टी के नेता आते थे लेकिन पानी के किल्लत बढ़ती ही चली जाती थी पिछले किसी सरकार ने अपनी अपना  यह काम नहीं किया था | यह काम तब शुरू हुआ जब आपने मोदी को आशीर्वाद  दिया ,  पीने के पानी का संकट दूर करने के लिए भी तेजी से कम हो रहा है जल जीवन मिशन हर घर नल जल जीवन मिशन की भी उन्होंने चर्चा की। 
बुंदेलखंड समृद्ध बने इसके लिए जरूरी है हमारी माताएं बहने भी सशक्त   बने  लखपति दीदी बने लखपति दीदी और ड्रोन  दीदी जैसी योजना शुरू की है हम तीन करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
स्वामित्व योजना के चर्चा करते हुए उन्होंने कहा ड्रोन  तकनीक से जमीन की पैमाइश करके लोगों को स्वामित्व दिए जा रहे हैं मध्य प्रदेश में इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा है। 
साथियों बुंदेलखंड की धरती को विकास की नई ऊंचाई तक पहुंचने के लिए डबल इंजन की सरकार दिन-रात काम कर रही है |  मैं बागेश्वर धाम से कामना करता हूं कि बुंदेलखंड विकास की राह पर इसी तरह आगे बढ़ता रहे | आज मैं हनुमान दादा के चरणों में है  मुझे लगा  क्या यह धीरेंद्र शास्त्री अकेले ही पर्ची निकलेगा या मैं भी निकल मैंने देखा कि हनुमान दादा की मुझ पर कृपा होते की  नहीं  हनुमान दादा ने मुझे आशीर्वाद दिया और मैं आज पहली पर्ची निकाल उनकी माता जी की पर्ची निकाल ली उसके बाद उन्होंने यहां यह बात बात  भी दी , यह बहुत बड़ा अवसर है बहुत बड़ा काम है संकल्प बड़ा हो संतों का आशीर्वाद हो प्रभु की कृपा हो तो समय सीमा में सब सुलभ होता है आपने कहा है इसके उद्घाटन के लिए मैं आऊं उनकी बारात में मैं आऊं मैं सार्वजनिक रूप से  से वादा करता हूं कि मैं दोनों काम करूंगा ।

मोदी जी के आने से बुन्देलखण्ड की दिशा और दशा बदलने वाली है:: बागेश्वर महाराज

 बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को बालाजी का विग्रह, सनातन क्या है  पुस्तक और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत  किया। स्वागत भाषण में उन्होंने  कहा कि बुन्देलखण्ड वीरों की भूमि, हीरों की भूमि और संतों की भूमि है। आज का पल अनूठा, अद्भुत और अकल्पनीय के साथ-साथ अविष्मणीय है। एक छोटे से गांव में सामान्य आग्रह करने पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए हैं। पूरा बुन्देलखण्ड उनका स्वागत करता है। शास्त्री  ने कहा कि कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखने का आमंत्रण स्वीकार करने से मोदी जी की उदारता दिखाई दे रही है। मोदी जी गाय, गंगा और गरीब की बात करने वाले हैं।  मोदी जी को विश्वामित्र की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि मोदी जी के आने से बुन्देलखण्ड की दिशा और दशा बदलने वाली है।

धीरेन्द्र शास्त्री  ने कहा कि मोदी जी बागेश्वर धाम आए और उन्होंने उनकी माता जी  से भेंट की । शास्त्री जी  ने कहा कि कैंसर अस्पताल में मोदी जी की माताजी के नाम से एक वार्ड बनाया जाएगा। उन्होंने बालाजी से प्रार्थना की कि उनकी कृपा मोदी जी पर बनी रहे ताकि वे इसी तरह जनकल्याण के कार्य करते रहें।
यह समय प्रदेश के लिए स्वर्णकाल है: डॉ. मोहन यादव
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  अपने उद्बोधन में कहा कि  बुन्देलखण्ड आन-बान-शान के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाला क्षेत्र है। इस समय समूचा प्रदेश स्वर्णकाल में चल रहा है। उन्होंने कहा कि  केन-बेतवा योजना से बुन्देलखण्ड की दशा बदलने वाली है | 
 प्रधानमंत्री जी के कारण अब बुंदेलखंड सूखा के संकट से उबरेगा और सुखी और समृद्ध बनेगा | 

 इस मौके पर प्रधान मंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का आशीर्वाद भी लिया सभा राजयपाल मांगू भाई पटेल , रामभद्राचार्य, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा , योगेश्वर बालक दास साध्वी ऋतम्भरा जी  मंचासीन रहे | 
By Ravindra Vyas at फ़रवरी 23, 2025 कोई टिप्पणी नहीं:
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22 फ़रवरी, 2025

Bageshwar_कैंसर हॉस्पिटल का इस जगह बनना दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश।o मनोज तिवारी

 कैंसर हॉस्पिटल का इस जगह बनना दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश।o मनोज तिवारी 


छतरपुर/  से 24 किमी दूर  गढ़ा  गांव का  बागेश्वर धाम सुर्खियों में है । 23 को प्रधानमंत्री जी को यहां कैंसर हॉस्पिटल की आधार शिला रखना है। उनकी तैयारियों को देखने और समझने के लिए नेताओं का दौरा लग रहा है। 

