22 फ़रवरी, 2025

Khjuraho_बुंदेलखंड की धरती पर पत्थर भी चमकता है तो हीरा कहलाता हैO मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 51वें खजुराहो नृत्य समारोह में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन गिनीज विश्व रिकॉर्ड से बढ़ेगा नृत्य साधकों का मानदेश की संस्कृति और नृत्यसाधकों के लिए गौरव का क्षण  - मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 खजुराहो  में एमपी के मुख्यमंत्री   डॉ. मोहन यादव ने ५१ वे खजुराहो नृत्य समारोह का  दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस वर्ष  नृत्य समारोह का आयोजन खजुराहो में स्थित कंदरिया महादेव मंदिर एवं देवी जगदम्बा मंदिर के मध्य मंदिर प्रांगण में शुरू हुआ।  खजुराहो में इस बार एक    नया विश्व रिकार्ड बना | 24 घंटे 9 मिनट 26 सेकंड तक 139 नृत्य कलाकारों द्वारा वृहद शास्‍त्रीय नृत्‍य  किया गया | यह  मैराथन नृत्य  गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है | 

                                     मुख्यमंत्री  डॉ यादव ने   कहा कि ईश्वर की साधना को समर्पित वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन गिनीज विश्व रिकॉर्ड से नृत्य साधकों का मान बढ़ेगा। यह देश की संस्कृति और नृत्य साधकों के लिए गौरव का क्षण है। सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और विश्व पटल पर अंकित करने का यह सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि गिनीज विश्व रिकॉर्ड से पूरा विश्व भारत की विविध और समृद्ध संस्कृति से प्रकाशमान होगा। 

24 घंटे 9 मिनट 26 सेकंड तक 139 नृत्य कलाकारों की अविरल और साधना से बना विश्व रिकॉर्ड न सिर्फ कला साधकों का हौसला बढ़ेगा बल्कि शासन के संस्कृति और विरासत को सहेजने के प्रयासों को भी गति देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती पावन और पवित्र है। बुंदेलखंड की धरती पर पत्थर भी चमकता है तो हीरा कहलाता है। मनुष्य चमकता है तो बुंदेला कहलाता है। वैसे ही बुंदेलखंड में नृत्य होता है तो वह अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह कहलाता है।


 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शास्त्रीय नृत्यों का सृजन भगवान की साधना के लिए किया गया है। जैसे कथकली में भगवान श्रीकृष्ण की रासलीलाजीवनऔर गतिविधियों को दिखाया जाता है। वहीं भगवान नटराज ने तांडव नृत्य और आनंद नृत्य का सृजन किया है। आज बने गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड में शास्त्रीय नृत्य की सतत प्रस्तुति से समय की निरंतरता को भी प्रदर्शित किया है। जिस तरह ब्रह्मांड में आकाशगंगा ब्लैक होल की ओर बढ़ती है और सौरमंडल में सूर्य एवं अन्य गृह अपनी गति से चलायमान है। समय को परमात्मा का स्वरूप माना गया है इसलिए समय का सदुपयोग जीवन में सबसे आवश्यक है।

    19 फरवरी, 2025 को दोपहर 2:34 बजे  वृहद शास्त्रीय नृत्य मैराथन (रिले) शुरू हुआ |  20 फरवरी, 2025 दोपहर 2:43 पर  पूर्ण हुआ । 24 घंटे 9 मिनट 26 सेकंड का ये कीर्तिमान विश्व में पहली बार  मध्य प्रदेश के नाम  हुआ |   मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम  में 139 नृत्य कलाकारों ने  निरंतर 24 घंटे 9 मिनट तक कथकभरतनाट्यमकुचिपुड़ीमोहिनीअट्टमओडिसी नृत्यों की प्रस्तुति दी। गिनीज टीम द्वारा इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड घोषित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री को सौंपा गया। 

संस्कृतिपर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संस्कृति को सहेजने और उसे विश्व पटल पर अंकित करने के प्रयास किए जा रहे है। इन्हीं प्रयासों के क्रम में यह छठवां गिनीज विश्व रिकॉर्ड बना है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह के उद्देश्य और आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

  

मध्यप्रदेश शासनसंस्कृति विभाग के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षणमध्यप्रदेश पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासनछतरपुर के सहयोग से आयोजित इस नृत्य अनुष्ठान का शुभारम्भ अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादवविशेष अतिथि माननीय सांसद खजुराहो श्री वी.डी. शर्मा एवं अध्यक्षता माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संस्कृतिपर्यटनधार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने की। इस अवसर प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन विभाग श्री शिवशेखर शुक्ला एवं संचालक संस्कृति श्री एन.पी.नामदेव भी उपस्थित रहे।

राज्य रूपंकर कला पुरस्कार 

 नृत्य समारोह  राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदान किए गए।  दत्तात्रय दामोदर देवलालीकर पुरस्कार सुश्री दिव्या पोरवालरघुनाथ कृष्णराव फड़के पुरस्कार सुश्री वीना सिंहनारायण श्रीधर बेन्द्रे पुरस्कार सुश्री रश्मि कुरिलमुकुन्द सखाराम भाण्ड पुरस्कार श्री नीतेश पंचालदेवकृष्ण जयशंकर जोशी पुरस्कार श्री उज्जवल ओझाजगदीश स्वामीनाथन पुरस्कार सुश्री प्रीति पोतदार जैनसैय्यद हैदर रजा पुरस्कार श्री मनीष सिंहलक्ष्मीसिंह राजपूत पुरस्कार सुश्री पल्लवी वर्माराममनोहर सिन्हा पुरस्कार श्री शुभमराज अहिरवार और विष्णु चिंचालकर पुरस्कार श्री लकी जायसवाल को प्रदान किया गया।

 

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