            बागेश्वर धाम आज पहुंचे बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी ने इस मौके पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा  दुनिया के यशस्वी नेता हमारे देश के   प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी बागेश्वर  बालाजी में आ रहे हैं ,23 को ,हमारे मध्य  प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला जी और जगदीश देवड़ा जी  दोनो लोग यहां तैयारी में हैं। हमारे लिए तो यह धाम ही है बहुत दिनों से मैं इस दिन की कामना कर रहा था और प्रधानमंत्री जी का आगमन हम सबके लिए बहुत अच्छा है और इस क्षेत्र के लिए भी ।हम सब तैयारी में लगे लगे हैं।

यह तो एक अद्भुत कार्य  यहां से शुरू हुआ है, इसके लिए हम  बागेश्वर पीठाधीश्वर  को धन्यवाद करते हैं। लेकिन कैंसर हॉस्पिटल का इस जगह बनना दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश है की संत महात्मा भी इसका इनीशिएटिव ले सकते हैं। और जब इनिशिएटिव संत महात्मा लेते हैं बागेश्वर पीठाधीश्वर जैसे कर रहे हैं तो  प्रधानमंत्री का भी सहयोग होता है पूरा प्रदेश इसमें लगा हुआ है हमारे पास धन्यवाद देने के लिए शब्द कम है।
महाकुंभ और बुंदेलखंड के इस कुंभ के संबंध में उन्होंने कहा कि मुझे तो लगता है जो महाकुंभ 140 वर्ष बाद आया उसकी प्रति छाया  हमें बागेश्वर धाम में दिख रही है महाराज जी ने जिस प्रकार से बालाजी की कृपा से सब कुछ किया है हम सब लोग उसमें गिलहरी जैसा प्रयास कर रहे हैं। 
धीरेंद्र शास्त्री और बागेश्वर धाम पर हो रहे इस कार्यक्रम पर लोगों द्वारा  कमियां निकालने के संबंध में जब उनसे टिप्पणी चाही  गई तो उन्होंने कहा ऐसे लोगों को  छोड़ दीजिए उनको बालाजी के ऊपर । देखिए आज यहां इतना बड़ा कार्य हो रहा है,दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है कि एक महात्मा  ने कैंसर हॉस्पिटल की शुरुआत कर दी है । दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां इसमें अपनी पुष्पांजलि , अपना श्रमदान करेंगे इसके बावजूद भी कोई इसमें मीन मेक निकलता है तो हनुमान जी कल्याण करेंगे ।

आज  मध्य प्रदेश के दो उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा जी, पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल , सांसद मनोज तिवारी ने बागेश्वर बालाजी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया । इसके बाद  लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ कार्यक्रम स्थल के मंच पर पहुंचे ।   कार्यक्रम को लेकर बैठक की  जहां  अधिकारियों ने मंच पर पहुंच कर के कार्यक्रम की जानकारी दी।
गुरुवार  की शाम मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी  बागेश्वर धाम पहुंचे थे ।  उन्होंने  बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की इस दौरान उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार के द्वारा किए जा रहे हैं मानवता के कार्यों  की सराहना की और बागेश्वर महाराज से कहा कि धाम पर अब आनंद की वर्षा हो रही हैं और जो आप मानवता के कार्य कर रहे है चाहे वह कन्या विवाह के कार्य हो या फिर कैंसर हॉस्पिटल बना रहे है जिसका शिला पूजन में प्रधानमंत्री मोदी जी आ रहे हैं,। 
 बागेश्वर महाराज ने मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी का बागेश्वर बालाजी भगवान के स्मृति चित्र  भेट किया । 
21 feb 25,
By Ravindra Vyas at फ़रवरी 22, 2025 कोई टिप्पणी नहीं:
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Khjuraho_बुंदेलखंड की धरती पर पत्थर भी चमकता है तो हीरा कहलाता हैO मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 51वें खजुराहो नृत्य समारोह में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन गिनीज विश्व रिकॉर्ड से बढ़ेगा नृत्य साधकों का मान, देश की संस्कृति और नृत्यसाधकों के लिए गौरव का क्षण  - मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 खजुराहो  में एमपी के मुख्यमंत्री   डॉ. मोहन यादव ने ५१ वे खजुराहो नृत्य समारोह का  दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस वर्ष  नृत्य समारोह का आयोजन खजुराहो में स्थित कंदरिया महादेव मंदिर एवं देवी जगदम्बा मंदिर के मध्य मंदिर प्रांगण में शुरू हुआ।  खजुराहो में इस बार एक    नया विश्व रिकार्ड बना | 24 घंटे 9 मिनट 26 सेकंड तक 139 नृत्य कलाकारों द्वारा वृहद शास्‍त्रीय नृत्‍य  किया गया | यह  मैराथन नृत्य  गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है | 

                                     मुख्यमंत्री  डॉ यादव ने   कहा कि ईश्वर की साधना को समर्पित वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन गिनीज विश्व रिकॉर्ड से नृत्य साधकों का मान बढ़ेगा। यह देश की संस्कृति और नृत्य साधकों के लिए गौरव का क्षण है। सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और विश्व पटल पर अंकित करने का यह सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि गिनीज विश्व रिकॉर्ड से पूरा विश्व भारत की विविध और समृद्ध संस्कृति से प्रकाशमान होगा। 

24 घंटे 9 मिनट 26 सेकंड तक 139 नृत्य कलाकारों की अविरल और साधना से बना विश्व रिकॉर्ड न सिर्फ कला साधकों का हौसला बढ़ेगा बल्कि शासन के संस्कृति और विरासत को सहेजने के प्रयासों को भी गति देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती पावन और पवित्र है। बुंदेलखंड की धरती पर पत्थर भी चमकता है तो हीरा कहलाता है। मनुष्य चमकता है तो बुंदेला कहलाता है। वैसे ही बुंदेलखंड में नृत्य होता है तो वह अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह कहलाता है।


 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शास्त्रीय नृत्यों का सृजन भगवान की साधना के लिए किया गया है। जैसे कथकली में भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, जीवन, और गतिविधियों को दिखाया जाता है। वहीं भगवान नटराज ने तांडव नृत्य और आनंद नृत्य का सृजन किया है। आज बने गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड में शास्त्रीय नृत्य की सतत प्रस्तुति से समय की निरंतरता को भी प्रदर्शित किया है। जिस तरह ब्रह्मांड में आकाशगंगा ब्लैक होल की ओर बढ़ती है और सौरमंडल में सूर्य एवं अन्य गृह अपनी गति से चलायमान है। समय को परमात्मा का स्वरूप माना गया है इसलिए समय का सदुपयोग जीवन में सबसे आवश्यक है।

    19 फरवरी, 2025 को दोपहर 2:34 बजे  वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन (रिले) शुरू हुआ |  20 फरवरी, 2025 दोपहर 2:43 पर  पूर्ण हुआ । 24 घंटे 9 मिनट 26 सेकंड का ये कीर्तिमान विश्व में पहली बार  मध्य प्रदेश के नाम  हुआ |   मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम  में 139 नृत्य कलाकारों ने  निरंतर 24 घंटे 9 मिनट तक कथक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, ओडिसी नृत्यों की प्रस्तुति दी। गिनीज टीम द्वारा इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड घोषित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री को सौंपा गया। 

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संस्कृति को सहेजने और उसे विश्व पटल पर अंकित करने के प्रयास किए जा रहे है। इन्हीं प्रयासों के क्रम में यह छठवां गिनीज विश्व रिकॉर्ड बना है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह के उद्देश्य और आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

  

मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन—छतरपुर के सहयोग से आयोजित इस नृत्य अनुष्ठान का शुभारम्भ अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव, विशेष अतिथि माननीय सांसद खजुराहो श्री वी.डी. शर्मा एवं अध्यक्षता माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने की। इस अवसर प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन विभाग श्री शिवशेखर शुक्ला एवं संचालक संस्कृति श्री एन.पी.नामदेव भी उपस्थित रहे।

राज्य रूपंकर कला पुरस्कार 

 नृत्य समारोह  राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदान किए गए।  दत्तात्रय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार सुश्री दिव्या पोरवाल, रघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार सुश्री वीना सिंह, नारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार सुश्री रश्मि कुरिल, मुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार श्री नीतेश पंचाल, देवकृष्ण जयशंकर जोशी पुरस्कार श्री उज्जवल ओझा, जगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार सुश्री प्रीति पोतदार जैन, सैय्यद हैदर रजा पुरस्कार श्री मनीष सिंह, लक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार सुश्री पल्लवी वर्मा, राममनोहर सिन्हा पुरस्कार श्री शुभमराज अहिरवार और विष्णु चिंचालकर पुरस्कार श्री लकी जायसवाल को प्रदान किया गया।

 

By Ravindra Vyas at फ़रवरी 22, 2025 कोई टिप्पणी नहीं:
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19 फ़रवरी, 2025

Khajuraho_Dance_खजुराहो नृत्य समारोह में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का होगा प्रयास

 51वाँ खजुराहो नृत्य समारोह में 


खजुराहो के कंदरिया महादेव मंदिर एवं देवी जगदंबा मंदिर के मध्य मंदिर प्रांगण में 51वाँ खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन होगा |  20 से 26 फरवरी 2025 को प्रतिदिन सायं 6ः30 बजे से आयोजित किया जाएगा।  अंतर्राष्ट्रीय  समारोह में इस वर्ष कई नए आयाम तथा  गतिविधियां जोड़ी गई हैं। इस कार्यक्रम में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। जिसके तहत 19 फरवरी को शाम 4 बजे से 26 घंटे की एक मैराथन डांस परफोर्मेंस दी जाएगी | खजुराहो नृत्य समारोह में प्रारंभ से ही नृत्य जगत के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं। इस वर्ष भी यह परम्परा जारी रखते हुए पद्म पुरस्कार एवं संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड प्राप्त नृत्य कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।


संस्कृति विभाग के सहायक संचालक अमित  यादव ने  बताया कि  मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भोपाल द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, मध्यप्रदेश पर्यटन एवं जिला प्रशासन  छतरपुर के सहयोग से यह  आयोजन 20 से 26 फरवरी, 2025 तक होगा ।
नृत्य संसार में खजुराहो नृत्य समारोह के मंच को बहुत ही सम्मान और आदर के साथ देखा जाता है। यहां प्रस्तुति करना किसी भी नृत्य कलाकार के लिए गर्व की बात होती है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए 51वें खजुराहो नृत्य समारोह में होने वाली गतिविधियों को विस्तार एवं व्यापकता देने का प्रयास किया गया है, ताकि नृत्य के साथ ही अन्य कला माध्यमों के भी विभिन्न पहलुओं का आस्वादन कलाप्रेमी कर सकें। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार अलंकरण समारोह भी आयोजित किया जाएगा।

कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह में देश, प्रदेश के विभिन्न जगहों से प्रसिद्ध कलाकार आके शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसमें अधिक से अधिक नवाचार करने का प्रयास किया गया है। जिसमें बाल नृत्य महोत्सव प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। साथ ही स्थानीय कलाकार है उनकों भी उचित मंच कार्यक्रम में दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य लोकल कलाकार एवं शिल्पकार एक स्टॉल दिया जाएगा। जिससे वह अपने प्रोडेक्ट को डिस्प्ले कर सकेंगे और प्रचार करेंगे। उन्होंने सभी से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। इस कार्यक्रम में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। जिसके तहत 19 फरवरी को शाम 4 बजे से 26 घंटे की एक मैराथन डांस परफोर्मेंस दी जाएगी। साथ ही बुंदेली एवं लोकल कलाकारों को भी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।


वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास

विभाग द्वारा सभी प्रमुख भारतीय शास्त्रीय नृत्यों यथा कथक, भरतनाट्यम, कुचीपुड़ी, ओडिसी आदि के साथ सबसे लम्बा वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन (रिले) प्रस्तुति की जा रही है, जिसे गिनीज बुक ऑफ वलर््ड रिकार्ड में दर्ज करने का प्रयास रहेगा। जिसमें निरन्तर 24 घंटे से भी अधिक नृत्य प्रस्तुतियां होंगी। यह गतिविधि आदिवर्त संग्रहालय, खजुराहो में होगी। गतिविधि का शुभारम्भ 19 फरवरी, 2025 को दोपहर 2ः00 बजे होगा जो निरन्तर 20 फरवरी, 2025 को सायं 5ः00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसका नृत्य निर्देशन या संयोजन कथक नृत्यांगना तथा फिल्म अभिनेत्री श्रीमती प्राची शाह, मुम्बई एवं संगीत निर्देशन या संयोजन श्री कौशिक बसु, मुम्बई द्वारा किया जाएगा। प्रारंभिक रूप से 5-5 कलाकारों के मान से 25 ग्रुप तैयार किये जायेंगे, जिसमें लगभग 125 कलाकार प्रतिभागिता करेंगे। विभागीय संगीत महाविद्यालय या विश्वविद्यालय एवं नृत्य के वरिष्ठ कलागुरुओं के साधनारत शिष्यों को प्रस्तुति के लिए अमांत्रित किया गया है।

स्थानीय कलाकरों को भी मौका

जिला प्रशासन छतरपुर के प्रयासों से स्थानीय कलाकारों का प्रोत्साहन बढ़ाने इस बार 10 शिल्पियों के लिए स्टॉल का आरक्षण एवं 21 से 26 फरवरी, 2025 में परिसर में स्थापित मंच पर सायं 4ः30 से 6ः00 बजे के मध्य प्रति दिवस एक-एक स्थानीय नृत्य प्रस्तुति के लिए व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे स्थानीय शिल्पियों एवं नृत्य प्रस्तुति के कलाकारों मंच मिलेगा और बुंदेली संस्कृति का बढ़ावा मिलेगा।
खजुराहो बाल नृत्य महोत्सव

खजुराहो नृत्य समारोह जैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से स्थानीय युवाओं को जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग ने "
खजुराहो  बाल नृत्य महोत्सव" के नाम से  पहली बार एक नई गतिविधि जोड़ी है।इसमें  मध्यप्रदेश के मूल निवासी 10 से 16 साल के युवा नृत्य कलाकार एक पृथक मंच पर अपनी प्रस्तुति दे सकेंगे। इसका उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परम्परा को संरक्षित करना और युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के प्रति प्रोत्साहित करना है। ये प्रस्तुतियां खजुराहो नृत्य समारोह परिसर में स्थित पृथक मंच पर सायं 5 से 6 बजे तक होंगी। इस महोत्सव हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें 310 नृत्य कलाकारों के आवेदन प्राप्त हुए थे। वरिष्ठ नृत्य गुरुओं की चयन समिति द्वारा 15 नृत्य कलाकारों को चयनित किया गया है।

प्रणाम: वरिष्ठ भरतनाट्यम नृत्यांगना पद्मविभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम के जीवन एवं कला अवदान एकाग्र प्रदर्शनी एवं व्याख्यान

51वें खजुराहो नृत्य समारोह में इस वर्ष एक नई अनुषांगिक गतिविधि प्रणाम  को जोड़ा गया है। इस गतिविधि के अंतर्गत सुविख्यात नृत्यांगना और पद्मविभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम के जीवन और कला अवदान को अभिव्यक्त करते आयोजन होंगे। जिनमें डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम के जीवन और कला अवदान पर एकाग्र प्रदर्शनी, व्याख्यान एवं संवाद सह प्रदर्शन भी शामिल होंगे। 
 प्रदर्शनी में डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम की कला यात्रा को दर्शाया जाएगा, जिसमें उनकी प्रस्तुति के फोटो, किताबें, उनके द्वारा डिजाइन नृत्य परिधान एवं उन्हें प्राप्त अवार्ड शामिल होंगे।  डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम भरतनाट्यम नृत्य की सुप्रसिद्ध कलाकार हैं। वह एक रिसर्च स्कॉलर, कोरियोग्राफर, म्यूजिक कंपोजर, गायिका, शिक्षिका, इंडोलॉजिस्ट और लेखिका भी हैं। वह भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों द्वारा उनके सम्मान में कई फिल्में और वृत्तचित्र बनाए गए हैं। हाल ही में वर्ष 2024 के पद्म विभूषण पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा हुई है। वे खजुराहो नृत्य समारोह में पूर्व में प्रस्तुति दे चुकी हैं।

व्याख्यान एवं संवाद हेतु डॉ. जयश्री राजगोपालन, सुश्री अनुराधा विक्रांत, सुश्री महती कन्नन, श्री अरविंथ कुमारस्वामी, श्री पियाल भट्टाचार्य, डॉ. राजश्री वासुदेवन, श्री अर्जुन भारद्वाज एवं डॉ. सच्चिदानंद जोशी पधारेंगे। 

पद्म पुरस्कार प्राप्त और एसएनए अवॉर्डी कलाकार देंगे नृत्य प्रस्तुतियां

खजुराहो नृत्य समारोह में प्रारंभ से ही नृत्य जगत के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी हैं। इस वर्ष भी यह परम्परा जारी रखते हुए पद्म पुरस्कार एवं संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड प्राप्त नृत्य कलाकारों को आमंत्रित किया गया है।

 कुचिपुड़ी की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मभूषण विदुषी राधाकृराजा रेड्डी, मणिपुरी नृत्य कलाकार पद्मश्री दर्शना झवेरी, छाऊ नृत्य कलाकार पद्मश्री शशधर आचार्य, ओडिसी नृत्य कलाकार प्रवत कुमार स्वाइन, मोहिनीअट्टम नृत्य कलाकार पद्मश्री विदुषी भारती शिवाजी, कथक नृत्य कलाकार पद्मश्री विदुषी शोभना नारायण, सत्रीय नृत्य कलाकार पद्मश्री गुरु जतिन गोस्वामी शामिल हैं। 

 एसएनए अवॉर्डी में मोहिनीअट्टम नृत्य कलाकार सुश्री पल्लवी कृष्णनन, भरतनाट्यम नृत्य कलाकार डॉ.संध्या पुरेचा, कुचिपुड़ी नृत्य कलाकार सुश्री दीपिका रेड्डी, कथकली नृत्य कलाकार श्री सदानम के.हरिकुमार, कथक नृत्य कलाकार सुश्री अदिति मंगलदास, मणिपुरी नृत्य कलाकार गुरु कलावती देवीकृबिम्बावती देवी का नाम शामिल है। साथ ही फिल्म अभिनेत्री और भरतनाट्यम की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुश्री मीनाक्षी शेषाद्रि की एकल नृत्य प्रस्तुति भी होगी।
 
नाद: भारतीय लोक एवं शास्त्रीय संगीत में उपयोगी वाद्यों की प्रदर्शनी

भारतीय लोक एवं नृत्य कृ संगीत में विभिन्न प्रकार के वाद्यों का प्रयोग किया जाता है। अलगकृअलग अंचलों, क्षेत्रों और परंपराओं में विशेष वाद्यों का प्रयोग होता है, जिनकी बनावट, ध्वनि इत्यादि लोगों को आकर्षित करती है। संगीतप्रेमी वाद्ययंत्रों के बारे में जान सकें, उन्हें देख सकें इसी उद्देश्य के साथ खजुराहो नृत्य समारोह में इस वर्ष संस्कृति विभाग द्वारा संकलित 600 से अधिक वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी नाद भी लगाई जाएगी। इसमें भारतीय लोक, जनजातीय एवं शास्त्रीय संगीत में उपयोग किए जाने वाले वाद्ययंत्र सम्मिलित होंगे। कई वाद्ययंत्र दुर्लभ भी होंगे।

चित्र कथन: नृत्योत्सव का सजीव चित्रांकन

51वें खजुराहो नृत्य समारोह में देहगति, भाव, मुद्राओं का सौंदर्य और भव्यता सिर्फ मंच पर ही नहीं, बल्कि कैनवास पर भी प्रदर्शित होगी। देश के ख्यातिलब्ध 10 चित्रकार खजुराहो नृत्य समारोह के मंच पर होने वाली नृत्य प्रस्तुतियों को रंग और कूची की सहायता से कैनवास पर सजीव चित्रण करेंगे। इन चित्रकारों में पद्मश्री श्रीमती शान्ति देवी, श्री राजेश श्याम, श्री एल. रजनीकांत सिंह, श्री कुडलयया महंतयया हीरेमठ, श्री किशन सोनी, डॉ सुनील विश्वकर्मा, श्री महेश कुमार कुमावत, श्री श्याम पुंडलिक कुमावत, श्री रघुवीर, श्री सुभाष पवार शामिल हैं।

 एक ओर खुले आसमान के नीचे मंदिर की आभा में नृत्य का सौंदर्य दिखेगा, तो वहीं दूसरी ओर कैनवास पर इसे अलगकृअलग दृष्टिकोण के साथ देखा जा सकेगा। इस गतिविधि को रचनात्मक के साथ अकादमिक बनाने का प्रयास भी किया गया है। इसमें संस्कृति विभाग के सभी ललित कला महाविद्यालयों के अध्यनरत छात्र-छात्राएं भी सहभागिता करेंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार में चयनित चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन भी होगा।
सृजन, हुनर और स्वाद

51वें खजुराहो नृत्य समारोह को भव्यता और विविधता देने के उद्देश्य से सृजन, हुनर और स्वाद गतिविधियों का आयोजन भी किया जायेगा। ताकि जो सुधिजन पधार रहे हैं वे नृत्य के साथकृसाथ भारतीय कलाओं के विभिन्न आयामों को भी जान व समझ सकें। सृजन गतिविधि में पारंपरिक शिल्प निर्माण तकनीक का प्रदर्शन होगा, जिसमें मिट्टी, पत्ता, बांस, गोबर, लाख, गोदना इत्यादि के उपयोग से कई तरह के शिल्पों का सृजन होता दिखेगा। वहीं, हुनर गतिविधि में पारंपरिक शिल्पों का प्रदर्शन और विक्रय भी होगा। स्वाद गतिविधि में विभिन्न प्रकार के देशज व्यंजनों का आनंद सुधिजन ले सकेंगे।

कलावार्ता: कलाविदों एवं कलाकारों के मध्य संवाद

51वें खजुराहो नृत्य समारोह में पूर्व वर्षों की भांति इस वर्ष लोकप्रिय संवाद सत्र कलावार्ता  आयोजित किया जाएगा। इस सत्र के विषय खजुराहो के मंदिरों पर केंद्रित होंगे, क्योंकि इस वर्ष मंदिरों के एक हजार वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इनमें मंदिरों की स्थापत्य कला, संगीत-नृत्य और खजुराहो के मंदिरों का सम्बन्ध प्रमुख होंगे। इन विषयों पर एकाग्र संवाद के लिए कथक नृत्यांगना सुश्री रजनी राव, दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद डॉ. शिवकांत बाजपेयी, डॉ. ओपी मिश्रा, डॉ. नारायण व्यास, डॉ. रमेश यादव एवं प्रो. शिवकांत द्विवेदी कलाकारों से संवाद हेतु पधारेंगे।

मध्यप्रदेश पर्यटन की गतिविधियां

खजुराहो मध्यप्रदेश का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां वर्षभर लाखों पर्यटक पधारते हैं। कई पर्यटक खजुराहो की पर्यटन यात्रा कुछ इस तरह बनाते हैं कि उन्हें पर्यटन के साथ खजुराहो नृत्य समारोह भी देखने को मिल जाए। इसलिए मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इस वर्ष समारोह के दौरान स्काई डाइविंग - एमपीटी पायल रिसोर्ट खजुराहो, हॉट एयर बैलून, कैम्पिंग-पन्ना, विलेज टूर - पुराना खजुराहो गाँव, ई-बाईक टूर-खजुराहो मंदिर, सेगवे टूर - खजुराहो, वॉटर स्पोर्ट्स-कुटनी जैसी रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

विश्व का सर्वश्रेष्ठ नृत्य उत्सव खजुराहो नृत्य समारोह

खजुराहो नृत्य समारोह 1974 में आरम्भ हुआ। वर्तमान रूप की कल्पना सन् 1975 में हुई। तब से लगातार यह समारोह विस्तार पाता रहा। इसकी कीर्ति दिग-दिगन्त फैली। स्थिति यह है कि यह विश्व के श्रेष्ठ समारोहों में गिना जाता है। इसमें भाग लेने वाले नृत्यकार अपनी सम्पूर्ण रचनात्मक क्षमताओं को यहां निरूशेष करते हैं। विदेशों से आने वाले नृत्यप्रेमी-दर्शक समारोह की प्रतीक्षा करते हैं। वे यात्रा कार्यक्रम इस तरह बनाते हैं कि वे खजुराहो समारोह के दर्शक बन सकें। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की संस्कृति नीति को यह श्रेय जाएगा कि इसने इतने आयामी समारोह की संरचना की है।

भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की संगम स्थली

खजुराहो नृत्य समारोह के प्रतिष्ठित मंच को भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की संगम स्थली कहने में भी कोई अतिशयोक्ति नहीं है। अपने समय के सुप्रसिद्ध नृत्य कलाकारों ने इस ढ्योढ़ी पर निश्चित ही अपना मस्तक झुकाया होगा या झुकाना न चाहा होगा। यह उन्हीं नृत्य कलाकारों की असाधारण प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन का ही परिणाम है कि खजुराहो नृत्य समारोह नृत्य संसार के गगन पर सबसे चमकदार तारे के रूप में सुशोभित है। 
 नृत्य कलाकारों में रुकमनी देवी अरुंडले, बिरजू महाराज, केलुचरण महापात्रा, पं. कार्तिक राम, सितारा देवी, मृणालिनी साराभाई, यामिनी कृष्णमूर्ति, सोवना नारायण, पद्मा सुब्रमण्यम, सोनल मानसिंह, पं. रामलाल, गुरु शंकर होम्बल सहित अनेक नाम सम्मिलित हैं। साथ ही उत्तर-पूर्वी राज्यों के मणिपुरी एवं सत्रिया नृत्य के सुप्रसिद्ध कलाकार सुन्दर और मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ नृत्य के इस कुंभ में आते रहे हैं। विगत वर्ष इस समारोह के स्वर्ण जयंती उत्सव में 1486 कथक नृत्य कलाकारों ने एक साथ नृत्य प्रस्तुत कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रचा था। यह रिकॉर्ड न सिर्फ एक रिकॉर्ड था, बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ नृत्य समारोह होने का प्रमाण पत्र भी था। खजुराहो नृत्य समारोह का मंच जहां एक ओर स्थापित नृत्य कलाकारों की अभूतपूर्व प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध है, तो वहीं दूसरी ओर युवाओं और असाधारण प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के लिए भी जाना जाता है।
By Ravindra Vyas at फ़रवरी 19, 2025 कोई टिप्पणी नहीं:
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12 फ़रवरी, 2025

Bageshwar_dham_बाबा के धाम आएंगे पीएम और राष्ट्रपति



  बाबा के धाम आएंगे पीएम और राष्ट्रपति 

रवीन्द्र व्यास 

देश दुनिया में विख्यात हो चुके बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अब धाम में कैंसर अस्पताल बनवाने जा रहे हैं | इसकी आधार शिला रखने  लिए उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को आमंत्रित  किया है | २३ फरवरी को पीएम को भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आना तय है , इसी के चलते वे बागेश्वर धाम आ कर आधार शिला रख सकते हैं | मोदी जी धाम पर आ कर  शिलान्यास करें इसकी पैरोकारी के लिए स्वयं सीएम और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भी सक्रिय हैं | वही २६ फरवरी को सामूहिक कन्या विवाह में महामहिम  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  के आगमन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं | ये अलग बात है कि धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपनी कथाओं से और पर्चा निकालने से ज्यादा अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियां बटोरते हैं |  

असल में  पीएमओ से हरी झंडी  मिलने के बाद बागेश्वर धाम में  तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रधानमंत्री  मोदी 23 फरवरी को  धाम में दो सौ करोड़ की लागत वाले  बालाजी सरकार कैंसर इंस्टीट्यूट ( कैंसर अस्पताल) की नींव रखेंगे। इसके लिए २५ एकड़  जमीन चिह्नित की  गई है।प्रारम्भिक चरण में यह अस्पताल २०० बेड  का होगा | इसमें गरीबों को मुफ्त उपचार मिलेगा |  अस्पताल में पैथोलॉजी, सीटी स्कैन, एमआरआई, रेडियोथेरेपी एंडी कीमोथेरेपी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जायेगी । इंस्टीट्यूट में तमाम आधुनिक सुविधाओं के साथ  फूड कोर्ट, एग्जीबिशन कॉम्प्लेक्स,  शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और सोलर पार्किंग होगी। जरुरत पड़ने पर विदेशों से भी इलाज के लिए चिकित्स्कों को बुलाया जाएगा | 

 अब गरीब किसे माना जाएगा इसके लिए  कमेटी  जांच करेगी और जो पात्र पाया जाएगा उसे निशुल्का इलाज का लाभ मिलेगा ।

108  आदिवासी कन्याओं  सहित २५१ कन्याओं का विवाह  

 बागेश्वर धाम में  इस वर्ष भी महाशिवरात्रि  पर विशाल कन्या विवाह महा महोत्सव होगा ।  विवाह समारोह  में 108 बेटियां आदिवासी समाज से  और  143 बेटियां सभी समाजों से चुनी  गई है । इस समारोह में  महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन को लेकर प्रशासन ने तैयारियों शुरू कर दी हैं | 

  विवाह के लिए धाम में  1000 से अधिक फॉर्म आए थे,   जांच  के बाद 251 बेटियों को  चयनित किया गया । इसमें सिर्फ छतरपुर और  नहीं देश प्रदेश के अनेकों स्थानों की  कन्याओं का चयन किया गया |  इन कन्याओं में में कई ऐसी  हैं जो अनाथ है, कुछ ऐसी भी है जो मातृ पितृ हीन है। विवाह के लिए जिन बेटियों को चयनित किया गया है   उनमें ४  दिव्यांग , ५४ अनाथ ,  ९४ पितृहीन १२ मातृ हीन और ८७ ऐसी हैं जो अत्यंत निर्धन परिवारों की हैं | 

विवादों  से नाता  

 कुंभ में भगदड़ में मारे गए लोगों को लेकर  बागेश्वर धाम के  पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा था कि, “यह घटना निंदनीय है, लेकिन इस महा प्रयाग में मरने वाले लोग मोक्ष प्राप्त करते हैं।” शास्त्री ने कहा, “यहां मरा नहीं है कोई, हां असमय चले गए तो दुख है, लेकिन जाना तो सबको है।” उनका मानना था कि गंगा के किनारे मरने वाले श्रद्धालु मोक्ष प्राप्त करते हैं, और यही इस स्थान की विशेषता है।प्रयागराज में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का  यह बयान  सोशल मीडिया पर जमकर वायरल भी हुआ  था और   विरोध भी हुआ  था ,| 

हालंकि  कुंभ में मोक्ष पाने वाले बयान को लेकर बागेश्वर धाम के  पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने  ५ फरवरी को  छतरपुर में सफाई दी। उन्होंने  कहा कि उस बयान को पूरा नहीं सुना गया है ,तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है ।

   उन्होंने कहा कि उस वीडियो में बोला है कि हृदय में बहुत पीड़ा है बहुत दुख है हमारा वक्तत्व यह नहीं था जो लोगों ने समझा है, जिस बयान को लेकर बवाल मचाया जा रहा है उसे वीडियो को पूरा सुने, छोटी सी बात को काटकर वायरल किया जा रहा, | 

हाल ही में बाबा बागेश्वर के कुछ बयान ऐसे रहे जिनने सुर्खियां बटोरी , इन पर विवाद भी हुए | असल में बाबा जी अपनी भावनाओं पर ना तो काबू रख पाते हैं और ना ही कलयुग के अनुरूप दोहरे चेहरे के साथ रह पाते हैं | जो मन में होता और उनको उचित  लगता है वह व्यक्त करने में कोई संकोच नहीं करते | गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का ही विवाद देख लीजिये ,एक आदिवासी महिला ने उन्हें बताया कि जी जी पी के कुछ सदस्य भगवान राम को नहीं मानते और उन्होंने रामायण को जलाया है | यह बयान सुनते ही नाराज शास्त्री ने जी जी पी  पर देशद्रोह और विदेशी फंडिंग का आरोप  आरोप लगा डाला  | उनका यह बयान भी एक वायरल विडिओ  सामने आने के बाद शुरू हुआ | जी जी पी ने भी  शास्त्री पर ढोंगी और संविधान की जानकारी ना होने का आरोप जड़ दिया | 

नेम प्लेट विवाद नेम प्लेट विवाद जुलाई 2024 में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बागेश्वर धाम की सभी दुकानों पर नेम प्लेट लगाने का आदेश दिया था। पंडित धीरेंद्र शास्त्री का कहना था कि इससे 'राम वालों' और 'रहमान वालों' की पहचान होगी। उनका मकसद 'कालनेमि यों' की पहचान करना है।

 हज़रत अली और बजरंगबली को एक साथ जोड़कर बाबा ने  टिप्पणी की थी। इस बयान पर  कई लोगों ने आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। इस पर उनके विरुद्ध एफ आई आर भी दर्ज कराई गई थी |  बाबा  ने बाद में सफाई दी कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था और उन्होंने अपने शब्दों को गलत समझे जाने पर माफी मांग ली।

 एक कार्यक्रम में पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि हम प्रार्थना करेंगे सनातनी हिंदुओं से कि एक हो जाओ। अगर तुम नहीं जागे तो ये तुम्हें अपने गांव में भी भोगना पड़ेगा। इसलिए निवेदन है कि सब हिंदू एक हो जाओ और पत्थर मारने वालों पर बुलडोजर चलवाओ। कुछ दिन बाद हम भी बुलडोजर खरीदने वाले हैं। अभी पैसे नहीं हैं वर्ना हम भी बुलडोजर खरीदें और राम के काज पर और सनातन महात्माओं पर और संतों पर पत्थर चलाएगा, हम उसपर बुलडोजर चलाएंगे।

प्रेमानंद महाराज की यात्रा 

 वृंदावन के आध्यात्मिक संत प्रेमानंद महाराज  हर रात अपने घर से निकलकर केली कुंज आश्रम तक पद यात्रा करते थे। उनके दर्शनों के लिए हजारों लोग रात से ही लाइन लगाकर खड़े हो जाते थे। पदयात्रा के समय उत्साही भक्त कई तरह के बैंड बाजे, आतिशबाजी और लाउडस्पीकर पर भजन बजाते थे।  आसपास के कॉलोनी में रह-रहे लोगों ने बाबा के इस पद यात्रा का विरोध करते हुए कहा  था कि शोर-शराबे से नींद में खलल पड़ता है। शोर से घर में रह रहे बीमार, बुजुर्ग, बच्चों और सुबह काम पर जाने वाले लोगों को दिक्कत हो रही है। यहाँ तक की कॉलोनी की महिलाएं पदयात्रा का विरोध करने के लिए तख्ती लेकर सड़क पर उतर आईं।  इन तख्तियों पर लिखा है, “कौन-सी भक्ति, कौन -सा दर्शन, ये तो है केवल शक्ति प्रदर्शन।” 

इसके बाद संत  प्रेमानंद महाराज  की पदयात्रा पर विराम लग गया | इसको  लेकर  बाबा बागेश्वर ने बयान दिया  कि  “पुराने समय में हवन कुंड से राक्षसों को दिक्कत हुआ करती थी। मनुष्यों को कभी भी भजन से दिक्कत नहीं होती। जो भी प्रेमानंद बाबा की पद यात्रा का विरोध कर रहा, वह शुद्ध रूप से इंसान नहीं है। आगे आप समझदार हो…समझ जाओ वो क्‍या है? हम ब्रजवासियों से कहेंगे, बाबा से कहेंगे कि आपका भजन बराबर चलने दो, आपकी यात्रा चलने दो, जिसके पेट में दर्द है, वह वृंदावन छोड़कर दिल्ली चले जाएं। क्योंकि वृंदावन में तो राधे ही राधे होगा, आधे-आधे नहीं होगा। जिन महिलाओं ने बाबा का विरोध किया, हम तो उनसे एक ही अनुरोध करेंगे। एक साधू के भजन में ही रोक लगाओगी देवियों तो तुम इंसान तो हो ही नहीं सकती। जरूरत पड़ने पर हम भी बाबा का साथ देंगे।

  

 

By Ravindra Vyas at फ़रवरी 12, 2025 कोई टिप्पणी नहीं:
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